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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट, गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति पर फोकस

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नई दिल्ली, 1 फरवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच बजट पेश कर दिया है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती हुई और बड़ी है। हमने पिछले 10 सालों में दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान कहा, “हमारा फोकस ‘ज्ञान’ (जीवाईएएन) यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति पर है। इसके साथ ही स्वास्थ्य, मैन्युफैक्चरिंग और मेकिंग इंडिया, रोजगार और इनोवेशन पर हमारा ध्यान केंद्रित है। साथ ही कृषि और निर्यात पर हम काम कर रहे हैं, हमारा उद्देश्य विकसित भारत बनाने पर है। पीएम मोदी के नेतृत्व में इकोनॉमी को गति देंगे। ये विकसित भारत का बजट है।”

उन्होंने किसानों के लिए ‘धनधान्य योजना’ का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, “किसानों के लिए प्रधानमंत्री धनधान्य योजना शुरू की जाएगी। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाकर 5 लाख की गई है।”

उन्होंने कहा, “यह बजट सरकार के विकास को बढ़ाने, सभी के डेवलपमेंट, मिडिल क्लास की क्षमता को बढ़ाने के लिए समर्पित है। हमने इस सदी के 25 साल पूरे करने जा रहे हैं। हमारी विकसित भारत की उम्मीदों ने हमें प्रेरणा दी है।”

निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा, “हमारी अर्थव्यवस्था सभी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। पिछले 10 वर्षों में हमारे विकास के ट्रैक रिकॉर्ड और ढांचागत सुधारों ने विश्व का ध्यान हमारी ओर खींचा है। इस अवधि के दौरान, भारत की योग्यता और सामर्थ्य में भरोसा बढ़ता गया है। अगले 5 वर्षों को हम सभी क्षेत्रों के संतुलित विकास में तेजी लाते हुए ‘सबका विकास’ को साकार करने के अद्वितीय अवसर के रूप में देखते हैं।”

वित्त मंत्री ने कहा, “मेक इन इंडिया, इम्प्लॉयमेंट और इनोवेशन, एनर्जी सप्लाई, स्पोर्ट्स का डेवलपमेंट, एमएसएमई का विकास हमारी विकास यात्रा में शामिल हैं और इसका ईंधन रिफॉर्म्स हैं। इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को मदद की संभावना है। ग्रामीण संपन्नता और अनुकूलन निर्माण राज्यों की भागीदारी से शुरू किया जाएगा। कौशल, निवेश से कृषि में रोजगार का सुधार होगा। इसका मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में विकल्प पैदा करना है। युवा किसानों, ग्रामीण महिलाओं, और छोटे किसानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पहले चरण में 100 विकासशील कृषि जिलों को शामिल किया जाएगा।”

उन्होंने आगे बताया, “खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लिए सरकार राष्ट्रीय तेल मिशन को चला रही है। 10 साल पहले हमने ठोस प्रयास किए थे और दलहन में आत्मनिर्भरता प्राप्त की थी। तब से आय में वृद्धि और बेहतर आर्थिक क्षमता की वृद्धि हुई है। अब सरकार तुअर, उड़द और मसूर पर ध्यान दे रही है। इसका विवरण दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों में पंजीकरण और करार करने वाले किसानों से 4 साल के दौरान सभी दलहन खरीदी जाएंगी।”

राष्ट्रीय समाचार

नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में जांच पूरी, एसआईटी ने डेढ़ हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट कोर्ट में की दाखिल

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नोएडा में अप्रैल माह में हुई श्रमिक हिंसा के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच पूरी कर ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने करीब डेढ़ हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी है। चार्जशीट में हिंसा की साजिश रचने वालों और उपद्रव में सीधे तौर पर शामिल लोगों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, 13 और 14 अप्रैल को नोएडा के विभिन्न क्षेत्रों में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान कई स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई थीं।

हिंसा के कारण क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा था। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने पिछले कई महीनों में घटनास्थलों का निरीक्षण करने, सीसीटीवी फुटेज खंगालने, डिजिटल साक्ष्य जुटाने और बड़ी संख्या में प्रत्यक्षदर्शियों एवं संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने का काम किया।

जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर एसआईटी ने करीब 10 ऐसे लोगों की पहचान की है, जिन पर हिंसा भड़काने और पूरी साजिश को अंजाम देने का आरोप है। इसके अलावा लगभग दो दर्जन लोगों को हिंसक घटनाओं में प्रत्यक्ष रूप से शामिल पाए जाने के आधार पर कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

एसआईटी की जांच में मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में रूपेश राय, आकृति, मनीषा, सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर और सतीश कुमार सहित कई अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इन आरोपियों की भूमिका हिंसा की योजना बनाने, लोगों को उकसाने और घटनाओं को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण रही।

इन सभी प्रमुख आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच अधिकारियों का कहना है कि चार्जशीट में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वीडियो फुटेज, मोबाइल डेटा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी प्रमाण शामिल किए गए हैं, जो अदालत में अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।

अब मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। एसआईटी की चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही नोएडा के चर्चित श्रमिक हिंसा प्रकरण की जांच का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से हिंसा और अराजकता फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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राष्ट्रीय समाचार

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत ने एलपीजी आयात के स्रोत बढ़ाए, तेल कंपनियों को हुआ करीब 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान

