राजनीति
लखीमपुर कांड: यूपी के उपमुख्यमंत्री बोले, दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी की रूह कांप उठेगी
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में हुई घटना को राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद और ब्रजेश पाठक ने दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया है।
मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि लखीमपुर की घटना दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। मैं विपक्ष से उम्मीद करता हूं, चाहे अखिलेश यादव हों, प्रियंका गांधी हों या मायावती हों, कि वे राजनीतिकरण करने के बजाय परिवार को सांत्वना दें। क्योंकि यहां पर कानून का राज कायम है।
उन्होंने आगे कहा कि यह घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस दुख की घड़ी में सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। अपराध करने वाला एक भी अपराधी बच नहीं पाएगा। उनके खिलाफ ऐसी कठोरतम कार्रवाई की जाएगी जो एक मिशाल बनेगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा लखीमपुर की घटना बहुत ही दुखद है। सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। सरकार सीधे नजर बनाए हुए थी। लखीमपुर की घटना का पर्दाफाश हो गया है। आरोपियों ने पहले बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया फिर हत्या कर लटका दिया। सरकार ऐसा कदम उठाएगी कि उनकी आने वाली पीढ़ियों की आत्मा भी कांप उठेगी। न्याय दिया जाएगा, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में बुधवार को एक पेड़ से दो नाबालिग बहनों के शव लटके पाए जाने के बाद छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने से एक आरोपी घायल हो गया। लखीमपुर खीरी के एसपी संजीव सुमन ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि छह आरोपियों की पहचान छोटू, जुनैद, सोहेल, हाफिजुल, करीमुद्दीन और आरिफ के रूप में हुई है।
राजनीति
पीएम मोदी 15 अक्टूबर को लद्दाख में 3,350 करोड़ की पांच विकास परियोजनाओं का करेंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लद्दाख में लगभग 3,350 करोड़ रुपये की पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस अवसर पर वह कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होने, ऊर्जा ढांचे में सुधार, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जल सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री लेह स्थित कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डे के नए यात्री टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके निर्माण पर 640 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 23,800 वर्ग मीटर में फैला यह आधुनिक टर्मिनल सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।
ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए टर्मिनल में भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग किया गया है। लद्दाख के संवेदनशील पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई इस सुविधा में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी। इससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी और देश के अन्य हिस्सों के साथ लद्दाख की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह सड़क लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से दुर्गम जांस्कर घाटी के रास्ते जोड़ती है। इससे लद्दाख के लिए एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध होगा, जो श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह राजमार्गों को अतिरिक्त विकल्प प्रदान करेगा।
हिमालय के चुनौतीपूर्ण भूभाग और ऊंचाई पर स्थित शिंकुन ला दर्रे से गुजरने वाली यह सड़क इंजीनियरिंग की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। रणनीतिक दृष्टि से यह सड़क सशस्त्र बलों की आवाजाही और रसद संबंधी जरूरतों को मजबूत करेगी। इसके अलावा, जांस्कर के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजारों और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
लद्दाख की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का उपयोग बढ़ाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री 9 मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना और 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खलत्सी विद्युत पारेषण लाइन का उद्घाटन करेंगे।
इन परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्र के विद्युत नेटवर्क की विश्वसनीयता में सुधार आएगा। साथ ही, लद्दाख के जलविद्युत संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण कदम होगा।
प्रधानमंत्री लेह के सिंधु घाट पर भारत के पहले शैलचित्र संरक्षण पार्क का भी उद्घाटन करेंगे। लद्दाख में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों वाले सैकड़ों स्थल मौजूद हैं। इन शैलचित्रों में वन्यजीवों, मानव आकृतियों और विभिन्न प्रतीकों की नक्काशी शामिल है, जो हजारों वर्षों के मानव इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।
ये शैलचित्र क्षेत्र की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का अमूल्य हिस्सा हैं। संरक्षण पार्क के माध्यम से इन संवेदनशील पुरातात्विक अवशेषों को सुरक्षित रखने, लोगों में इनके महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदार विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री परियोजना हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में विकसित 40 जल निकायों का भी उद्घाटन करेंगे। यह पहल लद्दाख की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों को देखते हुए जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह मिशन अमृत सरोवर के उद्देश्यों के अनुरूप है।
लद्दाख में कृषि के सामने पानी की उपलब्धता और मांग के बीच मौसमी असंतुलन एक बड़ी चुनौती है। बर्फ पिघलने और ग्लेशियरों से निकलने वाले पानी के कारण वर्ष के कुछ समय में पर्याप्त जल उपलब्ध होता है, लेकिन बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।
परियोजना हिम सरोवर का उद्देश्य उपलब्ध पानी का संरक्षण कर जरूरत के समय उसका उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे सिंचाई व्यवस्था को सहायता मिलेगी, कृषि पर निर्भर लोगों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
