महाराष्ट्र
जैकलीन के खिलाफ नोरा फतेही के मानहानि मामले की सुनवाई 21 जनवरी को
नई दिल्ली, 19 दिसंबर : यहां की पटियाला हाउस अदालत ने बॉलीवुड अदाकारा नोरा फतेही द्वारा अभिनेत्री जैकलीन फर्नाडीज के खिलाफ दायर मानहानि के मामले को 21 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। पटियाला हाउस अदालत के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) ने मानहानि का यह मामला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कपिल गुप्ता को सौंप दिया और उन्होंने इसे अगले महीने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया।
नोरा ने 12 दिसंबर को यहां की एक अदालत में जैकलीन के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जैकलीन ने उनके खिलाफ ‘दुर्भावनापूर्ण कारणों’ और उनके करियर को नष्ट करने के लिए अपमानजनक आरोप लगाए।
नोरा के अनुसार, जैकलिन ने अपने हितों को आगे बढ़ाने और उनके करियर को नष्ट करने के लिए उन्हें आपराधिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की, क्योंकि वे दोनों एक ही इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं और दोनों की समान पृष्ठभूमि है।
यह कहते हुए कि उनकी छवि को धूमिल किया जा रहा है, नोरा ने जोर देकर कहा कि कलाकारों का करियर पूरी तरह से उनकी प्रतिष्ठा पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैकलीन ने उनका आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत पतन सुनिश्चित करने के लिए उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।
आईएएनएस को उपलब्ध हुई शिकायत की प्रति में नोरा ने यह भी दावा किया है कि जैकलीन ने एक अन्य आपराधिक कार्रवाई से खुद को दूर करने का दुर्भावनापूर्वक प्रयास किया है।
नोरा ने अपने वकील वकील विक्रम चौहान के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया है, “जैकलीन फर्नाडीज भी अभिनेत्री हैं और फिल्म उद्योग में काफी प्रसिद्ध हैं। उन्हें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ रुपये के मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में भी आरोपी बनाया गया है। उन्होंने दुर्भावनापूर्ण कारणों से नोरा फतेही पर मानहानिकारक आरोप लगाए गए। इसके अलावा, जैकलीन ने शिकायतकर्ता को आपराधिक रूप से बदनाम करने की मांग की, ताकि वह अपने हितों को आगे बढ़ा सकें और बॉलीवुड में नोरा के करियर को नष्ट कर सकें।”
नोरा ने आगे आरोप लगाया है कि जैकलीन ने उनके खिलाफ झूठा बयान दिया।
पेश की गई दलील में नोरा ने कहा है, “जैकलीन ने मुझे अनावश्यक रूप से इस मामले में घसीटा और बदनाम किया है, क्योंकि मैं और वह एक ही इंडस्ट्री में हैं। वह पूरी तरह से जानती हैं कि किसी भी कलाकार का व्यवसाय और उनका करियर पूरी तरह से उनकी प्रतिष्ठा पर आधारित है। यह स्पष्ट रूप से स्थापित करता है कि मुझ पर लांछन गलत इरादे से लगाया गया है और इस तरह के लांछन से शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को नुकसान होगा।”
याचिका के मुताबिक, नोरा ने जैकलीन पर कुछ मीडिया प्लेटफर्मो पर भी उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया था, ताकि उनकी प्रतिष्ठा को कम किया जा सके। 2 दिसंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोरा से चंद्रशेखर के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की थी।
दोनों अभिनेत्रियों ने मामले में गवाह के तौर पर अपना बयान दर्ज कराया था।
इससे पहले, जैकलीन से संबंधित 7.2 करोड़ रुपये की फिक्स डिपोजिट ईडी ने कुर्क किया था और इसे अभिनेत्री को उपहारों से प्राप्त अपराध की आय करार दिया था।
पिछले साल फरवरी में ईडी ने चंद्रशेखर की सहयोगी पिंकी ईरानी के खिलाफ अपनी पहली पूरक अभियोजन शिकायत दर्ज की थी और कहा था कि पिंकी ने चंद्रशेखर को बॉलीवुड अभिनेत्रियों से मिलवाया था।
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि पिंकी ईरानी जैकलीन के लिए महंगे उपहारों का चयन करती थी और बाद में चंद्रशेखर द्वारा भुगतान किए जाने के बाद अभिनेत्रियों को उनके घर पहुंचा देती थी। ईडी ने पिछले साल दिसंबर में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत के समक्ष इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी।
चंद्रशेखर ने अलग-अलग मॉडलों और बॉलीवुड हस्तियों पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने उससे उपहार लेने से इनकार कर दिया था।
महाराष्ट्र
महायुति सरकार के अत्यधिक खर्च से महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था पर संकट: शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) ने गुरुवार को दावा किया कि 2026-27 के वार्षिक बजट के महज तीन महीने बाद महायुति सरकार द्वारा 97,706.40 करोड़ रुपए की पूरक मांगें पेश करने का कदम महाराष्ट्र के वित्तीय अनुशासन में आई गिरावट को उजागर करता है।
