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Monday,01-June-2026
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उद्योगों पर निवेश करने के लिए कर्नाटक सर्वश्रेष्ठ: सीतारमण

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि चीन और यूरोप से बाहर जाने वाले उद्योगों के लिए कर्नाटक निवेश के लिए सबसे अच्छी जगह है। सीतारमण तीन दिवसीय ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट (जीआईएम) के उद्घाटन सत्र में अपना भाषण दे रही थीं। उन्होंने समझाते हुए कहा- वह अन्य गंतव्यों की ओर बढ़ रहे हैं जो केवल कर प्रोत्साहन से अधिक की पेशकश कर रहे हैं। कर्नाटक देश में प्रमुख रोजगार जनरेटर है। राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 8.8 प्रतिशत का योगदान करते हुए, जबकि इसकी जनसंख्या कुल राष्ट्रीय जनसंख्या का सिर्फ पांच प्रतिशत है, सभी औपचारिक नौकरियों में से 10 प्रतिशत यहां सृजित होते हैं।

मंत्री ने कहा- मैं सभी निवेशकों को आश्वस्त करना चाहती हूं कि राज्य पूरी तरह से बहुत फुर्तीला है, नीतियों को वैश्विक विकास के साथ ऐसे समय में रखा जाता है जब आप सभी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस राज्य ने अपनी पिछली उपलब्धियों से खुद को प्रदर्शित किया हैं और यह आश्वासन दिया है कि अब भी और अगले 25 वर्षों तक अमृत काल के दौरान, कई निवेशकों के भारत में आने के लिए, यहां से पूरे विश्व में कर्नाटक एक आवश्यक आधार होगा।

उन्होंने कहा- मैं विश्व स्तर पर भारत के आसपास जो कुछ भी विकसित हो रहा है, उससे भी आकर्षित करना चाहूंगा। हर तरफ अनिश्चितता का माहौल जरूर है। भारी मात्रा में चुनौतियां, जो केवल भारत के लिए नहीं है, दुनिया के हर देश को लगता है कि प्रतिकूलता निश्चितता की भावना के बहुत मजबूत तत्व हैं जो पूरी तरह से अनुपस्थित हैं, यहां तक कि हम सभी चीन प्लस वन के बारे में बात करने लगे।

वित्त मंत्री ने कहा- जब आप मूल्य श्रृंखलाओं में विविधता लाना चाहते थे, या जब आप यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि आपके द्वारा उत्पादित कच्चे माल या मध्यस्थ उत्पादों के लिए एक से अधिक स्रोत हैं। आपके पास युद्ध की वैश्विक स्थिति थी। युद्ध, विशेष रूप से उन देशों से, जिन्होंने कच्चे माल की आपूर्ति की, चाहे वह ईंधन, उर्वरक या भोजन से संबंधित हो। तो, आपके पास ये देश युद्ध में हैं जो विशेष रूप से ईंधन और भोजन के क्षेत्र में दुनिया के लिए असुरक्षा पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा- परिणामस्वरूप, देश दुनिया के विभिन्न हिस्सों से इन सामग्रियों के स्रोत के लिए खुद को समायोजित कर रहे हैं। इसका उद्योगों, अर्थव्यवस्था, व्यापार और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ा है। इन व्यवधानों के परिणाम बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए थे जो कि मध्यवर्ती उत्पादों के लिए कच्चे माल के आवश्यक स्रोत, जो उभरते बाजारों के लिए बाजार थे..सभी भारी मंदी के संदेह से गुजर रहे हैं।

वे तकनीकी रूप से मंदी की दहलीज पर हो सकते हैं, लेकिन वास्तव में इस पर कोई सस्पेंस या सदमे से बाहर नहीं हैं कि क्या वे भविष्य में और कठोर मंदी में आ जाएंगे.. इन सभी अनिश्चितताओं के साथ, मैं इसे आपके सामने रखने के लिए यहां हूं क्योंकि सावधानीपूर्वक योजना, लक्षित सुविधा और राजकोषीय विवेक के कारण, प्रधानमंत्री ने सामने से नेतृत्व किया और यह सुनिश्चित किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहर के इन विकासों से गंभीर रूप से खतरा नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप, 2020 और आज के बीच, हम ऐसी स्थिति में आ गए हैं जहां चुनौतियां जारी हैं, नई चुनौतियां भी बन रही हैं। लेकिन, भारत शांत द्वीप के रूप में बना हुआ है। हमारी अपनी चुनौतियां होंगी लेकिन अन्य देशों के रूप में नहीं जैसा कि वे सोचते हैं कि भारत को इससे खतरा होगा।

मंत्री ने कहा- एक तरह से मैं अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान, नई दिल्ली में आगंतुकों के माध्यम से भी सुन रही हूं कि भारत शांति का नखलिस्तान प्रतीत है और चुनौतियों को सावधानी से दूर करता है और हमारी अर्थव्यवस्था अब निवेशकों के लिए बहुत आकर्षक है।

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नीट यूजी और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जुड़े मुद्दों पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक

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नई दिल्ली, 1 जून: नीट-यूजी परीक्षा व सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर संसदीय स्थायी समिति वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल कर रही है। नीट-यूजी परीक्षा के विषय पर, सोमवार को हो रही समिति की बैठक में विमर्श किया जा रहा है। सोमवार को यहां शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और नेशनल एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक को समिति के समक्ष जवाब देने के लिए बुलाया गया है।

