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अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 25 में किया शानदार प्रदर्शन, बिजली उत्पादन क्षमता 102 बीयू यूनिट्स रही

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अहमदाबाद, 30 अप्रैल। अदाणी पावर ने बुधवार को नतीजों का ऐलान किया। वित्त वर्ष 25 में कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा है और इसने 13,926 करोड़ रुपए का कंटिन्यूइंग प्रॉफिट बिफोर टैक्स (पीबीटी) दर्ज किया है, जो कि वित्त वर्ष 24 में 11,470 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 21.4 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है।

कंपनी का कंटिन्यूइंग प्रॉफिट बिफोर टैक्स बढ़ने की वजह ईबीआईटीडीए और फाइनेंस लागत में कमी होना है।

अदाणी ग्रुप की पावर कंपनी ने वित्त वर्ष 25 में 56,473 करोड़ रुपए का कंसोलिडेटेड कंटिन्यूइंग रेवेन्यू हासिल किया है, जो कि वित्त वर्ष 24 में 50,960 करोड़ रुपए था। कंपनी का रेवेन्यू बढ़ने की वजह अधिक बिक्री वॉल्यूम होना है।

कंपनी ने कहा कि कंटिन्यूइंग रेवेन्यू में एकमुश्त मिली पूर्व की आय को शामिल नहीं किया गया है। वित्त वर्ष 25 में कंपनी का कंटिन्यूइंग ईबीआईटीडीए 14.8 प्रतिशत बढ़कर 21,575 करोड़ रुपए हो गया है।

वित्त वर्ष 25 की चौथी तिमाही में कंपनी की कंसोलिडेटेड कंटिन्यूइंग रेवेन्यू 5.3 प्रतिशत बढ़कर 14,522 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 24 की चौथी तिमाही में 13,787 करोड़ रुपए था।

जनवरी-मार्च अवधि में कंसोलिडेटेड कंटिन्यूइंग पीबीटी 3,248 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले वर्ष समान अवधि में 3,464 करोड़ रुपए था।

वित्त वर्ष 25 कंपनी के लिए ऐतिहासिक रहा है। इस दौरान कंपनी ने 102.2 अरब यूनिट्स (बीयू) बिजली का उत्पादन किया है, जो कि वित्त वर्ष 24 में 85.5 बीयू था। इसके साथ ही कंपनी की कंसोलिडेटेड बिजली बिक्री की मात्रा सालाना आधार पर 20.7 प्रतिशत बढ़कर 95.9 बीयू हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 24 में 79.4 बीयू थी।

अदाणी पावर लिमिटेड के सीईओ एसबी ख्यालिया ने कहा, “कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अब तक का सबसे बेहतर ऑपरेशनल और वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है, जो अदाणी पोर्टफोलियो कंपनियों की ताकत और मजबूती को दर्शाता है। जैसे-जैसे हम क्षमता विस्तार के अगले चरण में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, हम अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को तेज करने और प्रमुख मापदंडों में अपने क्षेत्रीय नेतृत्व का विस्तार करने के लिए पूंजी और लागत दक्षता को प्राथमिकता दे रहे हैं।”

1,200 मेगावाट मोक्सी पावर जनरेशन लिमिटेड, 600 मेगावाट कोरबा पावर लिमिटेड और 500 मेगावाट अदाणी दहानू थर्मल पावर स्टेशन के अधिग्रहण के कारण कंसोलिडेटेड क्षमता वित्त वर्ष 24 में 15,250 मेगावाट से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 17,550 मेगावाट हो गई।

राष्ट्रीय समाचार

इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो जून में 26 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप फंड्स में आया सबसे अधिक निवेश

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इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो जून में मासिक आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 28,973 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि मई में 22,907 करोड़ रुपए था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से शुक्रवार को जारी डेटा में दी गई।

एम्फी द्वारा जारी डेटा में बताया गया कि 11 इक्विटी म्यूचुअल फंड सब-कैटेगरी में से सबसे अधिक 6,090 करोड़ रुपए का निवेश मिडकैप फंड कैटेगरी में आया है।

इसके बाद स्मॉलकैप फंड्स में 5,602 करोड़ रुपए का और फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,231 करोड़ रुपए का निवेश आया है।

