राजनीति
मणिपुर पुलिस पर हमला: तलाशी अभियान जारी, केंद्रीय नेतृत्व को स्थिति की जानकारी देगा भाजपा का प्रतिनिधिमंडल
सुरक्षा बलों ने सोमवार को संदिग्ध कुकी उग्रवादियों को पकड़ने के लिए अपनी तलाश जारी रखी, जिन्होंने शनिवार और रविवार को मणिपुर पुलिस कमांडो टीम पर हमला किया था, जिसमें पांच कर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी बलों पर हमलों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि राज्य की मौजूदा स्थिति से केंद्रीय नेताओं को अवगत कराने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही दिल्ली जाएगा।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि म्यांमार और राज्य के तेंग्नौपाल जिले के मोरेह और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है और राज्य और केंद्रीय बलों ने संदिग्ध कुकी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अपना तलाशी अभियान जारी रखा है।
अधिकारी ने कहा कि घायल कर्मियों – दिलियांगम कामसन, एम. प्रियोकुमार, एन. बोरजाओ, एम. सुनील और पोन्खालुंग – को मोरेह में असम राइफल्स शिविर में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर इम्फाल में क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान लाया गया।
कई आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि शनिवार से मोरेह इलाके में हमलावरों ने कुकी-ज़ो आदिवासियों के कई घरों को जला दिया है।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने एक्स पर अपना बयान पोस्ट करते हुए कहा, “हाल के दिनों में राज्य बलों के खिलाफ अभूतपूर्व हमले एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा बन गए हैं। राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बल सक्रिय रूप से स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, लेकिन संयुक्त सुरक्षा बलों के लिए इन तत्वों से निपटने के लिए एक मजबूत और व्यापक दृष्टिकोण अपनाना भी जरूरी है, जो लगातार मणिपुर राज्य को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।”
सिंह ने कहा, “भाजपा मणिपुर प्रदेश की अध्यक्ष ए. शारदा देवी, माननीय मंत्रियों, माननीय विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल हुआ, जिसमें मणिपुर को अस्थिर करने पर तुले अराजक तत्वों से निपटने के लिए कड़े दृष्टिकोण पर विचार-विमर्श किया गया।”
उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही केंद्रीय नेताओं से मिलने दिल्ली भी जायेगा।
इस बीच, मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके और मुख्यमंत्री ने राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सामूहिक प्रयास की अपील करते हुए नए साल 2024 पर मणिपुर के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं।
राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा, “नए साल का दिन नए संकल्प लेने का है। जैसा कि हम 2024 में प्रवेश कर रहे हैं, आइए हम सभी आने वाले वर्ष के दौरान मणिपुर के सभी हिस्सों में सद्भाव और पूर्ण शांति बनाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लें।”
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से, पिछले साल तीन मई को हुए अभूतपूर्व जातीय संघर्ष के कारण मणिपुर पिछले सात महीने से अधिक समय से कठिन स्थिति से गुजर रहा है।
राज्यपाल ने कामना की, “आइए हम सभी शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखने के लिए सामान्य स्थिति लाने के लिए इस मुद्दे को सामूहिक रूप से हल करने का प्रयास करें।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आठ महीने तक चली जातीय हिंसा ने विभिन्न समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के ताने-बाने को बाधित कर दिया है, जबकि विकास कार्य और आर्थिक गतिविधियां धीमी हो गई हैं। यह राज्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपने नए साल के संदेश में कहा कि पिछले लगभग आठ महीने से, मणिपुर अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, जिसमें कई कीमती जिंदगियां खो गई हैं और कई लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं।
सिंह ने कहा, “अभूतपूर्व जातीय संघर्ष ने, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, राज्य में रहने वाले सभी लोगों को प्रभावित किया है। अब समय आ गया है कि हम एक बेहतर मणिपुर की ओर अपनी यात्रा में बाधाओं और बाधाओं को दूर करने के लिए एकजुट हों, जहां इसके सभी लोग शांति और सौहार्दपूर्ण ढंग से एक साथ रहें और एक विकसित राज्य की सुविधाओं तक पहुंच प्राप्त करें।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नेपाल: पांच महीने बाद स्वदेश लौटे पूर्व पीएम देउबा

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा गुरुवार को स्वदेश लौटे। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। पांच महीने पहले वे सिंगापुर में “मेडिकल चेक-अप” कराने गए थे।
थाईलैंड के रास्ते एयरपोर्ट पहुंचने पर पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों में शामिल तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का, कृष्ण प्रसाद सितौला, प्रकाश मान सिंह, बिमलेंद्र निधि और प्रकाश शरण महत समेत कई नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
