अंतरराष्ट्रीय समाचार
जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध को ‘लगभग तुरंत’ खत्म कर सकते हैं : ट्रंप
TRUMP
वाशिंगटन, 18 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध को लगभग तुरंत खत्म करने का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, रूस के कब्जे वाले क्रीमिया को वापस लेना या नाटो में शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है।
ट्रंप ने रविवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर कहा, “यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की यदि चाहें तो रूस के साथ युद्ध को लगभग तुरंत समाप्त कर सकते हैं, या फिर वे लड़ाई जारी रख सकते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि अब ओबामा के समय (12 साल पहले) की तरह क्रीमिया वापस नहीं मिलेगा, और यूक्रेन नाटो में शामिल नहीं होगा।
जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ बेहद महत्वपूर्ण वार्ता की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए जेलेंस्की को रूस की कुछ शर्तों पर सहमत होना होगा।
इन शर्तों में दो मुख्य बातें हैं: यूक्रेन क्रीमिया रूस को दे दे (जिसे रूस ने 2014 में अपने साथ मिला लिया था) और कभी नाटो में शामिल न हो। ये वही शर्तें हैं जो रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने युद्ध खत्म करने के लिए रखी हैं।
यूरोपीय नेता, जो सोमवार को जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस जा रहे हैं, वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ट्रंप इस मुलाकात में जेलेंस्की पर दबाव डाल सकते हैं ताकि वे पुतिन की अलास्का शिखर सम्मेलन में रखी शर्तों को मान लें।
वे ट्रंप से यह जानना चाहते हैं कि शांति समझौते में रूस क्या छोड़ सकता है और भविष्य में अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी में क्या भूमिका निभाएगा।
ट्रंप ने जेलेंस्की को भेजे अपने संदेश के बाद लिखा, “कल व्हाइट हाउस में बड़ा दिन है। इतने सारे यूरोपीय नेता एक साथ कभी नहीं आए। उनकी मेजबानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है!!!”
यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नाटो महासचिव मार्क रुटे सोमवार को जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस की यात्रा में शामिल होंगे।
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ईरानी सेना का दावा, बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को मार गिराया

ईरानी सेना का दावा, बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को मार गिराया रविवार सुबह ईरानी सेना ने बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।
ईरान की मेहर समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सेना की वायु रक्षा इकाइयों ने रविवार सुबह बंदर अब्बास के ऊपर उड़ रहे एक अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को मार गिराया।
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान की सेना की वायु रक्षा इकाइयों ने बंदर अब्बास के ऊपर आसमान में हमलावर अमेरिकी सेना के एक ‘लुकास’ ड्रोन को नष्ट कर दिया।
सेना के जनसंपर्क कार्यालय ने बताया कि देश की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली के तहत काम कर रही वायु रक्षा इकाइयों ने बंदर अब्बास के आसमान में मौजूद अमेरिकी ‘लुकास’ ड्रोन को नष्ट कर दिया।
20 अक्टूबर को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की वायु रक्षा प्रणाली ने होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-9 ड्रोन को रोककर मार गिराया था। आईआरजीसी के अनुसार, यह ऐसा 54वां ड्रोन था, जिसे गिराया गया।
आईआरजीसी ने अपने बयान में बताया कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने दर्जनों जासूसी और लड़ाकू ड्रोन, साथ ही अन्य दुश्मन विमानों को भी मार गिराया है।
आईआरजीसी का कहना है कि ये कार्रवाइयां ऐसे संघर्ष के दौरान की गई हैं, जिसे वह संयुक्त राष्ट्र (यूएन) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तनाव को लेकर लगातार नजर रखी जा रही है।
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रूस की संसद के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी

12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लेने भारत पहुंचे रूस की संसद (स्टेट ड्यूमा) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने रविवार को नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
भारत में रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि 25 अक्टूबर को व्याचेस्लाव वोलोदिन राजघाट स्मारक परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की।
वोलोदिन इन दिनों भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। वे 26-27 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘संविधान सदन’ के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाले 12वें ‘ब्रिक्स संसदीय फोरम’ में हिस्सा लेंगे।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस मंच में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय नेता हिस्सा लेंगे। बैठक में जन-केंद्रित विकास और संसदीय सहयोग को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को घोषणा की थी कि 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच 26-27 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा।
संसद भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिरला ने कहा था कि यह मंच भारत की संसदीय कूटनीति के इतिहास में एक नया अध्याय साबित होगा। इसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसद अध्यक्ष, संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विभिन्न राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष, सांसद और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।
उनके अनुसार, मंच के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों का आयोजन भी होगा।
उन्होंने कहा, “अब तक 18 देशों से सुझाव मिले हैं और उसी आधार पर चर्चा की जाएगी। भारत ने एक नई पहल के तहत 64 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए हैं। इस तरह का बड़ा प्रयास पहली बार किया गया है।”
इस बीच, तीन अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों पर आयोजित एक परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया था।
बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
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प्रदर्शन की आग में झुलस रहा यूरोप: फ्रांस में कई जगह भड़की हिंसा, इटली-स्पेन में सुरक्षा बलों से टकराए प्रदर्शनकारी

यूरोप के कई देश फ्रांस, इटली, स्पेन और अल्बानिया प्रदर्शन की आग में झुलस रहे हैं। लोग बढ़ती मकान की कीमतों और महंगे जीवनयापन के खर्चों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब होती स्थिति के खिलाफ शनिवार शाम लोग हिंसक हो गए। स्पेन के बार्सिलोना शहर में भी प्रदर्शनकारियों ने लूटपाट कर सरकारी सपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में शनिवार को 4,10,000 लोग सड़कों पर उतर आए। इस दौरान 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनात की गई। लगभग एक हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इटली के मिलान में सैकड़ों सैनिकों को तैनात किया गया। बोलोग्ना में कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। स्पेन के मैड्रिड में हजारों सेवानिवृत्त लोगों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने मार्च निकाला और सम्मानजनक पेंशन की मांग की। वहीं, अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी।
तुर्किए टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब होती स्थिति के खिलाफ शनिवार को हुए ज्यादातर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने रात होते-होते कई शहरों में हिंसक रूप ले लिया। राजधानी पेरिस समेत कई जगहों पर झड़पें हुईं और पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि सभी जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, इसके बावजूद कई जगह हालात बिगड़ गए।
पेरिस में मुख्य मार्च के खत्म होने के बाद करीब 500 नकाबपोश युवाओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ। हालात काबू में करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों (वॉटर कैनन) का इस्तेमाल किया। यह सब ऐसे समय हुआ है जब पिछले सप्ताह भी देशभर में दंगे और लूटपाट की घटनाएं हुई थीं।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, पूरे देश में 289 जगहों पर प्रदर्शन हुए। गृह मंत्री नुनेज ने कहा कि गिरफ्तार लोगों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि अभी सभी आंकड़े पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। उन्होंने बताया कि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
सीबीएस न्यूज के मुताबिक, स्पेन के बार्सिलोना शहर में हुए एक सरकार-विरोधी प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की और शहर के केंद्रीय इलाके प्लाजा दे कातालुन्या के आसपास सड़क पर लगी सार्वजनिक संपत्ति में आग लगा दी।
यह विरोध प्रदर्शन लोगों की उन समस्याओं और चिंताओं को दिखाता है, जो बढ़ती महंगाई और आवास से जुड़ी मुश्किलों के कारण सामने आ रही हैं।
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