Connect with us
Monday,31-August-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ में 74.7 प्रतिशत की गिरावट की दर्ज

Published

on

मुंबई, 30 अप्रैल। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 83.4 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ में 74.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 329.6 करोड़ रुपए था।

उज्जीवन एसएफबी की आय में यह गिरावट मुख्य रूप से बैंक के बढ़ते प्रावधानों और बिजनेस मिक्स में बदलाव के कारण ब्याज आय में कमी के कारण दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में उज्जीवन एसएफबी की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 864.4 करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले इसी अवधि के 933.5 करोड़ रुपए से 7.4 प्रतिशत कम है।

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी ने तिमाही आधार पर सुधार दर्ज करवाया।

ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) पिछली तिमाही के 2.68 प्रतिशत से घटकर 2.18 प्रतिशत हो गए और नेट एनपीए में भी सुधार दर्ज किया गया, जो 0.56 प्रतिशत से घटकर 0.49 प्रतिशत हो गया।

बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो (पीसीआर) 78 प्रतिशत पर मजबूत बना रहा, जिसे तिमाही के दौरान 46 करोड़ रुपए के त्वरित प्रावधान का समर्थन मिला। इसका मतलब है कि बैंक ने संभावित नुकसान को कवर करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किया है।

पीसीआर बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतक है, जो नॉन-परफॉर्मिंग लोन से संभावित घाटे को कवर करने की उसकी क्षमता को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, उज्जीवन एसएफबी ने अपने डिपॉजिट में शानदार वृद्धि दर्ज की, जहां कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 37,630 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

बैंक ने अपने करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट रेश्यो में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो पिछली तिमाही से 43 आधार अंकों की वृद्धि के साथ 25.5 प्रतिशत हो गया।

उज्जीवन की ग्रॉस लोन बुक बढ़कर 32,122 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछली तिमाही से 5 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है।

बैंक के लिए एक प्रमुख आकर्षण इसके सिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो में वृद्धि थी, जो अब कुल लोन बुक का 44 प्रतिशत है, जो एक साल पहले की अवधि के दौरान 30 प्रतिशत था।

उज्जीवन एसएफबी ने लोन वितरण में भी रिकॉर्ड बनाया, जिसमें बैंक ने चौथी तिमाही में 7,440 करोड़ रुपए वितरित किए, जो तिमाही आधार पर 39 प्रतिशत की वृद्धि है।

यह माइक्रो-बैंकिंग और इंडिविजुअल लोन सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित था।

परिणामों की घोषणा के बाद, बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 42.56 रुपए पर आ गए।

व्यापार

सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट

Published

on

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों की दिशा और कीमती धातुओं की मांग को लेकर जारी बहस के बीच एक नई रिपोर्ट ने सोने और चांदी को लेकर बेहद आशावादी अनुमान जताया है। मोनार्क पीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार, अनुकूल परिस्थितियों में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 5,000 डॉलर से 5,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 95 डॉलर से 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।

रिपोर्ट ने इस सबसे सकारात्मक परिदृश्य या ‘बुल केस’ की संभावना 25 प्रतिशत बताई है। इसके अनुसार, यदि अमेरिकी श्रम बाजार में कमजोरी आती है, फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में कटौती करनी पड़ती है और वास्तविक प्रतिफल (रियल यील्ड) में गिरावट शुरू होती है, तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों द्वारा फिर से कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाना और चांदी की भौतिक आपूर्ति में तंगी लौटना भी इस तेजी के लिए जरूरी माना गया है।

हालांकि रिपोर्ट का सबसे संभावित परिदृश्य ‘बेस केस’ है, जिसे 55 प्रतिशत संभावना दी गई है। इस स्थिति में वर्ष 2026 के अंत तक सोना 4,300 डॉलर से 4,700 डॉलर प्रति औंस और चांदी 70 डॉलर से 85 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर तक ब्याज दरों को स्थिर रखेगा, ऊर्जा कीमतें सामान्य होंगी, वास्तविक प्रतिफल स्थिर रहेंगे और दुनिया के केंद्रीय बैंक प्रति तिमाही लगभग 250 टन सोने की खरीद जारी रखेंगे।

