राष्ट्रीय समाचार
पत्रकारों के डिवाइस जब्त करना गंभीर मामला : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दिशानिर्देश लाने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकारों के डिजिटल उपकरणों की जब्ती पर गंभीर चिंता व्यक्त की और केंद्र से जांच एजेंसियों की शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए बेहतर दिशानिर्देश लाने को कहा।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
जनहित याचिका में शीर्ष अदालत से कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ सुरक्षा उपाय लाने और डिजिटल उपकरणों की जब्ती के लिए दिशानिर्देश बनाने की अपील की गई।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू केंद्र की ओर से पेश हुए। राजू ने अदालत को बताया कि इस मामले में कई जटिल कानूनी मुद्दे शामिल हैं और पीठ से फिलहाल सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कौल ने टिप्पणी की कि एजेंसियों के सर्व-शक्तिमान होने को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है।
पीठ ने इसे बेहद खतरनाक स्थिति बताते हुए केंद्र को बेहतर दिशानिर्देश लाने का निर्देश दिया। यह याचिका 3 अक्टूबर को ऑनलाइन समाचार पोर्टल न्यूजक्लिक से जुड़े 46 पत्रकारों, संपादकों के घरों पर दिल्ली पुलिस की छापेमारी के मद्देनजर आई है।
छापेमारी के बाद, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, डिजीपब न्यूज इंडिया फाउंडेशन और इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प्स सहित कई मीडिया संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होेने अक्टूबर में पत्रकारों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती पर दिशानिर्देश मांगे थे।
छापेमारी में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पत्र में कहा गया है, “सच यह है कि आज, भारत में पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग प्रतिशोध के खतरे के तहत काम कर रहा है। और यह जरूरी है कि न्यायपालिका सत्ता का सामना मौलिक सत्य से करे – कि एक संविधान है जिसके प्रति हम सभी जवाबदेह हैं।”
अदालत 6 दिसंबर को सुनवाई फिर से शुरू करेगी।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन: सीबीआई जांच की मांग पर अड़े छात्र, तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन 20वें दिन भी जारी है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 6 छात्र अभी भूख हड़ताल पर हैं। छात्र परीक्षाओं में गड़बड़ियों की सीबीआई जांच, रिफॉर्म और जिम्मेदारी तय करने की मांग पर अड़े हैं। इस बीच तिरंगा यात्रा निकालने की भी योजना बना रहे हैं।
छात्र नेता रवींद्र ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, “आज विरोध प्रदर्शन का 20वां दिन है। मेरे दो साथी भूख हड़ताल पर हैं और दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई अन्य छात्र भी भूख हड़ताल पर हैं। सरकार से मेरी अपील है कि हम सभी छात्र हैं, इसलिए कृपया हमें यहां लंबे समय तक न रहने दें और हमारी मांगें पूरी करें।”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी भी कीमत पर अपनी मांगो से समझौता नहीं करेंगे। जब तक मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के हमसे बात करने के लिए तैयार होने का इंतजार कर रहे हैं। हम मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बातचीत करना चाहते हैं।”
रवींद्र ने कहा, “हम स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहे हैं और एक भव्य तिरंगा यात्रा की योजना बना रहे हैं। जब से हम यहां हैं, हम कई तरह की गतिविधियां आयोजित कर रहे हैं, जिनमें से हर एक यह संदेश देती है कि यहां के छात्र शिक्षित और जागरूक हैं। इससे पहले हमने सरकार को यह दिखाने के लिए एक मौन मार्च निकाला था कि नारे लगाने और शोर मचाने के बाद, अब हम शांतिपूर्वक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
वहीं, झारखंड पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर उन्होंने कहा, “कल हमारी एसएसपी के साथ बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। हमारा विरोध प्रदर्शन ऐतिहासिक था, जिसमें छात्रों ने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई और उसे मजबूत किया। अगर प्रशासन को लगता है कि कुछ असामाजिक तत्व मौजूद थे जो छात्रों के आंदोलन को भटकाने की कोशिश कर रहे थे तो सरकार को उनकी पहचान करनी चाहिए। ऐसा करते समय, उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वहां लगभग 50,000 छात्र मौजूद थे। अगर एक या दो प्रतिशत ऐसे अवांछित या असामाजिक तत्व थे, तो केवल उन्हीं लोगों की पहचान की जानी चाहिए और छात्रों को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।”
इस बीच विरोध कर रहे छात्र पीयूष कुमार सिंह ने कहा, “फिलहाल, हम इसी तरह अपना शांतिपूर्ण और अनुशासित विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। जब तक बातचीत का अगला दौर नहीं होता या हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। हम न्याय चाहते हैं और हमें मंत्री पर पूरा भरोसा है कि हमें न्याय मिलेगा। हमें सरकार से उम्मीद है, इसीलिए हम यहां बैठे हैं। हम अपने मुख्यमंत्री से गुजारिश करते हैं कि वे जल्द से जल्द हमारी समस्याओं का समाधान करें।”
राष्ट्रीय समाचार
विदेश मंत्री जयशंकर स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में हुए शामिल

