राजनीति
दोषियों की रिहाई पर गैर-अनुपालन के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के डीजी जेल को अवमानना नोटिस जारी किया
नई दिल्ली, 20 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के कारागार महानिदेशक के खिलाफ अदालत के पहले के आदेशों का पालन न करने के लिए दायर एक अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य सरकार को उन दोषियों की समय से पहले रिहाई पर विचार करने का निर्देश दिया गया था, जिन्होंने 16 साल से अधिक वास्तविक कैद और 20 साल की सजा काट ली है। कैदियों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि राज्य की निष्क्रियता के कारण, शीर्ष अदालत द्वारा पारित स्पष्ट आदेशों के बावजूद याचिकाकर्ता जेलों में सड़ रहे हैं। मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि हालांकि 48 याचिकाकर्ताओं में से अधिकांश को रिहाई की अनुमति दे दी गई है, शेष मामलों पर विचार नहीं किया गया है।
14 मार्च, 2022 को पारित एक आदेश में, शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह 1 अगस्त, 2018 की नीति के अनुसार आदेश की तारीख से 3 महीने के भीतर समय से पहले रिहाई के याचिकाकर्ताओं के मामले पर विचार करें। दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने डीजी, जेल से जवाब मांगा। अगले शुक्रवार को वापसी योग्य नोटिस जारी करें।
मल्होत्रा ने जोर देकर कहा कि याचिकाकर्ता जेल अधिकारियों द्वारा उनकी समय से पहले रिहाई की सिफारिश करने के बावजूद जेल में सड़ रहे हैं, जो अनुच्छेद 21 के तहत उनके जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया- याचिकाकर्ता इस अदालत द्वारा पारित आदेश के बावजूद जेल हिरासत में लगातार सड़ रहे हैं, जो कुछ भी नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत उनके मौलिक अधिकार के साथ-साथ अवैध हिरासत का स्पष्ट उल्लंघन है क्योंकि याचिकाकर्ता पहले ही न्यायिक हिरासत में निर्धारित सजा से कहीं अधिक सजा काट चुके हैं।
5 जनवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने डीजी, जेल, उत्तर प्रदेश को दोषियों को छूट का लाभ देने के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में अपनी व्यक्तिगत क्षमता में हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत ने पिछले साल सितंबर में एक फैसले में उत्तर प्रदेश में उम्रकैद की सजा काट रहे करीब 500 दोषियों को राहत देने के लिए कई निर्देश जारी किए थे।
यूपी सरकार ने 1 अगस्त, 2018 को आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों के लिए छूट नीति जारी की। सरकार के अनुसार, समय से पहले रिहाई के लिए आजीवन विचार करने के लिए, कैदी को 16 साल की वास्तविक सजा और 4 साल की छूट – कुल सजा के 20 साल से गुजरना चाहिए। बाद में जुलाई 2021 में नीति में संशोधन किया गया, 16 साल की वास्तविक सजा और 4 साल की छूट में बदलाव नहीं किया गया, लेकिन एक राइडर जोड़ा गया कि पात्र होने के लिए दोषी की आयु 60 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषियों की समयपूर्व रिहाई के सभी मामलों पर एक अगस्त, 2018 की नीति के तहत विचार किया जाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि 28 जुलाई 2021 की नीति द्वारा पेश किया गया प्रतिबंध 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक समय से पहले रिहाई के लिए पात्र नहीं है, जिसे 27 मई, 2022 के संशोधन द्वारा हटा दिया गया है। इसलिए, उस आधार पर समय से पहले रिहाई का कोई मामला खारिज नहीं किया जाएगा।
इसने कहा था कि दोषी को समय से पहले रिहाई के लिए आवेदन जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है और जेल अधिकारियों को उनके मामलों पर स्वत: विचार करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि उत्तर प्रदेश में जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण जेल अधिकारियों के साथ समन्वय में आवश्यक कदम उठाएंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कैदियों के सभी पात्र मामले जो लागू नीतियों के संदर्भ में समय से पहले रिहाई के हकदार होंगे, जैसा कि ऊपर देखा गया है, विधिवत विचार किया जाएगा और कोई भी कैदी, जो विचार किए जाने के लिए अन्यथा पात्र है, विचार से बाहर नहीं किया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने पर अभिजीत दिपके का हमला, बोले-सरकार को विरोध की आवाज से दिक्कत

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र को लोगों के विरोध करने के विचार से दिक्कत थी।
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज पीएम मोदी ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया। कल वे लोकतंत्र को ही खत्म कर देंगे। तानाशाह को कभी विरोध-प्रदर्शन की जगह से दिक्कत नहीं थी। दिक्कत तो लोगों के विरोध करने के विचार से थी।”
दरअसल, गृह मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश के आधार पर दिल्ली पुलिस ने नई गाइडलाइंस जारी करते हुए जंतर-मंतर को तय विरोध स्थल की सूची से हटा दिया है। अब विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहें; रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबी मैदान (पूर्वी दिल्ली) तय की गई है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त स्थानों की जांच के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर यह फैसला किया गया है। इन तीनों जगहों पर प्रदर्शन के लिए विस्तृत और संशोधित एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी। दिल्ली पुलिस का यह आदेश 28 अप्रैल 2022 के पुराने स्टैंडिंग ऑर्डर में आंशिक बदलाव है।
जंतर-मंतर लंबे समय से देश में लोकतांत्रिक विरोध का केंद्र रहा है। लगातार किसी न किसी मुद्दे को लेकर वहां प्रदर्शन होते रहे हैं। हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उस दौरान पुलिस और प्रशासन ने कई सख्त कदम उठाए थे। सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था।
