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अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव फिलिस्तीनी मांगों पर खरा नहीं : हमास

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गाजा, 30 मई। हमास के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि गाजा पट्टी में युद्ध रोकने के लिए अमेरिका का जो प्रस्ताव आया है, उस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, यह प्रस्ताव हमास और फिलिस्तीनी लोगों की मुख्य मांगों को पूरा नहीं करता।

मिडिया के मुताबिक, हमास के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य बासम नईम ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि उन्हें अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा पिछले हफ्ते दिए गए युद्धविराम प्रस्ताव पर इजरायल की प्रतिक्रिया मिल गई है।

नईम के मुताबिक, इजरायल ने फिलिस्तीन की मुख्य मांगों को नहीं माना। इनमें लड़ाई को पूरी तरह खत्म करना और गाजा पर लगी पुरानी नाकेबंदी हटाना शामिल है।

उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव युद्धविराम के दौरान भी इजरायल के कब्जे और लोगों की तकलीफों को जारी रहने देगा।

नईम ने कहा, “इसके बावजूद हमास का नेतृत्व फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ जारी हिंसा और मानवीय संकट को ध्यान में रखते हुए ज़िम्मेदारी के साथ इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।”

हमास ने पहले कहा था कि उसे मध्यस्थों के जरिए नया युद्धविराम प्रस्ताव मिला है। वह इसका मूल्यांकन इस तरह कर रहा है कि यह फिलिस्तीनी लोगों के हितों की रक्षा करे और गाजा के लोगों के लिए स्थायी शांति और राहत लाने में मदद करे।

हमास ने पहले कहा था कि वह विटकॉफ के साथ एक समझौते के “सामान्य ढांचे” पर सहमत हो गया है। इस समझौते का मकसद स्थायी युद्धविराम करना, इजरायल की गाजा से पूरी तरह वापसी सुनिश्चित करना, राहत सामग्री की आपूर्ति शुरू करना और हमास से एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी समिति को सत्ता सौंपना है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत ने अफगानिस्तान को भेजी जरूरी दवाओं की बड़ी खेप : विदेश मंत्रालय

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भारत सरकार ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को आवश्यक दवाओं की बड़ी खेप भेजी है। इस सहायता के माध्यम से भारत ने अफगान जनता के स्वास्थ्य, कल्याण और राहत प्रयासों के प्रति अपने निरंतर सहयोग को दोहराया है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है और कठिन परिस्थितियों में भी वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, ” भारत ने 5 टन जरूरी दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस तरह हमने अफगान जनता के कल्याण और मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।”

यह नई खेप अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और वहां की तत्काल चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से भेजी गई है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को दवाइयों, खाद्यान्न, टीकों और अन्य मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करता रहा है।

हाल के वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को जीवनरक्षक दवाइयां, खाद्य सहायता और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। नई खेप इसी मानवीय सहयोग की निरंतरता का हिस्सा है।

अप्रैल में भी भारत ने टीबी टीकाकरण कार्यक्रम को बल देने के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी थी।इसकी पुष्टि भी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर की थी।

इसी साल बाढ़ और भूकंप ने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई थी। जिसके बाद भारत की ओर से 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) पहुंचाई गई थी।

वहीं, मार्च में, भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी। पाकिस्तान के एक हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

भारत पिछले कई वर्षों से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच नवंबर 2025 में हुई बैठक में व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।

बैठक के बाद जयशंकर ने कहा था कि भारत अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए अपने समर्थन को जारी रखेगा। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया था।

इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और खाद्य सहायता भी भेजी थी। बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप (2025) के बाद भारत ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली रोम दौरा समाप्त कर हुए फ्रांस रवाना

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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग मंगलवार को इटली की अपनी यात्रा समाप्त कर फ्रांस के एवियां-लेस-बैंस के लिए रवाना हो गए, जहां वे जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति को लेकर विमान रोम के लियानार्डो द विंची इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जिनेवा के लिए रवाना हुआ, जिसके बाद वे सड़क मार्ग से फ्रांस के इस रिसॉर्ट शहर एवियां जाएंगे, जो उनकी वर्तमान यूरोप यात्रा का अंतिम पड़ाव है।

योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, ली पिछले मंगलवार से यूरोप दौरे पर हैं। यह पद संभालने के एक साल बाद उनकी पहली यूरोप यात्रा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण कोरिया के यूरोप के साथ कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है।

