अंतरराष्ट्रीय
दक्षिण अफ्रीका ने वनडे सीरीज के लिए टीम का किया ऐलान
दक्षिण अफ्रीका ने भारत के खिलाफ 19 जनवरी से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए टीम का ऐलान किया है। टीम में पहली बार हरफनमौला खिलाड़ी मार्को जेनसेन को जगह दी गई है। जेनसेन ने हाल ही में सुपरस्पोर्ट पार्क में पहले टेस्ट में भारत के खिलाफ डेब्यू किया था और दूसरी पारी में 4/55 विकेट लिए थे। वहीं, उन्होंने पहली पारी में बल्ले से योगदान भी दिया था।
क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (सीएसए) ने रविवार को 17 सदस्यीय टीम की घोषणा करते हुए यह भी कहा कि तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्टजे एकदिवसीय श्रृंखला में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वह चोट से उबर नहीं पाए हैं।
सीएसए संयोजक विक्टर म्पित्सांग ने एक बयान में कहा, “यह एक बहुत ही शानदार टीम है और हम यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि वे क्या कर पाते हैं। हमारे कई खिलाड़ियों के लिए भारतीय टीम के खिलाफ खेलने का बेहतरीन मौका है और यह युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी श्रृंखला होगी। उन्होंने टेम्बा बावुमा और कोच मार्क बाउचर को श्रृंखला के लिए शुभकामनाएं दी हैं।”
दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला आईसीसी क्रिकेट विश्व कप सुपर लीग का हिस्सा है। भारत 49 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर है, जबकि दक्षिण अफ्रीका 39 अंकों के साथ नौवें स्थान पर है। प्रत्येक टीम को एक मैच जीतने के लिए दस अंक मिलते हैं। वहीं, एक टाई या कोई परिणाम न आने पर पांच अंक दिए जाते हैं।
दक्षिण अफ्रीका वनडे टीम : टेम्बा बावुमा (कप्तान), केशव महाराज (उपकप्तान), क्विंटन डी कॉक (विकेटकीपर), जुबैर हमजा, मार्को जेनसेन, जेनमैन मलान, सिसांडा मगला, एडेन मार्करम, डेविड मिलर, लुंगी एनगिडी, वेन पार्नेल, एंडिले फेहलुकवेओ, ड्वेन प्रिटोरियस, कगिसो रबाडा, तबरेज शम्सी, रासी वैन डेर डूसन और काइल वेरेने।
अंतरराष्ट्रीय
ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ

TRUMP
वाशिंगटन, 3 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। जिसके तहत स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर के आयात पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
इस आदेश के तहत, आयातित धातु उत्पादों और उनसे बने अन्य उत्पादों के “पूरे कस्टम मूल्य” पर टैरिफ लागू होगा। प्रशासन ने कहा कि इस कदम से पिछली नीतियों में मौजूद उन कमियों को दूर किया जा सकेगा, जिनका फायदा उठाया जा रहा था।
यह फैसला पहले से लागू सेक्शन 232 के नियमों को आगे बढ़ाता है। इस कानून के तहत पहले ही कहा जा चुका है कि धातुओं का बढ़ता आयात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
नए नियमों के तहत, ज्यादातर स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। वहीं, इनसे बने कुछ अन्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
अधिकारियों का कहना है कि अब आयातकों को असली कीमत के आधार पर टैक्स देना होगा, ताकि कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश न हो सके।
प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संशोधित प्रक्रिया को समझाते हुए कहा, “हम अमेरिका में अमेरिकी ग्राहकों द्वारा स्टील के लिए चुकाए गए पूरे मूल्य का 50 प्रतिशत शुल्क के रूप में लेंगे।”
अधिकारी ने आगे कहा कि इस नई व्यवस्था को इसलिए तैयार किया गया है ताकि निर्यातक कीमतों में जो हेरफेर करते हैं, उसे खत्म किया जा सके। अधिकारी ने कहा, “वे जान-बूझकर कीमतों को आर्टिफिशियल रूप से कम करके दिखाते थे और अब हम इस चीज को खत्म कर रहे हैं, क्योंकि वे मूल रूप से इस पूरी व्यवस्था को धोखा दे रहे थे।”
प्रशासन ने अन्य उत्पादों के लिए भी एक ढांचा पेश किया है। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा बहुत कम होगी, उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट दी जाएगी; जबकि जिन उत्पादों में धातु की मात्रा काफी ज़्यादा होगी, उन पर एक निश्चित दर से शुल्क लगाया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, “अगर किसी उत्पाद में स्टील, एल्यूमीनियम या तांबे की मात्रा काफी ज़्यादा है तो उस पर सीधे-सीधे 25 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा।”
अधिकारियों का तर्क है कि इस बड़े बदलाव से नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा और आयातकों के लिए प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, जबकि दूसरी ओर नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और भी मजबूत होगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले लगाए गए टैरिफ के बाद अमेरिका में एल्युमिनियम और स्टील का उत्पादन बढ़ा है। एल्युमिनियम की क्षमता का इस्तेमाल करीब 50.4 प्रतिशत और स्टील का 77.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सरकार का कहना है कि अब इन आंकड़ों को 80 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने के लिए और सख्ती जरूरी है, ताकि कोई भी कंपनियां नए तरीकों से नियमों को दरकिनार न कर सकें।
इस आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो आगे चलकर और उत्पादों को भी इस टैक्स के दायरे में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि इन बदलावों का आम लोगों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और इससे चीजों की कीमतों में खास बढ़ोतरी नहीं होगी। उनका कहना है कि यह बदलाव सिर्फ व्यापार से जुड़े नियमों में है, खुदरा कीमतों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
ये नए टैरिफ 6 अप्रैल से लागू होंगे और उसी दिन से अमेरिका में आने वाले सभी संबंधित सामान पर लागू हो जाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान: पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी की हालत गंभीर, घर पर हुई थी एयर स्ट्राइक

