अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान और भारत जैसे देशों पर अपनी इच्छा थोपने की कोशिश कर रहा अमेरिका: तेहरान
तेहरान, 31 जुलाई। ईरान ने गुरुवार को अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अर्थव्यवस्था का ‘हथियारकरण’ कर रहा है और प्रतिबंधों का इस्तेमाल स्वतंत्र देशों जैसे ईरान और भारत पर अपनी इच्छा थोपने तथा उनके विकास में बाधा डालने के लिए कर रहा है।
भारत में ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “अमेरिका लगातार अर्थव्यवस्था को हथियार बना रहा है और प्रतिबंधों का उपयोग स्वतंत्र राष्ट्रों जैसे ईरान और भारत पर अपनी इच्छा थोपने और उनके विकास को रोकने के लिए कर रहा है। ये भेदभावपूर्ण और जबरदस्ती भरे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन हैं और आर्थिक साम्राज्यवाद का आधुनिक रूप हैं।”
पोस्ट में आगे कहा गया, “ऐसी नीतियों का विरोध एक अधिक शक्तिशाली, उभरते हुए, गैर-पश्चिमी बहुपक्षीय विश्व व्यवस्था और एक मजबूत वैश्विक दक्षिण की ओर उठाया गया कदम है।”
ईरान की यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस ऐलान के 24 घंटे के भीतर आई है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त से भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने और रूस से तेल खरीदने के लिए पेनल्टी लगाने की बात कही थी।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ईरान के तेल व्यापार पर लगाए गए नए अमेरिकी प्रतिबंधों को एक “दुष्प्रवृत्त कृत्य” करार दिया और कहा कि इसका मकसद देश के आर्थिक विकास और उसके नागरिकों की भलाई को नुकसान पहुंचाना है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने ईरान के तेल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें “दमनकारी प्रतिबंध” बताया और कहा कि ये अमेरिकी नीति निर्माताओं की ईरानी जनता के प्रति शत्रुता का स्पष्ट प्रमाण हैं।
तेहरान में मीडिया को संबोधित करते हुए बकाई ने कहा, “ये एकतरफा और अवैध प्रतिबंध अपराध की श्रेणी में आते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं और मानवता के खिलाफ अपराध हैं।”
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने क्यों उठाया पाकिस्तान के ‘डीप स्टेट’ का मुद्दा? नफरत की फैक्ट्री चलाने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र, 9 जून: पाकिस्तान अपनी डीप स्टेट सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों के मन में भारत के प्रति नफरत के बीज बो रहा है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद एक संगठित नफरत की फैक्ट्री चला रहा है, जो धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह कर रहा है। साथ ही सुरक्षा परिषद में आतंकवादी संगठनों का नाम लेकर भारत ने वैश्विक समुदाय पर दबाव बनाने की कोशिश की कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड न अपनाए जाएं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, ”अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।”
पी. हरीश ने पाकिस्तान द्वारा अपने देश के भीतर सक्रिय कुछ समूहों को “फितना अल हिंदुस्तान” कहे जाने की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में फैलाया जा रहा सरकारी दुष्प्रचार बताया।
‘फितना’ एक अरबी धार्मिक शब्द है, जिसका अर्थ ‘विद्रोह’ या ‘मूर्तिपूजा’ भी हो सकता है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान देश के राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी माहौल तैयार करते हैं। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की “डीप स्टेट” अपने नागरिकों को लगातार भारत के खिलाफ उकसाकर सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
उन्होंने ‘डीप स्टेट’ का उल्लेख पाकिस्तान की सेना की ओर इशारा करते हुए किया, जिसने पिछले साल संवैधानिक संशोधनों के जरिए राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
उन्होंने कहा, ”27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।”
यह संशोधन नवंबर में किया गया था, जिसके बाद सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लगभग कानून से ऊपर की स्थिति मिल गई और सरकार पर उनका नियंत्रण और मजबूत हो गया।
अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की चर्चा के दौरान हरिश ने पाकिस्तान द्वारा सुविधायुक्त आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने कहा कि आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और एक ईसाई की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा-पार गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।
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पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में देश में क्या-क्या बदल गया, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गिनाईं उपलब्धियां

