खेल
चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद कप्तान हार्दिक पांड्या मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल हुए
मुंबई, 11 मार्च। भारतीय ऑलराउंडर और मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2025 सीजन से पहले फ्रेंचाइजी टीम में मंगलवार को शामिल हो गए।
पांड्या दुबई में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के खिताब जीतने वाले अभियान का हिस्सा थे। रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम ने फाइनल में न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराकर आठ टीमों के टूर्नामेंट में अपना तीसरा खिताब जीता।
मुंबई इंडियंस ने एक्स पर अपने कप्तान की एक तस्वीर साझा की और पोस्ट पर कैप्शन दिया, “द गन हैज अराइव”।
पांड्या ने अपने ऑलराउंड कौशल से टूर्नामेंट में भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 31 वर्षीय पांड्या ने चार स्पिनरों के साथ जाने की भारत की रणनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि उन्होंने नंबर 7 पर आते हुए अपने बल्ले से कुछ मैच जीतने वाली पारियां भी खेलीं।
आईपीएल 2024 सीजन मुंबई इंडियंस के कप्तान के रूप में उनका पहला सीजन था, लेकिन यह उनके लिए अच्छा नहीं रहा क्योंकि 14 मैचों में से चार जीत के साथ मुंबई स्टैंडिंग में सबसे निचले स्थान पर रही। ऑलराउंडर को आगामी सीजन में बेहतर परिणाम की उम्मीद होगी।
हालांकि, पांड्या पिछले संस्करण के अंत में एक मैच के निलंबन के कारण 23 मार्च को चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के खिलाफ एमआई के शुरुआती मैच से चूकने वाले हैं। यह जुर्माना आईपीएल 2024 के दौरान तीन ओवर-रेट उल्लंघन के बाद लगाया गया है। आईपीएल नियमों के अनुसार, एक कप्तान को एक मैच के निलंबन का सामना करना पड़ता है, जब कोई टीम एक सीजन में तीन ऐसे उल्लंघन करती है।
सोमवार को, एमआई के मुख्य कोच माहेला जयवर्धने और पारस म्हाम्ब्रे और लसिथ मलिंगा (गेंदबाजी कोच), जे अरुण कुमार (सहायक बल्लेबाजी कोच), और कार्ल हॉपकिंसन (फील्डिंग कोच) के कोचिंग स्टाफ ने मैदान पर कदम रखा, जिससे उन लड़कों के लिए एक गहन प्रशिक्षण सत्र की व्यवस्था की गई जिन्होंने अपना शिविर शुरू कर दिया है। इस सत्र में नमन धीर, बेवन जैकब्स, रॉबिन मिंज, केएल श्रीजीत, राज अंगद बावा, पीएसएन राजू, अश्विनी कुमार और विग्नेश पुथुर शामिल हुए।
जयवर्धने ने कहा,”नए सत्र में नए सिरे से शुरुआत की जाएगी। कोचिंग टीम में नए चेहरे हैं जो दशकों का उच्च प्रदर्शन अनुभव लेकर आए हैं, जिससे खिलाड़ियों को बहुत सारी जानकारी और ज्ञान मिलता है। प्री-सीजन हमेशा रोमांचक होता है, लेकिन तीव्रता सबसे महत्वपूर्ण है और यही हम आज स्थापित करना चाहते हैं और इसे आगे ले जाना चाहते हैं। हमेशा एक कठिन सत्र होने वाला है, लेकिन मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि जब हमारे पास समय हो तो हम अच्छी तरह से तैयारी करें। “
राजनीति
एलजीपी संकट और 8 सांसदों के निलंबन पर लोकसभा में हंगामा, कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली, 13 मार्च : लोकसभा में शुक्रवार को एलपीजी और 8 सांसदों के निलंबन को लेकर हंगामा हुआ। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इसके कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
शुक्रवार सुबर 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस के सांसद वेल के नजदीक पहुंच गए। उन्होंने एलपीजी संकट को लेकर चर्चा की मांग उठाई। इसके साथ ही, 8 सांसदों के निलंबन को वापस लेने के लिए हंगामा किया।
