अपराध
बाबा सिद्दीकी हत्याकांड: विधवा ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख कर पूर्व विधायक की हत्या की स्वतंत्र जांच की मांग की
मुंबई: दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी की विधवा शहजीन जियाउद्दीन सिद्दीकी ने अपने पति की हत्या की जांच एक “स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी” को सौंपने की मांग करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख किया है।
वकील त्रिवणकुमार करनानी के माध्यम से दायर इस याचिका में मुंबई पुलिस पर राजनीतिक हस्तक्षेप और महत्वपूर्ण सबूतों को जानबूझकर दबाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई अगले हफ़्ते होने की संभावना है।
सिद्दीकी (66) की 12 अक्टूबर 2024 की रात बांद्रा (पूर्व) स्थित उनके बेटे जीशान के कार्यालय के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
शहज़ीन की याचिका में दावा किया गया है कि पुलिस जानबूझकर असली दोषियों को गिरफ्तार करने से बच रही है और हत्या का आरोप लॉरेंस बिश्नोई के भाई गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई पर लगा रही है। उन्हें अपने पति की मौत के पीछे एक ताकतवर बिल्डर लॉबी और एक राजनीतिक नेता का हाथ होने का शक है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जाँचकर्ताओं ने सिद्दीकी के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में झुग्गी पुनर्विकास परियोजनाओं में लगे बिल्डरों की भूमिका की जाँच “जानबूझकर टाली” — ये वे क्षेत्र हैं जहाँ उन्होंने झुग्गीवासियों के शोषण का विरोध किया था। याचिका में कहा गया है, “सिद्दीकी हमेशा झुग्गीवासियों के लिए काम करते थे और कई डेवलपर्स उन्हें बाधा मानते थे। पुलिस ने इस पहलू की कभी जाँच नहीं की।”
इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि स्पष्ट मकसद का खुलासा होने के बावजूद, पुलिस ने सिद्दीकी के बेटे, विधायक जीशान सिद्दीकी द्वारा नामित व्यक्तियों से पूछताछ नहीं की है। याचिका में कहा गया है, “जांच पहाड़ खोदकर चूहा निकालने जैसी लगती है।” साथ ही, यह भी कहा गया है कि व्हाट्सएप संदेशों और रिकॉर्डिंग रखने वाली “प्रमुख और महत्वपूर्ण गवाह” शहज़ीन से कभी पूछताछ नहीं की गई।
हत्या से पहले की घटनाओं का विवरण देते हुए, याचिका में कहा गया है कि सिद्दीकी ने अपनी हत्या से हफ़्तों पहले बार-बार सुरक्षा संबंधी चिंताएँ जताई थीं और पुलिस सुरक्षा बहाल करने की माँग की थी। 15 जुलाई, 2024 को उन्हें पृथ्वीजीत राजाराम चव्हाण नाम के एक व्यक्ति से एक “आपत्तिजनक और धमकी भरा संदेश” मिला।
25 जुलाई को उन्होंने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा बहाल करने की मांग की, जबकि उनके बेटे जीशान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर Y+ सुरक्षा मांगी। आयुक्त कार्यालय ने अगले दिन सिद्दीकी के पत्र का संज्ञान लिया।
याचिका में अगस्त में अशोक मुंद्रा नामक व्यक्ति द्वारा सिद्दीकी के खिलाफ कथित तौर पर की गई अपमानजनक टिप्पणी का भी उल्लेख किया गया है। मुंद्रा, व्यवसायी मोहित कंबोज का सहयोगी बताया जाता है।
29 जुलाई को, सिद्दीकी ने अपनी पत्नी को धमकी भरे संदेश का एक स्क्रीनशॉट भेजा और उससे कहा कि अगर उसे कुछ हो जाए तो इसे संभाल कर रख ले। दो हफ़्ते बाद, उसने उसे मैसेज किया, “यह सही तरीका नहीं है,” और फिर लिखा, “ये कमीने बदमाशी कर रहे हैं।”
याचिका में मांग की गई है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वैकल्पिक रूप से न्यायालय की निगरानी वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) को सौंपी जाए तथा पुलिस को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए।
हत्या के एक दिन बाद भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम और बाद में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की कई धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई। जाँच डीसीबी सीआईडी की मुंबई स्थित विशेष इकाई को सौंप दी गई।
इस साल जनवरी में, पुलिस ने 26 गिरफ्तार आरोपियों के नाम से एक आरोपपत्र दाखिल किया, जिन पर मकोका के तहत मामला दर्ज किया गया था। अनमोल बिश्नोई को वांछित आरोपी बताया गया है, और अभियोजन पक्ष का दावा है कि उसने अपराध सिंडिकेट में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए हत्या का आदेश दिया था।
जून में, सिद्दीकी के परिवार ने बिश्नोई की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें आरटीआई अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। अगस्त में, उन्हें बताया गया कि विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों को प्रत्यर्पण अनुरोध भेजा है।
अपराध
सीबीआई ने गुजरात के 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 11.42 करोड़ रुपए के ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई उन सिंडिकेट्स (गिरोहों) के खिलाफ सीबीआई की लगातार चल रही मुहिम का हिस्सा है, जो देशभर के नागरिकों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
एजेंसी के अनुसार, सीबीआई ने ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों पर देशव्यापी कार्रवाई को तेज करते हुए 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। इसी कड़ी में गुजरात के एक बड़े डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को 11.42 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। सीबीआई जांच के दौरान दोनों आरोपियों की अपराध से मिली रकम प्राप्त करने, उसकी लेयरिंग (कई खातों में घुमाने) और उसे आगे भेजने में भूमिका का पता चला।