समर्थकों ने देउबा के समर्थन में नारे लगाए। जनवरी में विवादित विशेष आम अधिवेशन के जरिए उन्हें पार्टी नेतृत्व पद से हटा दिया था।
देउबा 25 फरवरी को देश छोड़कर सिंगापुर चले गए थे। खबरों के अनुसार वो “मेडिकल चेक-अप” के लिए गए थे, और महीनों तक विदेश में रहे क्योंकि पिछले साल सितंबर में जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था। इस दौरान भारी मात्रा में कैश जलाया गया था। इसके बाद से ही उन पर मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच रही है।
नेपाली अधिकारियों ने चल रही जांच के तहत पहले ही उनके एसेट्स और बैंक अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद, मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अनुरोध पर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किए गए थे।
नेपाली सरकार ने इंटरपोल के जरिए उनके नाम पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की नाकाम कोशिश की थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया था। इसके बाद ही शायद देउबा ने घर लौटने का फैसला किया।
उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनकी पार्टी में संभावित फूट पड़ सकती है, और उनका गुट शुक्रवार को काठमांडू में कैडर की एक राष्ट्रीय सभा करने की घोषणा कर चुका है।
पार्टी के पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक करने की कोशिशों में जुटे हैं। इस गुट को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट विशेष आम अधिवेशन को अमान्य कर देगा। उस अधिवेशन में गगन थापा को पार्टी की नई केंद्रीय समिति का अध्यक्ष चुना गया था।
हालांकि इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने विशेष आम अधिवेशन को मान्यता दे दी थी, जिससे इस पुरानी पार्टी को थापा के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई थी।
इसके बाद 5 मार्च के चुनावों में पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, जिससे देउबा गुट ने थापा के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की थी।
इस गुट ने सुप्रीम कोर्ट के 17 अप्रैल के फैसले की समीक्षा की अपील की थी। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिटीशन को मंजूरी दे दी, और केस को तीन जजों की बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। नई सुनवाई का नतीजा ही पार्टी का भविष्य तय करेगा।
हालांकि उनकी वापसी से उनके गुट में जोश आ सकता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार उनके और उनकी पत्नी, पूर्व विदेश मंत्री आरजू देउबा, जो उनके साथ विदेश गई थीं, के खिलाफ कैसा बर्ताव करेगी।
उनकी पत्नी और बेटा, जयबीर स्वदेश नहीं लौटे हैं। देउबा और उनकी पत्नी, जिन्हें पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बुरी तरह पीटा था, मेडिकल इलाज का हवाला देकर देश छोड़कर चले गए थे लेकिन उनके इतने लंबे समय तक विदेश में रहने का कारण साफ नहीं हुआ।
इस जोड़े ने विदेश में अपनी यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं दी है, न ही उन्होंने यह बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री किन बीमारियों का इलाज करा रहे थे।
इस दौरान, माना जाता है कि वे सिंगापुर से हांगकांग चले गए थे। देउबा परिवार के हांगकांग में घूमते हुए वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, हालांकि जोड़े ने कभी भी ये साफतौर पर नहीं माना कि वो हांगकांग में थे।
राजनीति
कर्नाटक बंद के बीच हिरासत में लिए गए कन्नड़ कार्यकर्ता, स्कूल और बाजार खुले

कर्नाटक बंद का आह्वान कन्नड और किसान समर्थित संगठनों की ओर से किया गया है। यह बंद तमिलनाडु की ओर से कावेरी जल जारी किए जाने को लेकर बुलाया गया है। इस बंद को लेकर गुरुवार को राज्यभर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है।
कन्नड कार्यकर्ताओं पुलिस की एहतियाती कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया गया। वहीं स्कूल, कॉलेज, दुकान, बाजार और व्यावसायिक संस्थान सामान्य रूप से चलते नजर आए।
यह बंद मुख्य रूप से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति की ओर से बुलाई गई है। इस बंद का मुख्य उद्देश्य यह है कि तमिलनाडु कावेरी का जल जारी करें। इस दौरान पुलिस ने राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करके रखी और यह सुनिश्चित किया कि राज्यभर में शांति व्यवस्था बनी रहे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कोई बंद को प्रभावी करने के लिए बलपूर्वक रास्ते का इस्तेमाल नहीं करें।
कन्नड़ संगठनों के महासंघ के अध्यक्ष (जिसे कन्नड़ ओक्कूटा के नाम से भी जाना जाता है) और कन्नड़ चालुवली वटल पक्ष के अध्यक्ष वटल नागराज ने जैसे बंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, तो उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इस बीच कन्नड और किसान संगठनों से जुड़े कई नेता मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात करने वाले थे। इस मुलाकात के दौरान इस संगठन से जुड़े नेता मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने वाले हैं। यह ज्ञापन मुख्य रूप से तमिलनाडु की ओर कावेरी नदी पानी छोड़े जाने के संबंध में है।
