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Saturday,09-May-2026
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कोरोना महामारी के बाद रिएल एस्टेट में बढ़ा टेक्नोलॉजी का चलन

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देश का रियल एस्टेट क्षेत्र बहुत तेजी से प्रौद्योगिकी को अपना रहा है, जिससे कई मोर्चो पर लोगों को आसानी हो रही है। चाहे बात सही संपत्ति की तलाश की हो, या जटिल कागजी कार्रवाई करने की या फिर संपत्ति खरीदने के लिये ऋण लेने की। संपत्ति का पंजीकरण कराना हो या उसे किराये पर लेना, ऐसा कोई पहलू नहीं है, जो प्रौद्योगिकी से अछूता रह गया हो। रिएल एस्टेट की चरमर्राती पुरानी प्रणालियों को अब डिजिटल रूप दिया जा रहा है।

हाल ही में जारी ग्रांट थॉर्नटन के एक शोध से पता चलता है कि कोरोना महामारी ने नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ऑग्मेंटेड रिएलटी(एआर), वर्चुअल रिएलटी (वीआर), चैटबॉट्स, बिग डाटा, मार्केटिंग ऑटोमेशन, आईओटी आदि को रियल एस्टेट में तेजी से अपनाया जा रहा है। ग्रांट थॉर्नटन के एक विश्लेषक ने कहा है, रियल एस्टेट क्षेत्र में बहुत जरूरी तकनीकी परिवर्तन हो रहा है। इससे खरीदारों, विक्रेताओं और ब्रोकर्स सहित सभी हितधारकों के लिये लेनदेन का पूरा अनुभव बदल जायेगा।

खरीदार संपत्तियों को वर्चुअली देख पायेंगे और संपत्ति के इतिहास और इसके आसपास के बुनियादी ढांचे जैसे डाटा की जानकारी से भी लैस होंगे। अब जानकारी को डिजीटल किया जायेगा और पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया जायेगा।

संपत्ति से स्थानीय बाजार कितनी दूर है, स्कूल, खेल परिसर, कॉलेज, मेट्रो स्टेशन, अस्पताल, वाई-फाई सेवा प्रदाता, इंटरनेट कनेक्टिविटी आदि जैसी चीजों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। इसी तरह विक्रेताओं और ब्रोकर्स को बाजार के बारे में बेहतर जानकारी होगी, जिससे वे ग्राहक की प्राथमिकतायें जान पायेंगे तथा बिना देरी के सही खरीदार तक पहुंच पायेंगे।

ग्रांट थॉर्नटन के विश्लेषक ने कहा, रियल एस्टेट कंपनियां खोज, खरीद, बिक्री और आवास ऋण के हर पहलू में नये जमाने की डिजिटल तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब संपत्ति के मूल्यों , निर्माण की गुणवत्ता आदि को देखते हुये चंद सेकंड में लाखों दस्तावेजों के माध्यम से डाटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बना सकता है।

कंपास इंडिया डेवलपमेंट सेंटर में वरिष्ठ निदेशक और एआई प्रमुख रुशी भट्ट के अनुसार वैश्विक रियल एस्टेट टेक कंपनियां जैसे कंपास, इंक. रियल एस्टेट संपत्ति की खरीद फरोख्त में एक बेहद सहज और सुव्यवस्थित अनुभव प्रदान करने के लिये एआई का लाभ उठाती हैं।

उन्होंने कहा,ऑनलाइन पंजीकरण, संपत्ति का वर्चुअल टूर और ऑटोमेशन जैसे नवाचारों को तीव्र गति से अपनाया जा रहा है। पहले रिएल एस्टेट पारंपरिक था लेकिन अब यह क्षेत्र धीरे-धीरे डिजिटल इकोसिस्टम को अपना रहा है।

रूशी के अनुसार, हाइपर-पर्सनलाइज्ड सॉल्यूशंस और निर्बाध संचालन की बढ़ती मांग कंपास को वैश्विक रियल एस्टेट क्षेत्र में क्रांति लाने में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है, जो नवीन प्रौद्योगिकी और अभूतपूर्व कनेक्टिविटी द्वारा संचालित है।

ऐसा कहा जा सकता है कि रिएल एस्टेट क्षेत्र में तकनीकी उपकरण पूर्वाग्रह को दूर कर रहे हैं, अनुमान को समीकरण से बाहर कर रहे हैं, पारदर्शिता का परिचय दे रहे हैं और पूरी लेनदेन प्रक्रिया को सुचारू बना रहे हैं। हाल के वर्षों में लोगों को रहने, गाड़ी चलाने, काम करने, छुट्टियां मनाने आदि के तरीकों में तेज बदलाव हुआ, जिसे स्मार्ट लीविंग कहा जाता है। रियल एस्टेट क्षेत्र में टेक्नोलॉली को अपनाने की रफ्तार भले ही धीमी रही है लेकिन सबके जीवन को आसान बनाने के लिये आखिरकार इस क्षेत्र में भी अब बदलाव आ गया है।

राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय

राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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राजनीति

बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

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पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

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