राष्ट्रीय
एलिक्सिर इक्विटीज के दीपन मेहता ने कहा- मेरी वॉचलिस्ट पर पेटीएम, डिजिटल व्यवसायों से आएगा अगला मल्टीबैगर
भारतीय डिजिटल व्यवसायों में तेजी से विकास हो रहा है, विशेष रूप से फिनटेक परि²श्य में विभिन्न क्षेत्रों में ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत रूप से अपनाने से सहायता प्राप्त हुई है। इस विकास के मद्देनजर, एलिक्सिर इक्विटीज के निदेशक, दीपन मेहता ने हाल ही में एक प्रकाशन को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनका मानना है कि मल्टीबैगर स्टॉक का अगला सेट डिजिटल व्यवसायों से आएगा।
इस विषय पर विस्तार से बताते हुए, मेहता ने कहा कि मल्टीबैगर का अगला सेट परिपक्व व्यवसायों के बजाय अवधारणा शेयरों से आएगा। उन्होंने कॉन्सेप्ट स्टॉक को परिभाषित किया, जहां कंपनियां एक विशाल बाजार के साथ कुछ अलग कर रही हैं और बहुत कम लागत पर इसे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बहुत सारे डिजिटल व्यवसाय इस मानदंड पर खरे उतरते हैं, यही वजह है कि वह भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवा कंपनी और मोबाइल और क्यूआर भुगतान के अग्रणी, पेटीएम जैसी कंपनियों के शेयरों में तेजी का कारण हैं।
पेटीएम के लिए, मेहता ने कहा कि स्टॉक उनकी निगरानी सूची में है और वह इसे ‘बहुत बारीकी से’ ट्रैक करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि वह भविष्य में कंपनी के मुनाफे के लक्ष्य और राजस्व स्रोत के आधार पर उसमें निवेश कर सकते हैं।
पेटीएम के शेयर पिछले कुछ महीनों में बढ़ रहे हैं और शुक्रवार को 2.83 फीसदी की छलांग के बाद तेजी से 727 रुपये पर बंद हुए।
उन्होंने साक्षात्कार में कहा, “मेरा सरल निवेदन यह है कि इन कंपनियों में से एक या इनमें से अधिकतर कंपनियां बिजनेस मॉडल के तरीके और उन बिजनेस मॉडल के बारे में हमारी समझ के कारण महान मूल्य निर्माता बन सकती हैं।”
अप्रैल में, पेटीएम के एमडी और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने शेयरधारकों के साथ एक पत्र साझा किया, जिसमें कहा गया था कि कंपनी सितंबर 2023 तक ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए ब्रेकईवन हासिल कर लेगी, जो मजबूत व्यावसायिक गति, मुद्रीकरण के पैमाने और ऑपरेटिंग लीवरेज द्वारा समर्थित है।
उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कंपनी अपनी किसी भी विकास योजना से समझौता किए बिना इसे हासिल करने की योजना बना रही है।
पेटीएम ने देश में डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है और मजबूत वित्तीय समावेशन का मार्ग प्रशस्त किया है। कई एनालिस्ट पेटीएम के बिजनेस मॉडल और प्रॉफिटेबिलिटी की राह में तेजी आई है। शीर्ष ब्रोकरेज स्टॉक के लिए अपनी ‘बीयूवाई’ रेटिंग बनाए रखना जारी रखते हैं, जो कि कंपनी अपने अद्वितीय उच्च-मार्जिन व्यवसायों और प्रत्येक तिमाही में राजस्व वृद्धि के पैमाने के आधार पर देख रही है।
पेटीएम ने इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत एक उत्कृष्ट नोट पर की, जिसमें 2023 की पहली तिमाही में 89 प्रतिशत की सालाना राजस्व वृद्धि 1,680 करोड़ रुपये थी, जबकि ईबीआईटीडीए (ईएसओपी से पहले) का नुकसान घटकर 275 करोड़ रुपये हो गया, जिसमें 93 करोड़ रुपये का सुधार हुआ। कंपनी का योगदान लाभ वर्ष-दर-वर्ष 197 प्रतिशत बढ़कर 726 करोड़ रुपये हो गया, जिससे राजस्व में योगदान मार्जिन बढ़कर 43 प्रतिशत हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में यह 35 प्रतिशत था।
अगस्त के लिए अपने लेटेस्ट मासिक अपडेट में, कंपनी ने कहा कि उसका ऋण वितरण व्यवसाय अब 29,000 करोड़ रुपये की वार्षिक वितरण दर पर पहुंच गया है, जबकि उसने 2023 की दूसरी तिमाही के पहले दो महीनों के दौरान 4,517 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए हैं।
कंपनी ने देश भर के व्यापारियों के लिए 4.5 मिलियन से अधिक सदस्यता-आधारित भुगतान उपकरणों को तैनात करके अपने ऑफलाइन भुगतान नेतृत्व को भी मजबूत किया।
इसका मजबूत प्रदर्शन भारत के डिजिटल व्यापार परि²श्य में इसकी स्थिति का प्रतिबिंब है, क्योंकि यह देश में लाखों उपभोक्ताओं और व्यापारियों को सशक्त बनाने के अलावा दीर्घकालिक शेयरधारक मूल्य बनाने पर केंद्रित है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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