अंतरराष्ट्रीय समाचार
इमरान की पीटीआई आज लाहौर से ‘जेल भरो तहरीक’ की करेगी शुरुआत
इस्लामाबाद, 22 फरवरी : पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) बुधवार को लाहौर से अपना नया अभियान ‘जेल भरो तहरीक’ शुरू करने के लिए तैयार है। 200 से अधिक समर्थक अदालती गिरफ्तारी के विरोध में सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं।
अभियान की शुरुआत की घोषणा करते हुए खान ने एक वीडियो संदेश में कहा, “जेलों को भर दो और डर को चकनाचूर कर दो।”
पीटीआई की योजना अपनी सरकार को सत्ता से बेदखल करने और देश में वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के तहत संघीय और प्रांतीय स्तर पर चुनाव कराने के जानबूझकर प्रयास के खिलाफ है।
अभियान को पीटीआई की सोशल मीडिया टीम ने चालाकी से सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड में बदल दिया और अपने समर्थकों को अभियान का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित किया, जो आज लाहौर से शुरू हो रहा है।
पीटीआई ने अभियान लॉन्च डे (आज) तक विभिन्न शहरों में कई रैलियां भी की हैं। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि पीटीआई का शीर्ष नेतृत्व प्रचार के पहले चरण में अपनी गिरफ्तारी नहीं दे सकता।
पहले चरण में, कम से कम 200 पीटीआई थर्ड-स्तरीय लीडरों और समर्थकों को लाहौर में आज अदालत की गिरफ्तारी की उम्मीद है। विवरण के अनुसार, पीटीआई समर्थक मॉल रोड लाहौर में पंजाब प्रांतीय विधानसभा भवन के सामने पहुंचेंगे, जहां वे सरकार विरोधी अपना विरोध रिकॉर्ड करेंगे और अपनी गिरफ्तारी देंगे।
दूसरी ओर, प्रांतीय सरकार ने कहा है कि पीटीआई के विरोध स्थल पर किसी भी सार्वजनिक सभा पर रोक लगाते हुए मॉल रोड पर पहले से ही धारा-144 लागू कर दी गई है, जबकि सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जब तक विरोध हिंसक और आक्रामक न हो जाए, तब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाए।
लेकिन पीटीआई धारा 144 लागू होने के बावजूद अपनी विरोध रैली को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। यदि पीटीआई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो रैली को एक धरने में बदलने की योजना है।
पीटीआई की योजना के अनुसार, लाहौर जेल भरो तहरीक का शुरुआती बिंदु है। लाहौर के बाद 23 फरवरी को पेशावर, 24 फरवरी को रावलपिंडी, 25 फरवरी को मुल्तान, 26 फरवरी को गुजरांवाला, 27 फरवरी को सरगोधा और 28 फरवरी को साहीवाल में इसी तरह की गिरफ्तारियां की जाएंगी, जबकि फैसलाबाद मार्च के पहले दिन अभियान में शामिल होगा।
पीटीआई के वरिष्ठ नेता सीनेटर एजाज चौधरी ने कहा, “हमने अभियान के पहले दिन कम से कम 200 स्वयंसेवकों की मांग की थी, लेकिन अभियान के लिए 2,000 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि पूर्व सूचना मंत्री और पीटीआई के वरिष्ठ नेता फवाद चौधरी ने कहा है कि पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने भी जोर देकर कहा है कि वे पहले चरण में अभियान का हिस्सा बनेंगे और आज अदालती गिरफ्तारी भी दे सकते हैं।
फवाद चौधरी ने कहा, “पाकिस्तान के इतिहास में यह अनोखी घटना है। किसी अन्य राजनीतिक दल ने कभी ऐसा आंदोलन शुरू करने की हिम्मत नहीं की थी, जहां उसके कार्यकर्ता और नेता स्वेच्छा से गिरफ्तारी के लिए तैयार हों। यह विरोध घोर मानवाधिकारों के उल्लंघन, आसमान छूती महंगाई और आईएमएफ (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) के साथ सौदे के खिलाफ है।
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फिलीपींस में भूकंप से 61 लोगों की मौत, 75 हजार से ज्यादा घर बर्बाद

फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ के तट के पास 8 जून को आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा में 1,403 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी रविवार को फिलीपींस की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद (एनडीआरआरएमसी) ने दी।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इससे पहले एनडीआरआरएमसी ने बताया था कि इस भूकंप से 75,300 से अधिक परिवार यानी करीब 3.46 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से 45,000 से अधिक लोगों को विस्थापित होना पड़ा, जबकि 12,600 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो गए। भूकंप के कारण 45 तरह की घटनाएं भी हुईं, जिनमें ज्यादातर भूस्खलन शामिल हैं।
