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Sunday,03-May-2026
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रेलटेल लगभग 200 रेलवे स्टेशनों पर कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क का संचालन करेगा

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 रेलटेल लगभग 200 रेलवे स्टेशनों पर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) कियोस्क का संचालन करेगा। यह योजना सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के साथ साझेदारी में संचालित की गई है। ये रेलवे स्टेशनों पर आने-जाने वाले लोगों के लिए एक बड़ी सुविधा है। रेलवे के अनुसार पायलट आधार पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी सिटी स्टेशन और प्रयागराज सिटी स्टेशन पर दो कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पहले ही संचालित किए जा चुके हैं। इन कियोस्क को ‘रेलवायर साथी’ नाम दिया गया है। ये कियोस्क कॉमन सर्विस सेंटर के ग्राम स्तरीय उद्यमियों (वीएलई) द्वारा संचालित किए जाएंगे।

इस एक अद्वितीय जन-हितैषी पहल के तहत रेल मंत्रालय के एक सार्वजनिक उपक्रम, रेलटेल ने पूरे भारत में रेलवे स्टेशनों पर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) कियोस्क (स्टॉल) संचालित करने की एक योजना प्रारंभ की है। इस प्रयास से रेलवे स्टेशनों पर आने-जाने वाले लोगों को स्टेशन पर ही ‘कॉमन सर्विस सेंटर सेवाओं द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं का लाभ उठाने में सहायता मिलेगी। ‘कॉमन सर्विस सेंटर सेवाओं द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में यात्रा टिकट (ट्रेन, हवाई, बस आदि) की बुकिंग, आधार कार्ड, वोटर कार्ड, मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान, पैन कार्ड, आयकर, बैंकिंग, बीमा आदि सेवाएं शामिल हैं।

यह योजना ‘सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड’ (सीएससी-एसपीवी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के साथ साझेदारी में संचालित की गई है। इन कियोस्कों का संचालन ग्राम स्तरीय उद्यमियों द्वारा किया जाएगा।

इन कियोस्क का नाम ‘रेलवायर साथी कियोस्क’ रखा गया है। सबसे पहले, उत्तर प्रदेश के वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन और प्रयागराज सिटी रेलवे स्टेशन पर रेलवॉयर साथी ‘कॉमन सर्विस सेंटर कियोस्क को पायलट आधार पर चालू किया गया है। इसी तरह के कियोस्क लगभग 200 रेलवे स्टेशनों पर चरणवार संचालित किए जाएंगे। इनमें से 44 दक्षिण मध्य रेलवे में, 20 पूर्वोत्तर सीमा रेलवे में, 13 पूर्व मध्य रेलवे में, 15 पश्चिम रेलवे में, 25 उत्तर रेलवे में, 12 पश्चिम मध्य रेलवे में हैं, 13 पूर्वी तट रेलवे में हैं और 56 पूर्वोत्तर रेलवे में हैं।

रेलटेल ने 6090 स्टेशनों पर जिनमें से 5000 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं सार्वजनिक वाई-फाई (‘रेलवायर’ब्रांड नाम के अंतर्गत) उपलब्ध कराया है जो विश्व के सबसे बड़े एकीकृत वाई-फाई नेटवर्कों में से एक है। स्टेशनों पर इस मौजूदा अवसंरचना का उपयोग करते हुए, रेलटेल, ‘कॉमन सर्विस सेंटर के साथ साझेदारी में, ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाएं देने की योजना बना रही है जो डिजिटल डिवाइड को पाटने और डिजिटल इंडिया के माननीय प्रधानमंत्री जी के विजन को पूरा करने की दिशा में अग्रसर होगी।

इस सम्बंध में सीएमडी/रेलटेल, पुनीत चावला ने कहा, ‘ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अक्सर अवसंरचना व संसाधनों की कमी के साथ-साथ इंटरनेट का उपयोग करने की जानकारी के अभाव के कारण विभिन्न ई-गवर्नेंस सेवाओं का लाभ उठाने या डिजिटलाइजेशन की सुविधाओं को प्राप्त करने में कठिनाई होती है। ये रेलवॉयर साथी कियोस्क ग्रामीण आबादी की सहायता के लिए ग्रामीण रेलवे स्टेशनों पर इन आवश्यक डिजिटल सेवाओं को लाएंगे।’

