राष्ट्रीय
एम3एम फाउंडेशन का फोकस अपने कर्मचारियों के उत्थान पर
एम3एम इंडिया भारत में अग्रणी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक है और डॉ. पायल कनोदिया एम3एम फाउंडेशन में ट्रस्टी हैं। एम3एम फाउंडेशन, एम3एम इंडिया की एक परोपकारी शाखा है जिसका मुख्य फोकस ग्रामीण जीवन शैली को बदलने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और सामाजिक-आर्थिक विकास पर रहा है। एम3एम इंडिया में प्रमोटरों में से एक के रूप में, पायल बिजनेस का भी समर्थन करती है।
योग्यता के आधार पर डॉक्टर पायल को इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फंडामेंटल स्टडीज, सेंट पीटर्सबर्ग रूस से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति में दर्शनशास्त्र के ग्रैंड डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया गया है और वह सीडीआई के एक डिप्लोमेटिक मेंबर हैं। उन्होंने एचबीएस, बोस्टन से अपनी इंटरप्रिन्यूअरशिप को आगे बढ़ाया है।
आईएएनएस से बात करते हुए, पायल ने कहा कि एम3एम फाउंडेशन में, हम स्थायी परिवर्तन और लाभार्थियों को जिम्मेदार बनाने में विश्वास करते हैं। भारत में बहुत कुछ किया जाना है और मेरा मानना है कि हमें हमारे फाउंडेशन के जरिए लागू की जाने वाली चीजों पर अपना ध्यान बनाए रखना है। साथ ही, बेहतर भारत बनाने के लिए हमें राज्य और केंद्र सरकार को उनके मिशन में भी मदद करनी चाहिए।
एम3एम इंडिया के निर्माण स्थलों का दौरा करते हुए, उन्होंने देखा कि कई श्रमिकों और मजदूरों ने अपने छोटे बच्चों को घर पर छोड़ दिया है, उनमें से ज्यादातर लावारिस हैं, और इन बच्चों को निश्चित रूप से उचित ध्यान और देखभाल की आवश्यकता है।
पायल कहती हैं कि “मैंने देखा कि श्रमिकों और मजदूरों के बच्चे आम तौर पर घर पर रह जाते हैं और जब मैंने अपने कर्मचारियों के साथ बातचीत की, तो मैंने महसूस किया कि वे अपने बच्चों की भलाई, उनकी शिक्षा और भविष्य को लेकर काफी चिंतित थे। एक जिम्मेदार कंपनी के रूप में हमें उनके बच्चों के लिए कुछ करना था, और इस विचार के साथ, एम3एम फाउंडेशन ने-आईएमपॉवर प्रोजेक्ट लॉन्च किया। आईएमपावर- संसाधनों को सुनिश्चित करने के माध्यम से कार्यबल की क्षमता को अधिकतम करने के लिए एक पहल है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और फाउंडेशनों के साथ हमारे सहयोग के माध्यम से, अब हम इन बच्चों को शिक्षा और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए, और महिला कार्यबल के लिए कौशल वृद्धि भी सुनिश्चित करने के लिए सक्षम हैं। बहुत जल्द हम इन महिलाओं के लिए कौशल विकास केंद्र स्थापित करेंगे। पूरा प्रयास उनके लिए सम्मान का जीवन बनाने का है।”
हाल ही में, एम3एम फाउंडेशन के प्रोजेक्ट आईएमपावर को बेंगलुरु में आयोजित इंडिया सीएसआर लीडरशिप अवार्डस के दौरान ‘मोस्ट इनोवेटिव कम्युनिटी एंगेजमेंट प्रोजेक्ट 2021’ के रूप में मान्यता दी गई है।
पायल ने महामारी के समय में एम3एम फाउंडेशन के योगदान का भी उत्साहपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “मैं हमेशा मानती हूं कि अधिकांश कंपनियों का परोपकार पर एक मजबूत ध्यान होता है और वे अपने फाउंडेशन के माध्यम से कार्यक्रमों को निष्पादित करते हैं। मैं यह भी समझती हूं कि चूंकि हम सभी समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए काम करते हैं, ऐसे फाउंडेशनों को भी एक के रूप में देखा जाना चाहिए। हम समृद्धि में भी भागीदार हैं। इस फोकस के साथ, कोविड महामारी लॉकडाउन के दौरान, हमने हरियाणा सरकार के साथ गठबंधन किया और कॉरपोरेट संस्थाओं, रियल एस्टेट समूहों, व्यावसायिक संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों, धार्मिक निकायों और व्यक्तियों, और भोजन, स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए 2 लाख से अधिक जरूरतमंद लोगों का समर्थन करने में हम सक्षम थे। हमने इस पहल का नाम – ‘कर्तव्य’ रखा, और वास्तव में यह हम सभी द्वारा साझा की गई एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी।”
रोजगार आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने और बेरोजगारी से लड़ने के लिए, एम3एम फाउंडेशन ने हरियाणा सरकार के साथ लगभग 50,000 मेधावी छात्रों की मदद करने और उन्हें सरकारी नौकरियों की ऑनलाइन तैयारी की दिशा में संरेखित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। फाउंडेशन ने इस पहल का नाम ‘सक्षम उड़ान’ रखा है।
पायल अपना ज्यादातर समय फाउंडेशन की गतिविधियों को देती हैं। उनके जुनून और भागीदारी ने निश्चित रूप से एम3एम फाउंडेशन के विजन को मजबूत किया है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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