समिति देश की प्रमुख प्रवेश एवं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रही है। मंगलवार को कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। संसद भवन एनेक्सी परिसर में शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई है।

बैठक के एजेंडे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) बनाम पारंपरिक पेन-एंड-पेपर परीक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर चर्चा शामिल है। इसके साथ ही नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों, परीक्षा संचालन की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

बैठक में विशेष रूप से नीट-यूजी परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और उससे जुड़े विवादों पर सवाल किए जाएंगे। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़े प्रभाव को लेकर एनटीए और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से जवाब मांगे जा सकते हैं। समिति इस बात की भी समीक्षा कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

गौरतलब है कि इस वर्ष नीट-यूजी के प्रश्न लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। अब इसकी पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। पुनर्परीक्षा के निर्णय, उसकी आवश्यकता, परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय तथा प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी समिति की चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

संसदीय दस्तावेजों के अनुसार, बैठक के पहले सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) से संबंधित रिपोर्टों पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा है। इसके बाद शुरू हुए दूसरे सत्र में शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और एनटीए के वरिष्ठ अधिकारियों से परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाने हैं।

समिति की अगली बैठक 2 जून को होगी, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और सीबीएसई अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।

ओएसएम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन छात्रों और शिक्षकों ने स्कैन की गुणवत्ता, आरेखों के मूल्यांकन और तकनीकी समस्याओं जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है। इसके अलावा, कक्षा 9 और 10 में त्रिभाषा सूत्र के क्रियान्वयन की स्थिति और उसके प्रभावों की भी समीक्षा की जाएगी। संसदीय स्थायी समिति की ये बैठकें देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता और शिक्षा प्रणाली में सुधार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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उत्तराखंड: सीआईएसएफ ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किया मॉक ड्रिल

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तपोवन, 1 जून: उत्तराखंड के तपोवन में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने सोमवार को मॉक ड्रिल किया। इसमें आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्टेट फायर सर्विसेज़, लोकल पुलिस, बीआरओ, एनटीपीसी, आईबी, एलआईए, एसडीएम ऑफिस, एचसीसी और मेडिकल टीमों ने भी हिस्सा लिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल का आयोजन प्रमुख रूप से बादल फटने और बाढ़ की स्थिति में कैसे रेस्क्यू ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया जाए, इसके लिए अभ्यास करना था। इस मॉक ड्रिल से पहले ही पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर सबकुछ अंजाम दिया गया। मॉक ड्रिल के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि कुछ भी रूपरेखा से परे नहीं हो।

वहीं, मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद इसे सफल बताया जा रहा है और साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे हमें आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार की आपदाग्रस्त स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। ध्यान देने वाली बात है कि इस मॉक ड्रिल का आयोजन करने से पहले इसकी रूपरेखा पहले ही निर्धारित कर ली गई थी।

वहीं, इस मॉक ड्रिल के आयोजन का एक मकसद यह भी था कि सुरक्षाकर्मियों की मौजूदा कार्यकुशलता का आकलन किया जा सके। इस मॉक ड्रिल से यह भी पता चल गया कि अगर किसी कारणवश हमें किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो उससे निपटने के लिए हमारा मौजूदा सुरक्षा दस्ता कितना कुशल और सक्षम है। इसी देखते हुए इस मॉक ड्रिल को काफी सार्थक माना जा रहा है।

साथ ही, कई बार यह भी देखने को मिला है कि तालमेल के अभाव में रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे संवेदनशील प्रक्रियाओं को संपन्न करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में इस तरह के मॉक ड्रिल को काफी उपयोगी माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल के बाद अगर अब किसी भी प्रकार की खामियां सामने आई होंगी, तो उसे पुन: दुरूस्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

बता दें कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से हमेशा से ही संवेदनशील सूबों की फेहरिस्त में शुमार रहा है। ऐसी स्थिति में सीआईएसएफ के इस कदम को काफी माना जा रहा है। \

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नीट परीक्षा रद्द, सीबीआई करेगी जांच, जल्द होगा नई परीक्षा की डेट का ऐलान

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नई दिल्ली, 12 मई। देश भर में आयोजित की गई मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षा एमबीबीएस में दाखिले के लिए थी। मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई।

परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है। अब यह परीक्षाएं दोबारा से आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।

गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न परीक्षा होने से पहले ही लीक होने की बातें सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है।

यह परीक्षा 3 मई रविवार को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई 2026 को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि दोबारा आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा की नई तिथियां और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा। भारत सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए इस प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एजेंसी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह माना कि परीक्षा दोबारा कराने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन एजेंसी के अनुसार परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को अधिक गंभीर और दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता था।

इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 चक्र में छात्रों द्वारा किया गया पंजीकरण, उम्मीदवार विवरण और चुने गए परीक्षा केंद्र पुनर्परीक्षा में स्वत मान्य रहेंगे। जिन छात्रों ने नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था ऐसे छात्रों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवेदन कर चुके या परीक्षा में शामिल हो चुके छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी।

पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से आयोजित करेगी। एजेंसी ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों से बचें। छात्रों की सहायता के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अभ्यर्थी 011-40759000 और 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं।

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