अंतरराष्ट्रीय
जंगल की आग : लॉस एंजिल्स के लिए नए जोखिम पैदा कर सकती हैं तेज हवाएं
लॉस एंजिल्स, 13 जनवरी। अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के जंगलों से फैली आग ने लॉस एंजिल्स में तबाही मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर की मुश्किलें अभी और बढ़ सकती हैं।
लॉस एंजिल्स क्षेत्र में विनाशकारी जंगल की आग से जूझते हुए अग्निशमन दल को परेशानियों की सामना करना पड़ सकता है। यहां आने वाले दिनों में हवाएं तेज होने की उम्मीद है, जिससे बचाव कार्यों में परेशानी आ सकती है।
स्थानीय अधिकारियों ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि तेज हवाएं और लगातार शुष्क मौसम क्षेत्र में आग के खतरे को बढ़ा रहे हैं। रविवार को उत्तर-पूर्वी हवा की गति 50 मील (लगभग 80 किमी) प्रति घंटे से अधिक हो गई, और आने वाले दिनों में सांता एना की तेज हवाएं भी चलने का अनुमान है।
वहीं, लॉस एंजिल्स काउंटी के फायर चीफ एंथनी मार्रोन ने कहा कि ये हवाएं लॉस एंजेलिस काउंटी में आग के खतरे को और बढ़ा देंगी।
कैलिफोर्निया के वानिकी और अग्नि सुरक्षा विभाग के अनुसार लॉस एंजिल्स काउंटी में अभी भी तीन जंगलों आग लगी हुई है, जो लगभग 40,300 एकड़ (लगभग 163 वर्ग किमी) को जलाकर राख कर रही है।
आग से मरने वालों की संख्या रविवार तक बढ़कर 24 हो गई है। इनमें आठ लोग पैलिसेड्स की आग (सांता मोनिका के पहाड़ों पर) से और 16 लोग ईटन की आग (अल्टाडेना इलाके में) से मारे गए हैं। कैलिफोर्निया के वानिकी और अग्नि सुरक्षा विभाग ने बताया कि दो सबसे बड़ी आगों पर 11 प्रतिशत और 27 प्रतिशत काबू पा लिया गया है।
इस आग में 12,300 से अधिक इमारतें नष्ट हो चुकी हैं। वहीं एक लाख से अधिक लोगों को आपदा क्षेत्रों से निकाला गया है।
कैलिफोर्निया के गवर्नर के कार्यालय के अनुसार, गवर्नर गेविन न्यूसम ने रविवार को कैलिफोर्निया नेशनल गार्ड के अतिरिक्त 1,000 सदस्यों को लॉस एंजिल्स में तैनात किया है, जिससे इस क्षेत्र में कैलगार्ड सेवा सदस्यों की कुल संख्या लगभग 2,500 हो गई है।
कैलगार्ड के कर्मचारी जंगल की आग को बुझाने के प्रयासों में सहायता कर रहे हैं। वे यातायात नियंत्रण बिंदुओं पर तैनात हैं और कुछ जले चुके क्षेत्रों में सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
लॉस एंजिल्स काउंटी के शेरिफ रॉबर्ट लूना के अनुसार, पिछले सप्ताह लॉस एंजेलिस में लगी आग के बाद से कम से कम 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई को लूटपाट के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
आग से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में पैसिफिक पैलिसेड्स और अल्टाडेना के आसपास के आपदा क्षेत्रों में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच कर्फ्यू लागू है।
अंतरराष्ट्रीय
फैक्ट चेक: पाकिस्तानी अकाउंट ने एआई की मदद से भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ के बयान को बदला

नई दिल्ली, 16 मार्च : अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट्स की तरफ से भारत को लेकर फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश लगातार जारी हैं। हालांकि, भारत के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो और विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक अकाउंट लगातार पाकिस्तान के इस फर्जी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश कर रहे हैं।
