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राजनीति

तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023: कागजनगर में सार्वजनिक बैठक के दौरान बीआरएस, बसपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प से तनाव व्याप्त

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हैदराबाद, 13 नवंबर: तेलंगाना के कोमाराम भीम आसिफाबाद जिले के कागजनगर कस्बे में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के समर्थकों के बीच झड़प से तनाव पैदा हो गया। घटना रविवार रात की है. समस्या तब शुरू हुई जब एक चुनावी बैठक, जिसे बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आर.एस. प्रवीण कुमार संबोधित कर रहे थे, को सत्तारूढ़ दल के समर्थकों ने कथित तौर पर बाधित कर दिया। बसपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जहां वे एक सार्वजनिक बैठक कर रहे थे, वहां तेज आवाज में गाने बजाता हुआ एक बीआरएस प्रचार वाहन पहुंचा। इससे दोनों गुटों में झड़प हो गयी. पुलिस ने झड़प कर रहे समूहों को तितर-बितर करने के लिए हस्तक्षेप किया। प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि उनके अनुरोध के बावजूद बीआरएस कार्यकर्ताओं ने गाने की आवाज कम करने से इनकार कर दिया. इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए, प्रवीण कुमार ने कागजनगर पुलिस स्टेशन के सामने धरने का नेतृत्व किया। उन्होंने इस घटना के लिए बीआरएस विधायक कोनेरू कोनप्पा को जिम्मेदार ठहराया. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी प्रवीण कुमार 30 नवंबर को सिरपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। कुमार ने राजनीति में प्रवेश करने के लिए 2021 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वह बसपा में शामिल हो गए और उसके प्रदेश अध्यक्ष बन गए। बसपा सभी 119 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है. चुनाव 30 नवंबर को होने हैं.

राष्ट्रीय समाचार

भारत का मानसून बेहतर हुआ, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका आई कमी : रिपोर्ट

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भारत में मानसून की स्थिति हाल के महीनों में काफी बेहतर हुई है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान की आशंका कमी आई है। हालांकि, बारिश का वितरण अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई है, जो जून में 35 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में कहा गया, “स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि यह पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।” मानसून में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिला है। सीजन की कमजोर शुरुआत के बाद बुवाई में काफी सुधार हुआ है।

ब्रोकरेज के अनुसार, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से 2 प्रतिशत कम थी, जबकि जून के अंत में यह कमी 21 प्रतिशत थी।

इसके अलावा, धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम रहा, जबकि मक्का का रकबा 4 प्रतिशत घटा।

इसके विपरीत, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर से करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रहा।

मैक्वायरी ने कहा कि बुवाई में बची हुई कमी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है और यह व्यापक स्तर पर नहीं है।

इसके अलावा, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर भी बारिश की कमी के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर के बराबर या उससे अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80-100 प्रतिशत है।

हालांकि, बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।

रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में सुधार, कुल बुवाई में सीमित कमी और पर्याप्त सिंचाई भंडार ने मिलकर खरीफ उत्पादन में गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मानसून की प्रगति महंगाई के लिहाज से भी सकारात्मक है। जून के स्तर की तुलना में खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं।

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राजनीति

यूपी चुनाव: मुस्लिम प्रभावी सीटों पर ओवैसी का फोकस, गठबंधन की राह नहीं बनी तो अकेले मैदान में कूदने की तैयारी

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। इस बीच आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) भी प्रदेश में अपना सियासी खाता खोलने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी की पहली प्राथमिकता गठबंधन है, लेकिन सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनी तो एआईएमआईएम अकेले चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश के चुनावी महत्व को समझते हैं। यही वजह है कि पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर तराई क्षेत्र के बहराइच तक ओवैसी खुद दौरा कर पार्टी की संभावनाओं का जायजा ले चुके हैं। पार्टी ने फिलहाल प्रयागराज, बहराइच, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर और अमरोहा की कई विधानसभा सीटों पर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। इन क्षेत्रों में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले ऐसे इलाकों में अपना सियासी आधार मजबूत करने की है, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। गठबंधन को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। ऐसे में एआईएमआईएम ने अपने विकल्प खुले रखे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, यदि किसी दल के साथ गठबंधन नहीं होता है तो एआईएमआईएम अपने दम पर करीब 200 से 250 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर सकती है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि एआईएमआईएम को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2023 के निकाय चुनाव के प्रदर्शन से राजनीतिक आधार मजबूत करने का अवसर मिला। पार्टी के कई प्रत्याशियों ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल कर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। अब एआईएमआईएम इसी स्थानीय चुनावी सफलता को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के कई हिस्सों में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि एआईएमआईएम इन क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाने में सफल रहती है तो उसका असर केवल उसके वोट प्रतिशत तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि समाजवादी पार्टी के चुनावी समीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम का प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा है और पार्टी अब तक विधानसभा में अपना खाता नहीं खोल सकी है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हुज्जत रजा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की राजनीति में यदि ओवैसी की एआईएमआईएम गठबंधन से बाहर रहकर चुनाव लड़ती है तो उसका असर मुख्य रूप से विपक्षी मतों के बंटवारे के रूप में सामने आ सकता है, जिसका लाभ भाजपा को मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, यदि सपा-कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन एआईएमआईएम को साथ लेता है तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती है और विपक्ष को इसका लाभ मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद और पल्लवी पटेल जैसे नेताओं और दलों के साथ संभावित तालमेल को भी ‘भीम-मीम’ समीकरण के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, अतीक अहमद के परिवार से जुड़े किसी चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की संभावना को लेकर अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

एआईएमआईएम सेंट्रल जोन के अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में अपना खाता खोलने के लक्ष्य के साथ पूरी तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा, ”हम भाजपा को रोकने के लिए सभी विपक्षी दलों के साथ सम्मानजनक हिस्सेदारी वाले गठबंधन के पक्ष में हैं। बसपा के साथ गठबंधन की संभावना हो या चंद्रशेखर आजाद और अन्य दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का विकल्प, हमारा उद्देश्य भाजपा को रोकना है।”

उन्होंने कहा कि सितंबर तक गठबंधन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई तो एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश की 200 से 250 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। पार्टी की बूथ स्तर तक तैयारियां चल रही हैं और पूरे प्रदेश से लगातार चुनाव लड़ने के लिए आवेदन मिल रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान का दावा: दक्षिणी फार्स प्रांत में म‍िला 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्‍यादा प्राकृतिक गैस भंडार

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ईरान ने घोषणा की है कि उसके दक्षिणी फार्स प्रांत में 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्‍यादा प्राकृतिक गैस का भंडार मिला है।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने रविवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि इस भंडार से 160 अरब क्यूबिक मीटर से अधिक गैस निकाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस गैस क्षेत्र का विकास जल्द से जल्द शुरू करने के लिए अधिकारी तेजी से जरूरी कदम उठा रहे हैं।

उन्होंने इस गैस को ‘स्वीट’ प्राकृतिक गैस बताया। इसका मतलब है कि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बहुत कम है, जिससे गैस के उत्पादन और विकास की लागत कम हो सकती है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान का ऊर्जा क्षेत्र कई महीनों से उसके बुनियादी ढांचे पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के असर का सामना कर रहा है।

पाकनेजाद ने कहा कि यह खोज ‘देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत आधार साबित होगी।’

इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा, न होर्मुज स्‍ट्रेट के जरिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से। ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।”

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आई।

ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ ‘अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई’ की जाएगी।

उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।” ट्रंप ने इस कदम को ‘आर्थिक डी-डे” बताया।

18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तनाव खत्म करने की बात शामिल थी।

इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके एक अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

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