पार्टी ने कहा कि सार्वजनिक ऋण लगभग 11 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने, 60,000 करोड़ रुपए के वार्षिक ब्याज बोझ और राज्य के खजाने से मनमाने ढंग से खर्च किए जाने के कारण महाराष्ट्र सरकार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है।
शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा कि वर्तमान स्थिति उस अर्थशास्त्र के छात्र की तरह है, जो परीक्षा के दौरान अपनी उत्तर पुस्तिका में एक के बाद एक कई अनुपूरक प्रश्न जोड़ता है, और परिणाम घोषित होने पर मुश्किल से उत्तीर्ण हो पाता है।
मुख्यपत्र ‘सामना’ में टिप्पणी की गई, “महाराष्ट्र की अनुपूरक प्रश्न मांगने वाली सरकार अनुपूरक प्रश्नों की मांग में रिकॉर्ड बनाकर राज्य की तबाह अर्थव्यवस्था का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ा रही है।”
संपादकीय में तर्क दिया गया कि किसी भी सरकार के लिए बजट के तुरंत बाद पूरक मांग बेहद शर्मनाक होता है।
संपादकीय में कहा गया, “अनुत्पादक गतिविधियों पर अंधाधुंध खर्च के कारण राज्य सरकार की वित्तीय योजना पूरी तरह से पटरी से उतर गई है। महाराष्ट्र कभी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन पिछले चार वर्षों में यह प्रतिष्ठा पूरी तरह से धूमिल हो गई है। इन चार वर्षों के दौरान महायुति सरकार ने लगभग 5 लाख करोड़ रुपए की पूरक मांगें लाने का सिलसिला जारी रखा है। यह बजट से अधिक खर्च का विश्व रिकॉर्ड है।”
शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि आदर्श रूप से यदि वित्तीय वर्ष के अंत में आवंटित धनराशि कम पड़ जाए या कोई नई योजना अचानक शुरू हो जाए तो अगले बजट से कुछ ही दिन पहले पूरक मांगों का उपयोग किया जाना चाहिए, लेकिन आज आवंटन जानबूझकर मुख्य बजट में छिपाए जाते हैं, और राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पूरक मार्गों के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए की मांग की जाती है। इस बार सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। अगले बजट में पूरे नौ महीने शेष रहते हुए सरकार के राजस्व और व्यय अनुमान पहले तीन महीनों में ही धराशायी हो गए।
उन्होंने कहा कि जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सत्ता में थी और उसने काफी कम पूरक मांगें रखी थीं, तब मौजूदा सरकार के नेताओं (जो उस समय विपक्ष में थे) ने वित्तीय अनुशासन के पूर्ण पतन का आरोप लगाते हुए उनकी कड़ी आलोचना की थी।
संपादकीय में आगे कहा गया, “आज वही विपक्षी नेता राज्य के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल के चार वर्षों में पूरक मांगें 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाने के बावजूद वह अब इसे वित्तीय अनुशासनहीनता नहीं मानते।”
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने व्यंग्य करते हुए कहा कि पूरक उपलब्धि समर्थक सरकार पूरक मांगों का नया रिकॉर्ड बना रही है और उस राज्य की अर्थव्यवस्था को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर रही है जो कभी अपनी वित्तीय अनुशासन के लिए प्रसिद्ध था। सरकार खुलेआम उस राज्य की आर्थिक विरासत को नष्ट कर रही है जिसे कभी वित्तीय ईमानदारी के लिए सम्मान दिया जाता था।
महाराष्ट्र
आईएमडी ने महाराष्ट्र के 31 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट, मुंबई में 113 पेड़ गिरे

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुरुवार को पूरे महाराष्ट्र में व्यापक बारिश का अनुमान लगाया है और 31 जिलों के लिए मौसम संबंधी अलर्ट जारी किया है। इनमें से 25 जिलों को ‘येलो अलर्ट’ और छह जिलों को ‘ऑरेंज अलर्ट’ पर रखा गया है, जो लगातार बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं की संभावना का संकेत देते हैं।
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने पिछले 24 घंटों में शहर भर में पेड़ और उनकी शाखाएं गिरने की 113 घटनाओं की जानकारी दी है।
बीएमसी के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर के इलाके में ऐसी 40, पूर्वी उपनगरों में 23 और पश्चिमी उपनगरों में 50 घटनाएं दर्ज की गईं, क्योंकि इस आर्थिक राजधानी में भारी बारिश और तेज हवाएं चलीं।
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब मुंबई सहित महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में भी फैल गया है, जिससे पूरे राज्य में व्यापक बारिश हो रही है। पिछले दो दिनों में मानसून की गतिविधि तेज होने के कारण मुंबई और पड़ोसी ठाणे में भारी बारिश हुई।
