अंतरराष्ट्रीय
फैसलाबाद से कराची तक, पाकिस्तान में कपिल देव के यादगार पल
विश्व कप विजेता कप्तान और क्रिकेट की दुनिया में सबसे महान आलराउंडरों में से एक, कपिल देव ने विभिन्न विरोधियों के खिलाफ अपने शानदार करियर के दौरान कई यादगार प्रदर्शन किए हैं और उनमें से एक कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ भी शामिल है।
भारत-पाकिस्तान मैचों के दौरान, कपिल और इमरान खान के बीच प्रतिस्पर्धा देखी गई थी।
क्रिकेट जगत भाग्यशाली था कि उपमहाद्वीप से इन सितारों का उदय हुआ जिन्होंने 1970 और 1980 के दशक में इयान बॉथम और रिचर्ड हेडली के साथ स्पॉटलाइट को साझा किया।
दोनों खिलाड़ियों ने विश्व कप खिताब के लिए अपनी अंडररेटेड टीमों का नेतृत्व किया और उनके पूरे करियर में कई समानताएं थीं।
यह सब 16 अक्टूबर, 1978 को शुरू हुआ, जब कपिल ने पाकिस्तान के फैसलाबाद में शक्तिशाली पाकिस्तानी टीम के खिलाफ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए मैदान पर कदम रखा।
उन्होंने मुख्य रूप से एक गेंदबाज के रूप में प्रवेश किया, जो बल्ले से कुछ तेज प्रहार कर सकता था। हरियाणा के खेतों से पले-बढ़े कपिल ने रणजी ट्रॉफी में हरियाणा टीम के लिए विकेट लेकर घरेलू मैदानों में हलचल पैदा की थीं।
पहली पारी में तत्कालीन 19 वर्षीय खिलाड़ी के आंकड़े काफी हद तक अप्रभावी थे। वहीं, दो पाकिस्तानी दिग्गज, जहीर अब्बास और जावेद मियांदाद ने 255 रनों की साझेदारी की जिससे पाकिस्तान ने पहली पारी में 500 रनों से अधिक का स्कोर पार किया।
कपिल पहली पारी में विकेट नहीं ले पाए, लेकिन दूसरी पारी में महान उत्साह के साथ वापस आए, सादिक मोहम्मद के रूप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय विकेट लिया और मैच अंतत: ड्रॉ समाप्त हुआ। गुंडप्पा विश्वनाथ ने साहसिक 145 रन बनाये।
जबकि कपिल ने एक आलराउंडर के रूप में अपने अभूतपूर्व कौशल की झलक दी, भारत के लिए श्रृंखला काफी हद तक भूलने योग्य थी क्योंकि पाकिस्तान ने उन्हें 2-0 से हरा दिया था।
हालांकि, आलराउंडर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार प्रगति की। यह विशेष रूप से 1979 में चेन्नई में उसी विरोधी के खिलाफ सामने आया, जहां उन्होंने सात विकेट (मैच में 11 विकेट) लिए, जिसने भारत को सीरीज में यादगार जीत दिलाई।
एक और उदाहरण जहां कपिल ने पाकिस्तान के खिलाफ 22 मार्च 1985 को शारजाह क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में रोथमैन फोर-नेशंस कप में प्रभावित किया था।
पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम को इमरान खान (6/14) द्वारा 42.4 ओवर में 125 रनों पर आउट कर दिया गया। केवल दो भारतीय बल्लेबाज पारी में दोहरे अंक का स्कोर हासिल करने में सफल रहे।
जवाब में, कप्तान कपिल देव (3/17) के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाजों ने एक शानदार प्रदर्शन किया और पाकिस्तान को 87 रन (32.5 ओवर) पर आउट कर 38 रन से जीत हासिल की।
1982 में कराची में दूसरे टेस्ट के दौरान, कपिल अपनी बल्लेबाजी से हमेशा की तरह निडर थे, उन्होंने केवल 30 गेंदों में 50 रन बनाए। कपिल की वह पारी काफी साहसी थी। वह अंतत: पहली पारी में 73 रन पर आउट हो गए। भारत वह मैच एक पारी और 86 रनों से हार गया, लेकिन कपिल अपने धैर्य और ²ढ़ संकल्प के लिए सबसे यादगार रहे।
चैंपियन खिलाड़ी हमेशा शीर्ष विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन करने का एक तरीका ढूंढते हैं और पाकिस्तान के खिलाफ भारत की जीत में बड़ा योगदान देकर कपिल ने अपने ऐतिहासिक करियर के दौरान अपनी चैंपियनशिप मानसिकता को साबित किया।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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