ताजा मामले में पीआईबी ने बताया कि पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स एक फर्जी वीडियो सर्कुलेट कर रहे हैं। इस वीडियो में पूर्व आर्मी चीफ, जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड), को भारतीय सेना के बारे में गलत बयान देते हुए दिखाया गया है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने एआई से बनाई गई फेक वीडियो और ओरिजिनल वीडियो लगाकर सावधान रहने की अपील की और कहा, “सावधान! यह एक एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो है। पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा अकाउंट्स ऐसे मैनिपुलेटेड वीडियो को एक कोऑर्डिनेटेड डिसइन्फॉर्मेशन कैंपेन के हिस्से के तौर पर सर्कुलेट कर रहे हैं ताकि जनता को गुमराह किया जा सके और भारतीय सेना पर भरोसा कम किया जा सके। जानकारी साझा करने से पहले हमेशा आधिकारिक और भरोसेमंद सोर्स से जानकारी सत्यापित करें।”
बता दें, एआई की मदद से छेड़छाड़ करने के बाद पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) का वीडियो साझा किया जा रहा है, जिसमें वे इजरायल का समर्थन करने के नुकसान के बारे में बात कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि हमारी भारतीय सेना को हमेशा एक एथिकल फोर्स बनने की ट्रेनिंग दी गई थी।
फेक वीडियो में उनके हवाले से आगे कहा जाता है, “मेरी बात याद रखना, यह हालात पूरी तरह से बगावत की तरफ जा रहे हैं। हम सबने देखा है कि असम में क्या हो रहा है। हमारी आर्मी को इज़राइली इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिनका पहला इंस्ट्रक्शन यह होता है कि सभी मुस्लिम, सिख, रेंगमा और कुकी इंसान नहीं हैं। वे पहले उन्हें इंसानियत से दूर करना सिखाते हैं और फिर उन पर ज़ुल्म किया जाता है। यह अच्छा नहीं है। अगर यह चलता रहा तो इससे अंदरूनी बगावत हो जाएगी।”
वहीं हकीकत में पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे (रिटायर्ड) ने कहा था, “हमें न सिर्फ अभी के सुरक्षा खतरों की चुनौतियों से निपटने का अंदाजा लगाना चाहिए, बल्कि यह भी अंदाजा लगाना चाहिए कि भविष्य में क्या होने वाला है। एक बार जब आप अंदाजा लगा लेते हैं, तो आपको उसी हिसाब से खुद को तैयार करना होगा। आपके पास वे काबिलियत होनी चाहिए जो आपको भविष्य की लड़ाइयों को अच्छे से लड़ने में काबिल बनाए। इसलिए सेना को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। आम तौर पर सेनाओं पर पिछली लड़ाई की तैयारी करने का आरोप लगाया जाता है। आपको उसी हिसाब से तैयारी करनी होगी, लेकिन यह काम नहीं करेगा। हमें याद रखना होगा कि हम नई पीढ़ी की क्षमताएं हासिल कर रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
‘फर्जी न्यूज’ फैलाने को लेकर ईरानी सरकार और अमेरिकी मीडिया पर बरसे ट्रंप, बोले- ईरान सिर्फ एआई लड़ाई जीत सकता है

TRUMP
वाशिंगटन, 16 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गलत सूचनाएं फैलाने को लेकर अमेरिकी मीडिया और ईरानी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान केवल एआई द्वारा निर्मित फर्जी वीडियो के सहारे दुष्प्रचार की लड़ाई जीतने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि ईरान द्वारा ‘एआई’ का उपयोग सूचना युद्ध में एक घातक हथियार के रूप में किया जा रहा है, ताकि वैश्विक स्तर पर भ्रम फैलाया जा सके।
ईरान पर निशाना साधते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “ईरान को लंबे समय से मीडिया के जरिए तथ्यों से छेड़छाड़ और पब्लिक रिलेशन्स का मास्टर माना जाता है। वे सेना के हिसाब से बेअसर और कमजोर हैं, लेकिन वे फेक न्यूज मीडिया को गलत जानकारी देने में सच में अच्छे हैं। अब, एआई एक और गलत जानकारी का हथियार बन गया है जिसका ईरान काफी अच्छे से इस्तेमाल करता है। वे दिन-ब-दिन खत्म होते जा रहे हैं।”
ट्रंप ने पोस्ट में आगे कहा कि ईरान नकली बोट्स् दिखाकर बता रहा है कैसे ये बोट्स समुद्र में अलग-अलग जहाजों पर गोली चला रही थीं, जो बहुत बढ़िया, ताकतवर और खतरनाक दिखती हैं, लेकिन ये बोट्स हैं ही नहीं। यह सब गलत जानकारी है, जो यह दिखाने के लिए है कि उनकी पहले से हारी हुई सेना कितनी मजबूत है!