स्पीकर ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों को शांत कराने की कोशिश करते हुए कहा, “मैंने पहले भी आग्रह किया था और फिर से आग्रह कर रहा हूं कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। आज भी प्रतिपक्ष के 8 सदस्यों के प्रश्न सूचीबद्ध हुए हैं। प्रश्नकाल के अंदर देश के मुद्दे और क्षेत्र की समस्याएं उठती हैं, तो वहीं सरकार की जवाबदेही तय होती है। इसीलिए आग्रह है कि प्रश्नकाल के अंदर सभी को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने विपक्षी सदस्यों को लेकर कहा, “वे बोलते हैं कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए, उन्हें सदन में बोलने दिया जाए, लेकिन जब बोलने का अवसर दिया जाता है तो उस समय आप बोलते नहीं हैं और सदन में गतिरोध करना चाहते हैं। यह संसदीय मर्यादा नहीं है।” स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों को प्रश्नकाल के बाद अपना विषय उठाने के लिए कहा, लेकिन हंगामा जारी रहा।
8 सदस्यों के निलंबन पर सख्त टिप्पणी करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सदन के अंदर अगर मेजों पर चढ़ेंगे तो इसी तरह (निलंबन) की कार्रवाई होगी। मेरा एक और आग्रह है कि सदन की पवित्रता, चाहे वह संसद परिसर के अंदर हो या संसद के बाहर हो, उसकी पवित्रता, मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाने की सबकी जिम्मेदारी है। जिस तरह का आचरण और व्यवहार विपक्ष के सदस्यों का रहा है, वे सदन की पवित्रता को समाप्त कर रहे हैं।”
लोकसभा स्पीकर ने दोहराया कि विपक्ष के सदस्य प्रश्नकाल नहीं चलने देना चाहते हैं और लगातार गतिरोध पैदा करते हैं। इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय
पीएम नेतन्याहू ने ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा को आईआरजीसी की कठपुतली बताया

तेल अवीव, 13 मार्च : ईरान के खिलाफ 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित नहीं था कि एक बार इजरायल और अमेरिका ऐसे हालात बना देंगे तो ईरान के लोग इस्लामिक रिपब्लिक को गिरा देंगे।
ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा कि आप किसी को पानी तक ले जा सकते हैं; आप उसे पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। वहीं, उन्होंने ईरान के नए सुप्रीम लीडर सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कठपुतली बताया।
ईरान में सत्ता बदलने की संभावना के बारे में पीएम नेतन्याहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिपोर्टरों से कहा, “हम ऐसा करने के लिए सबसे अच्छे हालात बनाएंगे, जिसमें हवाई हमले भी शामिल हैं, जैसा हमने कल किया था, जैसा हम इन दिनों कर रहे हैं, ताकि (ईरानी लोगों) को सड़कों पर उतरने के लिए जरूरी जगह मिल सके।”
उन्होंने आगे कहा, “हम इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स और बासिज (उनकी सड़कों पर तैनात सेना) उनके चेकपॉइंट्स पर जबरदस्त हमले कर रहे हैं और अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है।”
इजरायली प्रधानमंत्री ने मोजतबा खामेनेई को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कठपुतली बताया, जो सार्वजनिक तौर पर अपना चेहरा नहीं दिखा सकते। दरअसल, ईरान के नए सुप्रीम लीडर युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं दिखे हैं। सुप्रीम लीडर बनने से पहले भी वह सार्वजनिक रूप से ना के बराबर दिखाई दिए हैं।
सुप्रीम लीडर बनने के बाद से मोजतबा के सार्वजनिक तौर पर ना दिखने को लेकर माना जा रहा है कि वह एयरस्ट्राइक में घायल हो गए हैं। गुरुवार को, ईरान की सरकारी मीडिया ने मोजतबा खामेनेई का एक विद्रोही बयान पढ़ा गया। रविवार को सुप्रीम लीडर बनाए जाने के बाद मोजतबा का यह पहला बयान था, लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से उन्हें न तो देखा गया है और न ही सुना गया है।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, “मैं इससे इनकार नहीं करता, मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि ईरानी लोग इस शासन को गिरा देंगे।” हालांकि, उन्होंने ईरानी जनता से बात करते हुए कहा, “हमने आपसे कहा था, ‘मदद आ रही है’। खैर, मदद आ गई है और आगे भी आएगी। हम सभी इस शासन के गिरने के नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन एक सत्ता परिवर्तन देश के अंदर से ही हो सकता है।”
