महाराष्ट्र
बेंगलुरु भगदड़: आरसीबी विजय परेड की दुखद घटना जिसमें 11 लोगों की मौत और 40 घायल हुए
बेंगलुरु: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में ऐतिहासिक जीत के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के लिए जो खुशी की बात थी, वह बुधवार, 4 जून को एक दुःस्वप्न में बदल गई।
लाखों की संख्या में लोग बेंगलुरु की सड़कों पर उमड़ पड़े और एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के आसपास जमा हो गए, ताकि अपनी टीम के साथ जश्न मना सकें। लेकिन अंतिम समय में लिए गए फैसलों और बड़े पैमाने पर गलत अनुमानों के कारण खराब तरीके से आयोजित इस कार्यक्रम में एक जानलेवा भगदड़ मच गई, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 11 लोगों की जान चली गई और 40 से अधिक लोग घायल हो गए।
यहां दिन भर की गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया गया है:
विजयी आरसीबी टीम बेंगलुरू पहुंची और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मिलने विधान सौधा पहुंची। शहर भर में सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई, खासकर एम चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर, जहां मुख्य जश्न मनाया जाना था।
2:00 अपराह्न: हजारों प्रशंसक पहले से ही स्टेडियम के बाहर एकत्र हो गए थे, कई लोग निर्धारित सम्मान समारोह से कई घंटे पहले ही 13 प्रवेश द्वारों पर कतार में खड़े हो गए थे।
3:00 बजे: स्टेडियम के आस-पास की सड़कें भीड़भाड़ वाली हो गईं क्योंकि भीड़ और बढ़ गई। पुलिस की मौजूदगी काफी थी लेकिन उपस्थित लोगों की भारी संख्या के कारण वह भारी पड़ गई। मूल रूप से, स्टेडियम में प्रवेश पास के माध्यम से नियंत्रित किया जाता था, लेकिन देर से की गई घोषणा ने सभी प्रशंसकों के लिए प्रवेश को खुला घोषित कर दिया, जिससे भ्रम और अराजकता फैल गई।
दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक: विधान सौधा से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक दोपहर 3:30 बजे के आसपास आधिकारिक विजय परेड शुरू होने वाली थी, जिससे भीड़ और बढ़ गई। स्टेडियम के गेट जाम की वजह बन गए क्योंकि लोग अंदर जगह सुरक्षित करने के लिए आगे बढ़ रहे थे। बैरिकेड दबाव को झेल नहीं पाए और आखिरकार टूट गए। इस भगदड़ में लोग कुचले गए, जिसके परिणामस्वरूप भयानक भगदड़ मच गई। घायलों को सुरक्षित निकालने की कोशिश में बचे लोगों के जूते और सामान ज़मीन पर बिखर गए।
शाम 5:00 बजे: आपदा के पैमाने के बारे में धीरे-धीरे खबरें आने लगीं। शुरुआती रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन संख्या तेजी से बढ़ती गई। अब तक, 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, और 47 अन्य घायलों का इलाज किया जा रहा है। परेशान करने वाली बात यह है कि स्टेडियम के अंदर मैदान पर जश्न कुछ समय तक जारी रहा, इससे पहले कि त्रासदी की गंभीरता स्पष्ट हो।
अधिकारियों ने क्या कहा
पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक द्वारा कर्नाटक सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, भगदड़ “हजारों प्रशंसकों की अप्रत्याशित भीड़” के कारण हुई, जो दोपहर 3:30 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच स्टेडियम में घुसने की कोशिश कर रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है, “सभी संभव सुरक्षा व्यवस्था की गई थी… हालांकि, हजारों प्रशंसकों की अप्रत्याशित भीड़ के कारण… एक बैरिकेड टूट गया, और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े, जिसके परिणामस्वरूप भगदड़ मच गई।”
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दुख जताते हुए स्वीकार किया कि सरकार को इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा, “भीड़ ने सभी उम्मीदों को पार कर लिया.. स्टेडियम में 35,000 लोगों के बैठने की क्षमता है, लेकिन अनुमान है कि दो से तीन लाख लोग आए। इस त्रासदी के दर्द ने जीत की खुशी को भी खत्म कर दिया है।”
