मनोरंजन
मैरी कॉम और सुनील छेत्री ने ‘केबीसी14’ पर जीते 12.5 लाख रुपये किए दान
आमिर खान के बाद मिताली मधुमिता और मेजर डी.पी. सिंह ने दर्शकों को उनकी कहानियों से रूबरू कराया, छह बार के विश्व चैंपियन, ओलंपिक खेलों के पदक विजेता और राज्यसभा सांसद एम.सी. मेजबान और मेगास्टार अमिताभ बच्चन द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब देने के लिए मैरी कॉम और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर सुनील छेत्री ने ‘केबीसी 14’ पर हॉटसीट लिया।
बातचीत के दौरान छेत्री ने बिग बी की हिट फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ के एक गाने की एक पंक्ति का हवाला दिया, “मर गया? लेकिन आप तो जिंदा हो?”
इस पर बच्चन ने जवाब दिया, “ये जीना भी कोई जीना है लल्लू?” छेत्री ने फुटबॉल के अपने कुछ गुर भी दिखाए।
फिर, दो सेलिब्रिटी मेहमानों को एक सवाल का जवाब देना था, जो उन्होंने किया और 12.5 लाख रुपये जीते। सवाल था, “जो लोग जंगल के पास काम करते हैं और रहते हैं वे बोनबीबी की पूजा करते हैं, एक देवी जो उन्हें बाघों से बचाती है?”
उन्हें इनमें से चुनना था बांदीपुर, रणथंभौर, सुंदरबन और कान्हा, जिसमें जवाब था सुंदरबन।
पैसा क्रमश: मैरी कॉम रीजनल बॉक्सिंग फाउंडेशन और द वॉयस ऑफ स्ट्रे डॉग्स द्वारा साझा किया जाएगा।
खेल यहीं समाप्त होना था क्योंकि समय समाप्त हो गया था और मेजबान 25 लाख रुपये का सवाल नहीं पूछ सके।
मनोरंजन
सेट पर झगड़े वाली धारणा पर राधिका आप्टे बोलीं-‘महिलाएं नहीं पुरुष होते हैं ज्यादा असुरक्षित’

अभिनेत्री राधिका आप्टे आगामी वेब सीरीज ‘अक्का’ में अभिनेत्री कीर्ति सुरेश के साथ नजर आएंगी। साथ बातचीत में अभिनेत्री ने उस पुरानी धारणा को खारिज कर दिया कि फिल्म सेट पर महिलाओं के बीच अक्सर झगड़े या टकराव होते हैं।
अभिनेत्री का मानना है कि वर्कप्लेस का माहौल जेंडर पर नहीं बल्कि लोगों के आपसी तालमेल पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “यह बहुत पुरानी धारणा है कि महिलाएं आपस में झगड़ती हैं। मुझे लगता है कि पुरुष महिलाओं से कहीं ज्यादा असुरक्षित होते हैं। सच कहूं तो यह मर्द या औरत की बात नहीं है, यह आपसी तालमेल की बात है। आप कुछ लोगों के साथ घुल-मिल जाते हैं और कुछ के साथ नहीं।”
सेट पर अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए राधिका आप्टे ने माहौल को पॉजिटिव बताया और कैमरे के सामने और पीछे दोनों जगह महिलाओं की मौजूदगी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारा सेट वाकई बहुत अच्छा था। सेट पर लगभग बराबर संख्या में पुरुष और महिलाएं थीं। कास्ट में कई महिलाएं थीं और पर्दे के पीछे काम करने वाली टीम में भी कई महिलाएं थीं। मुझे लगता है कि वहां एक अच्छी सिस्टरहुड वाली फीलिंग थी, जिसने चीजों को और ज्यादा कम्फर्टेबल बना दिया।”
राधिका ने बताया कि साथ काम करने वालों के साथ घुलने-मिलने का मतलब यह नहीं है कि आप हर किसी के करीबी दोस्त बन जाएं, चाहे वह पुरुष हो या महिला। उन्होंने कहा कि लोग करीबी रिश्ता न होने पर भी एक-दूसरे के साथ अच्छे और प्रोफेशनल संबंध बनाए रख सकते हैं।
वेब सीरीज ‘अक्का’ की बात करें, तो यह एक गैंगस्टर कहानी है, जिसमें महिलाएं मुख्य भूमिका में हैं। इस शो के साथ धर्मराज शेट्टी ने डायरेक्शन में अपना डेब्यू किया है, जिन्होंने इस सीरीज को लिखा भी है। 1980 के दशक पर आधारित अक्का एक ऐसी काल्पनिक दुनिया में घटती है जिसे पीढ़ियों से महिलाओं ने बनाया, चलाया और बचाकर रखा है। यह सीरीज 30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी।
मनोरंजन
राजनीति से दूरी पर राज बब्बर का दो टूक जवाब, पंजाबी फिल्मों में वापसी का भी दिया संकेत