तेहरान, 2 अप्रैल : ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और सुप्रीम लीडर के सलाहकार कमाल खराजी की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार एयर स्ट्राइक में उनकी पत्नी की मौत हो गई जबकि खराजी घायल हो गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में उनके घर पर हमला हुआ। इस हमले के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। ईरानी मीडिया और स्थानीय रिपोर्ट्स में इसे एक ‘हत्या की कोशिश’ बताया गया है।
खराजी ईरान की ‘स्ट्रेटेजिक फॉरेन रिलेशंस काउंसिल’ के अध्यक्ष हैं। यह संस्था सीधे देश के सर्वोच्च नेता को सलाह देती है और विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल के हमले लगातार पांचवें हफ्ते भी ईरान पर जारी हैं।
ईरानी मीडिया ने बताया कि बुधवार को तेहरान में खराजी के घर को निशाना बनाया गया था। ‘शर्ग’, ‘एतेमाद’ और ‘हम मिहान’ दैनिक के अनुसार, उनकी हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गुरुवार को भी तेहरान, इस्फाहान और शिराज पर हवाई हमलों की जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी। दक्षिणी ईरान के लारेस्तान में चार लोगों के मारे जाने की खबर है।
इस बीच, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कर दावा किया कि राजधानी स्थित 100 साल पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला कर उसे तबाह कर दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने एक्स पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इस ‘आक्रामकता’ की ओर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने इसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया।
उन्होंने लिखा, “वैश्विक स्वास्थ्य के एक सदी पुराने स्तंभ ‘ईरानी पाश्चर इंस्टीट्यूट’ के खिलाफ की गई आक्रामकता, वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला है। यह जिनेवा कन्वेंशन और आईएचएल के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (आईएचएल) को टैग करते हुए कहा, “हम डब्ल्यूएचओ, आईसीआरसी और वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं से अपील करते हैं कि वे इस हमले की निंदा करें, नुकसान का आकलन करें और पुनर्निर्माण में सहायता करें।
अंतरराष्ट्रीय
‘हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, कोई चिंता नहीं’, होर्मुज स्ट्रेट तनाव के बीच ईरानी दूतावास का आश्वासन

नई दिल्ली, 2 अप्रैल : ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण संघर्ष दूसरे महीने में आ चुका है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान और ईरानी ताकत को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है, वहीं ईरान भी लगातार हमले तेज कर रहा है। इन सबके बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। मौजूदा हालात के बीच भारत में ईरानी दूतावास ने कहा है कि भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं।
दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं।” इसे रिपोस्ट कर भारत में ईरानी दूतावास ने लिखा, “होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं।”
तेहरान के मेयर के प्रवक्ता अब्दुलमोहर मोहम्मदखानी ने कहा कि हाउसिंग यूनिट्स को हुए नुकसान में कांच, दरवाजे और खिड़कियों जैसी छोटी-मोटी मरम्मत से लेकर बड़े रीकंस्ट्रक्शन या पूरे रेनोवेशन तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 1,869 परिवारों को घर की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि करीब 1,245 परिवारों को 23 रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किया गया है।
मोहम्मदखानी ने आगे कहा कि अब तक 4,000 से ज्यादा रेजिडेंशियल यूनिट्स की मरम्मत शुरू हो चुकी है, जिन्हें नगर निकाय ने या तो किया है या वित्तीय समर्थन दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्रंप के भाषण के जवाब में एक बयान जारी किया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि ईरान को दो से तीन हफ्ते के अंदर एक समझौते के लिए सहमत होना होगा या अपने हर पावर प्लांट पर हमले का सामना करना होगा।
ट्रंप की इस धमकी को लेकर इस्माइल बघाई ने कहा, “हम युद्ध, बातचीत, सीजफायर और फिर उसी पैटर्न को दोहराने के इस बुरे चक्र को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उन्होंने चल रहे संघर्ष को “न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और उससे आगे के लिए विनाशकारी” बताया।
बघाई ने कहा कि जब तक अमेरिकी-इजरायली हमले जारी रहेंगे, ईरान जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। तेहरान अपने खाड़ी पड़ोसियों को दुश्मन नहीं मानता।
उन्होंने कहा, “हमने बार-बार कहा है कि हम उन सभी के साथ अपने अच्छे पड़ोसी वाले संबंध जारी रखने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। समस्या यह है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमले को अंजाम देने के लिए उनके इलाकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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