परिषद ने कहा कि भूकंप से 45 सड़क खंड, आठ पुल, एक हवाई अड्डा और दो बंदरगाहों पर आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा कृषि, पशुपालन और मछली पालन के कामों पर भी असर पड़ा है। 48 शहरों और नगरपालिकाओं में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई।
फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सिस्मोलॉजी (पीएचआईवीओएलसीएस) ने बताया कि यह भूकंप टेक्टोनिक था, जो सुबह 7:37 बजे स्थानीय समय पर 33 किलोमीटर की गहराई में आया। इसका केंद्र सरंगानी प्रांत के मिंडानाओ द्वीप पर मासीम शहर के तट से लगभग 32 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में था।
इससे पहले फिलीपींस के ऑफिस ऑफ सिविल डिफेंस के प्रवक्ता जूनी कैस्टिलो ने बताया था कि दक्षिण कोटाबाटो के जनरल सैंटोस शहर में 10 लोगों की मौत हुई है। यह एक बंदरगाह शहर है जिसकी आबादी सात लाख से ज्यादा है। साथ ही कम से कम 12 लोग अभी लापता हैं।
ज्यादातर मौतें मलबा गिरने, इमारतों के ढहने और भूस्खलन की वजह से हुई हैं। फिलीपींस राष्ट्रीय पुलिस ने पहले बताया था कि कम से कम 134 लोग घायल हुए हैं।
जनरल सैंटोस में एक दो मंजिला स्कूल की इमारत भी गिर गई, जिसमें कई छात्र फंस गए थे। अधिकारी अभी इस घटना की पुष्टि कर रहे हैं। ऑनलाइन वीडियो में प्रभावित इलाकों में विश्वविद्यालय और रेस्तरां की इमारतें ढही हुई दिखाई दीं।
कई व्यावसायिक इमारतों को भी नुकसान हुआ है, जहां साइनबोर्ड गिर गए और खिड़कियों के शीशे टूट गए। स्थानीय लोग तुरंत निकलकर सुरक्षित जगहों पर चले गए।
यह तेज भूकंप उस समय आया जब फिलीपींस में स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों के बाद फिर से कक्षाएं शुरू होने वाली थीं। कई स्कूलों की निगरानी वीडियो में भूकंप के दौरान तेज झटके दिखे, जिसके बाद शिक्षक और छात्र या तो तुरंत बाहर निकल गए या डेस्क के नीचे छिप गए।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप से 6 क्षेत्रों में 43 डिवीजनों के तहत 8,642 स्कूल प्रभावित हुए हैं।
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राष्ट्रपति ट्रंप का दावा- अमेरिकी सेना ने मार गिराया ‘ट्रेन डी अरागुआ’ का नेता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के अपराधी गिरोह ‘ट्रेन डी अरागुआ’ के नेता के मारे जाने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के साथ मिलकर किए गए एक सैन्य ऑपरेशन में ‘ट्रेन डी अरागुआ’ के कथित नेता को मार गिराया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, “मेरे निर्देश पर अमेरिकी सदर्न कमांड ने एक तेज और घातक हमला किया, जिसमें ट्रेन डे अरागुआ के कुख्यात नेता नीनो गुरेरो को मार गिराया गया। ट्रेन डे अरागुआ सबसे खूंखार आतंकवादी संगठनों में से एक है।”
उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मेरे दोबारा पद संभालने से पहले, जो बाइडेन ने हमारी दक्षिणी सीमा को लाखों अवैध अपराधियों के लिए खोल दिया था और इस विदेशी गिरोह को अमेरिकी नागरिकों के साथ बलात्कार, अंग-भंग और हत्या जैसे जघन्य अपराध करने की खुली छूट दे दी थी। अपने चुनाव अभियान के दौरान मैंने वादा किया था कि मैं इन राक्षसों को हमारे देश से बाहर निकालूंगा और उन परिवारों को न्याय दिलाऊंगा जिनके प्रियजनों की उन्होंने हत्या की।”
इस दौरान, राष्ट्रपति ट्रंप ने कुछ लोगों के नाम गिनाए और कहा, “इस कार्रवाई से अमेरिकी सेना ने उनके, उनके परिवारों और उनके चाहने वालों के लिए बदला लिया है।”