ईरामन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को ठहराते हुए पीएम नेतन्याहू ने कहा कि ताकत का इस्तेमाल जरूरी था क्योंकि पिछले जून में 12 दिन चले इजरायल-ईरान युद्ध के बाद से सरकार अपने न्यूक्लियर हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर वापस लौट आई थी।
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को इजरायल ने चेतावनी दी थी कि वे “मौत के उद्योग” को फिर से बनाने की कोशिश न करें, लेकिन खामेनेई ने इसके बजाय ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को तेज कर दिया और अब हमने खामेनेई को खत्म कर दिया है।
उन्होंने कहा, “अगर हमने तुरंत एक्शन नहीं लिया होता, तो कुछ ही महीनों में ईरान का मौत का उद्योग किसी भी हमले से बच जाता। इसलिए, हम एक साथ लड़ाई के लिए निकले, अमेरिका-इजरायल, ताकि जो हमने शुरू किया था उसे जारी रख सकें और ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने से रोक सकें। ईरान को ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने से रोकना जो इजरायल, अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए खतरा हों। यही हमारा मकसद है।
नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा लड़ाई में, इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है और एक बहुत जरूरी न्यूक्लियर वैज्ञानिक को ढेर कर दिया है और इजरायल के पास इस अभियान के लिए कई हैरान करने वाली चीजें हैं और यह उम्मीद से बेहतर चल रहा है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर, इजरायल एक ऐसी सरकार को रोक रहा है जो उसे (इजरायल को) खत्म करना चाहती थी। हमारे दुश्मन एक पल में गायब नहीं हो रहे हैं, लेकिन हमारी कमाल की कामयाबी देखिए।
जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या इजरायल खामेनेई के बेटे और वारिस, मोजतबा खामेनेई के पीछे जाएगा, तो उन्होंने जवाब दिया, “मैं आतंकी संगठनों के किसी भी नेता के लिए जीवन बीमा पॉलिसी नहीं लूंगा।
अपराध
मुंबई सेंट्रल के रेलवे अस्पताल में महिला डॉक्टर की संदिग्ध हालात में मौत, जांच में जुटी पुलिस

मुंबई, 13 मार्च : मुंबई सेंट्रल स्थित पश्चिम रेलवे के जगजीवनराम अस्पताल में तैनात एक महिला डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। डॉक्टर का शव अस्पताल परिसर में स्थित उनके कमरे में मिला। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मुंबई पुलिस के अनुसार, डॉ. अनुजा कुलकर्णी को बीते दिन अस्पताल में पहले से निर्धारित कई सर्जरी करनी थीं लेकिन तय समय पर वह ऑपरेशन थिएटर नहीं पहुंचीं। सहकर्मियों ने उन्हें कई बार फोन करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। लगातार संपर्क न हो पाने के कारण उनके साथ काम करने वाले डॉक्टरों को संदेह हुआ।
इसके बाद एक जूनियर डॉक्टर चौथी मंजिल पर स्थित उनके कमरे तक पहुंचा और दरवाजा खटखटाया लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। शक होने पर उसने दरवाजे के कांच से अंदर झांककर देखा तो डॉ. कुलकर्णी कुर्सी के पास फर्श पर गिरी हुई दिखाई दीं। यह दृश्य देखकर उसने तुरंत अस्पताल प्रशासन को सूचना दी।
सूचना मिलने पर अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर मौके पर पहुंचे और डॉक्टर की जांच की। जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और कमरे का पंचनामा कर जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस कमरे में महिला डॉक्टर का शव मिला, उसका दरवाजा अंदर से बंद था।
मृतका की पहचान डॉ. अनुजा कुलकर्णी के रूप में हुई है, जो अविवाहित थीं और अस्पताल के ईएनटी (कान-नाक-गला) विभाग में कार्यरत थीं। मुंबई के टार्डियो पुलिस स्टेशन में इस मामले में एडीआर के तहत मामला दर्ज किया गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
फिलहाल डॉक्टर की मौत के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने अस्पताल परिसर और चौथी मंजिल के सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों में दहशत और चिंता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
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