अंतरराष्ट्रीय
बर्मिघम टेस्ट: इंग्लैंड से रोहित-द्रविड़ की जोड़ी को मिलेगी कड़ी चुनौती
पिछले साल मेहमान टीम के कुछ खिलाड़ियों के कोरोना पॉजिटिव होने के कारण मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट के रद्द होने जाने के बाद से भारतीय क्रिकेट टीम में बहुत कुछ बदल गया है।
कप्तान के रूप में विराट कोहली और मुख्य कोच के रूप में रवि शास्त्री के साथ शुरू हुई श्रृंखला अब रोहित शर्मा के कप्तान के रूप में और राहुल द्रविड़ के कोच की भूमिका निभाने के साथ समाप्त होगी।
दूसरी ओर, इंग्लैंड के पास ब्रेंडन मैकुलम और बेन स्टोक्स की एक नई कोच और कप्तान जोड़ी भी होगी, जिन्होंने अपनी-अपनी भूमिकाओं में क्रिस सिल्वरवुड और जो रूट की जगह ली है।
पिछले साल और अब के बीच एक और अंतर यह है कि टीमों को अब बायोसिक्योर बबल में नहीं रहना पड़ेगा, जो क्रिकेटरों के लिए एक बड़ी राहत होगी।
तत्कालीन विराट कोहली की अगुवाई वाली टीम ने अक्टूबर में 2-1 की बढ़त के साथ इंग्लैंड के दौरे को बीच में छोड़ दिया था और रोहित के पास अब इसे 3-1 बनाने या श्रृंखला जीतने के लिए खेल को ड्रा करने की जिम्मेदारी होगी, जो एक कठिन सवाल होगा, यह देखते हुए कि इंग्लैंड एक अलग लेवल की क्रिकेट खेल रहा है।
यह भी पहली बार होगा, जब रोहित और द्रविड़ दोनों एक साथ विदेशी धरती पर इस तरह की प्रमुख भूमिकाओं के साथ नजर आएंगे। विशेष रूप से, दक्षिण अफ्रीका में कोच के रूप में द्रविड़ का पहला विदेशी दौरा था, लेकिन रोहित चोट के कारण श्रृंखला से चूक गए थे।
रोहित के नेतृत्व वाली भारतीय टीम वर्तमान में इंग्लैंड में लीसेस्टरशायर के खिलाफ अभ्यास मैच खेल रही है और चार दिवसीय मैच का पहला दिन भारत के लिए अच्छा नहीं था, खासकर शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के लिए, जो सस्ते में आउट हो गए थे।
रोहित (25) एक बार फिर हुक शॉट खेलते हुए आउट हो गए, जबकि शुभमन गिल 21 रन पर आउट हो गए और अय्यर बिना खाता खोले ही चलते बने। दूसरी ओर, कोहली (33) अच्छे टच में नजर आए, लेकिन बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे।
यह रिजर्व विकेटकीपर केएस भरत (नाबाद 70) थे, जिन्होंने भारत को संकट से निकालने का काम किया और गुरुवार को अपने अभ्यास मैच के पहले दिन का खेल खत्म होने तक 246/8 पर ले गए। भारत महत्वपूर्ण मुकाबले से पहले कुछ आत्मविश्वास हासिल करने के लिए चल रहे अभ्यास मैच को उच्च स्तर पर समाप्त करना चाहेगा।
यह अभ्यास मैच कोहली को निरंतरता के लिए लंबे संघर्ष से खराब फॉर्म से निकलने का मौका देगा। उन्होंने आईपीएल सहित क्रिकेट के सभी प्रारूपों में पिछले 100 मैचों में कोई भी शतक नहीं लगाया है।
भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच 1 जुलाई से बर्मिघम में शुरू होगा, इसमें केएल राहुल चोटिल होने के कारण उपलब्ध नहीं होंगे और यह देखना दिलचस्प होगा कि ओपनिंग कौन करेगा और लाइन-अप को लेकर द्रविड़ की क्या योजना होगी। माना जा रहा है कि गिल रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग कर सकते हैं, जैसा कि उन्होंने अभ्यास मैच में किया था।
टेस्ट टीम में मौजूदा भारत के किसी भी बल्लेबाज का हाल ही में समाप्त हुए आईपीएल 2022 में अच्छा प्रदर्शन नहीं रहा है। दो अलग-अलग प्रारूपों के बीच तुलना करना अक्सर गलत माना जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों में आत्मविश्वास तब आता है जब उन्होंने किसी बड़े मैच से पहले बेहतर टूर्नामेंट खेला होता।
रिकॉर्ड के लिहाज से भारत ने मार्च के बाद से कोई टेस्ट मैच नहीं खेला है, जब उन्होंने 2-0 से श्रृंखला जीत के साथ श्रीलंका पर अपना दबदबा बनाया था। पुजारा और गिल को छोड़कर, भारतीय खिलाड़ियों में से किसी ने भी लाल गेंद वाली क्रिकेट नहीं खेली है, क्योंकि इसके बाद आईपीएल 2022 में या फिर उसके बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी20 श्रृंखला में खेले थे।
क्रिकेट के जानकार देखना चाहेंगे कि रोहित और द्रविड़ अपने पहले विदेशी दौरे में क्या जादू करते हैं। योजना को ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण होगा क्योंकि इंग्लैंड श्रृंखला को जीत के साथ समाप्त करना चाहेगा क्योंकि उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
स्टोक्स और मैकुलम के नेतृत्व में इंग्लैंड वर्चस्व के साथ एक अलग लेवल का क्रिकेट खेल रहा है, जो लॉर्डस और ट्रेंट ब्रिज में न्यूजीलैंड पर उनकी रोमांचक जीत में काफी स्पष्ट देखने को मिला। इसलिए, निश्चित रूप से वे भारत के लिए कुछ कठिन चुनौतियां पैदा करेंगे।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज का पांचवां टी20 मैच बारिश से धुलने के बाद द्रविड़ से इंग्लैंड की नई टीम के बारे में पूछा गया और उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे न्यूजीलैंड के खिलाफ अच्छा खेल रहे हैं।
भारतीय कोच ने कहा, “इंग्लैंड में टेस्ट मैच खेलना हमेशा एक अच्छा अनुभव होता है, जब आप यहां टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं तो आप इंग्लैंड में वास्तव में अच्छे दर्शकों की संख्या की उम्मीद करते हैं। इंग्लैंड की टीम भी अच्छा खेल रही है। यह थोड़ी अलग स्थिति है। अब, जब हम पिछले साल आए थे, तब इंग्लैंड शायद कमजोर टीम लग रही थी, लेकिन उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ बेहतर क्रिकेट खेला है।”
भारतीय टीम: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, हनुमा विहारी, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, रविचंद्रन अश्विन, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, उमेश यादव , प्रसिद्ध कृष्ण और श्रीकर भारत (विकेटकीपर)।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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