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में देशभर से लोग जुड़ रहे हैं। इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी गुरुवार को इस अभियान का हिस्सा बने।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आवास पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक तस्वीर ‘एक्स’ पर शेयर की। तस्वीर के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा “हर घर तिरंगा।”
विदेश मंत्रालय ने भी जयशंकर की पोस्ट को रीशेयर करते हुए लिखा, “हर दिल में तिरंगा, हर घर में तिरंगा।”
‘हर घर तिरंगा’ अभियान आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शुरू किया गया था। इसका मकसद नागरिकों को अपने घरों में राष्ट्रीय ध्वज लगाने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अभियान की सोच यह थी कि अब तक लोगों का राष्ट्रीय ध्वज से रिश्ता ज्यादा औपचारिक और संस्थागत रहा है। इसे व्यक्तिगत गर्व और सम्मान की अभिव्यक्ति बनाने के लिए लोगों को घर-घर तिरंगा लाने के लिए कहा गया। इससे तिरंगा देश से व्यक्तिगत जुड़ाव का प्रतीक बने और साथ ही राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय एकता के प्रति सामूहिक संकल्प को भी दर्शाए।
इस साल ‘हर घर तिरंगा 2026’ को ‘वंदे मातरम के 150 साल’ की भावना को समर्पित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देशवासियों से 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की थी।
इंस्टाग्राम रील में पीएम मोदी ने कहा था, “15 अगस्त को गौरव के साथ मनाएं, स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दें, विकसित भारत का संकल्प लें। हर घर तिंरगा, घर घर तिंरगा, हर मन तिंरगा।” उन्होंने कैप्शन में लिखा था, “आइए, हर घर तिरंगा को हर घर का उत्सव बनाएं।”
वहीं, ‘एक्स’ पर पीएम मोदी ने लिखा था, “हमारा तिरंगा हमारा गर्व है और देश के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने कहा था, “आइए ‘हर घर तिरंगा’ आंदोलन में उत्साह से भाग लें और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के अपने सामूहिक संकल्प को दोहराएं।”
राजनीति
नीट पेपर लीक मामलाः राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट पर लिया संज्ञान, कल से होगी सुनवाई

नीट यूजी पेपर लीक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट की स्पेशल कोर्ट आरोप तय करने के लिए 13 अगस्त से सुनवाई करेगी।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने मीडिया द्वारा मामले में गवाहों के नाम छापे जाने पर आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत चौंकाने वाला है कि जो बात अभी तक कोर्ट में नहीं बोली गई है, वह अभी चार्जशीट का हिस्सा है। यह सब मीडिया में सामने आना बेहद चौंकाने वाला है। कोर्ट ने कहा कि मीडिया की भी जिम्मेदारी बनती है, ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।
वहीं, सीबीआई ने कहा कि मीडिया में कुछ गवाहों के नाम छापे जा रहे हैं, वह गवाह नाबालिग भी हो सकते हैं। लगातार चार्जशीट के हिस्से को अखबारों में छापा जा रहा है। नीट यूजी पेपर 2026 पेपर लीक मामले में आगे की जांच के लिए सीबीआई ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर इजाजत मांगी है। सीबीआई की अर्जी पर राउज एवेन्यू कोर्ट अर्जी ने आरोपियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। कल (गुरुवार) इस मामले पर भी कोर्ट करेगी सुनवाई।
सीबीआई ने नीट यूजी पेपर लीक मामले में 20,000 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे, मनीषा संजय हवलदार को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई ने चार्जशीट में कहा कि तीन विषय विशेषज्ञों ने दिल्ली के एनटीए कार्यालय से नीट परीक्षा के प्रश्नों को अलग-अलग तरीकों से बाहर निकाला था। आरोपी ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय उनकी तलाशी नहीं ली गई।
सीबीआई ने चार्जशीट में कहा है कि एनटीए में गोपनीय अनुभाग में प्रवेश और निकास के दौरान विशेषज्ञों की जांच या तलाशी की कोई प्रथा नहीं थी। एनटीए में डेडिकेटेड सीसीटीवी लाइव फीड निगरानी नियंत्रण कक्ष नहीं था, जिसके परिणामस्वरूप गोपनीय हॉल में विशेषज्ञों की गतिविधियों पर किसी का ध्यान नहीं गया।
सीबीआई ने आरोपपत्र में कहा कि एक आरोपी ने प्रश्नों को कागज की पर्चियों पर लिखा और फिर उन्हें छिपा दिया, जबकि दो अन्य आरोपियों ने प्रश्नों को याद किया, अपने होटल के कमरों में लौटकर या तो उन्हें लिख दिया या पाठ्यपुस्तकों में संबंधित आर्टिकल्स को मार्क किया।
सीबीआई ने आरोप पत्र में कहा कि जांच से पता चला है कि विशेषज्ञों को अनुवाद, पुनः अनुवाद के दौरान रफ कार्य के लिए गोपनीय अनुभाग के अंदर सादे कागज की शीट उपलब्ध कराई गई थीं। आरोपी पी.वी. कुलकर्णी ने इन शीटों का उपयोग करके रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्नों और उत्तर विकल्पों को संक्षेप में नोट किया।
सीबीआई ने कहा कि जांच से पता चला है कि बायोलॉजी (बॉटनी और जूलॉजी) डॉक्यूमेंट तेजस दभाड़े ने 20 अप्रैल और 21 अप्रैल 2026 को स्नेहांजलि देशमुख और दीया शिंदे के नोट्स की फोटोकॉपी से टाइप किया था, जो मनीषा संजय वाघमारे ने धनंजय लोखंडे के जरिए सत्यजीत सोलंकी और तेजस दभाड़े को दिए थे।
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