प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की गई है तथा घायलों की चिकित्सा देखभाल का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त करते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हम इस दुखद घटना से दुखी हैं… हमें इतनी भारी भीड़ की उम्मीद नहीं थी। स्टेडियम में 35,000 लोगों की क्षमता है, लेकिन 3 लाख से अधिक लोग एकत्र हुए।”
उन्होंने कहा, “आपका दर्द हमारा है। हम इस दुख में अपने लोगों के साथ खड़े हैं।”
भगदड़ की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
महाराष्ट्र
मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान दो गुटों में हुआ विवाद, 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई के मालवणी (मलाड) इलाके में गणपति विसर्जन के दौरान विवाद, मारपीट, गाली-गलौज और जुलूस में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मालवाणी पुलिस ने शिकायतकर्ता के आधार पर आदिल (24), सुनील शेख (25), गौस (22), अजगर (23), जाकिर (26), जुबेर (25) और हुसेन (24) के खिलाफ का मामला दर्ज कर इनकी तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की शाम करीब 7:15 बजे निरंकार नगर, एनटीसी स्कूल रोड, गेट नंबर 7, मालवणी, मालाड पश्चिम में गणपति विसर्जन के दौरान गणपति मंडप के प्रवेश द्वार के पास कोल्ड पायरो उपकरण लगाया गया था। इससे निकलने वाले कृत्रिम आग जैसे प्रभाव को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे सामने स्थित दुकान में आग लग सकती है। इसी बात को लेकर आदिल, सुनील शेख, गौस, अजगर और जाकिर ने गणपति मंडल के कार्यकर्ताओं से विवाद करने लगे।
पुलिस के मुताबिक, जुबेर और हुसैन ने रोहित ठाकुर और सुशील महतो के साथ हाथापाई की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अयान शेख नामक व्यक्ति हाथ में एक मटका लेकर आया और महिला कार्यकर्ताओं के सामने गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने के लिए दौड़ा।
अनंत चतुर्दशी के दिन शुक्रवार सुबह, लालबाग, परेल, गिरगांव और अन्य क्षेत्रों के पूजनीय गणपति प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा शुरू हुई। ढोल-ताशा, नासिक बाजा और बैंजो की थापों पर लाउडस्पीकर के साथ-साथ गुलाल उड़ाते हुए और भीलतू वाद्ययंत्रों (बीम) का प्रयोग करते हुए जुलूस रवाना हुआ। ‘लालबागचा राजा,’ ‘मुंबईचा राजा,’ ‘परेलचा राजा,’ ‘गिरगांवचा राजा,’ ‘गिरगांवचा महाराजा,’ ‘भगवान गणपति’ और गणेशोत्सव मंडलों की गणेश प्रतिमाएं सुबह की ध्वनि के साथ विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुईं। ‘लालबागचा राजा’ के दर्शन के लिए लालबाग बाजार के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। भगदड़ से बचने के लिए ‘सड़क अवरोध’ लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया गया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के 265 तालुकों को सीएम फडणवीस ने किया सूखा घोषित, और सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखे से प्रभावित किसानों और नागरिकों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 358 तालुकों (तहसील) में से 265 में सूखा घोषित किया गया है। जिन 265 तालुकों में ‘ट्रिगर-1’ के मानक पूरे हुए हैं, उन्हें सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। इससे पता चलता है कि राज्य के लगभग 75 प्रतिशत तालुकों में अब सूखे जैसे हालात हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा की है। इसके तहत लैंड रेवेन्यू में छूट, फसल लोन का रीस्ट्रक्चर, खेती से जुड़े लोन की रिकवरी पर रोक, खेती के पंपों के मौजूदा बिजली बिल में छूट (7.5 हॉर्सपावर कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ है, अब उससे ज़्यादा कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों को भी छूट), स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा शुल्क में छूट, एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत नियमों में ढील देकर अधिक से अधिक काम शुरू किए जाएंगे।
