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Tuesday,16-June-2026
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जिग्नेश मेवाणी जमानत मिलने के तुरंत बाद असम में फिर गिरफ्तार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक ‘आपत्तिजनक’ ट्वीट के सिलसिले में असम पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के छह दिन बाद सोमवार को असम पुलिस ने गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी को कोकराझार जिले की एक अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के तुरंत बाद फिर से गिरफ्तार कर लिया। बारपेटा जिले की पुलिस ने एक महिला पुलिस अधिकारी का शील भंग करने समेत विभिन्न आरोपों में मेवाणी को गिरफ्तार किया है।

विधायक के खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों में आईपीसी 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील कृत्य या शब्द का उपयोग), आईपीसी 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकना) और 354 (किसी भी महिला पर हमला या आपराधिक बल का उपयोग करना, अपमान करने का इरादा या यह आशंका कि शील भंग कर देगा) शामिल हैं।

एक महिला सब-इंस्पेक्टर ने 21 अप्रैल को बारपेटा रोड पुलिस स्टेशन में मेवाणी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था, “21 अप्रैल को जब मैं गिरफ्तार आरोपी जिग्नेश मेवाणी को गुवाहाटी हवाईअड्डे से कोकराझार तक अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ ले जा रही थी, आरोपी व्यक्ति ने मेरे प्रति अपशब्द कहे।”

“जब मैंने उसे संभलकर बोलने के लिए कहा तो वह उत्तेजित हो गया और, फिर अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उसने मेरी ओर उंगली उठाई और मुझे डराने की कोशिश की और मुझे बलपूर्वक अपनी सीट पर धकेल दिया। इस प्रकार उसने मेरे कानूनी कर्तव्य निभाने के दौरान मुझ पर हमला किया। धक्का देते समय मुझे अनुचित तरीके से छूकर मेरी शील भंग कर दी। कोकराझार पहुंचने के बाद मैंने तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की सूचना दी।” शिकायत की प्रति आईएएनएस के पास उपलब्ध है।

गुजरात के विधायक को पहली बार बुधवार रात को प्रधानमंत्री के खिलाफ एक ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने यह टिप्पणी 18 अप्रैल को एक ट्वीट के माध्यम से की थी।

मेवाणी को गुरुवार सुबह गुवाहाटी के लिए रवाना किया गया, जहां से उन्हें सड़क मार्ग से कोकराझार ले जाया गया।

कोकराझार जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने गुरुवार को दलित कार्यकर्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी और उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

रविवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और उसे एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया और पुलिस को सोमवार को फिर से मेवाणी को अदालत में पेश करने को कहा।

अपनी दोबारा गिरफ्तारी से पहले मेवाणी ने कहा कि यह भाजपा और आरएसएस की गहरी साजिश है।

उन्होंने अदालत परिसर के बाहर मीडिया से कहा, “वे (भाजपा और आरएसएस) मेरी छवि खराब करने के लिए ऐसा कर रहे हैं और व्यवस्थित रूप से ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने रोहित वेमुला के साथ ऐसा किया, उन्होंने चंद्रशेखर आजाद के साथ किया, अब वे मुझे निशाना बना रहे हैं।”

गुजरात के विधायक को पिछले सप्ताह उनके गृह राज्य से गिरफ्तार किया गया था।

मेवाणी की गिरफ्तारी के बाद से जिन्होंने पहले कांग्रेस को बाहरी समर्थन देने का वादा किया था, पार्टी असम के विभिन्न हिस्सों में गिरफ्तारी को ‘साजिश’ करार देते हुए प्रदर्शन कर रही है।

पार्टी ने मामले को देखने के लिए अपनी कानूनी टीम कोकराझार भी भेजी।

असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने भाजपा सरकार पर एक साधारण ट्वीट से निपटने के लिए राज्य के पुलिस बल का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए आरोप लगाया था कि यह पुलिस द्वारा एक साजिश और ‘गुंडागीरी’ है।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी थाने में मेवाणी से मुलाकात की थी।

माकपा विधायक मनोरंजन तालुकदार और निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई ने भी थाने में मेवाणी से मुलाकात की थी।

41 वर्षीय विधायक पर आपराधिक साजिश, पूजा स्थल से संबंधित अपराध, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शांति भंग करने वाले उकसावे का आरोप लगाया गया था।

भाजपा नेता अरूप कुमार डे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि मेवाणी की टिप्पणी ‘एक निश्चित समुदाय के लोगों के एक वर्ग को उकसा सकती है’।

अपराध

मुंबई : अंधेरी में 60 लाख रुपये से ज़्यादा कीमत के गहने चोरी का ड्रामा करने के आरोप में दो आरोपी गिरफ्तार

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मुंबई पुलिस ने दो ऐसे चालाक आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है, जिन्होंने चोरी और सड़क हादसे की कहानी रची थी और 60 लाख रुपये के गहने चोरी होने का नाटक किया था। हालांकि, पुलिस जांच में पता चला कि सोने के गहने पहुंचाने वाला व्यक्ति ही चोर था और उसने अपने दोस्त के साथ मिलकर चोरी की थी। एमआईडीसी पुलिस ने गोल्ड स्टार कंपनी की कंचन पवार की शिकायत पर चोरी का मामला दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने अपने कर्मचारी अविनाश गंगाधर कदम (26) को सोने के गहने पहुंचाने के लिए भेजा था। उसी समय उसने बताया कि उसकी मोटरसाइकिल एक्टिवा का एक्सीडेंट हो गया था और इस दौरान सोने के गहने और बैग भी चोरी हो गए। उसने बिना किसी चोट या घाव के अस्पताल में भर्ती होने का नाटक किया। इस दौरान पुलिस ने कई सीसीटीवी फुटेज की जांच की और पता चला कि संदिग्ध, जिसका नाम मनोज हेमंत जोगदंड (41) है, एक्सीडेंट से पहले संदिग्ध तरीके से यहां गश्त कर रहा था। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दोनों ने चोरी का नाटक किया था और घटना को एक्सीडेंट बताकर लूट की योजना बनाई थी। इसके बाद पुलिस ने अविनाश को भी हिरासत में ले लिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर रहस्य सुलझा लिया। यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती के निर्देश पर डीसीपी दत्ता नलावड़े ने किया।

