राष्ट्रीय
एचपी लेजरजेट टैंक एमएफपी 1005 प्रिंटर एसएमबी के लिए उत्पादकता बढ़ाएगा
एचपी भारत में एक नया लास्टर टैंक प्रिंटर लेकर आया है जो समय पर किसी भी समझौते के बिना बढ़ी हुई व्यावसायिक दक्षता, लागत, जटिलता और गुणवत्ता प्रदान करता है। एचपी लेजरजेट टैंक एमएफपी 1005 में स्वचालित डुप्लेक्स प्रिंटिंग, एक 40-शीट ऑटो दस्तावेज फीड सपोर्ट और दैनिक उपयोग के साथ भी लगातार मुद्रण सुनिश्चित करने के लिए 50,000-पृष्ठ का लॉन्ग-लाइफ प्रदान करता है।
हाल के वर्षों में छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों की महत्वपूर्ण वृद्धि को देखते हुए, लेटेस्ट प्रिंटर अगली पीढ़ी के उद्यमियों और व्यापार मालिकों को उनके प्रिंट प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर समर्थन करता है।
23,695 रुपये की कीमत वाला एचपी लेजर टैंक 1005 प्रिंटर कुछ अगली पीढ़ी की विशेषताओं के साथ आता है।
क्या यह हाई-क्वोलिटी, कम लागत वाली छपाई के लिए एक आदर्श विकल्प है? आइए जानते हैं।
सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, प्रिंटर को हाई-वॉल्यूम प्रिंटिंग के लिए बनाया गया है। टैंक में 5,000 पृष्ठों का टोनर पहले से ही भरा हुआ है जो अल्ट्रा-हाई यील्ड एचपी टोनर रीलोड किट के साथ रिफिल पर बचत करने में मदद करता है।
डिवाइस ने शार्प टेक्स्ट और बोल्ड ब्लैक, पेज दर पेज के साथ असाधारण गुणवत्ता प्रदान की।
आप 2,500 और 5,000 पेज के एचपी टोनर रिफिल विकल्पों के साथ कम डाउनटाइम का आनंद लेते हुए लगभग 15 सेकंड में मूल एचपी टोनर को आसानी से फिर से भर सकते हैं।
मूल एचपी टोनर रीलोड किट 90 प्रतिशत तक कचरे को बचा सकता है और 75 प्रतिशत से अधिक कम प्लास्टिक के साथ बनाया गया एक अनूठा डिजाइन प्रदान करता है।
डिवाइस स्वचालित दो-तरफा प्रिंटिंग प्रदान करता है और आप एचपी स्मार्ट ऐप के साथ कभी भी, कहीं भी प्रिंट, स्कैन साझा कर सकते हैं।
एचपी लेजर टैंक 1005 प्रिंटर लगातार और असाधारण प्रिंटिंग सुनिश्चित करने के लिए 50,000-पेज इमेजिंग ड्रम तक लंबे जीवन के साथ कम रखरखाव के लिए एक आदर्श उपकरण है।
अधिकतम उत्पादकता के लिए, आप अपने अपटाइम को 22 पीपीएम तक प्रिंट स्पीड के साथ बढ़ा सकते हैं।
प्रिंटर स्मार्ट-गाइडेड बटन, सेल्फ-रीसेट के साथ डुअल-बैंड वाई-फाई और ब्लूटूथ एलई कनेक्शन, एचपी ‘वॉल्फ सिक्योरिटी एसेंशियल’ फीचर और 150-शीट इनपुट ट्रे के साथ आता है।
प्रिंटर आसानी से कार्यों को संभालता है, चाहे वह प्रिंट हो, स्कैन हो या कॉपी हो, इस प्रकार आपकी दैनिक कार्यालय की जरूरतों को पूरा करता है।
आप अपनी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ एचपी स्मार्ट ऐप का उपयोग कर सहजता से कनेक्ट कर सकते हैं जो कर्मचारियों को अपने मोबाइल डिवाइस से दूरस्थ रूप से प्रिंट करने और ‘स्मार्ट एडवांस’ टूल के साथ उन्नत स्कैनिंग सुविधाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।
एचपी वोल्फ एसेंशियल सिक्योर द्वारा समर्थित उन्नत सुरक्षा सुविधाएं भी संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शामिल की गई हैं।
संक्षेप में, एचपी लेजर टैंक 1005 प्रिंटर मूल्य-सचेत यूजर्स के लिए एक आदर्श विकल्प है, जिन्हें विस्तृत मुद्रण की जरूरत है, जो हमेशा व्यस्त रहते हैं और हर चीज को और अधिक करने के लिए लगातार चुनौती देते हैं।
प्रिंटर समय, लागत, जटिलता और गुणवत्ता से समझौता किए बिना एक बेहतर व्यावसायिक दक्षता को सक्षम करेगा।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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