रेलटेल के साथ साझेदारी के बारे में बात करते हुए सीएससी-एसपीवी प्रबंध निदेशक डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने कहा कि दूरदराज के गांवों में कनेक्टिविटी के अभाव के कारण ग्रामीण भारत में डिजिटल सेवाओं की पहुंच अक्सर बाधित होती है। रेलवे स्टेशनों पर रेलटेल के वाई-फाई और कियोस्क इंफ्रास्ट्रक्च र की उपलब्धता से, हमारे ग्राम स्तरीय उद्यमी हमारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में सक्षम हो सकेंगे।

राष्ट्रीय

पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजी शिपिंग का बड़ा कदम, निर्यातकों को राहत देने के निर्देश; नाविकों को सुरक्षित रहने की सलाह

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नई दिल्ली, 9 अप्रैल : पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है। कि युद्ध प्रभावित पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) क्षेत्र में फंसे माल (कार्गो) वाले निर्यातकों को राहत दी जाए और उन्हें जरूरी छूट प्रदान की जाए।

एक सर्कुलर में कहा गया है कि बंदरगाह प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली छूट, जैसे डिटेंशन चार्ज, ग्राउंड रेंट, रीफर प्लग-इन (कनेक्टेड लोड) और अन्य टर्मिनल चार्ज, सभी मामलों में समान रूप से निर्यातकों तक नहीं पहुंच रही हैं।

डीजी शिपिंग ने निर्देश दिया है कि पोर्ट अथॉरिटी द्वारा दी गई सभी छूट पारदर्शी तरीके से सीधे संबंधित हितधारकों, जिनमें फ्रेट फॉरवर्डर्स और एनवीओसीसी शामिल हैं, को दी जाएं और वे आगे इसे निर्यातकों तक पहुंचाएं।

इसके साथ ही बंदरगाह प्राधिकरणों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे टर्मिनल स्तर पर इसकी निगरानी करें ताकि छूट का लाभ बिना देरी के सही लोगों तक पहुंचे।

रेगुलेटर ने पोर्ट और टर्मिनल ऑपरेटर्स से कहा है कि वे इन निर्देशों का सख्ती से पालन करें ताकि लागत में पारदर्शिता बनी रहे, निर्यातकों के हित सुरक्षित रहें और संकट के दौरान कामकाज प्रभावित न हो।

यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्यातक 497 करोड़ रुपए की रेजिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना के तहत दावा कर सकें और लाभ उठा सकें।

डीजी शिपिंग ने कहा, “शिपिंग कंपनियां ऐसे मामलों में पूरी पारदर्शिता और ऑडिट की सुविधा बनाए रखें। साथ ही, कार्गो पर लगने वाला वॉर रिस्क प्रीमियम भी बदला है, जो पहले के निर्देशों के अनुरूप नहीं हो सकता। इस मामले को बीमा कंपनियों के साथ उठाया जा रहा है।

इसी बीच डीजी शिपिंग ने ईरान के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी भी जारी की है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक किनारे पर हैं, वे घर के अंदर रहें, संवेदनशील जगहों से दूर रहें और अपनी आवाजाही के लिए भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें।

वहीं, जो नाविक जहाज पर हैं, उन्हें जहाज पर ही रहने और बिना जरूरत किनारे पर जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सभी कर्मियों से सतर्क रहने, आधिकारिक जानकारी पर नजर रखने और अपनी कंपनी व संबंधित अधिकारियों के संपर्क में बने रहने की अपील की गई है।

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राष्ट्रीय

राणा अयूब के संदेशों पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स से मांगा जवाब

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नई दिल्ली, 8 अप्रैल : दिल्ली उच्च न्यायालय में पत्रकार राणा अयूब से जुड़े एक मामले में अहम सुनवाई हुई है।

यह मामला वर्ष 2013 से 2017 के बीच उनके सामाजिक माध्यम पर किए गए संदेशों से जुड़ा है, जिनमें उन पर भारत विरोधी भावना फैलाने का आरोप लगाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राणा अयूब द्वारा हिंदू देवी-देवताओं और वीर सावरकर को लेकर किए गए कुछ संदेशों पर कड़ी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि ये संदेश अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक प्रकृति के प्रतीत होते हैं, जो समाज में तनाव पैदा कर सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और एक्स को निर्देश दिया है कि वे इन संदेशों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दें। साथ ही, यह भी बताएं कि आगे क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में देरी उचित नहीं है और इसे तुरंत सुना जाना जरूरी है।