एक्टर और सीनियर पॉलिटिकल लीडर राज बब्बर अपने परिवार के साथ अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल पहुंचे। यहां उन्होंने सभी की खुशहाली और भलाई के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने पंजाबी सिनेमा में हो रहे काम की तारीफ की और जल्द ही पंजाबी इंडस्ट्री में अपने नए प्रोजेक्ट के साथ जुड़ने का इशारा भी दिया।
राज बब्बर के इस बयान से उनके फैंस को एक बार फिर उन्हें पंजाबी फिल्मों में देखने की उम्मीद जगी है। वहीं, राजनीति से दूरी बनाने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी से दूरी नहीं बनाई है।
राज बब्बर ने मीडिया से बातचीत में कहा, ”मैंने किसी से दूरी नहीं बनाई, वाहेगुरु जैसा कहते हैं, हम उसी रास्ते पर चलते हैं।”
पंजाबी इंडस्ट्री के बारे में बात करते हुए राज बब्बर ने आगे कहा, ”पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अच्छी कहानियों पर काम हो रहा है। शानदार फिल्में बनाई जा रही हैं। हम भी जल्द ही इस इंडस्ट्री में काम करते नजर आएंगे।”
हालांकि, उन्होंने अपने नए प्रोजेक्ट का नाम, कहानी या बाकी जानकारी नहीं दी। ऐसे में फिलहाल यह साफ नहीं है कि वह किसी फिल्म में अभिनय करेंगे या किसी दूसरे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनेंगे।
बता दें कि राज बब्बर का पंजाबी सिनेमा से पुराना नाता रहा है। हिंदी फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने के साथ उन्होंने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया है। ‘चन्न परदेसी’, ‘लौंग दा लश्कारा’, ‘माड़ी दा दीवा’, ‘माहौल ठीक है’ और ‘यारां नाल बहारां’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने पंजाबी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। साल 2021 में वह पंजाबी कॉमेडी-हॉरर फिल्म ‘भूत अंकल तुसी ग्रेट हो’ में नजर आए। इसके बाद 2024 में रिलीज हुई पंजाबी फिल्म ‘शाहकोट’ में भी उन्होंने काम किया। इस फिल्म में वह गुरु रंधावा और ईशा तलवार के साथ दिखाई दिए। ‘शाहकोट’ के जरिए उन्होंने पंजाबी सिनेमा में वापसी की थी।
वहीं, उनके राजनीतिक करियर के बारे में बात करें, तो उन्होंने 1989 में जनता दल के साथ राजनीतिक सफर शुरू किया था। बाद में वह समाजवादी पार्टी से जुड़े और 1994 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे। वह 1999 में आगरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और 2004 में दोबारा इसी सीट से चुने गए।
साल 2006 में समाजवादी पार्टी से उनके रिश्तों में खटास आई। इसके बाद 2008 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने फिरोजाबाद से लोकसभा चुनाव जीता। आगे चलकर वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बने और 2016 से 2019 तक इस पद पर रहे। 2015 में वह उत्तराखंड से दोबारा राज्यसभा के सदस्य बने।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज बब्बर को हरियाणा की गुरुग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
मनोरंजन
‘बच्चों को देर से समझ आती है माता-पिता की अहमियत’, जब पिता को याद कर भावुक हुए थे अजय देवगन

बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने साल 2021 में एडवेंचर रियलिटी शो ‘इंटू द वाइल्ड विद बेयर ग्रिल्स’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने अपने पिता और मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन के साथ अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की थी।
अजय ने बताया था कि उम्र बढ़ने के साथ बच्चों का अपने माता-पिता को देखने का नजरिया बदल जाता है। खासकर जब वे खुद माता-पिता बनते हैं, तब उन्हें समझ आता है कि उनके माता-पिता ने उनके लिए कितना कुछ किया है।
शो के दौरान होस्ट बेयर ग्रिल्स ने अजय से उनके पिता के निधन के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, ”आपने हाल ही में अपने पिता को खोया है।” इस पर अजय ने जवाब दिया, ”हां, दो साल पहले।” बेयर ग्रिल्स ने कहा कि पिछले दो साल उनके लिए काफी मुश्किल रहे होंगे।
इसके बाद अजय ने बताया कि माता-पिता को खोना बेहद मुश्किल होता है, लेकिन बचपन और युवावस्था में अक्सर बच्चे उनके योगदान को ठीक से समझ नहीं पाते। उन्होंने कहा, ”अपने माता-पिता को खोना मुश्किल होता है, क्योंकि जिंदगी के 20 साल की उम्र तक आप उनकी परवाह नहीं करते। आपको लगता है कि वे बेवकूफ हैं, उन्हें कुछ नहीं पता और आपको सब कुछ पता है।”
अजय ने आगे कहा, ”लेकिन जब आपके अपने बच्चे होते हैं, तब आपको समझ आता है कि माता-पिता क्या होते हैं। वे आपके लिए सबसे अच्छा चाहते हैं। हालांकि, इस बात को समझने में काफी समय लग जाता है।”
बातचीत के दौरान बेयर ग्रिल्स ने अजय से उनके पिता की बीमारी के बारे में भी पूछा। इस पर अभिनेता ने बताया कि वीरू देवगन अल्जाइमर बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा, ”हां, उन्हें अल्जाइमर था। स्टंट की वजह से उन्हें काफी चोटें भी लगी थीं।” अजय ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि शूटिंग के दौरान एक बार उनके पिता को कार के ऊपर से निकलने वाला स्टंट करना था। इस दौरान उनके सिर में चोट लग गई थी।
अजय ने बताया कि उस दौर में फिल्मों के स्टंट के लिए असली कारों और साधारण कांच का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे चोट लगने का खतरा ज्यादा रहता था। उन्होंने कहा, ”क्योंकि उस समय असली कांच इस्तेमाल किया जाता था। अब हम टफ ग्लास का इस्तेमाल करते हैं। उससे भी चोट लगती है, लेकिन असली कांच से बहुत ज्यादा चोट लगती है।”
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