रिपोर्ट में एक ‘बेयर केस’ परिदृश्य भी प्रस्तुत किया गया है, जिसकी संभावना 20 प्रतिशत आंकी गई है। यदि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है तथा महंगाई में कमी मांग की कमजोरी में बदल जाती है, तो सोना 3,400 डॉलर से 3,900 डॉलर प्रति औंस और चांदी 45 डॉलर से 55 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ सकती है।

मोनार्क पीएमएस के मुताबिक, सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी मुद्रास्फीति-संरक्षित प्रतिभूतियों (टीआईपीएस) का वास्तविक प्रतिफल है, जो 2.41 प्रतिशत पर बना हुआ है। चूंकि सोना किसी प्रकार का ब्याज या प्रतिफल नहीं देता, इसलिए ऊंचे वास्तविक प्रतिफल निवेशकों के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प बन जाते हैं और सोने की मांग पर दबाव डाल सकते हैं।

वहीं चांदी के बुनियादी कारकों को रिपोर्ट ने काफी मजबूत बताया है, जिसके अनुसार, चांदी का बाजार लगातार छठे वर्ष घाटे की स्थिति में है। वर्ष 2021 से अब तक लगभग 762 मिलियन औंस चांदी सतही भंडार से निकल चुकी है, जबकि वैश्विक खनन उत्पादन पिछले एक दशक से लगभग स्थिर बना हुआ है। इससे भविष्य में मांग बढ़ने पर कीमतों में तेज उछाल की संभावना बन सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि चांदी की मांग बढ़ती है तो सीमित भौतिक उपलब्धता कीमतों को और तेजी से ऊपर ले जा सकती है। कॉमेक्स बाजार में कागजी दावों की तुलना में उपलब्ध भौतिक चांदी का अनुपात अभी लगभग 5.6 गुना है, जो आपूर्ति संबंधी दबाव की संभावनाओं को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सोने-चांदी का अनुपात भी सामान्य हो गया है, जो जनवरी में 46 गुना से शिखर से बढ़कर आज लगभग 69 गुना हो गया है, जो इसके 21वीं सदी के औसत के करीब है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में चांदी ने अपनी पहले की बढ़त का बड़ा हिस्सा गंवा दिया है और अब यह सोने की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती है।

Continue Reading

व्यापार

कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते घरेलू बाजार में बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी में 0.56 प्रतिशत तक की गिरावट

Published

on

तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं के कारण जोखिम भावना कमजोर होने से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इस बीच सेंसेक्स और निफ्टी50 में 0.40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,264.51 से 133.78 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 77,130.73 पर खुला। वहीं शुरुआती कारोबार में यह 367.58 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,896.93 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,175.65 से मामूली 58.10 अंक यानी 0.24 प्रतिशत फिसलकर 24,117.55 पर खुला, हालांकि शुरुआती कारोबार में यह एक समय 137.25 अंक यानी 0.56 प्रतिशत गिरकर 24,038.40 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि खबर लिखे जाने तक सुबह 9.30 बजे के आसपास सेंसेक्स करीब 311 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,942 के स्तर पर ट्रेड करते हुए नजर आया। वहीं निफ्टी 50 113.65 (0.47 प्रतिशत) फिसलकर 24,062 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.53 प्रतिशत और 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी मेटल, निफ्टी आईटी, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी मीडिया का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि निफ्टी बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा।

एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को निफ्टी 50 में दो सत्रों की गिरावट के बाद 0.35 प्रतिशत की रिकवरी जरूर देखने को मिली थी, लेकिन यह तेजी सीमित दायरे में रही। सूचकांक अभी भी 23,606 से 24,774 तक की तेजी के 50 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर और अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है। ऐसे में बाजार की व्यापक तकनीकी तस्वीर अभी भी सतर्कता का संकेत दे रही है। निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण और निकटतम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि इसके नीचे 23,800 का स्तर अगला प्रमुख सपोर्ट है। दूसरी ओर, 24,300 से 24,400 के बीच का क्षेत्र तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। यदि निफ्टी 24,400 के ऊपर टिकाऊ बढ़त दर्ज करता है, तभी तकनीकी स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा और सूचकांक 24,800 की ओर बढ़ सकता है।

