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Tuesday,29-September-2026
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एमवाई के साथ-साथ अन्य जातियों को भी साध कर भाजपा को हराने की सपा की रणनीति

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 2022 में होने जा रहा उत्तर प्रदेश का विधान सभा चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है क्योंकि प्रदेश में लगातार 3 चुनाव हार चुकी सपा के अस्तित्व के लिए यह चुनाव काफी मायने रखता है। सपा इस बार नई रणनीति और जबरदस्त तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने जा रही है। 2017 के पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा ने बूथ स्तर तक की जबरदस्त तैयारी के साथ-साथ प्रदेश में छोटे-छोटे दलों के साथ गठबंधन कर महत्वपूर्ण जातीय समीकरण को भी साधा था, जिसका भाजपा को सबसे ज्यादा लाभ भी मिला था।

भाजपा की इसी रणनीति से सबक लेते हुए सपा ने इस बार बड़े दलों के साथ गठबंधन करने की बजाय छोटे-छोटे दलों को साथ लेकर चुनाव में जाने का फैसला किया है। सपा अब तक सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी , राष्ट्रीय लोकदल, महान दल, जनवादी पार्टी और अपना दल ( कमेरावादी) के साथ गठबंधन कर चुकी है और हाल के दिनों में आप राज्य सभा सांसद संजय सिंह के साथ भी अखिलेश यादव की मुलाकात हो चुकी है।

आईएएनएस के साथ खास बातचीत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दावा किया कि 2014, 2017 और 2019 की परिस्थितियां अलग थी और 2022 के हालात अलग है। इन छोटे दलों के बेस वोट बैंक के सहारे चुनाव जीतने को आश्वस्त अखिलेश ने तो आईएएनएस के साथ बातचीत में यहां तक दावा कर दिया कि इस बार प्रदेश की जनता भाजपा का सफाया करने जा रही है।

दरअसल, 2017 के विधान सभा चुनाव की बात करे तो इसमें भाजपा को सहयोगी दलों के साथ मिलाकर लगभग 3.59 करोड़ वोट के साथ 325 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ी सपा को लगभग 1.89 करोड़ और कांग्रेस को लगभग 54 लाख वोट मिले थे। उस समय सपा को सिर्फ 47 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस महज 7 सीट पर ही सिमट कर रह गई थी।

इस बार राजनीतिक हालात बदले हुए हैं। 2017 में एनडीए गठबंधन का हिस्सा रही ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी इस बार सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। वहीं कांग्रेस भी इस बार सपा से अलग होकर चुनाव लड़ने जा रही है। ऐसे में सपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती 1.7 करोड़ के लगभग वोटों के अंतर को पाटने की है ताकि उसे भाजपा से अधिक वोट हासिल हो सके।

समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद और यादव परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य धर्मेन्द्र यादव ने आईएएनएस के साथ बातचीत करते हुए दावा किया कि वोटों का यह अंतर बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता क्योंकि इससे पहले 2012 में हमने प्रदेश में सरकार बनाई थी। उन्होंने भाजपा पर 2017 में मतदाताओं को ठगने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 में भाजपा ने हर जाति के एक नेता को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया था और चुनाव जीतने के बाद किसी और को मुख्यमंत्री बना दिया था इसलिए इस बार ये जातियां इनके झांसे में नहीं आएगी।

कभी एमवाई ( मुस्लिम और यादव ) समीकरण के सहारे प्रदेश में जीत हासिल करते रहने वाली सपा इस बार खास रणनीति के तहत सबको लुभाने का प्रयास कर रही है।