बेंगलुरू में स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से चलते रहे। जहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट बड़ी संख्या में क्लास अटेंड करते हुए नजर आए। राज्यभर में किसी भी शिक्षण संस्थान में बंद का ऐलान नहीं किया गया। बच्चों के माता पिता ने यह फैसला किया है कि किसी भी सूरत में बंद का समर्थन नहीं किया जाए, क्योंकि बच्चों की परीक्षाएं नजदीक आ रही है। ऐसी स्थिति में उनके लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो परीक्षा की तैयारी पूरी ईमानदारी से करें।
वहीं, बेंगलुरू में सार्वजनिक वाहनों पर भी बंद का कोई असर नहीं पड़ा। सड़कों पर बड़ी संख्या में सार्वजनिक वाहन चलते नजर आए। वहीं दुकान, बाजार और अन्य व्यवसायिक संस्थान खुले रहे। उधर, कई जिलों में लोग बंद का समर्थन करते हुए भी नजर आए।
हालांकि, ऐहतियात बरतते हुए कर्नाटक से तमिलनाडु के लिए बस की सेवा को निलंबित कर दिया गया। इससे पड़ोसी राज्यों के लोगों को सफर करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
रामनगर के इज़ुरु सर्कल में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। इजरू सर्कल को प्रमुख जंक्शन के रूप में जाना जाता है। करुणाडु सेना और कर्नाटक रक्षणा वेदिके (प्रवीण शेट्टी गुट) के कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु की तरफ से कावेरी नदी के पानी को जारी करने को लेकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तन लेते हुए कावेरी नदी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से यह अपील की है कि वो अपना ध्यान पानी की किल्लत पर ध्यान दें। मौजूदा समय में कर्नाटक के कई हिस्सों में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।
हालांकि कर्नाटक में बंद के ऐलान कई बावजूद भी कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन सुचारू रूप से चल रहा है। बंद की वजह से प्रशासन की तरफ से सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा-व्यवस्था दुरूस्त कर दी गई है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राज्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति देखने को नहीं मिले।
राजनीति
खान एवं खनिज संशोधन विधेयक राज्यसभा में पारित, मानसून सत्र का समापन

खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 राज्यसभा में पारित हो गया। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में पेश किया। विधेयक पेश किए जाने और चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन में जमकर नारेबाजी की। वहीं बिल पारित होने के साथ ही मानसून सत्र का भी समापन हो गया।
वहीं चर्चा का जवाब देते हुए जी. किशन रेड्डी ने कहा कि खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि तेल के क्षेत्र में भी राज्यों को मिलने वाले राजस्व में काफी वृद्धि हुई है। रेड्डी ने कहा कि पहले राज्यों को करीब 50 प्रतिशत राजस्व मिलता था, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद राज्यों को करीब 96 प्रतिशत राजस्व मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार को केवल 4 प्रतिशत हिस्सा मिलता है।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को राज्यों के हित की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मोदी सरकार राज्यों के हित के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों के लिए लगातार काम कर रही है।
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कराधान किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साधन है। यदि संसद कराधान से जुड़े प्रावधानों पर सहमति नहीं बनाएगी तो देश के खनन और खनिज क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा। इस विधेयक का उद्देश्य खनिज क्षेत्र का विकास करना और राज्यों के राजस्व को बढ़ाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधेयक के लागू होने से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और खनिज क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा, ”मेरा विश्वास है कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और देश को इसका लाभ मिलेगा।”
इससे पहले राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को बताया कि उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की ओर से लोकसभा से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ था। इस अनुरोध में कहा गया था कि इसके लिए शून्यकाल में उठाए जाने वाले विषयों और प्रश्नकाल को स्थगित कर विधेयक को तुरंत लिया जाए।
विधेयक के महत्व और इस तथ्य को देखते हुए कि मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल को स्थगित किया गया ताकि सदन विधेयक पर तत्काल विचार कर सके। वहीं पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए मान लिया गया।
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