राजनीति
कांग्रेस में शामिल होने के एक दिन बाद, अभिनेत्री विजयशांति बनीं तेलंगाना चुनाव समन्वयक
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव के लिए एक पखवाड़े से भी कम समय बचा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को अभिनेता से नेता बनीं विजयशांति को अभियान और योजना समिति में पार्टी का मुख्य समन्वयक नियुक्त किया।
एक आधिकारिक संचार में, कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष ने तेलंगाना के आगामी विधानसभा चुनाव – 2023 के लिए अभियान और योजना समिति के मुख्य समन्वयक के रूप में विजयशांति की नियुक्ति के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी है। ”
विजयशांति ने इस सप्ताह की शुरुआत में सत्तारूढ़ बीआरएस छोड़ दिया था और शुक्रवार को खड़गे की उपस्थिति में तेलंगाना में कांग्रेस में शामिल हो गईं।
खड़गे ने समरसिम्हा रेड्डी, पुष्पलीला, मल्लू रवि, एम कोडंडा रेड्डी, वेम नरेंद्र रेड्डी, एरावती अनिल, रामलू नाइक, पिटला नागेश्वर राव, ओबेदुल्ला कोथवाल, रमेश मुदिराज, पारिजात रेड्डी, सिद्धेश्वर, राममूर्ति नाइक, अली बिन इब्राहिम मस्काथी और दीपक जॉन को भी संयोजक के रूप में.नियुक्त किया।
119 सदस्यीय विधानसभा के लिए 30 नवंबर को मतदान होना है।
कांग्रेस ने शुक्रवार को दक्षिणी राज्य के लिए अपना घोषणापत्र भी जारी किया, दसमें मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर दैनिक ‘प्रजा दरबार’, 3 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त फसल ऋण, कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में अनियमितताओं और अन्य भ्रष्टाचार की न्यायिक जांच का वादा किया गया।
सभी प्रमुख फसलों के लिए एक व्यापक फसल बीमा योजना, हिंदुओं को इंदिराम्मा उपहार के रूप में 1,00,000 रुपये और 10 ग्राम सोना और अल्पसंख्यक लड़कियों को उनकी शादी के समय 1,60,000 रुपये, प्रत्येक को 12,000 रुपये प्रति वर्ष की वित्तीय सहायता ऑटो रिक्शा चालक और असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा अन्य प्रमुख चुनावी वादों में शामिल हैं।
इसके अलावा, कांग्रेस ने धरणी पोर्टल के स्थान पर “भूमाता” पोर्टल का वादा किया है और आश्वासन दिया है कि उन सभी किसानों को न्याय मिलेगा जिन्होंने अपनी भूमि का अधिकार खो दिया है। दो महीने पहले घोषित छह गारंटियों के अलावा, पार्टी ने 30 नवंबर के चुनावों के लिए घोषणापत्र में विभिन्न वर्गों के लिए कई वादे शामिल किए हैं।
‘अभय हस्तम’ शीर्षक से, 42 पन्नों का घोषणापत्र शुक्रवार को कांग्रेस प्रमुख द्वारा तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) के अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी, कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता मल्लू भट्टी विक्रमार्क और अन्य नेताओं की उपस्थिति में जारी किया गया।
राजनीति
राहुल गांधी के परिवार पर विवादित टिप्पणी करना पड़ा भारी, कर्नाटक के भाजपा विधायक पर एफआईआर दर्ज

कर्नाटक में भाजपा के विधायक यशपाल सुवर्णा की एक विवादित टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के परिवार को लेकर दिए गए बयान के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
बुधवार को उडुपी टाउन पुलिस स्टेशन में यह मामला उडुपी जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार कोडावूर की शिकायत पर दर्ज किया गया। पुलिस ने विधायक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 57, 192, 196(2), 352, 353(2) और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया है।
जानकारी के मुताबिक, उडुपी में भाजपा द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यशपाल सुवर्णा ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर आप लोग ऐसे ही नाटक करते रहे, तो जैसे 1992 में हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हमारी भावनाएं आहत होने पर बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था, उसी तरह कांग्रेस का वंश और राहुल गांधी का परिवार भी खत्म कर दिया जाएगा।”
इस बयान के सामने आते ही कर्नाटक की राजनीति गरमा गई। कांग्रेस ने भाजपा पर नफरत फैलाने वाली भाषा और धमकी की राजनीति करने का आरोप लगाया। विधायक के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी।
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के कार्यकारी अध्यक्ष और एमएलसी मंजूनाथ भंडारी ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यशपाल सुवर्णा की टिप्पणी को ‘घृणित, अपमानजनक और भड़काऊ’ बताया और कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले किसी जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह की भाषा उचित नहीं है।
मंजूनाथ भंडारी ने आरोप लगाया कि भाजपा नीट पेपर लीक विवाद और उसे लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले कर रही है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद कभी भी मानहानि, नफरत फैलाने वाले भाषण या धमकी का आधार नहीं बन सकते। इस तरह की टिप्पणी से खासकर तटीय कर्नाटक में सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को राज्य के गृह मंत्री के सामने उठाकर जांच में तेजी लाने की मांग करेंगे।
महाराष्ट्र
‘तीन साल में 1.21 लाख से ज्यादा एमएसएमई बंद’, सामना में शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर साधा निशाना

शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लोकसभा में पेश केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं। इसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां चली गईं।
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय लिखा, “पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं और नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहां इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
संपादकीय के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया। पार्टी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।
संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
संपादकीय में कहा गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु सरकार मिड-डे मील में हर हफ्ते ‘चिकन बिरयानी’ शामिल करने पर कर रही विचार

तमिलनाडु सरकार राज्य की प्रमुख मिड-डे मील योजना के तहत सफ्ताह में एक बार ‘चिकन बिरयानी’ शुरू करने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद पोषण में सुधार करना और स्कूली खाने को छात्रों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
यह प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह देश के सबसे पुराने स्कूल न्यूट्रिशन प्रोग्राम में एक अहम बदलाव होगा।
अधिकारियों ने बताया कि कोई भी फैसला सोशल वेलफेयर और महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ बातचीत करके लिया जाएगा, जो पूरे राज्य में मिड-डे मील स्कीम को लागू करता है।
यह कदम सरकार की उन कोशिशों का हिस्सा है, जिनके जरिए वह बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर सरकारी स्कूलों में छात्रों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने और उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
प्रस्तावित चिकन बिरयानी से मौजूदा मेन्यू में एक और अच्छा विकल्प जुड़ने की उम्मीद है, साथ ही इससे छात्रों को हफ्ते में एक बार प्रोटीन से भरपूर खाना भी मिल सकेगा।
सरकार मिड-डे मील स्कीम के तहत परोसे जाने वाले खाने की कुल क्वालिटी को बेहतर बनाने के सुझावों पर भी विचार कर रही है, जिसमें स्कूलों में सप्लाई किए जाने वाले चावल की क्वालिटी भी शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर क्वालिटी का खाना इस प्रोग्राम की असरदारता को और बढ़ा सकता है। इस प्रोग्राम ने क्लासरूम में बच्चों की भूख मिटाने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों के एनरोलमेंट और स्कूल में बने रहने की दर को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
तमिलनाडु की दोपहर के भोजन की योजना में अभी कक्षा 1 से 10 तक के छात्र शामिल हैं और इससे सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 40 लाख बच्चों को फायदा होता है।
मुख्यमंत्री की नाश्ता योजना में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र शामिल हैं और हाल ही में इसके विस्तार के बाद इससे लगभग 32 लाख बच्चों को फायदा होने की उम्मीद है। सरकार नाश्ते और दोपहर के भोजन को हायर सेकेंडरी कक्षाओं के छात्रों तक बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है।
अगर दोपहर के भोजन के कार्यक्रम को 11वीं और 12वीं कक्षा तक बढ़ाया जाता है, तो अनुमान है कि इससे लगभग आठ लाख और छात्रों को फायदा होगा। शिक्षा विशेषज्ञों और स्कूल प्रशासकों का लंबे समय से यह मानना रहा है कि हायर सेकेंडरी छात्रों को पोषण संबंधी सहायता देने से स्कूल में उपस्थिति बेहतर होगी, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम होगी और पढ़ाई-लिखाई में बेहतर प्रदर्शन में मदद मिलेगी, खासकर कम आय वाले परिवारों के बच्चों के लिए।
अगर चिकन बिरयानी को शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह स्कूल में पोषण और छात्रों के कल्याण के प्रति तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही प्रतिबद्धता की दिशा में एक और कदम होगा।
यह राज्य हमेशा से भोजन-आधारित कल्याणकारी कार्यक्रमों को लागू करने में अग्रणी रहा है और इसकी दोपहर के भोजन की योजना देशभर में इसी तरह की पहलों के लिए एक मॉडल के तौर पर काम करती है।
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