राष्ट्रीय समाचार
बिहार : रील्स बनाने के चक्कर में ट्रेन से कटकर 2 किशोरों की मौत
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के परसा रेलवे हॉल्ट के समीप बुधवार को ट्रेन से कटकर दो किशोरों की मौत हो गई। कहा जा रहा है कि दोनों किशोर मोबाइल फोन से रील्स बना रहे थे तभी ट्रेन की चपेट में आ गए।
पुलिस के मुताबिक, बहुअरवा रेलवे गुमटी नंबर 178 ‘सी’ के पास एक ट्रैक पर मालगाड़ी गुजर रही थी। दोनों दोस्त दूसरे ट्रैक पर कान में ईयरफ़ोन लगाकर रील्स बना रहे थे, इसी बीच सप्तक्रांति सुपर फास्ट ट्रेन पहुंच गई और दोनों किशोर उसकी चपेट में आ गये।
मझौलिया थाना के इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र ने बताया कि मृतकों की पहचान सेनुअरिया पंचायत के अमवा बैरागी टोला निवासी सुरेंद्र महतो के पुत्र सूरज कुमार (18) और अमेरिका महतो के पुत्र कन्हैया कुमार (16) के रूप में की गयी है। पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत इनोवेट्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को सुदृढ़ करता है: धर्मेंद्र प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को भारत इनोवेट्स पर दो रणनीतिक दस्तावेज जारी किए, जिनमें उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में निहित भारत के उभरते नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया गया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है, जिसके तहत भारत को ज्ञान के उपभोक्ताओं के राष्ट्र से ज्ञान के निर्माताओं, नवोन्मेषकों और प्रौद्योगिकी नेताओं के राष्ट्र में परिवर्तित किया जाना है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद; विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार; उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी; नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक दीपक बागला; शिक्षा मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा की संयुक्त सचिव सौम्या गुप्ता और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रमुख उद्देश्यों में से एक भारत को ज्ञान उपभोग प्रणाली से ज्ञान सृजन और नवाचार प्रणाली में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि भारत इनोवेट्स रणनीतिक दस्तावेज में शामिल स्टार्टअप भारत के प्रमुख संस्थानों, इनक्यूबेटरों और अनुसंधान प्रणालियों से उभर रहे हैं, जो देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र की बढ़ती नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत इनोवेट्स पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत की नवाचार क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के नवाचार-आधारित विकसित भारत के व्यापक मिशन के अनुरूप है।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत इनोवेट्स कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेश फर्मों के साथ जुड़ने के अवसर प्रदान कर रहा है, जो 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती हैं और विश्व स्तर पर 12,000 से अधिक निवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में 100 से अधिक वैश्विक निवेशकों और प्रमुख संस्थानों के एक साथ आने की उम्मीद है, जो भारत के डीप-टेक और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।
प्रधान ने बताया कि इस पहल ने निवेशकों की काफी रुचि जगाई है, और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश पर अंतिम सहमति बन चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत करने के लिए पेरिस, टोक्यो और बेंगलुरु में कई रोडशो आयोजित किए गए हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि आईआईटी, आईआईएससी, बीआईटीएस पिलानी और अन्य प्रमुख संस्थान भारत इनोवेट्स के तहत अपनी प्रमुख अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जो राष्ट्रीय विकास में अकादमिक नेतृत्व वाले नवाचार के बढ़ते योगदान को उजागर करेगा।
प्रधान ने कहा कि भारत इनोवेट्स, इनक्यूबेटर इनोवेशन ब्रिज और इंडस्ट्री इनोवेशन ब्रिज के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव के लिए सुनियोजित मार्ग तैयार कर रहा है, जो भारतीय नवप्रवर्तकों को अग्रणी वैश्विक संस्थानों, निगमों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों से जोड़ता है। इस संदर्भ में, उन्होंने बताया कि फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ नवाचार-केंद्रित 28 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप एजेंडा को आगे बढ़ाने में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों से उभरने वाले शोध-आधारित स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाकर डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने में मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रोफेसर सूद ने आगे कहा कि भारत को न केवल डीप-टेक कंपनियां बनानी चाहिए, बल्कि डीप-टेक नवाचार की एक गहरी संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए।
इस अवसर पर जारी किए गए दो रणनीतिक दस्तावेजों में भारत इनोवेट्स स्टार्टअप कंपेंडियम शामिल है, जिसमें देश भर से चयनित 120 उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स का विवरण दिया गया है। ये दस्तावेज स्टार्टअप्स को भविष्य में विकास के अवसरों की पहचान करने में मदद करने के लिए क्षेत्रवार बाजार की जानकारी, प्रौद्योगिकी रुझान, वैश्विक अवसरों का मानचित्रण और रणनीतिक जुड़ाव के मार्ग प्रदान करते हैं। दूसरा रणनीतिक दस्तावेज आईआईटी, आईआईएससी और अन्य प्रमुख संस्थानों सहित अग्रणी उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की लगभग 50 अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं को प्रदर्शित करता है।
भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तत्वावधान में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय 14-16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर में भारत इनोवेट्स 2026 का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन 3,000 से अधिक उद्यमों में से चयनित 120 विशिष्ट डीप टेक नवोन्मेषकों को एक साथ लाता है, जो अंतरिक्ष, रक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की अनुसंधान क्षमताओं को उजागर करता है। इस आयोजन की एक प्रमुख विशेषता आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास जैसे 15 प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों की भागीदारी है। इस समूह के पास 1,500 से अधिक पेटेंट हैं और इन्होंने सामूहिक रूप से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की धनराशि जुटाई है, जिसमें दो सूचीबद्ध कंपनियां, आइडियाफोर्ज और एथर एनर्जी शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद से बड़ी उछाल के साथ हरे निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स में 967 अंकों की बढ़त