येलो अलर्ट वाले जिलों में ठाणे, मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, नासिक, अहिल्यानगर, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, बीड, हिंगोली, नांदेड़, अकोला, अमरावती, भंडारा, बुलढाणा, गढ़चिरौली, गोंदिया, नागपुर, वर्धा और वाशिम शामिल हैं।
इस बीच, भारी बारिश और खराब मौसम की आशंका के कारण पुणे, यवतमाल, लातूर, धाराशिव, चंद्रपुर और सतारा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
महाराष्ट्र के लगभग सभी इलाकों में मानसून सक्रिय हो गया है, जिससे कुछ जगहों पर भारी बारिश और कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। मुंबई, कोंकण क्षेत्र और उससे सटे गोवा में बारिश का जो खास तौर पर अधिक रही है, जिससे लंबे समय से चली आ रही गर्मी से काफी राहत मिली है।
नासिक, जलगांव, परभणी, जालना, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, यवतमाल, नागपुर और चंद्रपुर समेत कई जिलों में भी बारिश दर्ज की गई है। साथ ही, मानसून गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ गया है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश में अचानक हुई यह तेजी किसी एक मौसम प्रणाली का नतीजा नहीं थी। बल्कि, यह तीन वायुमंडलीय प्रणालियों के आपसी मेल से हुआ, जिन्होंने मिलकर मुंबई और आसपास के इलाकों में मानसून की गतिविधि को तेज कर दिया।
आईएमडी ने तापमान में धीरे-धीरे गिरावट का अनुमान भी लगाया है। अगले दो दिनों में पूरे महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान 2-4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है और फिर स्थिर हो सकता है। अगले चार से पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में भी धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है।
कुल मिलाकर पूरे महाराष्ट्र में मानसून की स्थिति सक्रिय बनी हुई है। कई जिलों में व्यापक और कुछ जगहों पर भारी बारिश हो रही है। बारिश से गर्मी से काफी राहत मिली है और आईएमडी ने संकेत दिया है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून की तेज गतिविधि जारी रहने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी पर नजर रखें और जरूरी सावधानी बरतें।
महाराष्ट्र
सरकार मुंबई के झुग्गी-झोपड़ी इलाकों के स्कूलों के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत वापस ले, शर्तों में ढील देकर उन्हें परमानेंट करना चाहिए: अबू आसिम आज़मी

ABU ASIM AZMI
समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और मानखुर्द शिवाजी नगर से विधायक अबू आसिम आज़मी ने महाराष्ट्र असेंबली के मॉनसून सेशन के दौरान सदन में झुग्गी-झोपड़ियों में चल रहे प्राइवेट स्कूलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की है कि इन स्कूलों के प्रिंसिपल, सेक्रेटरी और चेयरमैन के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत वापस ली जाए और इन स्कूलों को बंद होने से बचाया जाए। सदन को संबोधित करते हुए अबू आसिम आज़मी ने कहा, “मेरा चुनाव क्षेत्र मानखुर्द शिवाजी नगर बहुत गरीब और पिछड़ा इलाका है। यहां करीब 30 से 35 हज़ार बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इस इलाके में बीएमसी स्कूलों की कैपेसिटी पूरी तरह खत्म हो चुकी है और नए एडमिशन के लिए बच्चों की लंबी वेटिंग लिस्ट है। ऐसे में, ये प्राइवेट स्कूल ही गरीब बच्चों की पढ़ाई का एकमात्र सहारा हैं।
मुख्य मांगें और बातें:
शर्तों में ढील और रेगुलराइज़ेशन
स्कूलों को मंज़ूरी देने के लिए सरकार की शर्तें जैसे ओपन स्पेस, प्लेग्राउंड वगैरह, स्लम एरिया में पूरी करना प्रैक्टिकली नामुमकिन है। इसलिए, सरकार को इन इलाकों के लिए खास कानून बनाकर उन्हें रेगुलराइज़ करना चाहिए। शिवाजी नगर और देवनार पुलिस स्टेशनों में इन स्कूलों के मैनेजमेंट के खिलाफ दर्ज एफआईआर तुरंत वापस लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों का रिजल्ट 90 परसेंट से ज़्यादा है और इनका एजुकेशनल स्टैंडर्ड बीएमसी स्कूलों से बेहतर है। यहां टीचर सिर्फ़ 6,000 से 7,000 रुपये की मामूली सैलरी पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कमेटी बनाने में देरी हो रही है। पिछली मीटिंग में सरकार ने इस मुद्दे पर जांच कमेटी बनाने का भरोसा भी दिया था, लेकिन अभी तक कोई कमेटी नहीं बनी है। अबू आसिम आजमी ने चेतावनी दी कि अगर एडमिनिस्ट्रेटिव कार्रवाई की वजह से ये स्कूल बंद हो गए तो 30 से 35 हजार गरीब बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधेरे में चला जाएगा। उन्होंने सरकार से इस मामले में तुरंत दखल देने की जोरदार अपील की है।
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