उस प्रदर्शन के दौरान स्थिति ऐसी बनी थी कि दिल्ली सरकार को करीब 45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े थे और कई ट्रेनों को भी रद्द करना पड़ा था, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सरकार का कहना है कि जंतर-मंतर पर बार-बार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से मध्य दिल्ली में यातायात और जनजीवन प्रभावित होता है। इसी को देखते हुए प्रदर्शन स्थलों को शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किया गया है। वहीं विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश बताया है।
राष्ट्रीय समाचार
वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में मिले-जुले रह सकते हैं नतीजे, चुनिंदा क्षेत्रों में मांग मजबूत : रिपोर्ट

वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में कॉरपोरेट नतीजे अलग-अलग सेक्टर्स में मिले-जुले रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान लागत पर दबाव बने रहने के बावजूद, कुछ खास इंडस्ट्रीज को मजबूत मांग से सहारा मिलेगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को मौजूदा अच्छे औसत इक्विटी एसेट्स से फायदा होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, कवरेज दायरे में आने वाली कंपनियों की मुख्य आय में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 3.6 प्रतिशत और साल-दर-साल आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
इसके अलावा, बैंकों में लोन ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, जबकि शुद्ध ब्याज मार्जिन पर निगरानी रखनी होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटो और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की तरफ से लोन बांटने की स्थिर वृद्धि से ग्रोथ को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो सेक्टर में रिटेल मांग और त्योहारों के लिए स्टॉक जमा करने से आपूर्ति को बढ़ावा मिला, लेकिन कच्चे माल की ऊंची लागत और सप्लाई-चेन में रुकावटों से मुनाफे पर असर पड़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा, बिल्डिंग मटीरियल सेक्टर में अलग-अलग ट्रेंड देखने को मिल सकते हैं। पाइप का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि वुड पैनल को निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सीमेंट इंडस्ट्री के वॉल्यूम में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है, हालांकि ईंधन की ऊंची लागत से मुनाफे पर दबाव पड़ने की संभावना है।
इसी तरह, कंज्यूमर स्टेपल्स में दोहरे अंकों की ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में महंगाई और बारिश की अनिश्चितताओं का असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वायर और केबल की ग्रोथ से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, इंडस्ट्रियल सेक्टर में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करने वाली कैपिटल गुड्स कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है, जबकि इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर काम पूरा करने से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ सकता है।
इसमें आगे कहा गया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम की रफ्तार स्थिर रहने की उम्मीद है, हालांकि नए ऑर्डर मिलने की गति धीमी हुई है।
अपराध
ओडिशा से रायपुर लाया जा रहा 23.5 किलो गांजा जब्त, चार तस्कर गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर बड़ी सफलता हासिल की है।
पुलिस ने एक कार से 23.500 किलोग्राम गांजा बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में करीब 19.95 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई है।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि किआ कैरेंस कार (ओडी 02 सीटी 3301) में अवैध गांजा लेकर कुछ तस्कर ओडिशा से छत्तीसगढ़ की ओर आ रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने एनएच-53 स्थित अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट पर नाकेबंदी की। कुछ देर बाद संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी जांच की गई।
कार में सवार चारों व्यक्तियों से पूछताछ के दौरान उनके जवाब संदिग्ध पाए गए। पूछताछ करने पर उन्होंने कार में गांजा होने की बात स्वीकार की। तलाशी लेने पर वाहन की पिछली सीट के पीछे रखी सफेद रंग की बोरी से 23.500 किलो गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 11.75 लाख रुपए बताई गई है।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे गांजा ओडिशा के बौध जिले से लेकर रायपुर (छत्तीसगढ़) पहुंचाने जा रहे थे।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गांजे के अलावा तस्करी में प्रयुक्त किआ कैरेंस कार (कीमत 8 लाख रुपए) और चार मोबाइल फोन (कीमत 20,500 रुपए) भी जब्त कर लिए। कुल जब्त संपत्ति की कीमत 19,95,500 रुपए आंकी गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान केशव गाई गौउरिया (32), स्वागत महाकुल (26), मनतोष पौड (28) और रविन्द्र बस्तिया (26) के रूप में हुई है। सभी आरोपी ओडिशा के बौध जिले के निवासी हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ थाना सिंघोडा में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) II(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब गांजे की सप्लाई चेन, सोर्स प्वाइंट, डेस्टिनेशन प्वाइंट और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है।
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