व्यापार
‘क्यूआईपी’ के जरिए प्राप्त निवेश 2024 में नई ऊंचाई पर, रियल एस्टेट सबसे आगे
मुंबई, 13 फरवरी। घरेलू कंपनियों द्वारा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया 2024 में अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। इसमें 99 इश्यू के तहत अलग-अलग सेक्टरों में कुल 1,41,482 करोड़ रुपये का निवेश आया। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
‘क्यूआईपी’ लिस्टेड कंपनियों के लिए बाजार नियामकों की पूर्वानुमति के बिना ‘पूंजी जुटाने’ का एक सरल तरीका है।
इस मामले में रियल एस्टेट एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभरा, जिसमें आठ डेवलपर्स और एक रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) ने सामूहिक रूप से 22,320 करोड़ रुपये क्यूआईपी से जुटाए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल कुल क्यूआईपी में रियल एस्टेट की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत रही।
यह साल 2023 की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है क्योंकि साल 2023 में केवल 43 क्यूआईपी इश्यू ने 55,109 करोड़ रुपये जुटाए और रियल एस्टेट की इस स्पेस में कोई गतिविधि नहीं रही।
साल 2024 पिछले 11 साल में सबसे ज्यादा क्यूआईपी फंड जुटाने का साल रहा, जिसमें रियल एस्टेट ने मजबूत वापसी की। संस्थागत निवेशकों ने इस सेक्टर की लंबी अवधि की वृद्धि में भरोसा दिखाया।
एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, “2024 में क्यूआईपी फंड जुटाने में उछाल देश के आर्थिक बुनियादी ढांचे में मजबूत संस्थागत विश्वास के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र की निरंतर ताकत को उजागर करता है।”
भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद क्यूआईपी गतिविधि में उछाल आया। साल की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और मौद्रिक नीतियों में बदलाव के कारण निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में तेज गिरावट देखी गई।
जहां खुदरा निवेशकों ने बाजार में उतार-चढ़ाव पर सतर्कता से अपना रुख तय किया,वहीं संस्थागत निवेशकों ने लंबी अवधि की संभावना वाले क्षेत्रों, खासकर रियल एस्टेट में निवेश जारी रखा।
पुरी ने कहा, “बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद, पूंजी बाजार मजबूत बना हुआ है और कंपनियां लगातार रणनीतिक निवेश आकर्षित कर रही हैं।”
उन्होंने कहा कि मजबूत वित्तीय स्थिति आगामी रियल एस्टेट विकास के बड़े पैमाने पर प्रवाह को सपोर्ट करती है।
इससे पहले, पिछले साल के पहले नौ महीने में रियल एस्टेट डेवलपर्स ने क्यूआईपी के जरिए 12,801 करोड़ रुपये जुटाए थे, जो कुल क्यूआईपी के 17 प्रतिशत से अधिक था।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 561 अंक फिसला, निफ्टी 0.6 प्रतिशत लुढ़का

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.72 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर था। इस तरह घरेलू बाजार में लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया।
इस दौरान करीब 1,422 शेयरों में बढ़त, 2,632 शेयरों में गिरावट और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला क्षेत्र बनकर उभरा, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक (-1.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-1.6 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-1.1 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (-1 प्रतिशत) भी गिरावट के साथ बंद हुए।
इसके बाद, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.8 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.3 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, इसके बाद निफ्टी मेटल का स्थान रहा, जिसमें 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल 39 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।
इस बीच, भारतीय रुपया 57 पैसे गिरकर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले सत्र में रुपया 95.68 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई और यह 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़े आर्थिक संकट पैदा कर रही हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया है, ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार पर एक नई नाकाबंदी की घोषणा की है। इससे आगामी कारोबारी सत्रों में भी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रोजगार में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की होगी जरूरत: रिपोर्ट

भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
व्यापार
सोने और चांदी में रिकवरी, दाम आधा प्रतिशत से अधिक बढ़े

सोने और चांदी में मंगलवार को रिकवरी देखने को मिली। इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम आधा प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,40,309 रुपए के मुकाबले 640 रुपए की तेजी के साथ 1,40,949 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
शुरुआती कारोबार में इसमें और तेजी देखने को मिली। सुबह 9:47 पर यह 742 रुपए या 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,41,051 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,40,796 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,41,294 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
सोने के साथ चांदी में तेजी देखी जा रही है।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,17,718 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 615 रुपए की तेजी के साथ 2,18,333 रुपए प्रति किलो पर खुला।
खबर लिखे जाने तक, यह 1,231 रुपए या 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,18,949 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,17,923 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,19,289 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार देखा जा रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,023 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57.87 डॉलर प्रति औंस पर थी।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में आने वाले समय में दबाव देखने को मिल सकता है। इसका बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ना है।
अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.62 प्रतिशत, अमेरिका के 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.104 प्रतिशत और अमेरिका के 5 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.378 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
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