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Saturday,03-October-2026
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पीएम मोदी ने 44वें शतरंज ओलंपियाड के लिए मशाल रिले का शुभारंभ किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में 44वें शतरंज ओलंपियाड के लिए ऐतिहासिक मशाल रिले का शुभारंभ किया। एफआईडीई के अध्यक्ष अर्कडी ड्वोरकोविच ने प्रधानमंत्री को मशाल सौंपी, जिन्होंने इसे ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को बाद में थमा दिए। इस मशाल को चेन्नई के पास महाबलीपुरम में अंतिम समापन से पहले 40 दिनों की अवधि में 75 शहरों में ले जाया जाएगा। हर स्थान पर प्रदेश के शतरंज महारथियों को मशाल मिलेगी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और निसिथ प्रमाणिक, शतरंज के खिलाड़ी और उत्साही, राजदूत, शतरंज अधिकारी उपस्थित थे।

ड्वोरकोविच ने मशाल रिले की नई परंपरा की शुरुआत में पहल करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया, जो दुनिया भर में इस खेल को लोकप्रिय और प्रेरित करेगा।

उन्होंने कहा, “एफआईडीई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और सम्मान देने के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा 2010 में एक स्थान पर शतरंज खेलने वाले प्रधानमंत्री के भाषण को याद किया और सफलता की ओर ले जाने में शिक्षा और खेल के संयोजन की भूमिका की सराहना की।

एफआईडीई अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की है कि शतरंज पूरे भारत और दुनिया भर के सभी स्कूलों का हिस्सा बन जाएगा।

उन्होंने कहा, “भारत आज सबसे तेजी से बढ़ने वाला शतरंज देश है और आपके पास इस पर गर्व करने के लिए सभी आधार हैं। हम आपके नेतृत्व के लिए आभारी हैं कि आप शतरंज के हित में जो काम कर रहे हैं, वह शानदार हैं।”

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज शतरंज ओलंपियाड खेलों के लिए पहला मशाल रिले भारत से शुरू हो रहा है। पहली बार इस वर्ष भारत भी शतरंज ओलंपियाड खेलों की मेजबानी करने जा रहा है। हमें गर्व है कि अपने जन्मस्थान से शुरू होकर और पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा, “सदियों पहले इस खेल की मशाल भारत से पूरी दुनिया में फैली थी। आज शतरंज की पहली ओलंपियाड मशाल भी भारत से निकल रही है। आज जब भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है, अमृत महोत्सव यह शतरंज ओलंपियाड मशाल देश के 75 शहरों में भी जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “एफआईडीई ने फैसला किया है कि प्रत्येक शतरंज ओलंपियाड खेल के लिए मशाल रिले भारत से ही शुरू होगा। यह सम्मान न केवल भारत का सम्मान है, बल्कि शतरंज की इस गौरवशाली विरासत का सम्मान भी है। मैं इसके लिए एफआईडीई और इसके सभी सदस्यों को बधाई देता हूं।”

प्रधानमंत्री ने शतरंज में भारत की विरासत पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने विश्लेषणात्मक और समस्या सुलझाने वाले दिमाग के लिए शतरंज जैसे खेलों का आविष्कार किया था। शतरंज, भारत के माध्यम से, दुनिया के कई देशों में पहुंचा और बहुत लोकप्रिय हो गया।”

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षो में भारत शतरंज में अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर रहा है। इस साल शतरंज ओलंपियाड में भारत का दल अब तक का सबसे बड़ा दल है।

मोदी ने उम्मीद जताई कि भारत इस साल पदकों का नया कीर्तिमान बनाएगा। उन्होंने कई सबक के बारे में बात की जो शतरंज हमें हमारे जीवन में देता है।

जीवन में हर किसी के लिए सही समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जैसे शतरंज के हर मोहरे की अपनी अनूठी ताकत और एक अनूठी क्षमता होती है। यदि आप एक मोहरे के साथ सही कदम उठाते हैं और इसकी शक्ति का उपयोग करते हैं। शतरंज की बिसात की यह विशेषता हमें जीवन का बड़ा संदेश देती है। यदि सही समर्थन और सही वातावरण दिया जाए, तो सबसे कमजोर के लिए भी कोई लक्ष्य असंभव नहीं है।”

शतरंज के एक और सबक पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “शतरंज के खेल की एक और बड़ी विशेषता दूरदर्शिता है। शतरंज हमें बताता है कि वास्तविक सफलता अल्पकालिक सफलता के बजाय दूरदर्शिता से आती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पाठ भारत की खेल नीति और लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) जैसी योजनाओं को सूचित करता है, जिसके परिणाम सामने आने लगे हैं।

तोक्यो ओलंपिक, पैरालंपिक, थॉमस कप और बॉक्सिंग में भारत की हालिया सफलताओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। देश के युवाओं में साहस, समर्पण और ताकत की कोई कमी नहीं है। इससे पहले ये हमारे युवाओं को सही मंच का इंतजार करना पड़ा। आज ‘खेलो इंडिया’ अभियान के तहत देश इन प्रतिभाओं को खोज रहा है और आकार दे रहा है।”

खेलो इंडिया के तहत देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं उभर रही हैं और देश के विभिन्न कस्बों और जिलों में आधुनिक खेल का बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत खेलों को अन्य शैक्षणिक विषयों के रूप में माना गया है। उन्होंने कहा कि फिजियो, स्पोर्ट्स साइंस जैसे खेलों के कई नए आयाम सामने आ रहे हैं और देश में कई खेल विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ी पर उम्मीदों के दबाव को स्वीकार किया और उन्हें जीरो फीसदी टेंशन या दबाव के साथ अपना शत-प्रतिशत देने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि देश आपकी मेहनत और समर्पण को देखता है। जितनी जीत खेल का हिस्सा है, उतनी ही फिर से जीतने की तैयारी भी खेल का हिस्सा है।

शतरंज में एक गलत चाल की कीमत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल में शांत रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सुझाव दिया कि योग और ध्यान इसमें बहुत मदद कर सकते हैं। उन्होंने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और आगामी अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में उत्साहपूर्वक भाग लेने की अपील की।

44वां शतरंज ओलंपियाड 28 जुलाई से 10 अगस्त तक चेन्नई में आयोजित किया जाएगा। 1927 से आयोजित इस प्रतियोगिता की मेजबानी पहली बार भारत में और 30 साल बाद एशिया में हो रही है। 189 देशों के भाग लेने के साथ, यह किसी भी शतरंज ओलंपियाड में सबसे बड़ी भागीदारी होगी।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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