अंतरराष्ट्रीय
भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 41 रन से हराया
भारतीय टीम ने अपनी शानदार गेंदबाजी और मजबूत क्षेत्ररक्षण के दम पर महिला एशिया कप के अपने कारवां का आगाज जीत के साथ किया। 150 रनों का बचाव करने उतरी भारतीय टीम ने दस गेंद शेष रहते ही पूरी विपक्षी टीम को पवेलियन भेज दिया। भारत ने श्रीलंका के ऊपर 41 रनों की बड़ी जीत हासिल की।
भारत ने 20 ओवर में छह विकेट पर 150 रन बनाने के बाद श्रीलंका की टीम को 18.2 ओवर में 109 रन पर निपटा दिया। 53 गेंदों में 76 रन बनाने वाली जेमिमाह रॉड्रिग्स को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला। जेमिमाह रॉड्रिग्स ने अपनी शानदार पारी में 11 चौके और एक छक्का लगाया।
जेमिमाह रॉड्रिग्स ने कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ तीसरे विकेट के लिए 92 रनों की शानदार साझेदारी की। हरमनप्रीत ने 30 गेंदों में 33 रन बनाये। जेमिमाह रॉड्रिग्स टीम के 134 के स्कोर पर आउट हुईं और टीम 150 रनों तक ही पहुंच सकी। श्रीलंका की तरफ से ओशादी रनासिंघे ने 32 रन पर तीन विकेट लिए।
श्रीलंका की पारी में तीन ही बल्लेबाज दहाई की संख्या में पहुंच सकीं। हसिनी परेरा ने 32 गेंदों में सर्वाधिक 30 रन बनाये। भारत की तरफ से दयालन हेमलता ने 15 रन देकर तीन विकेट लिए जबकि पूजा वस्त्रकर और दीप्ति शर्मा को दो-दो विकेट मिले।
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने जीत के बाद कहा, “हमने गेंद के साथ अच्छी शुरूआत नहीं की थी, लेकिन रन आउट और बाद में हमारे गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाजी की। दीप्ति ने अच्छा प्रदर्शन किया। शुरूआत में हमने दो विकेट गंवा दिए थे लेकिन इसके बाद मेरे और जेमिमाह के बीच अच्छी साझेदारी हुई। हमें लगा कि हमने 20-30 रन कम बनाए, अगर मैंने और जेमिमाह ने आगे बल्लेबाजी की होती तो हम 200 के आसपास पहुंच सकते थे।”
प्लेयर ऑफ द मैच बनीं जेमिमाह ने कहा, “मैंने पिछले छह हफ्ते से बैट नहीं छुआ था। लेकिन मैं अपने माता-पिता, कोच और सपोटिर्ंग स्टाफ का तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगी, जिन्होंने मुझे चोट से उबरने में मदद की। मैंने धीमी और टर्न लेती पिचों पर खेलने का काफी अभ्यास किया था और यह मेरे काम आया। इस जीत से टीम में आत्मविश्वास का संचार हुआ है।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के अमेरिकी तेल टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत, 15 क्रू सदस्य सुरक्षित निकाले गए

नई दिल्ली/बगदाद, 12 मार्च : बुधवार को इराक के बसरा के पास एक अमेरिकी तेल टैंकर ‘सेफसी विष्णु’ पर ईरान ने हमला कर दिया। इस हमले में टैंकर पर काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। इराक में भारतीय दूतावास ने जानकारी दी।
बगदाद में भारतीय दूतावास ने कहा कि जहाज पर सवार बाकी 15 भारतीय क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया और एक सुरक्षित जगह पर ले जाया गया।
यह हमला फारस की खाड़ी में हुआ, जहां इराक के समुद्री इलाके में एक और तेल टैंकर पर हमला होने के बाद उसमें भी आग लगने की खबर सामने आई। ईरान ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा है कि पानी के अंदर ड्रोन हमले में जहाजों को निशाना बनाया गया था।
ईरानी सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी के मुताबिक, इस ऑपरेशन में पानी के अंदर ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ईरानी ड्रोन ने “फारस की खाड़ी में दो तेल टैंकर उड़ा दिए”। जिन जहाजों पर हमला हुआ, वे माल्टीज के झंडे वाला टैंकर जेफिरोस और मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला सेफसी विष्णु थे। सेफसी विष्णु का मालिकाना हक अमेरिकी की कंपनी सेफसी ट्रांसपोर्ट इंक के पास है, जबकि टैंकर जेफिरोस का मालिक ग्रीस में रहता है।
घटना के बाद, बगदाद में भारतीय दूतावास ने कहा कि वह इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है।
बगदाद में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “11 मार्च, 2026 को, मार्शल आइलैंड्स के झंडे के नीचे चल रहे अमेरिका के कच्चे तेल के टैंकर सेफसी विष्णु पर इराक के बसरा के पास हमला हुआ, जिसमें दुर्भाग्य से एक भारतीय क्रू मेंबर की जान चली गई। बाकी 15 भारतीय क्रू को तब से सुरक्षित जगह पर पहुंचा दिया गया है।”
