राष्ट्रीय
पेटीएम की अत्यधिक महंगी मूल्य निर्धारण नीति बनी आईपीओ की असफलता का कारण
पेटीएम साल की सबसे चर्चित और प्रत्याशित लिस्टिंग रही है, लेकिन डी-डे पर इसका यह काफी निराशाजनक साबित हुआ है। दूसरी ओर, मैपमायइंडिया के पास अपने आईपीओ के लिए अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण बिल्ड-अप था, लेकिन यह निवेशकों के बीच हिट साबित हुआ। निजी धन प्रबंधन (वेल्थ मैनेजमेंट) कंपनी क्लाइंट एसोसिएट्स ने दो आईपीओ की तुलना करते हुए एक नोट में यह बात कही है।
नोट में कहा गया है, “हमारी पहले की सिफारिश के अनुसार और प्रचार के विपरीत, पेटीएम का आईपीओ केवल 1.89 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि मैपमायइंडिया साल के सबसे सफल टेक-आईपीओ में से एक निकला।”
पेटीएम के निराशाजनक आईपीओ प्रदर्शन के कारणों का हवाला देते हुए, क्लाइंट एसोसिएट्स ने कहा कि पेटीएम ने पिछले कुछ वर्षों में कई व्यवसायों जैसे वॉलेट, पेमेंट गेटवे, उपभोक्ता ऋण क्रेडिट कार्ड, धन, बीमा वितरण, टिकटिंग, गेमिंग, विज्ञापन में प्रवेश किया है, लेकिन वह अपने मोबाइल-वॉलेट व्यवसाय को छोड़कर अब तक उनमें से किसी में भी श्रेणी का लीडर बनने में कामयाब नहीं हुआ है।
एक कारण यह है कि इनमें से प्रत्येक कार्यक्षेत्र में इसे तीव्र प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। नोट में कहा गया है कि बीएनपीएल के क्षेत्र में अमेजन, गूगल और फ्लिपकार्ट जैसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र के दिग्गजों, वित्तीय उत्पादों के वितरण आदि ने इसकी इकाई अर्थशास्त्र को कम कर दिया है और इसे किसी भी सार्थक बाजार हिस्सेदारी हासिल करने से रोक दिया है।
नई व्यावसायिक श्रेणियों में पेटीएम के निरंतर उद्यम ने इसके निवेशकों और उपभोक्ताओं को इसके मूल मूल्य प्रस्ताव के बारे में भ्रमित करते हुए इसके व्यापक ²ष्टिकोण और व्यावसायिक फोकस के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इसके अलावा, तेजी से वृद्धि और यूपीआई भुगतानों की स्वीकृति के कारण मोबाइल-वॉलेट व्यवसाय तेजी से अप्रासंगिक हो रहा है, जो मुफ्त है और साथ ही मुद्रीकरण योग्य नहीं हैं।
नोट में कहा गया है कि उपभोक्ताओं और व्यापारियों के आधार के लिए ऋण वितरण यानी ऋण वितरण पेटीएम का अगला बड़ा कोर्स प्रतीत होता है, लेकिन वहां भी, चीनी फर्मों के बड़े स्वामित्व के कारण बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए नियामक जोखिम अधिक रहता है।
पेटीएम के आसपास की वित्तीय चिंताओं पर, क्लाइंट एसोसिएट्स ने कहा कि पेटीएम ने अब तक 4.6 अरब डॉलर जुटाए हैं और अब तक उसके द्वारा खींची गई इक्विटी पूंजी की लगभग 70 प्रतिशत फंडिंग घाटे में चली गई है।
नोट में कहा गया है कि निवेशकों के लिए चौंकाने वाली बात यह है कि 3,500 करोड़ रुपये के औसत वार्षिक राजस्व के पैमाने तक पहुंचने के बावजूद, कंपनी के पास अभी भी एक व्यवहार्य व्यवसाय मॉडल और लाभप्रदता का एक स्पष्ट मार्ग नहीं है।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों में, पेटीएम ने माइनस 43 रुपये का औसत नकारात्मक ईपीएस और माइनस 36.90 प्रतिशत का औसत आरओएनडब्ल्यू (नेट वर्थ पर रिटर्न) दिखाया है।
नोट में कहा गया है कि कुछ विश्लेषकों के अनुसार, गैर-भुगतान व्यवसाय राजस्व में अगले पांच वर्षों में आक्रामक 50 प्रतिशत सीएजीआर वृद्धि के बावजूद, पेटीएम अभी भी सकारात्मक एफसीएफ (फ्री कैश फ्लो) उत्पन्न करने में सक्षम नहीं होगा।
मूल्यांकन संबंधी चिंताओं पर, नोट में कहा गया है कि 3,500 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व पर पेटीएम का मूल्यांकन 1.39 लाख करोड़ है और नकारात्मक आय सभी मापदंडों से तर्कहीन रूप से महंगी है।
अन्य आईपीओ से इसकी तुलना करते हुए, नोट में कहा गया है कि दूसरी ओर मैपमायइंडिया का न केवल एक सुसंगत वित्तीय ट्रैक रिकॉर्ड, व्यवसाय वृद्धि और मार्जिन में सुधार हुआ है, बल्कि वे कंपनी के मध्यम से लंबी अवधि के भविष्य के लिए एक स्पष्ट विजन बनाने में कामयाब रहे हैं, जिसने इसके हितधारकों और निवेशकों में समान रूप से विश्वास को प्रेरित किया है।
क्लाइंट एसोसिएट्स ने आगे निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि दिलचस्प बात यह है कि हालांकि पेटीएम की अत्यधिक महंगी मूल्य निर्धारण नीति इसके आईपीओ की असफलता के लिए जिम्मेदार कारकों में से एक रही है, लेकिन मैपमायइंडिया की कीमत बहुत ही आक्रामक रही है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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