इस बीच, इंडिया वीआईएक्स में 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 10.68 पर आ गया। पिछले लगभग एक महीने से यह अपने अल्पकालिक मूविंग एवरेज के नीचे बना हुआ है। कम अस्थिरता का यह माहौल बाजार के तेजी वाले निवेशकों को कुछ राहत देता है और संकेत देता है कि फिलहाल बाजार अत्यधिक निकट अवधि की अस्थिरता की आशंका नहीं जता रहा है।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि डेरिवेटिव आंकड़ों की बात करें तो निफ्टी का पुट-कॉल रेशियो (पीसीआर) शुक्रवार को बढ़कर 0.89 हो गया, जो पिछले सत्र में 0.77 था। 0.7 से ऊपर का स्तर बाजार की धारणा में कुछ सुधार का संकेत देता है, लेकिन यह अभी भी 1 से नीचे है। इसका मतलब है कि तेजी का रुझान अभी इतना मजबूत नहीं हुआ है कि उसे स्पष्ट ट्रेंड रिवर्सल माना जा सके।

तकनीकी दृष्टि से निफ्टी फिलहाल 24,000 से 24,400 के दायरे में फंसा हुआ दिखाई दे रहा है। यदि सूचकांक 24,000 के नीचे और विशेष रूप से 23,800 के नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और बाजार में कमजोरी गहरा सकती है। वहीं दूसरी ओर, 24,400 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट ही बाजार की अल्पकालिक तस्वीर को मजबूत कर सकता है और रिकवरी की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

ऐसे में निफ्टी में 24,000 और 23,800 के स्तर निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण निगरानी क्षेत्र बने रहेंगे। 24,000-24,400 के दायरे से किसी भी दिशा में निर्णायक ब्रेकआउट बाजार की अगली बड़ी चाल तय कर सकता है।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

बाजार की पाठशाला: इन लोगों के लिए 31 अगस्त है आईटीआर फाइल करने की डेडलाइन, जानिए किसके लिए कौन-सा फॉर्म होगा सही

Published

on

अगर आप नौकरी के साथ कारोबार, पेशे या स्वतंत्र रूप से काम करके कमाई करते हैं, तो आपके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। बिना कर ऑडिट वाली कारोबारी या पेशेवर आय रखने वाले करदाताओं को 31 अगस्त 2026 तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा। वहीं, जिन कारोबारियों और पेशेवरों के खातों का कर ऑडिट जरूरी है, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 है। ऐसे करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि उनकी आय और वित्तीय स्थिति के आधार पर कौन-सा रिटर्न फॉर्म लागू होगा।

आयकर विभाग के अनुसार, 31 जुलाई की अंतिम तारीख तक 6.5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे, जिनमें वेतनभोगी लोगों, पेंशनभोगियों, छात्रों की आय वाले करदाताओं और अलग-अलग स्रोतों से आय प्राप्त करने वाले लोगों के रिटर्न शामिल हैं। इनमें कारोबार (बिजनेस) और पेशे (प्रोफेशन) से आय वाले बड़ी संख्या में करदाता भी शामिल रहे। अब बिना कर ऑडिट वाले कारोबार या पेशे से आय रखने वाले बाकी करदाताओं के लिए 31 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण है।

बिजनेस या प्रोफेशन से आय होने पर आम तौर पर आईटीआर-3 या आईटीआर-4 में से किसी एक फॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। सही फॉर्म का चुनाव करदाता की आय, कारोबार की प्रकृति और कर व्यवस्था पर निर्भर करता है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने से बाद में कर विभाग की ओर से परेशानी या स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है।

आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन यानी अनुमानित कर व्यवस्था का विकल्प नहीं चुनते हैं।