आईएएनएस के साथ बातचीत में अखिलेश यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में किसान, नौजवान और व्यापारी समेत प्रदेश की जनता इस बार उनके साथ है। सपा नेता धर्मेन्द्र यादव ने भी इस बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जाति, धर्म और वर्ग की सीमा से अलग हटकर इस बार समाज के सभी तबके का समर्थन सपा को मिल रहा है । धर्मेन्द्र यादव 2012 से 2017 के दौरान अखिलेश यादव सरकार की तमाम उपलब्धियों को गिनाते हुए दावा कर रहे हैं कि 2022 में किसान, युवा, व्यापारी , महिला , दलित और ओबीसी समेत समाज का हर तबका सपा को वोट करेगा। जाहिर तौर पर इसमें छोटे दलों के साथ गठबंधन की बड़ी भूमिका रहने वाली है।

ओवैसी के उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के बावजूद सपा मुस्लिम वोटों को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही है। धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि हर राजनीतिक दल चुनाव लड़ना चाहता है लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश में सिर्फ अखिलेश यादव का ही जादू चलने जा रहा है। धर्मेन्द्र यादव ने दावा किया कि इस बार सपा को कोई नकार नहीं रहा है।

दरअसल , इस बार सपा एक साथ कई मोचरे पर काम कर रही है। एक तरफ जहां सपा अपने आधार वोट बैंक रहे मुस्लिम और यादवों को पूरी तरह से अपने पाले में बनाए रखने का प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ छोटे दलों के साथ गठबंधन कर उनके बेस वोट बैंक के सहारे मत प्रतिशत और सीटों की संख्या में भाजपा पर बढ़त भी हासिल करने की योजना पर काम कर रही है।

चुनावी रैलियों की तारीखों और उसमें भारी भीड़ जुटाकर भी सपा भाजपा के नहले पर दहला मारने का लगातार प्रयास कर रही है। ‘ लाल टोपी’ विवाद पर सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साध कर भी अखिलेश अपने समर्थक मतदाताओं को यह संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि वो अकेले मोदी और योगी जैसे हैवीवेट नेताओं से भिड़ने को तैयार हैं।

राष्ट्रीय समाचार

पश्चिम बंगाल पोस्ट-पोल हिंसा हत्याकांड में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, फरार अपराधी झरना मिस्त्री गिरफ्तार

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2021 के पश्चिम बंगाल पोस्ट-पोल हिंसा से जुड़े हत्या के मामले में लंबे समय से फरार चल रही घोषित अपराधी झरना मिस्त्री को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने मंगलवार को उसे दक्षिण 24 परगना जिले के संतोषपुर के घोषपाड़ा से गिरफ्तार किया।

झरना मिस्त्री सह-आरोपी संजय मिस्त्री की पत्नी है। सीबीआई के मुताबिक, 2021 में एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही वह फरार थी और उसने इस मामले की जांच या सुनवाई की कार्यवाही में कभी हिस्सा नहीं लिया। उसकी गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने 50 हजार रुपये का नकद इनाम भी घोषित किया था।

यह मामला पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा के दौरान एक महिला की हत्या से जुड़ा है। कलकत्ता हाईकोर्ट के 19 अगस्त 2021 के आदेश के अनुपालन में सीबीआई ने 27 अगस्त 2021 को इस मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए जगद्दल थाने में 3 मई 2021 को दर्ज एफआईआर संख्या 345/2021 को टेकओवर किया था।

एफआईआर में शिकायतकर्ता की मां शोभा रानी मंडल की हत्या का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 29 दिसंबर 2021 को कुल 13 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें झरना मिस्त्री भी शामिल थी।

सीबीआई के अनुसार, झरना मिस्त्री लगातार छिपती रही और अदालत की प्रक्रिया से बचती रही। इसके बाद उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर स्थित एसीजेएम अदालत ने 3 अक्टूबर 2023 के आदेश के जरिए उसे घोषित अपराधी घोषित कर दिया था।

सीबीआई ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को आज बैरकपुर की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।

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राजनीति

कांग्रेस क्यों चाहती है मृत और डुप्लीकेट वोटरों के नाम रिस्टोर हों?: स्मृति ईरानी

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भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर चुनाव आयोग को निशाना बनाने को लेकर तीखा हमला बोला।