इटली में, जो उनके दौरे का दूसरा पड़ाव था (पहले वे बेल्जियम गए थे), राष्ट्रपति ली ने राष्ट्रपति सर्जियो मेट्टेलो और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति जताई और सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

उन्होंने पोप लियो चौदहवें से भी मुलाकात की और कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापित करने के प्रयासों के प्रति वेटिकन के समर्थन की पुष्टि की।

एवियां में, राष्ट्रपति ली जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां वे आमंत्रित साझेदार देश के नेता के रूप में शामिल होंगे। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब दक्षिण कोरिया को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है।

सोमवार को, राष्ट्रपति ली ने पोप को वर्ष 2027 में दक्षिण कोरिया में होने वाले वर्ल्ड यूथ डे 2027 कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया। यह आमंत्रण उन्होंने वेटिकन में अपनी मुलाकात के दौरान दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वी सुंग लैक के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सहयोग पर सहमति जताई। राष्ट्रपति ली ने पोप को औपचारिक रूप से दक्षिण कोरिया आने का निमंत्रण भी दिया।

बैठक में कोरियाई प्रायद्वीप की शांति प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई, और वेटिकन ने इस प्रयास के लिए अपना मजबूत समर्थन दोहराया।

अधिकारियों के अनुसार, बातचीत में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संवाद की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि कठिन राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बातचीत और सहयोग जारी रहना चाहिए।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-फ्रांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत सहयोग के तलाश रहे अवसर: पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत-फ्रांस की साझेदारी को नई गति मिल रही है। साथ ही, उन्होंने फ्रांसीसी व्यवसायों और निवेशकों को भारत की विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।

गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि उन्होंने जाने-माने वकील और आईआईटी दिल्ली बोर्ड के चेयरमैन हरीश साल्वे की ओर से आयोजित डिनर में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने भारत और फ्रांस के इंडस्ट्री लीडर्स, एकेडेमिया के सदस्यों, रिसर्चर्स और इनोवेटर्स के साथ बातचीत की।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में भारत-फ्रांस संबंधों को नई गति मिली है और रणनीतिक, आर्थिक, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।

इसके अलावा, उन्होंने फ्रांस की कंपनियों और निवेशकों से भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने और दोनों देशों के लिए अधिक समृद्ध और टिकाऊ भविष्य की दिशा में मिलकर काम करने का आग्रह किया।

अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान, गोयल ने यूरोप के सबसे बड़े साइंस और टेक्नोलॉजी हब, सोफिया एंटीपोलिस का दौरा किया। यह दौरा यूरोपीय बाजारों के साथ भारत के डीप-टेक जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा था।

इसे यूरोप की सिलिकॉन वैली बताते हुए मंत्री ने कहा कि यह टेक्नोलॉजी पार्क एक सफल मॉडल पेश करता है कि कैसे रिसर्च, टैलेंट और एंटरप्राइज मिलकर इनोवेशन और आर्थिक विकास को आगे बढ़ा सकते हैं। इस हब में 2,600 से अधिक कंपनियां काम करती हैं, जो कई तरह के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी हैं।

गोयल ने कहा कि भारत इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल सेंटर के तौर पर तेजी से उभर रहा है। उन्होंने टेक्नोलॉजी पार्क में मौजूद इंडस्ट्री लीडर्स को भारत में निवेश, सहयोग और अपने कामकाज को बढ़ाने के मौकों पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कहा कि भारत का इनोवेशन इकोसिस्टम पार्टनरशिप और टेक्नोलॉजी के मिलकर विकास के लिए नए रास्ते बना रहा है, जिससे न सिर्फ भारत और फ्रांस, बल्कि पूरी दुनिया को फायदा हो सकता है।

नीस में, मंत्री ने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के लिए स्थानीय नेताओं और सरकार, बिजनेस, इनोवेशन और इन्वेस्टमेंट से जुड़े प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

गोयल ने बताया कि नीस में ‘पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स’ में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ का आयोजन हो रहा है। इस इवेंट में 13 टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से 120 स्टार्टअप और 20 से ज्यादा बेहतरीन संस्थानों की भागीदारी के जरिए भारत की डीप-टेक क्षमताओं को दिखाया जा रहा है।

मंत्री के अनुसार, इस इवेंट में 350 से अधिक ग्लोबल इन्वेस्टर और वेंचर कैपिटलिस्ट शामिल हुए हैं, जो भारत के बढ़ते इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम में दुनिया की बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है।

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