इन पांचों परियोजनाओं के माध्यम से लद्दाख में परिवहन, ऊर्जा, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और जल प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में हुई प्रगति से उत्साहित हूं: कनाडा की विदेश मंत्री

भारत के दो दिवसीय दौरे पर आईं कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति पर संतोष जताया है। बुधवार को उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के साथ ऊर्जा, नवाचार और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार कर रहे हैं।
कनाडाई विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट पर एक तस्वीर के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने 14 अक्टूबर से जुड़ी खास याद साझा करते हुए कहा, “ठीक एक साल पहले नई दिल्ली में उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात कर कनाडा-भारत संबंधों के लिए संयुक्त रोडमैप तैयार करने की दिशा में कदम उठाया था।”
उन्होंने कहा, “आज लौटकर यह देखकर उत्साहित हूं कि हमने कितनी प्रगति की है। व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने से लेकर ऊर्जा, नवाचार और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तक, दोनों देश कई मोर्चों पर आगे बढ़े हैं।”
आनंद ने कहा कि भारत और कनाडा के संबंधों का वास्तविक महत्व इस बात में है कि दोनों देश मिलकर क्या हासिल कर सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे बदलाव जिक्र करते हुए आगे कहा, “ऐसे समय में, जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में व्यापक बदलाव हो रहे हैं, भारत और कनाडा के बीच मजबूत होते संपर्क भविष्य की समृद्धि को आकार देने और स्वतंत्र, खुले तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में योगदान देने का अवसर प्रदान करते हैं।”
उनका यह बयान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के प्रयासों के बीच आया है।
कनाडा की विदेश मंत्री मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। पोस्ट में लिखा कि जून 2025 के बाद यह अनीता आनंद की भारत की तीसरी यात्रा है। यह दौरा भारत और कनाडा के बीच लगातार जारी उच्चस्तरीय संवाद तथा संबंधों में आई सकारात्मक गति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
जायसवाल के अनुसार, यात्रा के दौरान दोनों पक्ष हाल के दिनों में हुई प्रगति को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच संबंधों में निरंतरता और आपसी सहयोग की दिशा में एक और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आगामी बैठकों में आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में 2026 के त्योहारी सीजन में कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचने का अनुमान: कैट

भारत में 2026 के त्योहारी सीजन (नवरात्रि से लेकर दीपावली तक) में कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है, यह पिछले साल के आंकड़े से 15-18 प्रतिशत है। यह जानकारी कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से दी गई।
कैट के नेशनल सेक्रेटरी जनरल और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह अनुमान अलग-अलग राज्यों के व्यापार संघों और बाजारों से मिली जानकारी, ग्राहकों की मांग, त्योहारों के दौरान खरीदारी के ट्रेंड और ग्रामीण व अर्ध-शहरी इलाकों में बढ़ी हुई कमर्शियल गतिविधियों पर आधारित था।
उन्होंने कहा कि पिछले साल त्योहारों के दौरान कुल कारोबार लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपए का था, जिसमें 5.40 लाख करोड़ रुपए का सामान और 65,000 करोड़ रुपए की सेवाएं शामिल थीं।
कैट के अनुसार, मौजूदा त्योहारी सीजन में सर्विस सेक्टर में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है और इसका कारोबार 80,000 करोड़ रुपए से 1 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है।
त्योहारों के समय बढ़ने वाली मांग से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स डिलीवरी, वेयरहाउसिंग, होटल, रेस्टोरेंट, टूरिज्म, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट और लोकल ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है।
कैट के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, त्योहारों के दौरान होने वाले व्यापार में ग्रोसरी और फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, इसके बाद सोना, चांदी और ज्वेलरी का नंबर आता है जिनकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान की हिस्सेदारी 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रेडीमेड कपड़े और गिफ्ट आइटम की हिस्सेदारी 7-7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
व्यापारी संगठन ने कहा कि होम डेकोर और फर्नीचर व फर्निशिंग की हिस्सेदारी 5-5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।
बाकी कैटेगरी में टेक्सटाइल और फैब्रिक, मिठाई और नमकीन, पूजा का सामान, फल और ड्राई फ्रूट्स, बेकरी और कन्फेक्शनरी, जूते-चप्पल और अन्य सामान व उनसे जुड़े बिजनेस शामिल हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि त्योहारों के मौसम में धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और कमर्शियल इवेंट्स – जैसे रामलीला, दुर्गा पूजा सेलिब्रेशन, गरबा और डांडिया इवेंट्स, मेले, एग्जीबिशन और कम्युनिटी गैदरिंग – के जरिए भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि त्योहारों के बिजनेस में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से पता चलता है कि कंज्यूमर अब स्थानीय स्तर पर बने प्रोडक्ट्स, हैंडीक्राफ्ट, भारतीय ब्रांड और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) द्वारा बनाए गए सामान को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
खंडेलवाल ने इस ट्रेंड के लिए कुछ हद तक ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे इनिशिएटिव्स को मिली बढ़ती स्वीकार्यता को जिम्मेदार बताया।
उन्होंने कंज्यूमर्स से त्योहारों के मौसम में भारतीय प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने की अपील की और कहा कि इससे व्यापारियों, कारीगरों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और स्थानीय सर्विस प्रोवाइडर्स को फायदा होगा।
कैट ने भरोसा जताया कि नवरात्रि से दीपावली 2026 तक चलने वाला त्योहारों का मौसम देश के व्यापार, सर्विस सेक्टर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
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