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों से उपजे सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ हरे निशान में खुला।
इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी50 और सेंसेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,832.55 से 876.72 अंक उछलकर 74,709.27 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,161.60 से 250.95 अंक उछलकर 23,412.55 पर खुला।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9:18 बजे) सेंसेक्स 967.34 अंकों यानी 1.31 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,799.89 पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं निफ्टी50 275.85 अंक या 1.19 प्रतिशत बढ़कर 23,437.45 पर पहुंच गया।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.38 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 1.61 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके साथ ही, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.37 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 1.30 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.23 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 1.15 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.14 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 1.13 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।
निफ्टी50 इंडेक्स में इंडिगो, इटरनल, लार्सन एंड टुब्रो, श्रीराम फाइनेंस और बजाज फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, हिंडाल्को, डॉ. रेड्डी, बजाज-ऑटो और कोल इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ एक बड़ा समझौता कर लिया है और अब सिर्फ दस्तावेज को अंतिम रूप देना बाकी है। समझौते पर अगले कुछ दिनों में हस्ताक्षर हो जाएंगे और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल जाएगा।
इस खबर से बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट पर विराम लग गया और बाजार बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव को लेकर चिंताओं में कमी आने से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे सकारात्मक संकेतों और प्रमुख कमोडिटी कीमतों में स्थिरता से बाजार की धारणा मजबूत बनी हुई है।
एक्सपर्ट के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का दायरा मजबूत सपोर्ट बना हुआ है, जबकि 23,600 से 23,650 के बीच अहम रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बीते कारोबारी दिन 11 जून को लगातार 12वें कारोबारी सत्र में बिकवाली जारी रखी और करीब 1,987 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। हालांकि हाल के दिनों में बिकवाली की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है, जिससे विदेशी निवेशकों के दबाव में कमी के संकेत मिल रहे हैं।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार बाजार को मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने लगातार 18वें सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 4,224 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे। डीआईआई की मजबूत खरीदारी ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
एक्सपर्ट ने कहा कि यदि सूचकांक इस रेजिस्टेंस को पार कर मजबूती बनाए रखता है, तो बाजार में आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं निचले स्तरों पर 23,000 का दायरा फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-बुल्गारिया संबंधों को आधुनिक और आगे की सोच वाली साझेदारी में बदलने की जरूरत: जयशंकर

सोफिया, 11 जून: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को भारत और बुल्गारिया के रिश्तों पर कहा कि इन संबंधों को अब एक आधुनिक और भविष्य के लिए अहम साझेदारी में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का राजनीतिक नजरिया एक जैसा है।
सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलीस्लावा पेट्रोवा के साथ बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने बताया, “आज हमारी बातचीत तीन हिस्सों में रही। पहला, भारत और बुल्गारिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग। दूसरा, भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी। तीसरा, हम दोनों देश मिलकर दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं।”
भारत-बुल्गारिया संबंधों पर उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते बहुत पुराने और अच्छे हैं। अब हमारा काम इन्हें एक आधुनिक और आगे की सोच वाले संबंध में बदलना है। राजनीतिक रूप से, हमारी बातचीत में यह साफ हुआ कि हमारी सोच और नजरिया काफी हद तक एक जैसे हैं।”
इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।
भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने हाल ही में हुए समझौतों का जिक्र किया, जिनमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क शामिल हैं। ये सभी समझौते इस साल जनवरी में हुए थे। उन्होंने कहा कि इनसे दोनों पक्षों के बीच सहयोग काफी बढ़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया काफी अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है, इसलिए विवादों को लड़ाई-झगड़े के बजाय बातचीत से हल करना जरूरी है।
जयशंकर ने कहा, “हम सभी मानते हैं कि दुनिया इस समय बहुत ज्यादा अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। इसमें कई बड़े संघर्ष, आर्थिक सुरक्षा की चिंताएं, हाल में महामारी का अनुभव और आतंकवाद का लगातार खतरा शामिल है। भारत का इन सभी मुद्दों पर साफ रुख है। हम मानते हैं कि यह युद्ध का समय नहीं है।”
उन्होंने कहा, “संघर्षों का समाधान सिर्फ बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। आर्थिक जोखिमों के मामले में समाधान सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाना है। यह भी बहुत जरूरी है कि समुद्री व्यापार को रोका या खतरे में न डाला जाए।”
विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर भारत के लगातार जोर देने की बात भी कही, खासकर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा के मुद्दों पर।
उन्होंने कहा, “ग्लोबल साउथ की ओर से भारत ने बार-बार ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कोविड के समय ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है और यह भारत और बुल्गारिया दोनों ने देखा।”
जयशंकर ने आतंकवाद पर सख्त रुख की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इस पर पूरी दुनिया में ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर भारत और बुल्गारिया के बीच काफी सहमति बनी है।
उन्होंने अंत में कहा, “आतंकवाद के मामले में दुनिया को साफ तौर पर जीरो टॉलरेंस अपनाना चाहिए। इन सभी विषयों पर भारत और बुल्गारिया की सोच काफी हद तक एक जैसी रही है।”
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