न्यायालय ने राणा अयूब को भी नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में अपना पक्ष रखने को कहा है। अदालत का कहना है कि यह मामला सार्वजनिक भावना और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों का जवाब समय पर आना जरूरी है।

साथ ही, दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और सोशल साइट एक्स को निर्देश दिया है कि वे अगले दिन तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है, जहां इस पूरे प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

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राजनीति

बारामती उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे की इस शर्त से बढ़ी सियासी हलचल

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पुणे, 6 अप्रैल : बारामती विधानसभा उपचुनाव में एक नए मोड़ आ गया है। कांग्रेस उम्मीदवार और वकील आकाश मोरे ने साफ कह दिया है कि वह अपना नामांकन तभी वापस लेंगे, जब महाराष्ट्र सरकार अजित पवार के विमान हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल संयोग नहीं था और सच सामने लाना बेहद जरूरी है।

आकाश मोरे ने कहा, “हम यह लड़ाई लोकतंत्र की रक्षा और भाजपा की विचारधारा का विरोध करने के लिए लड़ रहे हैं। अगर सरकार इस मामले में एफआईआर दर्ज करती है और गंभीर जांच करती है, तभी मैं अपना नामांकन वापस लेने पर विचार करूंगा।”

आकाश मोरे पेशे से वकील हैं और उनकी एक राजनीतिक विरासत है। उनके पिता 2014 में अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।

उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इतने बड़े नेता की मौत को गंभीरता से लेना चाहिए। मोरे ने कहा, “बारामती और महाराष्ट्र के ‘कर्तापुरुष’ चले गए। सवाल यह है कि आखिर एफआईआर क्यों नहीं हुई या जांच क्यों नहीं हुई? हमने अजित दादा का राजनीतिक विरोध किया, ये हो सकता है, लेकिन राज्य के विकास के मामले में उनके साथ खड़े रहे। अगर कोई बड़ा नेता हादसे में मर जाए और एफआईआर दर्ज न हो, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है।”

उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल भी इस रुख से सहमत हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे की शर्त पूरी तरह जायज है। उन्होंने कहा, “अजित दादा के निधन के बाद उनके परिवार ने भी जांच की मांग की थी। इसलिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी, लेकिन यह प्रक्रिया कहां अटकी? रोहित पवार को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महाराष्ट्र भर में दौड़ लगानी पड़ी और आखिरकार यह एफआईआर केवल कर्नाटक में हुई। क्या यही संवेदनशीलता है? हमारी मांग है कि एफआईआर महाराष्ट्र, खासकर बरामती में दर्ज हो तभी हम निर्णय करेंगे।”

अतुल लोंढे ने कहा कि मोरे सोमवार को कांग्रेस की तरफ से नामांकन दाखिल करेंगे। इस पर काफी चर्चा और आलोचना हो रही है। कई लोग पुरानी परंपराओं का हवाला देते हुए सुझाव दे रहे हैं कि कांग्रेस को इस चुनाव में निर्विरोध मतदान होने देना चाहिए। क्या नांदेड में वसंतराव चव्हाण की मृत्यु के बाद चुनाव नहीं हुए थे? क्या भरत भालके के निधन के बाद मंगलवेढा में चुनाव नहीं हुए थे? ऐसे अनगिनत उदाहरण दिए जा सकते हैं जहां भाजपा ने अपनी सुविधा के अनुसार राजनीति की है।”

कांग्रेस के इस कदम ने निर्विरोध चुनाव की संभावना को रोक दिया है। पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि शरद पवार और उद्धव ठाकरे के समर्थन से सुनेत्रा पवार बिना मुकाबले चुनाव जीत सकती हैं, लेकिन कांग्रेस द्वारा आकाश मोरे को मैदान में उतारे जाने के फैसले ने सबको चौंका दिया और अब नामकंन वापस लेने के लिए ये मांग रखी है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पहले कोशिश की कि चुनाव बिना मुकाबले हो, लेकिन कांग्रेस ने आकाश मोरे को मैदान में उतारकर खेल बदल दिया। जैसे-जैसे नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख नजदीक आ रही है, सबकी नजरें अब महायुति सरकार पर हैं कि वह इस मांग का क्या जवाब देती है। इस बीच, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बारामती के लोगों से अपील की है कि सुनेत्रा पवार को रिकॉर्ड बहुमत से चुने।

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