जांच से यह भी पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए 11.42 करोड़ रुपए में से 2.5 करोड़ रुपए प्राप्त करने के लिए किया था। साथ ही, ये दोनों मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को अपने साथियों के कई खातों में ट्रांसफर करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।
जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और दूसरे साइबर अपराधों से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में शामिल थे। उनके पास से जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस से कई ऐसे चैट, मैसेज और दस्तावेज भी मिले हैं, जो अपराध में उनकी भूमिका साबित करते हैं।
मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर तलाशी की गई। इस दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने कहा कि इन सबूतों की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाया जा सके।
एजेंसी ने जानकारी दी कि सीबीआई ने अलग-अलग राज्यों से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के कई मामले अपने हाथ में लिए हैं। इनमें से चार मामलों में पिछले 30 दिनों में सीबीआई ने 22 राज्यों में 142 जगहों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अपराध
पंजाब में 47 किलो हेरोइन और अवैध हथियारों के साथ 4 तस्कर गिरफ्तार, सीमा पार से जुड़े तार

पंजाब पुलिस ने एक बार फिर ड्रग और हथियार तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने बड़ी मात्रा में हेरोइन और हथियार के साथ 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कनेक्शन सीमा पार से जुड़े हैं।
पंजाब डीजीपी की ओर से एक्स पोस्ट में कहा गया, “एक बड़ी कामयाबी में फरीदकोट पुलिस ने सीमा पार हेरोइन तस्करी के एक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 4 लोगों को पकड़ा है। इनके कब्जे से 47.3 किलो हेरोइन, 3 पिस्तौल, 3 मैगजीन, 15 कारतूस और 2 गाड़ियां बरामद की हैं।”
डीजीपी ने बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि पकड़े गए आरोपी पंजाब में हेरोइन और अवैध हथियारों की सीमा पार तस्करी में शामिल एक नेटवर्क से जुड़े हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन सादिक और फरीदकोट में एफआईआर दर्ज की गई है। इस बड़े नेटवर्क का पता लगाने और इसके आगे-पीछे के कनेक्शन का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
इसके पहले काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर ने सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 3 मुख्य आरोपियों को पकड़ा था और 17 किलो हेरोइन बरामद की थी। शुरुआती जांच से पता चला है कि ये आरोपी सीमा पार के तस्करों के साथ मिलकर काम कर रहे थे और आगे सप्लाई के लिए हेरोइन की खेप ले रहे थे।
पुलिस स्टेशन स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल अमृतसर में पकड़े गए तस्करों के खिलाफ एअफआईआर दर्ज की गई है। आगे की जांच जारी है ताकि तस्करी के पूरे नेटवर्क (आगे और पीछे के कनेक्शन) का पता लगाया जा सके, इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके और सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को खत्म किया जा सके। डीजीपी ने दोहराया कि पंजाब पुलिस सीमा पार तस्करी पर कड़ी नजर रख रही है और ड्रग तस्करी व संगठित आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठा रही है।
अपराध
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में खाली घर से मिला नाबालिग लड़की का शव, परिवार ने जताया हत्या का शक

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में शनिवार सुबह एक खाली घर से 16 साल की लड़की का शव मिला है। परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या एक नाबालिग लड़के और उसके परिवार वालों ने की है। बताया जा रहा है कि लड़की उस लड़के के साथ रिलेशनशिप में थी। लड़की के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
लड़की का शव पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन इलाके में एक खाली घर से मिला। लड़की के जीजा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि वह शुक्रवार रात से लापता थी। हमने पूरी रात उसे ढूंढा लेकिन वह नहीं मिली। आज सुबह वह मृत पाई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि हमें पता चला कि लड़की का एक स्थानीय लड़के के साथ संबंध था। वह ट्यूशन के लिए उनके घर जाती थी लेकिन बाद में उसने वहां ट्यूशन जाने से मना कर दिया। हमें शक है कि लड़की की हत्या की गई है। हमने सरकार से अपील की है कि उसे उचित न्याय मिले।
शनिवार सुबह लड़की का शव परिवार के ही एक खाली घर के अंदर मिला। उसके गले पर उसका स्कार्फ बंधा हुआ था।पुरुलिया मुफस्सिल पुलिस स्टेशन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को पुरुलिया मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया।
पुलिस ने कहा कि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही पता चलेगा। अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया है। पुरुलिया जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि शव बरामद कर लिया गया है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। लड़की के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
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