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पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान भारत ने तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के आयात के स्रोतों में विविधता लाई और खाड़ी क्षेत्र पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका, ईरान और कई अन्य देशों से खरीद बढ़ा दी।

क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत की एलपीजी आयात संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला। परंपरागत रूप से भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी जरूरतें पश्चिम एशियाई देशों से पूरी करता रहा है। हालांकि अप्रैल 2026 तक अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग एक-तिहाई तक पहुंच गई, जबकि फरवरी में यह केवल 8 प्रतिशत थी।

यह बदलाव 2025 के अंत में भारत और अमेरिका के बीच हुए 22 लाख टन प्रति वर्ष एलपीजी आपूर्ति समझौते से संभव हुआ। यह समझौता भारत की सालाना एलपीजी आयात जरूरतों का लगभग 10 प्रतिशत पूरा करता है।

ईरान भी भारत के आयात स्रोतों में फिर से शामिल हो गया और अप्रैल में कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत रही। इसके अलावा, भारत ने अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी एलपीजी की खरीद की।

आयात के स्रोतों में विविधता लाने की इस रणनीति से संघर्ष के दौरान आपूर्ति सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिली, लेकिन इसके कारण लंबी दूरी से माल लाना पड़ा और परिवहन लागत भी बढ़ गई।

आपूर्ति में बाधा और बढ़ी हुई कीमतों का असर घरेलू खपत पर भी पड़ा। फरवरी में जहां भारत की एलपीजी खपत 32 लाख टन थी, वहीं अप्रैल में यह घटकर 24.7 लाख टन रह गई। ऊंची कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों ने मांग को प्रभावित किया।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 3.32 करोड़ टन एलपीजी खपत दर्ज की गई थी, जो सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि थी। लेकिन इसके बाद के महीनों में मांग में तेज गिरावट देखने को मिली।

मार्च और अप्रैल में एलपीजी की मांग सालाना आधार पर 13 प्रतिशत घटी, जबकि मई में यह गिरावट और बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई।

रिपोर्ट के अनुसार, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्योंकि उन्हें बाजार आधारित कीमतों का सामना करना पड़ा और बढ़ती लागत का असर उन पर तुरंत पड़ा। दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं की मांग अपेक्षाकृत स्थिर रही क्योंकि रसोई गैस की खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई।

क्रिसिल ने बताया कि संघर्ष के कारण वैश्विक एलपीजी कीमतों में तेज उछाल आया। भारतीय आयात के लिए मानक मानी जाने वाली सऊदी अरामको कॉन्ट्रैक्ट प्राइस फरवरी से जून के बीच 46 प्रतिशत बढ़ गई, जिसका कारण आपूर्ति में बाधा की आशंका और बढ़ी हुई मालभाड़ा लागत रही।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में अपेक्षाकृत कम वृद्धि की गई। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत इस अवधि में लगभग 10 प्रतिशत बढ़ी, जबकि 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमत में 79 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

घरेलू गैस की कीमतों को सीमित रखने के कारण तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की अंडर-रिकवरी में भारी वृद्धि हुई, क्योंकि खरीद लागत खुदरा बिक्री मूल्य से काफी अधिक हो गई।

क्रिसिल के अनुमान के अनुसार, मई में दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी 651 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई। वहीं मार्च से मई के बीच सरकारी तेल कंपनियों को कुल मिलाकर लगभग 22,000 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही इजरायल ने लेबनान पर किया हमला , 5 की मौत

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दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले जारी है। हालिया हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने शनिवार को बताया कि, हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू होने के 24 घंटों के भीतर ही दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र पर एयर स्ट्राइक की गई।

एक दिन पहले ही दोनों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, युद्धविराम शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:00 बजे से प्रभावी हुआ।

इस बीच, हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने शुक्रवार को कहा कि यदि संगठन पर हमला किया गया तो वह हथियारों के बल पर इजरायल का मुकाबला करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौत की धमकियां उनके सदस्यों को डराने में सफल नहीं होंगी।

अल-मनार टीवी चैनल पर प्रसारित अपने संबोधन में कासिम ने कहा, “हिज्बुल्लाह को खत्म करने और कब्जे को स्थायी बनाने की परियोजना विफल हो चुकी है, और इजरायल हमारी जमीन के अंतिम हिस्से तक से पीछे हटेंगे।”

उन्होंने कहा कि लेबनान इस समय “सबसे खतरनाक दौर” और देश के भविष्य को निशाना बनाने वाली “अमेरिकी-इजरायली अभियान” का सामना कर रहा है। कासिम ने आरोप लगाया कि लेबनान की राजनीतिक सत्ता के खिलाफ इजरायल नया आंदोलन खड़ा करना चाहता है और संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में भी बाधाएं पैदा कर रहा है।

कासिम ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के हथियार केवल इजरायल के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हैं और उन्होंने इजरायल से लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की।

उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब शुक्रवार को युद्धविराम लागू होने के कुछ ही समय बाद इजरायली हवाई हमले में सज्द के निकट जबल अल-रफी क्षेत्र को निशाना बनाया गया।

इससे पहले दिन में, हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट “लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस” के सदस्य इब्राहिम अल-मूसावी ने कहा था कि यदि इजरायल भी समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो हिज्बुल्लाह युद्धविराम समझौते का सम्मान करता रहेगा।

वहीं, लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में कुल 3,980 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,001 लोग घायल हुए हैं।

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