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान के हमले में अमेरिका के पांच रिफ्यूलिंग प्लेन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। इनमें से चार विमान पूरी तरह सुरक्षित और सेवा में हैं। केवल एक विमान को आंशिक क्षति पहुंची है, जो मरम्मत के बाद जल्द ही दोबारा उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाएगा। जिन बिल्डिंग्स और शिप में आग लगी हुई दिखाई गई है, वे आग नहीं हैं; यह एआई से बनी फेक न्यूज है। उदाहरण के लिए, ईरान, फेक न्यूज मीडिया के साथ मिलकर काम करते हुए, हमारे महान यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर को, जो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्रतिष्ठित शिप में से एक है, समुद्र में बेकाबू होकर जलता हुआ दिखा रहा है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि जिन मीडिया आउटलेट्स ने इस तरह की फेक न्यूज फैलाई है, उनके खिलाफ देशद्रोह का चार्ज लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “सच तो यह है कि ईरान खत्म हो रहा है और वे सिर्फ वही लड़ाइयां जीतते हैं जो वे एआई के जरिए बनाते हैं और जिन्हें भ्रष्ट मीडिया आउटलेट्स फैलाते हैं। रेडिकल लेफ्टविंग प्रेस यह अच्छी तरह जानता है, लेकिन फिर भी झूठी कहानियां और झूठ फैलाता रहता है।”
अमेरिकी मीडिया पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि झूठी खबरों की वजह से इनकी अप्रूवल रेटिंग इतनी कम है। इन मीडिया संस्थानों की कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्हें खुशी है कि फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफसीसी) के चेयरमैन ब्रेंडन कैर इन भ्रष्ट और बेहद पक्षपाती न्यूज संगठनों के लाइसेंस की समीक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, इन संस्थानों को अमेरिकी एयरवेव का मुफ्त इस्तेमाल करने की सुविधा मिलती है, लेकिन वे इसका उपयोग खबरों और अपने कई कार्यक्रमों में गलत जानकारी फैलाने के लिए करते हैं। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि लेट-नाइट शो होस्ट्स को खराब रेटिंग के बावजूद भारी सैलरी मिलती है और जैसा कि वे अपने शो द अप्रेंटिस में कहते थे, उन्हें कभी फायर नहीं किया जाता।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने और ओबामा के शासन में की गई कार्रवाई पर शेयर किए मीम्स

वॉशिंगटन, 14 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। अपने बयानों की वजह से वह अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं। वहीं, ट्रूथ सोशल पर वह अपने विचारों के साथ-साथ मीम्स, कार्टून और अलग-अलग तरह के पोस्टर भी साझा करते रहते हैं। ताजा मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूर्व प्रेसिडेंट बराक ओबामा के साथ खुद की एक फोटो साझा की है।
ट्रंप ने इस मीम वाले पोस्टर में पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ बर्ताव की तुलना अपने कार्यकाल के दौरान की कार्रवाई से की है। ओबामा के साथ ईरानी शासन और पैसों वाली फोटो पर लिखा है कि ओबामा कैसे ईरान के साथ बातचीत कर रहे हैं, वहीं नीचे एक दूसरी तस्वीर है, जिसमें ट्रंप खुद नजर आ रहे हैं और उनके साथ बैकग्राउंड में कुछ मिसाइलें हैं। इस पर लिखा है कि ट्रंप मिसाइल के जरिए ईरान से डील करते हैं।
बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में यह दूसरी बार है जब ईरान के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की गई है। इससे पहले जून 2025 में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर यूरेनियम का संवर्धन रोकने के लिए हमले किए थे। इस हमले में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं, ईरान के कई न्यूक्लियर वैज्ञानिक भी मारे गए।
अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ईरान को इस तरह से तबाह करना है कि वह फिर से परमाणु हथियार बनाने के लिए ताकत ना जुटा सके। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका ने ईरान के खार्ग आइलैंड पर “हर सैन्य टारगेट को पूरी तरह से खत्म कर दिया है,” जो एक जरूरी क्रूड एक्सपोर्ट हब है।
इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी धमकी दी है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को जाने से रोकता रहा तो वह आइलैंड के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करेगा।
ट्रंप द्वारा ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किए गए वीडियो में आइलैंड पर हमले दिखाए गए, जिनमें एयरपोर्ट की सुविधाओं पर हमले भी शामिल थे। सरकारी मीडिया ने तेहरान के खतम अल-अनबिया सैन्य कमांड हेडक्वार्टर का हवाला देते हुए बताया कि स्ट्राइक के बाद, ईरान ने कहा कि उसके एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई भी हमला उन तेल कंपनियों के क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले करेगा, जिनके पास अमेरिकी शेयर हैं या जो अमेरिका के साथ सहयोग करती हैं।
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