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अपराध

पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन मामले में आरोपी नासिक में गिरफ्तार

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महाराष्ट्र के पुणे में दो करोड़ रुपए के गबन के मामले में फरार एक आरोपी को नासिक में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुणे पुलिस में 38 वर्षीय किरण दादासाहेब शिंदे की दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ‘गंगा फर्नहिल’ प्रोजेक्ट की चार इमारतों में फ्लैट बेचने और उससे जुड़े कामों की जिम्मेदारी सीनियर सेल्स मैनेजर साइमन रॉनी पीटर को सौंपी गई थी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने फ्लैट की बिक्री से मिली रकम को कंपनी के खाते में जमा करने के बजाय, अपने सहयोगी बी. चंद्रशेखर के एक फर्जी प्राइवेट बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया। इस तरह उन्होंने 32 ग्राहकों से इकट्ठा किए गए लगभग 2 करोड़ रुपए का गबन किया।

इस शिकायत के आधार पर 9 जून को पुणे के कालेपडल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामला दर्ज होने के बाद पीटर फरार हो गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया।

जांच के दौरान पुणे पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी नासिक शहर में छिपा हुआ है। कालेपडल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अशोक शर्माले से संपर्क किया और पीटर का पता लगाने और उसे पकड़ने में मदद मांगी।

विश्वसनीय जानकारी मिलने पर शर्माले को पता चला कि आरोपी पीटर कार से नासिक आया था और गंगापुर रोड पर कालेनगर में होटल ट्रीबो सफायर के कमरा नंबर 301 में ठहरा हुआ था।

यह जानकारी मिलने पर क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम के अधिकारी घनश्याम भोये और उनकी टीम को तुरंत उस जगह भेजा गया। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और बाद में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए उसे पुणे पुलिस को सौंप दिया।

यह ऑपरेशन गंगापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर शर्माले और उनकी टीम की अगुवाई में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उनकी टीम में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर तुषार देवरे और पुलिस हेड कॉन्स्टेबल रवींद्र मोहिते, गिरीश महाले, भागवत थाविल, घनश्याम भोये, प्रवीण केदारे, गोरख सालुंखे, सुजीत जाधव और तुलसीदास चौधरी शामिल थे।

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अपराध

जम्मू-कश्मीर : सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, भ्रष्टाचार के मामले में दो वन अधिकारियों समेत तीन गिरफ्तार

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सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने रविवार को कहा कि उसने जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में भ्रष्टाचार के आरोप में वन विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में वन विभाग के दो अधिकारी और उसी विभाग का एक कैजुअल लेबरर (अस्थायी कर्मचारी) शामिल है।

गिरफ्तार लोगों की पहचान कावूसा, मगाम के रेंजर मंजूर अहमद मलिक; नुसगाम, खानसाहिब के फॉरेस्टर मंजूर अहमद डार; और रामहामा, बीरवाह के कैजुअल लेबरर बशीर अहमद गनी के तौर पर हुई है।

ये गिरफ्तारियां सीबीआई पुलिस स्टेशन, कश्मीर में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की धारा 7 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 05/2026 के सिलसिले में की गईं।

इससे पहले, सीबीआई की एक टीम ने बडगाम जिले के बीरवाह इलाके में जाल बिछाया और बशीर अहमद गनी को तब पकड़ा जब वह कथित तौर पर 15,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था।

यह ऑपरेशन अवैध रूप से पैसे की मांग के आरोपों के बाद शुरू किया गया था। सूत्रों ने बताया कि आगे की जांच चल रही है।

इस केंद्र शासित प्रदेश की अपनी भ्रष्टाचार-रोधी संस्था, ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) है, जिसे सरकारी अधिकारियों के बीच भ्रष्टाचार की जांच करने और उसे रोकने का अधिकार है।

सीबीआई के पास ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988’ के तहत भ्रष्टाचार की जांच करने का मुख्य अधिकार क्षेत्र है, जिसमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारी, केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारी और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) व सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारी शामिल होते हैं।

सीबीआई के भ्रष्टाचार-रोधी अधिकार क्षेत्र के दायरे और उसके इस्तेमाल से जुड़े कई खास ऑपरेशनल नियम हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के तहत केंद्रीय अधिकार क्षेत्र उन अधिकारियों पर लागू होता है जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी आम तौर पर राज्य के ‘एंटी-करप्शन ब्यूरो’ (एसीबी) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

चूंकि पुलिसिंग राज्य का विषय है, इसलिए सीबीआई राज्यों में ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम’ की धारा 6 के तहत संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दी गई ‘सामान्य सहमति’ के माध्यम से काम करती है।

कई राज्यों ने यह सामान्य सहमति वापस ले ली है, जिसका मतलब है कि सीबीआई को उन इलाकों में जांच करने के लिए मामले-विशेष की सहमति या अदालत के आदेश की जरूरत होती है।

सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट सीबीआई को देश में कहीं भी किसी भी भ्रष्टाचार के मामले की जांच करने का अधिकार दे सकते हैं, भले ही राज्य सरकार सहमति देने से इनकार करे।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थानीय राज्य पुलिस बल और एसीबी के पास भी अपने राज्य में काम कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के तहत मामले दर्ज करने और उनकी जांच करने का अधिकार क्षेत्र है।

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