नई दिल्ली, 9 जून: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में पिछले 12 वर्षों में बदलाव आया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “12 साल पहले नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। पिछले ‘सेवा के 12 साल’ में, विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में बदलाव आया है। पासपोर्ट जारी करने और दस्तावेज के अटेस्टेशन को आम नागरिक के लिए एक आसान अनुभव बनाया गया है। विदेश में खुले दूतावासों और भारतीय समुदाय के लिए वेलफेयर फंड के ज्यादा इस्तेमाल के जरिए भारतीयों को पूरी मदद दी।”
उन्होंने कहा कि शिकायत सुलझाने और फीडबैक के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए। मुश्किल हालात में लोगों को निकालने के जरिए असरदार तरीके से जवाब दिया। यूक्रेन, इजरायल, अफगानिस्तान और सूडान इसके कुछ उदाहरण हैं। भारतीयों को ग्लोबल वर्कप्लेस तक पहुंचने और ग्लोबल वर्कफोर्स का हिस्सा बनने में मदद की। अब तक 21 मोबिलिटी पार्टनरशिप की हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसाय को विदेश में मार्केट एक्सेस दिलाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद की। विकास परियोजनाओं के जरिए भारतीय प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को नए मार्केट में एंट्री दिलाने में मदद की।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “विदेश में रहने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए कल्याणकारी उपाय शुरू किए। भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया और अन्य देशों में हमारी विरासत और परंपराओं के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा दिया। विदेश में रहने और जाने वाले भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 44 दूतावास और कॉन्सुलेट खोले। भारतीय डिप्लोमेसी देश के लिए 24/7 काम करती है। आज भारतीय ज्यादा विश्वास और गर्व के साथ विदेश यात्रा करते हैं।”
सोमवार को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक इंटरव्यू आने वाला है, जिसमें वह पीएम मोदी के नेतृत्व में विश्व कल्याण के 12 साल पर बात करेंगे। इस बातचीत में अंतरिक्ष अन्वेषण और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर व्यापार, साइबर कैपेबिलिटी, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति तक भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए बदलाव के बारे में गहरी चर्चा करेंगे।
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बोधगया पहुंचे म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग, राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने किया स्वागत

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने अपने भारत दौरे की शुरुआत बिहार के बोधगया से की है। पड़ोसी देश के साथ सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करते हुए म्यांमार के राष्ट्रपति का बोधगया आगमन पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्हें हवाई अड्डे पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट (सेवानिवृत्त) जनरल सैयद अता हसनैन ने रिसीव किया। यू पांच दिवसीय (30 मई से 3 जून) राजकीय दौरे पर भारत आए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरों के साथ उनके बोधगया पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा भारत और म्यांमार के बीच गहरे आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, और पीपल-टू-पीपल संबंधों को दर्शाती है। साथ ही, यह दोनों देशों के बीच जारी सहयोग और पारस्परिक साझेदारी की मजबूती को भी रेखांकित करती है।
मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कार्यक्रमानुसार, म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। उनके साथ कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों वाला उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा। राष्ट्रपति के रूप में यह उनका पहला भारत दौरा है।
नई दिल्ली में 1 जून को राष्ट्रपति ह्लाइंग और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की जाएगी। राष्ट्रपति ह्लाइंग एक बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे।
शनिवार को बोधगया के बाद 2 जून को यू मिन मुंबई दौरे पर रहेंगे, जहां वे व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और विभिन्न स्थलों का भ्रमण करेंगे।
भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘महासागर’ नीतियों के केंद्र में स्थित म्यांमार दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत-म्यांमार संबंधों को और अधिक गहराई और मजबूती प्रदान करेगी।
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