अगर टैक्सपेयर नियमित रूप से अकाउंट बुक्स मेंटेन करता है, उसकी कुल आय 50 लाख रुपये से अधिक है या वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी एफएंडओ ट्रेडिंग करता है, तो कई मामलों में आईटीआर-3 लागू हो सकता है।

आईटीआर-3 के जरिए वे टैक्सपेयर्स वेतन या पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी, बिजनेस या प्रोफेशन, कैपिटल गेन्स और अन्य स्रोतों से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। आम तौर पर यह फॉर्म उन व्यक्तियों या एचयूएफ के लिए इस्तेमाल होता है, जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न दाखिल करने के योग्य नहीं हैं।

वहीं, आईटीआर-4 यानी सुगम उन व्यक्तियों, एचयूएफ और फर्म के लिए है, जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम के तहत बिजनेस या प्रोफेशनल इनकम घोषित करते हैं और जिनकी कुल आय निर्धारित सीमा के भीतर है। सामान्य तौर पर इसमें 50 लाख रूपये तक की कुल आय वाले पात्र टैक्सपेयर्स शामिल हो सकते हैं।

इसमें बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली आय के अलावा वेतन या पेंशन, अधिकतम दो हाउस प्रॉपर्टी से आय और ब्याज, फैमिली पेंशन तथा डिविडेंड जैसी अन्य स्रोतों से आय भी शामिल की जा सकती है। निर्धारित शर्तों के तहत कृषि आय 5,000 रूपये तक और सेक्शन 112ए के तहत आने वाले कुछ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स भी इसमें रिपोर्ट किए जा सकते हैं।

हालांकि, हर टैक्सपेयर आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं कर सकता। अगर सेक्शन 112ए के तहत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स या निर्धारित सीमा से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स है, अनलिस्टेड इक्विटी शेयर हैं, विदेशी संपत्ति या विदेश से आय है, घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करना है, या ऐसी आय है जिस पर विशेष दर से टैक्स लगता है, तो आईटीआर-4 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कंपनी के डायरेक्टर भी इस फॉर्म के जरिए रिटर्न दाखिल नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न दाखिल करने से पहले करदाताओं को फॉर्म 26एएस, वार्षिक सूचना विवरण यानी एआईएस, करदाता सूचना सारांश यानी टीआईएस, फॉर्म 16 और फॉर्म 16ए की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

साथ ही बैंक खाते और कर भुगतान से जुड़े चालान भी तैयार रखने चाहिए। कारोबारियों को बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड, लाभ-हानि खाता, बैलेंस शीट, बिल और चालान, जीएसटी रिटर्न तथा भुगतान माध्यमों से मिले डिटेल्स का भी मिलान करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर करदाता ने शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो ब्रोकरेज स्टेटमेंट, कॉन्ट्रैक्ट नोट, डीमैट स्टेटमेंट और कैपिटल गेन्स से जुड़ी पूरी जानकारी तैयार रखनी चाहिए। इनका मिलान एआईएस और बैंक रिकॉर्ड से करना जरूरी है। इसी तरह, किराये से आय पाने वाले प्रॉपर्टी मालिकों को रेंट एग्रीमेंट, नगर निगम टैक्स की रसीद, प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और होम लोन के ब्याज का सर्टिफिकेट संभालकर रखना चाहिए।

टैक्सपेयर्स को लागू होने पर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, फॉर्म 10-आईईए की अनॉलेजमेंट और विभिन्न डिडक्शन का दावा करने के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी तैयार रखने चाहिए। रिटर्न दाखिल करते समय जल्दबाजी के बजाय एआईएस, टीआईएस, फॉर्म 26एएस , बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड को अच्छी तरह मिलाना जरूरी है।

इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले सबसे महत्वपूर्ण बात सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव करना है। गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल करने पर बाद में परेशानी हो सकती है। इसलिए अपनी आय के स्रोत, बिजनेस या प्रोफेशन की प्रकृति, कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, शेयर बाजार की ट्रेडिंग और लागू टैक्स व्यवस्था को ध्यान में रखकर ही आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का चुनाव करें।

इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना हैं कि आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं, लेकिन उन्हें बिना जांचे स्वीकार नहीं करना चाहिए। रिटर्न जमा करने के बाद ई-सत्यापन पूरा करना भी जरूरी है।

जटिल आय या कई स्रोतों से कमाई होने की स्थिति में रिटर्न दाखिल करने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट या योग्य टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है।

Continue Reading
Advertisement
राष्ट्रीय समाचार9 hours ago

दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर बोले अरविंद केजरीवाल- 1.5 करोड़ में से 47 लाख मतदाता गायब

खेल11 hours ago

प्रीमियर लीग: फर्नांडीस की हैट्रिक, मैनचेस्टर यूनाइटेड ने इप्सविच को 5-2 से हराया

व्यापार11 hours ago

सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट

अंतरराष्ट्रीय समाचार12 hours ago

अमेरिकी राजदूत गोर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से मिले, साझेदारी बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

राष्ट्रीय समाचार12 hours ago

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से पहले उद्योग जगत से चर्चा करेगा वाणिज्य मंत्रालय, निर्यातकों की चिंताओं पर होगा मंथन

राजनीति12 hours ago

राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर पर भड़की मध्य प्रदेश कांग्रेस कांग्रेस, कहा- कार्रवाई शुद्धिकरण कराने वालों पर होनी चाहिए

राष्ट्रीय समाचार14 hours ago

राहुल गांधी पर एफआईआर के बाद कांग्रेस का भाजपा पर हमला, देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

राष्ट्रीय समाचार14 hours ago

जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस-बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड को 30 हजार रुपये करने की मांग

राष्ट्रीय समाचार14 hours ago

जज को प्रभावित करने की कोशिश मामले में सुकेश की अर्जी पर दिल्ली पुलिस ने उठाए सवाल, 3 नवंबर को होगी सुनवाई

खेल15 hours ago

दलीप ट्रॉफी: वैभव सूर्यवंशी का बल्ला गरजा, सेंट्रल जोन के खिलाफ खेली आतिशी पारी

महाराष्ट्र4 weeks ago

महाराष्ट्र में मछली पकड़ने पर 15 अगस्त तक पाबंदी, मंत्री नितेश राणे ने गोवा से मांगा सहयोग

मनोरंजन4 weeks ago

जाह्नवी कपूर ने शिखर पहाड़िया और परिवार के साथ बिताए गए खास पलों की तस्वीरें शेयर कीं

व्यापार3 weeks ago

आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल का पहली तिमाही में घाटा बढ़ा, 249 करोड़ रुपए का हुआ नुकसान

मनोरंजन4 weeks ago

‘खतरनाक स्टंट करने की हिम्मत देते हैं’, फरहाना भट्ट ने रोहित शेट्टी को बताया मजबूत सपोर्ट

महाराष्ट्र3 weeks ago

महाराष्ट्र: टीईटी पेपर लीक मामले में पुलिस प्रशिक्षण संस्थान का संचालक गिरफ्तार, भिवंडी कोर्ट में किया जा सकता है पेश

राष्ट्रीय समाचार4 weeks ago

भारत का लक्ष्य 2030 तक 10,000 जीआई पंजीकरण और एफटीए के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाना

राष्ट्रीय समाचार4 weeks ago

ओडिशा पुलिस की बड़ी सफलता, 6 महीने में 17,590 गुमशुदा महिलाएं और बच्चे खोजे गए

राजनीति3 weeks ago

केजरीवाल के कार्यकाल में सरकार को भारी जीएसटी नुकसान, रिश्वत-वसूली के लिए नहीं की गई कार्रवाई: प्रवेश वर्मा

राष्ट्रीय समाचार2 weeks ago

सरकारी योजनाओं के दम पर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मजबूत, 10.88 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

अंतरराष्ट्रीय समाचार3 days ago

जापान: 11 साल बाद जन्मदर में मामूली सुधार, इस साल छह महीने में 3.42 लाख बच्चों का जन्म

रुझान