दूतावास ने यह भी पुष्टि की कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और निकाले गए क्रू सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहा है। बयान में आगे कहा गया, “बगदाद में भारतीय दूतावास इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है और हर संभव मदद दे रहा है।”
जानमाल के नुकसान पर सहानुभूति व्यक्त करते हुए, मिशन ने दुखी परिवार के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। भारतीय दूतावास ने कहा, “दूतावास मृतक क्रू मेंबर के परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।”
यह घटना इलाके में बढ़ते तनाव और समुद्री ट्रैफिक के लिए बढ़ते खतरों के बीच हुई है। इससे पहले, ईरान ने चेतावनी दी थी कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को आग लगा देगा। बता दें, होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी समुद्री कॉरिडोर है जिससे दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई आमतौर पर गुजरती है।
तेहरान की चेतावनी के बावजूद, इस रास्ते से कुछ ही शिपिंग ट्रैफिक जारी रहा है, हालांकि सुरक्षा चिंताओं के कारण हालात को देखते हुए कुल मिलाकर आवाजाही में काफी कमी आई है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने कहा कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट में संभावित खतरों का मुकाबला करने के लिए कार्रवाई की है। ईरान के खिलाफ यूएस-इजरायली सैन्य अभियान अब अपने 12वें दिन में पहुंच गया है और लड़ाई के जल्द खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
यूएई ने यूएनएससी में ईरान की निंदा वाले प्रस्ताव का किया स्वागत, तुरंत हमले रोकने की उठाई मांग

UAE
नई दिल्ली, 12 मार्च : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया। ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई। यूएन के इस प्रस्ताव का समर्थन करने के साथ ही यूएई ने मांग की है कि ईरान इन हमलों को तुरंत रोके।
यूएन में यूएई के स्थायी प्रतिनिधि एम्बेसडर मोहम्मद अबुशाहाब ने सुरक्षा परिषद की ओर से उठाए गए कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “135 देशों द्वारा को-स्पॉन्सर किए गए इस प्रस्ताव को अपनाने से एक साफ और एक जैसा संदेश जाता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हमारी संप्रभुता पर हमलों या आम लोगों और जरूरी ढांचों को जानबूझकर टारगेट करने को बर्दाश्त नहीं करेगी। यूएई इस मुश्किल समय में अपने और हमारे इलाके के नेतृत्व और लोगों के साथ खड़े रहने के लिए यूएनएससी का शुक्रिया अदा करता है। हम अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने, स्थिरता और अपने इलाके में और ज्यादा तनाव को रोकने के लिए यूएन और अपने साथियों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
यूएई की सरकार ने कहा कि इस प्रस्ताव का नेतृत्व खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में शामिल बहरीन ने किया था। यूएई इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में बहरीन की काबिलियत के लिए बहुत शुक्रिया अदा करता है।
प्रस्ताव के अनुसार ईरान की ओर से किए जा रहे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा भी हैं। यूएई सरकार ने बताया कि प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान तुरंत और बिना किसी शर्त के पड़ोसी देशों को उकसाने या धमकी देने का कोई भी तरीका बंद करे। कतर सरकार ने कहा, “यूएन में पेश किया गया यह प्रस्ताव ईरानी हमलों के जवाब में सेल्फ डिफेंस के अधिकार की भी पुष्टि करता है, जिसे यूनाइटेड नेशंस चार्टर के आर्टिकल 51 में मान्यता दी गई है।”
यूएई ने मांग की है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से माने, खासकर हथियारों वाली लड़ाई में आम लोगों और आम चीजों की सुरक्षा के मामले में और ऐसी किसी भी धमकी या काम से दूर रहे जो इलाके की स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रहा है।