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही, मैंने ‘ट्रेन डे अरागुआ’ को आतंकवादी संगठन घोषित करने, हजारों खतरनाक अपराधियों को देश से बाहर निकालने और उन गिरोहों के खिलाफ जंग छेड़ने का अपना वादा पूरा किया, जो लंबे समय से हमारे नागरिकों के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे, जबकि कमजोर नेताओं ने अमेरिका को बेबस और रक्षात्मक स्थिति में छोड़ दिया था।”
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई वेनेजुएला में हमारे दोस्तों के साथ मिलकर की गई, जिनके साथ हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। नतीजतन, ‘ट्रेन डे अरागुआ’ के आतंकवादियों के लिए अब वेनेजुएला या कहीं और कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है। राष्ट्रपति ने पोस्ट में लिखा, “मेरे नेतृत्व में, हम इन क्रूर हत्यारों और ड्रग माफियाओं को कभी भी, कहीं भी ढूंढ निकालेंगे और उन्हें उसी नरक में भेजेंगे, जिसके वे हकदार हैं।”
बता दें कि ‘ट्रेन डी अरागुआ’ की शुरुआत वेनेजुएला में हुई थी और इसने कई लैटिन अमेरिकी देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस ग्रुप का संबंध ड्रग तस्करी, मानव तस्करी, जबरन वसूली, अपहरण और अन्य संगठित आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा है।
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पाकिस्तान: बन्नू में हथियारबंद हमलावरों का कहर, दो पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में अलग-अलग घटनाओं में हथियारबंद हमलावरों की गोलीबारी में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पाकिस्तान के अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को एक पुलिस कांस्टेबल किसी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद घर लौट रहा था। तभी बन्नू-मीरानशाह रोड पर अज्ञात हमलावरों ने उस पर गोली चला दी। वह गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
एक दूसरी घटना में, एक और पुलिस कांस्टेबल को उसके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने दोनों मामलों में हमलावरों को पकड़ने के लिए संबंधित इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
इससे पहले इसी हफ्ते, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के किला अब्दुल्ला, पिशिन और डुकी जिलों में पुलिस ठिकानों पर हुए हमलों में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हो गए थे। स्थानीय मीडिया ने गुरुवार को अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, मोटरसाइकिलों पर सवार हथियारबंद लोगों के एक समूह ने भारी हथियारों से गिलो पुलिस चेकपोस्ट पर हमला किया और बाद में उसमें आग लगा दी। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, किला अब्दुल्ला के पुलिस अधीक्षक अथर रशीद ने बताया कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई।
उन्होंने कहा कि हमलावर दो एके-47 राइफलें, चेकपोस्ट पर खड़ी एक निजी कार और एक मोटरसाइकिल अपने साथ ले गए। आग लगने से चेकपोस्ट को काफी नुकसान पहुंचा और वहां मौजूद रिकॉर्ड तथा फर्नीचर पूरी तरह जल गए।
एक अन्य हमले में पिशिन के सरानान इलाके में सुल्तान पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीन लिए और विस्फोटकों का इस्तेमाल कर इमारत को नुकसान पहुंचाया।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार रात डुकी इलाके के एक पुलिस स्टेशन पर भी हमला किया गया। इस दौरान पुलिस और हमलावरों के बीच जमकर गोलीबारी हुई, जिसमें एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।
पिछले हफ्ते पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) की मासिक सुरक्षा रिपोर्ट में बताया गया था कि मई महीने में पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति और खराब हुई है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में उग्रवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय की कमी के बाद मई में उग्रवादी हमले फिर बढ़ गए। हमलों, मौतों, आत्मघाती हमलों और अपहरण की घटनाओं में तेज बढ़ोतरी यह दिखाती है कि सुरक्षा चुनौतियां अभी भी गंभीर बनी हुई हैं।
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