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हर साल रामनवमी पर भगवान सूर्य करेंगे श्रीराम का अभिषेक, दोपहर 12 बजे दमकेगा प्रभु का ललाट

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अयोध्या, 6 जनवरी। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या की दिव्यता, भव्यता और नव्यता की झलक दिखने लगी है। ना केवल नगर में हो रहे विकास कार्यों में, बल्कि भगवान राम के भव्य मंदिर और यहां तक कि उनकी मूर्ति में भी अलौकिकता के दर्शन होंगे। मंदिर ट्रस्ट की ओर से भी इस पर अपनी मुहर लगा दी गई है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया है कि प्रभु श्रीराम की मूर्ति को इस प्रकार से बनाया गया है कि प्रत्येक वर्ष रामनवमी को भगवान सूर्य स्वयं श्रीराम का अभिषेक करेंगे। भारत के प्रख्यात अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की सलाह पर मूर्ति की लंबाई और उसे स्थापित करने की ऊंचाई को इस प्रकार से रखा गया है कि हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें प्रभु श्रीराम के ललाट पर पड़ेंगी।

ट्रस्ट की ओर से बताया गया है कि तीन शिल्पकारों ने प्रभु श्रीराम की मूर्ति का निर्माण अलग-अलग किया, जिसमें से एक मूर्ति को प्रभु प्रेरणा से चुना गया है। चुनी गई मूर्ति की पैर से लेकर ललाट तक की लंबाई 51 इंच है और इसका वजन डेढ़ टन है। मूर्ति की सौम्यता का बखान करते हुए कहा गया कि श्यामल रंग के पत्थर से निर्मित मूर्ति में ना केवल भगवान विष्णु की दिव्यता और एक राजपुत्र की कांति है बल्कि उसमें 5 साल के बच्चे की मासूमियत भी है।

चेहरे की कोमलता, आंखों की दृष्टि, मुस्कान, शरीर आदि को ध्यान में रखते हुए मूर्ति का चयन किया गया है। 51 इंच ऊंची मूर्ति के ऊपर मस्तक, मुकुट और आभामंडल को भी बारीकी से तैयार किया गया है। ट्रस्ट के अनुसार मूर्ति की प्रतिष्ठा पूजा विधि को 16 जनवरी से प्रारंभ कर दिया जाएगा। इसके अलावा 18 जनवरी को गर्भगृह में प्रभु श्रीराम को आसन पर स्थापित कर दिया जाएगा। प्रभु श्रीराम की मूर्ति की एक विशेषता यह भी है कि इसे अगर जल और दूध से स्नान कराया जाएगा तो इसका नकारात्मक प्रभाव पत्थर पर नहीं पड़ेगा। साथ ही अगर कोई उस जल या दूध का आचमन करता है तो शरीर पर भी इसका दुष्प्रभाव नहीं होगा।

राममंदिर परिसर में ही महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और देवी अहिल्या का भी मंदिर बनाया जाएगा। इसके अलावा जटायु की प्रतिमा को यहां पहले से ही स्थापित कर दिया गया है। ट्रस्ट के अनुसार श्रीराम का मंदिर अद्भुत होगा। हालांकि, ये अभूतपूर्व नहीं होगा, क्योंकि दक्षिण भारत में ऐसे मंदिर हैं, मगर उत्तर भारत में बीते 300 साल में ऐसा कोई मंदिर निर्मित नहीं हुआ है। निर्माण करने वाले इंजीनियर भी ये मानते हैं।

पत्थर की आयु एक हजार साल होती है। धूप हवा पानी का प्रभाव पत्थर पर पड़ता है। जमीन के संपर्क में होने के कारण पत्थर नमी सोखता है। लेकिन, यहां पर पत्थर नमी नहीं सोख पाएगा, क्योंकि नीचे ग्रेनाइट लगाया गया है। इसमें लोहे का भी इस्तेमाल नहीं हुआ है, क्योंकि लोहा ताकत को कमजोर कर देता है। जमीन के नीचे एक ग्राम भी लोहा नहीं लगा है। इस प्रकार की रचना की गई है कि जैसे-जैसे आयु बढ़ेगी जमीन के नीचे एक बहुत ताकतवर चट्टान तैयार हो जाएगी। जमीन के ऊपर किसी भी प्रकार के कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है, क्योंकि, कंक्रीट की आयु 150 साल से ज्यादा नहीं होती। हर कार्य को करते हुए आयु का विचार किया गया है।

ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि 22 जनवरी को दिन में देशभर के पांच लाख मंदिरों में भव्य पूजन अर्चन के साथ ही उल्लास मनाया जाएगा तथा शाम के समय हर सनातनी अपने-अपने घर के बाहर कम से कम पांच दीपक अवश्य जलाएं। साथ ही 26 जनवरी के बाद ही लोग मंदिर में दर्शन के लिए आएं। ट्रस्ट के महासचिव ने आश्वस्त किया कि जब तक सभी लोग दर्शन नहीं कर लेंगे, तब तक मंदिर के कपाट खुले रहेंगे, फिर चाहे रात के 12 ही क्यों न बज जाएं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-बुल्गारिया संबंधों को आधुनिक और आगे की सोच वाली साझेदारी में बदलने की जरूरत: जयशंकर

