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Friday,03-April-2026
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गूगल ने एशिया-प्रशांत में 84 लाख एमएसएमई को किया प्रशिक्षित

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गूगल ने सोमवार को बताया कि उसने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में उसने ‘ग्रो विद गूगल’ के जरिए 85 लाख एमएसएमई को प्रशिक्षित किया है।

कंपनी ने बताया कि वह छोटे कारोबारों को मदद देने के लिए तथा नए कारोबारों की लॉन्चिंग में सहयोग करने के लिए आने वाले वर्षो में मौजूदा कार्यक्रमों को अधिक विस्तृत करेगा।

गूगल के अध्यक्ष, एशिया-प्रशांत, स्कॉट बोमॉन ने कहा कि उनकी कंपनी एमएसएमई को दक्ष लोगों की तलाश करने में मदद करेगी। उनकी कंपनी गूगल करियर सर्टिफिकेट के जरिये लोगों को कौशल प्रशिक्षण दे रही है।

उन्होंने कहा कि हमारे डेवलपर प्रोग्राम जैसे भारत की ऐपस्केल एकेडमी ऐप निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर विकसित होने में मदद करेगी।

कई प्रमुख संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर गूगल भारत, इंडोनेशिया और सिंगापुर में स्कॉलरशिप दे रहा है। जल्द ही अन्य देशों में भी समान मौके दिए जाएंगे। इस साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ढाई लाख से अधिक स्कॉलरशिप दिए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

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TRUMP

वॉशिंगटन, 3 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है।

जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।

आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।

घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।

फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”

अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है।

उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।”

ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।

इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

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अंतरराष्ट्रीय

पनामा नहर से जुड़े जहाजों को लेकर अमेरिका ने दी चीन को चेतावनी

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वाशिंगटन, 3 अप्रैल : अमेरिका ने चीन को चेतावनी दी है कि पनामा का झंडा लगे जहाजों को निशाना बनाने वाले कदम एक अहम वैश्विक व्यापार मार्ग के लिए खतरा हैं। और इससे व्यवसायों व उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ सकती है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि पनामा का झंडा लगे जहाजों के खिलाफ चीन के हालिया कदम पनामा में कानून के शासन को कमजोर करने के लिए आर्थिक साधनों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।

उन्होंने कहा कि जहाजों की आवाजाही में रोक, देरी और अन्य बाधाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता को कमजोर करती हैं, व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ाती हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली में विश्वास को कम करती हैं।

ये टिप्पणियां चीनी बंदरगाहों पर पनामा का झंडा लगे जहाजों के निरीक्षण और उन्हें रोके जाने की घटनाओं में वृद्धि की रिपोर्टों के बाद आई हैं। पनामा के अधिकारियों ने जांच-पड़ताल में वृद्धि की बात स्वीकार की है, जिसके कारण समुद्री परिचालन में देरी और व्यवधान आया है।

यह विवाद बाल्बोआ और क्रिस्टोबल टर्मिनलों पर पनामा के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सामने आया है। अदालत ने हांगकांग स्थित एक कंपनी को दी गई एक लंबे समय से चली आ रही रियायत को रद्द कर दिया और सरकार को बंदरगाहों का नियंत्रण अपने हाथ में लेने तथा नए ऑपरेटर नियुक्त करने की अनुमति दे दी।

रूबियो ने कहा कि अदालत के फैसले ने पारदर्शिता और कानून के शासन को कायम रखा व निजी ऑपरेटरों को जनहित के प्रति जवाबदेह बनाया। उन्होंने आगे कहा कि यह दर्शाता है कि पनामा अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यावसायिक अवसरों के लिए एक विश्वसनीय भागीदार है।

अमेरिका ने पनामा की संप्रभुता के प्रति अपने समर्थन की भी पुष्टि की। रूबियो ने कहा कि वाशिंगटन पनामा के साथ मजबूती से खड़ा है और देश के साथ आर्थिक तथा सुरक्षा सहयोग का विस्तार करने की उम्मीद करता है।

पनामा नहर वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह वैश्विक समुद्री व्यापार का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा संभालती है। जहाजों की आवाजाही में कोई भी व्यवधान आपूर्ति श्रृंखलाओं में दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, जिससे ऊर्जा, विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने नहर के पास रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर लगातार चिंताएं जताई हैं।

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अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका ने ईरान के अहम पुल पर किया हमला, ट्रंप ने चेतावनी दी- ‘अभी बहुत कुछ होना बाकी है’

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वाशिंगटन, 3 अप्रैल : अमेरिकी सेना ने ईरान में एक अहम हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी के साथ ईरान से समझौता करने की अपील की है। उन्होंने कहा ईरान को समझौता करना चाहिए वर्ना “आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।”

यह हमला बी1 पुल पर हुआ, जो तेहरान को पास के शहर करज से जोड़ता है। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन सेना के लिए सामान ले जाने का एक तय रास्ता था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया।

वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि यह पुल अभी चालू नहीं था और सेना इसका इस्तेमाल नहीं कर रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, जिनमें नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद आम नागरिक भी शामिल थे।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस हमले की सराहना की। उन्होंने लिखा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल गिरा दिया गया है, अब इसका कभी इस्तेमाल नहीं होगा। अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है!” उन्होंने ईरान को यह चेतावनी भी दी कि “इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, एक समझौता कर लो।”

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य व्यवस्था को कमजोर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद देश के भीतर मिसाइल और ड्रोन से जुड़े सामान की आवाजाही को रोकना था।

ईरान के नेताओं ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा, “जब देश की रक्षा की बात आएगी, तो हम में से हर व्यक्ति सैनिक बन जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग तैयार हैं और डटे हुए हैं।

तेहरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि “मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है।”

इस हमले के साथ ही अन्य जगहों पर भी हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, एक हवाई हमले में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को निशाना बनाया गया, जो एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे “अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला” बताया।

यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता नजर आ रहा है। इजरायल ने कहा कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी।

राजनयिक स्तर पर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। रूस, चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया।

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