इसके अलावा, जहां जरूरी होगा वहां पीने के टैंकर पहुंचाए जाएंगे। किसानों के खेती के पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, खेती पर निर्भर किसानों-खेती मजदूरों को अनाज मिलेगा, जानवरों के लिए चारे का इंतजाम, बड़े पैमाने पर पानी बचाने का काम किया जाएगा। पिछले आदेश के मुताबिक, पेयजल और जानवरों के लिए पानी की प्लानिंग जारी रहेगी। सभी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को पंचनामा प्रक्रिया तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही फसलों की हालत दिखाने वाली तस्वीरें और जीपीएस से डेटा इकट्ठा करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इसके पहले 24 सितंबर वाशिम दौरे पर पहुंचे देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार जल्द ही प्रभावित इलाकों में गंभीर सूखा घोषित करने के लिए एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी करेगी। साथ ही, खेती-किसानी के बढ़ते संकट से जूझ रहे राज्य में उन सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा, जो पिछली योजनाओं में छूट गए थे।
सीएम ने गांव में किसानों को संबोधित करते हुए लोगों को भरोसा दिलाया था कि सरकारी तंत्र ग्रामीण राहत कार्यों को प्राथमिकता देगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि आर्थिक मदद के अलावा, राज्य प्रशासन पीने के पानी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने, मवेशियों के लिए चारा बांटने और फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) तेजी से करने के लिए आपातकालीन उपाय कर रहा है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र यूसीसी कमेटी से पूर्व जज के इस्तीफे पर जयराम रमेश बोले-‘हर राज्य का अलग यूसीसी संविधान की भावना के खिलाफ’

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित समिति से हाईकोर्ट के एक पूर्व जज के इस्तीफे के बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि इस इस्तीफे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और समिति के कामकाज पर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि क्या संविधान सभा ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना की थी, जिसमें हर राज्य अपना अलग-अलग समान नागरिक संहिता बनाए? इसका जवाब है बिल्कुल नहीं। क्या डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान निर्माताओं ने कभी सोचा था कि एक राजनीतिक दल की राजनीतिक चालों के हिसाब से राज्य अलग-अलग यूसीसी बनाने की होड़ करेंगे? इसका जवाब भी नहीं है।
कांग्रेस नेता ने 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 17 जून 2016 को मोदी सरकार ने ही यूसीसी के सवाल को विस्तृत अध्ययन के लिए विधि आयोग के पास भेजा था। आयोग ने व्यापक रिसर्च के बाद 31 अगस्त 2018 को अपना कंसल्टेशन पेपर प्रकाशित किया था। इसके पेज 7 के पैराग्राफ 1.15 में स्पष्ट कहा गया था कि “इस स्तर पर समान नागरिक संहिता बनाना न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय।” आयोग ने अलग-अलग पारिवारिक कानूनों में मौजूद भेदभाव को दूर करने की सिफारिश की थी।
रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने उसी आयोग की सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया, जिसे उसने खुद जिम्मा सौंपा था क्योंकि तथ्य उसके राजनीतिक एजेंडे से मेल नहीं खाते थे। पिछले तीन वर्षों में भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी के अपने-अपने वर्जन जबरन पारित कराए हैं। उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू हो गया जबकि गुजरात में 24 मार्च 2026, असम में 27 मई 2026 और मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा में विधेयक पारित किया गया।
उन्होंने कहा कि ये राज्यस्तरीय यूसीसी एक जैसे भी नहीं हैं। इनमें अलग-अलग प्रावधान, अलग-अलग दंड और कई छूट हैं। उत्तराखंड का यूसीसी कई पितृसत्तात्मक परंपराओं को आज भी जारी रखे हुए है और कानून का पालन करने वाले निवासियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है।
जयराम रमेश ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा। एनडीए के बाकी दलों की आवाज को दबा दिया गया है। कांग्रेस के अनुसार, मोदी सरकार के लिए यूसीसी कोई कानूनी सुधार नहीं बल्कि विभाजन, व्यवधान और ध्यान भटकाने का औजार है, जो समाज को स्थायी ध्रुवीकरण में बनाए रखने का साधन है।
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