वहीं, जून में मल्टीकैप फंड्स में 3,070 करोड़ रुपए, लार्जकैप फंड्स में 2,067 करोड़ रुपए, लार्ज एवं मिडकैप फंड्स में 4,321 करोड़ रुपए, वैल्यू फंड्स/कॉन्ट्रा फंड्स में 686 करोड़ रुपए, फोकस्ड फंड्स में 1,118 करोड़ रुपए और सेक्टोरल/थीमेटिक फंड्स में 1,469 करोड़ रुपए का निवेश आया है।

इसके अलावा, समीक्षा अवधि में ईएलएसएस फंड्स से 634 करोड़ रुपए और डिविडेंड यील्ड फंड्स से 49 करोड़ रुपए की निकासी हुई है।

डेट म्यूचुअल फंड्स से निकासी का सिलसिला जारी है। जून में आउटफ्लो करीब 1.09 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि मई में यह राशि 96,948 करोड़ रुपए थी।

डेट म्यूचुअल फंड्स की 16 कैटेगरी में से सबसे अधिक 42,293 करोड़ रुपए की निकासी लिक्विड फंड्स में देखी गई है। इसमें 16,484.01 करोड़ रुपए की निकासी के साथ लो ड्यूरेशन फंड्स दूसरे और 10,595 करोड़ रुपए की निकासी के साथ मनी मार्केट्स फंड्स तीसरे स्थान पर थे।

जून में गोल्ड ईटीएफ में 3,443.23 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इस दौरान अन्य ईटीएफ में 13,237 करोड़ रुपए का निवेश आया। वहीं, इंडेक्स फंड्स में 58 करोड़ की निकासी देखी गई।

इस निवेश से भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 30 जून तक बढ़कर 82,22,480.04 करोड़ रुपए हो गया है। पूरी जून माह में औसत एयूएएम का आकार 84,18,485.5 करोड़ रुपए रहा है।

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राष्ट्रीय समाचार

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, घबराने की जरूरत नहीं: डब्ल्यूटीसी चेयरमैन विजय कलंत्री

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वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) के चेयरमैन विजय कलंत्री ने गुरुवार को कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

न्यूज एजेंसी से बातचीत में विजय कलंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और भारतीय रुपए पर भी दबाव बना है।

उन्होंने कहा कि इस अनिश्चित माहौल का असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा है, जिसके कारण शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली है।

विजय कलंत्री ने कहा, “कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।”

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा, “भारत पहले भी ऐसे दौर का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है, जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थीं। हमारी अर्थव्यवस्था ने पहले भी कई वैश्विक संकटों के दौरान मजबूती दिखाई है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने में भी सक्षम है।”

कलंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी लगातार बदल रही है और आगे क्या होगा, यह अमेरिका, ईरान और अन्य वैश्विक पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। ऐसे में भारत को घबराने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। लेकिन भारत पहले भी ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुका है और मुझे विश्वास है कि देश मौजूदा अनिश्चितताओं से भी मजबूती के साथ निपटेगा।”

डब्ल्यूटीसी के चेयरमैन ने दोहराया, “घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जरूर है, लेकिन भारत पहले भी ऊंची तेल कीमतों के दौर से सफलतापूर्वक निकल चुका है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।”

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व्यापार

मध्यपूर्व तनाव के बीच सोने और चांदी का दाम करीब आधा प्रतिशत फिसला

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सोने और चांदी की शुरुआत शुक्रवार को लाल निशान में हुई और इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब आधा प्रतिशत कम हो गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,45,300 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 410 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,890 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट देखी गई। यह सुबह 10 बजे 696 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.48 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,603 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

सोने के साथ चांदी में भी गिरावट देखने को मिली, हालांकि, यह काफी सीमित थी।

चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,26,377 रुपए प्रति किलो के मुकाबले करीब सपाट 2,26,368 रुपए प्रति किलो पर खुला।

खबर लिखे जाने तक यह 244 रुपए प्रति किलो या 0.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,26,133 रुपए प्रति किलो पर था।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,128 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 60.86 डॉलर प्रति औंस पर था।

विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है और अमेरिका की ओर से हवाई हमले करने के बाद ईरान ने भी करार जवाब दिया है और मध्य पूर्व में अमेरिका के कई ठिकानों को निशाना बनाया है।

रिपोर्ट्स में बताया गया कि गुरुवार को ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरानी सेना ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

बाद में ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान में कई धमाकों की खबर दी, जिनमें बुशहर (जहां देश का एक परमाणु संयंत्र है), कोनारक, चोघादक और बंदर अब्बास शामिल हैं।

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