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सोफिया, 11 जून: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को भारत और बुल्गारिया के रिश्तों पर कहा कि इन संबंधों को अब एक आधुनिक और भविष्य के लिए अहम साझेदारी में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों का राजनीतिक नजरिया एक जैसा है।

सोफिया में बुल्गारिया की विदेश मंत्री वेलीस्लावा पेट्रोवा के साथ बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने बताया, “आज हमारी बातचीत तीन हिस्सों में रही। पहला, भारत और बुल्गारिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग। दूसरा, भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी। तीसरा, हम दोनों देश मिलकर दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं।”

भारत-बुल्गारिया संबंधों पर उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते बहुत पुराने और अच्छे हैं। अब हमारा काम इन्हें एक आधुनिक और आगे की सोच वाले संबंध में बदलना है। राजनीतिक रूप से, हमारी बातचीत में यह साफ हुआ कि हमारी सोच और नजरिया काफी हद तक एक जैसे हैं।”

इस यात्रा के दौरान जयशंकर ने बुल्गारिया के प्रधानमंत्री रुमेन रादेव से भी मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने हाल ही में हुए समझौतों का जिक्र किया, जिनमें फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क शामिल हैं। ये सभी समझौते इस साल जनवरी में हुए थे। उन्होंने कहा कि इनसे दोनों पक्षों के बीच सहयोग काफी बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया काफी अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है, इसलिए विवादों को लड़ाई-झगड़े के बजाय बातचीत से हल करना जरूरी है।

जयशंकर ने कहा, “हम सभी मानते हैं कि दुनिया इस समय बहुत ज्यादा अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। इसमें कई बड़े संघर्ष, आर्थिक सुरक्षा की चिंताएं, हाल में महामारी का अनुभव और आतंकवाद का लगातार खतरा शामिल है। भारत का इन सभी मुद्दों पर साफ रुख है। हम मानते हैं कि यह युद्ध का समय नहीं है।”

उन्होंने कहा, “संघर्षों का समाधान सिर्फ बातचीत और कूटनीति से ही हो सकता है। आर्थिक जोखिमों के मामले में समाधान सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाना है। यह भी बहुत जरूरी है कि समुद्री व्यापार को रोका या खतरे में न डाला जाए।”

विदेश मंत्री ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं पर भारत के लगातार जोर देने की बात भी कही, खासकर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा के मुद्दों पर।

उन्होंने कहा, “ग्लोबल साउथ की ओर से भारत ने बार-बार ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है। स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में कोविड के समय ने दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितना जरूरी है और यह भारत और बुल्गारिया दोनों ने देखा।”

जयशंकर ने आतंकवाद पर सख्त रुख की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि इस पर पूरी दुनिया में ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों पर भारत और बुल्गारिया के बीच काफी सहमति बनी है।

उन्होंने अंत में कहा, “आतंकवाद के मामले में दुनिया को साफ तौर पर जीरो टॉलरेंस अपनाना चाहिए। इन सभी विषयों पर भारत और बुल्गारिया की सोच काफी हद तक एक जैसी रही है।”

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राजनीति

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना महिला सशक्तीकरण के दावों के विपरीत : संजय राउत

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मुंबई, 10 जून: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मीनाक्षी नटराजन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके बावजूद भी उनका नामांकन रद्द कर दिया गया है। आखिर यह क्या है? एक तरफ आप महिला शक्ति वंदन अधिनियम लाकर यह दावा करते हैं कि आपके लिए महिला सशक्तीकरण मायने रखता है, तो वहीं दूसरी तरफ आप एक महिला का नामांकन रद्द कर देते हैं। आखिर क्यों? आपने ऐसा करके एक महिला का अपमान किया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, उन्होंने मीनाक्षी नटराजन पर दर्ज केस का भी जिक्र किया। संजय राउत ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के ऊपर कोई भी केस दर्ज नहीं है। मैंने खुद उस पूरी वस्तुस्थिति को समझने का प्रयास किया है। लिहाजा मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है, उन्हें सिर्फ एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। अब इन लोगों के लिए नियम कायदे कानून भी अलग हो चुके हैं। एक नारी वंदना और पुरुष वंदना। परमल नाथवानी झारखंड से बीजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके नामांकन पत्र में कुछ खामियां थीं। लेकिन, वहां के रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें अपनी कमियों को दूर करने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। लेकिन, यह नियम और कानून नाथवानी के मामले में लागू नहीं किया गया है, बल्कि उनका नामांकन पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। आखिर यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? ये लोकतंत्र की हत्या है।

इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल पूरे होने के मौके पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के पूरे 12 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन, इन सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गया है, जब प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने विसंगति पूर्ण व्यवहार न किया हो।

उन्होंने कहा कि यह लोग महिला राजनेता को राजनीति में आने से रोक रहे हैं। सुनियोजित तरीके से उनका नामांकन खारिज कर रहे हैं, ताकि उन्हें राज्यसभा में आने से रोका जा सके और दूसरी तरफ यही लोग महिला मतदाताओं को रिझाने के मकसद से महिला शक्ति वंदन अधिनियम ला रहे हैं। आखिर ऐसी स्थिति में एक महिला को न्याय कैसे मिलेगा। अब ऐसे में सवाल यही है कि क्या हम चीफ जस्टिस से न्याय की उम्मीद कर सकते हैं। मौजूदा समय में हमारे न्यायतंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करके रख दिया गया है।

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राजनीति

योगी सरकार का मिशन शक्ति मॉडल: बदली बेटियों की तस्वीर, बढ़ा सुरक्षा और स्वाभिमान का दायरा

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लखनऊ, 9 जून: महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर वर्ष 2017 से पहले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहने वाला उत्तर प्रदेश अब महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मिशन शक्ति अभियान ने प्रदेश में नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई दिशा दी है। आज मिशन शक्ति अभियान सामाजिक परिवर्तन और महिला सशक्तीकरण का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है।

योगी सरकार ने महिला सशक्तीकरण की अवधारणा को नई दिशा देते हुए सुरक्षा, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व विकास को एक सूत्र में पिरोया। मिशन शक्ति के माध्यम से प्रदेश की लाखों बेटियों को न केवल सुरक्षित वातावरण मिला, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने, नेतृत्व करने और अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के अवसर भी प्राप्त हुए। यही कारण है कि आज उत्तर प्रदेश की बेटियां आत्मविश्वास, स्वाभिमान और सामर्थ्य के साथ नए आयाम स्थापित कर रही हैं तथा मिशन शक्ति महिला सशक्तीकरण के प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है।

मिशन शक्ति के अंतर्गत प्रदेश के विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में व्यापक स्तर पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए गए। 10 लाख से अधिक बालिकाओं को जूडो-कराटे एवं सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्रयासों ने छात्राओं को शारीरिक रूप से सक्षम बनाया। उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा बोध भी विकसित किया। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियानों ने हेल्पलाइन सेवाओं, साइबर सुरक्षा, महिला अधिकारों और कानूनी संरक्षण संबंधी जानकारी को जन-जन तक पहुंचाया। इससे महिलाओं और बालिकाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

योगी सरकार ने बालिकाओं को नेतृत्व के अवसर प्रदान करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की। ‘एक दिन की अधिकारी’ कार्यक्रम के माध्यम से 89 हजार से अधिक बालिकाओं को प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव कराया गया। विद्यालय, ब्लॉक, तहसील और जिला स्तर पर अधिकारियों की भूमिका निभाकर छात्राओं ने शासन-प्रशासन की कार्य-प्रणाली को समझा और नेतृत्व कौशल विकसित किया। यह पहल बेटियों को सपने देखने की प्रेरणा देने के साथ-साथ उन्हें उन सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करती है।

मिशन शक्ति के अंतर्गत आयोजित मीना मंच, मीना दिवस, जनसंवाद, रैलियों और नुक्कड़ नाटकों ने महिला सशक्तीकरण के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया। लाखों छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अभिभावकों की सहभागिता ने बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को सामाजिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनाया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लैंगिक समानता, बाल विवाह निषेध, महिला अधिकार, साइबर सुरक्षा और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता पैदा हुई है।

मिशन शक्ति ने महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया। हजारों बालिकाओं को डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता कार्यक्रमों से जोड़कर आधुनिक तकनीक और आर्थिक प्रबंधन की जानकारी प्रदान की गई। बैंक भ्रमण और वित्तीय जागरूकता कार्यक्रमों ने छात्राओं को बचत, बैंकिंग और आर्थिक निर्णयों की समझ विकसित करने में मदद की। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

मिशन शक्ति का सबसे बड़ा प्रभाव सामाजिक सोच में आए परिवर्तन के रूप में दिखाई दे रहा है। प्रदेश में बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति सकारात्मक माहौल विकसित हुआ है। परिवारों और समुदायों में बालिकाओं को लेकर दृष्टिकोण में बदलाव आया है तथा महिलाओं की भागीदारी सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में बढ़ी है। महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और मिशन शक्ति जैसे अभियानों ने महिलाओं में विश्वास का वातावरण तैयार किया है। आज प्रदेश की बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, विज्ञान और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहीं हैं।

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