इस प्रस्ताव को अपनाने से पहले जीसीसी देशों और यूएई ने यूएनएससी के अध्यक्ष और अमेरिकी सेक्रेटरी-जनरल को कई चिट्ठी भी भेजी थी। इन चिट्ठियों में यूएई और बड़े इलाके पर ईरान के हमलों के पैमाने और उसके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया गया था। यूएनएससी समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की गई थी। यूएई सरकार ने कहा है कि ईरान अपने गैरकानूनी हथियारों से किए गए हमलों की वजह से प्रभावित देशों को हुए सभी नुकसान के लिए जिम्मेदार है।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने ईरान पर हमलों को तेल की कीमतों में कमी से जोड़ा

trump
वॉशिंगटन, 12 मार्च : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने केंटकी में अपने समर्थकों से कहा कि आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार की समन्वित रिलीज़ और तेहरान पर लगातार दबाव बनाए रखने से ऊर्जा बाज़ार स्थिर हो जाएंगे।
केंटकी के हेब्रोन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान का बचाव किया और कहा कि वॉशिंगटन अपने उद्देश्यों की प्राप्ति तक अभियान जारी रखेगा।
ट्रंप ने कहा, ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए अमेरिका ईरान के आतंकी शासन से उत्पन्न खतरे को रोकने के लिए निर्णायक कार्रवाई कर रहा है और दावा किया कि यह अभियान सफल रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगभग ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की वायुसेना “खत्म हो चुकी है, पूरी तरह खत्म”, और देश के पास अब कोई काम करने वाला रडार या एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण नहीं बचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता “90 प्रतिशत कम हो गई है” और उसके ड्रोन “85 प्रतिशत तक नष्ट हो चुके हैं।”
उन्होंने कहा, “हम उन फैक्ट्रियों को लगातार उड़ा रहे हैं जहां ये बनाए जाते हैं और सच कहूं तो किसी ने भी ऐसा पहले कभी नहीं देखा।”
राष्ट्रपति ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ पहले की अमेरिकी कार्रवाइयों का भी जिक्र किया और कहा कि सेना ने “ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।”
ट्रंप ने तर्क दिया कि भविष्य के खतरों को रोकने के लिए यह अभियान जरूरी है और जोर देकर कहा कि अमेरिका समय से पहले पीछे नहीं हटेगा।
उन्होंने कहा, “जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता, हम यहां से नहीं जाएंगे।” सैन्य दावों के साथ-साथ ट्रंप ने कहा कि संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार में संभावित व्यवधान को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने भीड़ को बताया कि इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने उसी दिन पहले सहमति जताई है कि दुनियाभर के विभिन्न राष्ट्रीय पेट्रोलियम भंडारों से “रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल” जारी करने के लिए समन्वय किया जाएगा।
ट्रंप के मुताबिक रणनीतिक तेल भंडार जारी करने से “तेल की कीमतों में काफी कमी आएगी।”
ट्रंप ने ईरानी नौसैनिक संपत्तियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी बलों ने उन जहाजों को निशाना बनाया जो समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने में शामिल थे।
उन्होंने कहा, हमने 58 नौसैनिक जहाजों को निष्क्रिय कर दिया और यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने क्षेत्रीय जल में बारूदी सुरंगें बिछाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले “31 जहाजों को नष्ट कर दिया।”
ट्रंप ने कहा कि अभियान तेजी से आगे बढ़ा है और दावा किया कि कम समय में ही ईरान की सैन्य संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
उन्होंने कहा, “जो आप अभी देख रहे हैं, वैसा पहले कभी किसी ने नहीं देखा।” संघर्ष के बावजूद अमेरिका ऊर्जा आपूर्ति को जारी रखने के लिए भी काम कर रहा है।
ट्रंप ने कहा, “हम यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि तेल की आपूर्ति जारी रहे,” और दोहराया कि सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उसके लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
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