स्मृति ईरानी ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व ने आज उन 13 करोड़ 30 लाख नामों का उल्लेख किया, जिनके संदर्भ में चुनाव आयोग 26 तारीख को अपना बयान दे चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि इलेक्टोरल रोल में अगर किसी का नाम डुप्लीकेट हो या किसी मृत व्यक्ति का नाम हो, तो कांग्रेस पार्टी क्यों चाहती है कि मृत लोगों के नाम रिस्टोर हों। कांग्रेस क्यों चाहती है कि डुप्लीकेट नाम इलेक्टोरल रोल में चलते रहें। चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस नोट में स्पष्ट किया है कि बीएलओ घरों में जाकर ऐसे लोगों को नोटिस जारी कर रहे हैं और एफआईआर के संदर्भ में उनके घर जाकर दस्तावेज कलेक्ट करके खुद पुष्टि करेगा।

उन्होंने कहा कि जब चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्टीकरण दे दिया है, तो फिर क्यों कांग्रेस का नेतृत्व चाहता है कि जो मृत हैं उनका नाम इलेक्टोरल रोल में रिस्टोर रहे और जिनका नाम डुप्लीकेट है, उनका नाम इलेक्टोरल रोल में बना रहे।

स्मृति ईरानी ने कांग्रेस द्वारा लाहौर अधिवेशन का उल्लेख किए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज वह स्तब्ध हैं कि कांग्रेस नेतृत्व ने लाहौर कांग्रेस सेशन का उल्लेख किया। अगर कांग्रेस पार्टी इतिहास के पन्ने पलटना चाहती है, तो उसे वह पन्ना भी देश की जनता के सामने रखना चाहिए जिसमें एओ ह्यूम, जो ब्रिटिश एम्पायर के सेक्रेटरी रेवेन्यू, एग्रीकल्चर एंड कॉमर्स थे, उन्होंने वायसराय के साथ यह सुझाव साझा किया था कि अगर ब्रिटिश एम्पायर का संरक्षण करना है तो कांग्रेस पार्टी का गठन होना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यह हिस्टोरिकल डॉक्यूमेंट में दर्ज है। ब्रिटिश के संरक्षण के लिए जिस कांग्रेस पार्टी को बनाया गया, वह आज भारत के चुनाव आयोग पर लाहौर कांग्रेस सेशन का उल्लेख करके अटैक कर रही है, इससे ज्यादा शर्मनाक बात कोई नहीं हो सकती।

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राष्ट्रीय समाचार

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के 58 लाख विद्यार्थियों को ड्रेस के लिए 600 रुपए मिलेंगे

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मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहले से आठवीं तक पढ़ने वाले 58 लाख बच्चों को गणवेश के लिए 600 रुपए दिए जाएंगे।यह फैसला मंगलवार को हुई मोहन सरकार की कैबिनेट में लिया गया । राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि राज्य के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के 58 लाख विद्यार्थियों को 600 रुपए प्रति गणवेश के अनुसार सीधे बैंक खाता के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे, इसके अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा 348 करोड़ रुपए छात्रों को दिए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि बैठक में करीब 24 हजार 500 करोड़ के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें पुनरीक्षित प्रस्ताव, संशोधित प्रस्ताव तथा विभिन्न योजनाओं की निरंतरता से संबंधित प्रस्ताव शामिल रहे। इन सभी प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद स्वीकृति प्रदान की गई है। मंत्री चैतन्य काश्यप के मुताबिक यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में भारत के कुल 78 स्थलों को शामिल किया गया है, जिनमें 19 स्थल मध्यप्रदेश के हैं। इनमें बाघ गुफाओं की चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुफाएं जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह मध्यप्रदेश के पर्यटन के लिए भविष्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। प्रदेश में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और पर्यटन के विकास पर लगातार कार्य किया जा रहा है। साथ ही, प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि हो रही है और हमारे सभी टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्यों को भी व्यवस्थित एवं विकसित किया जा रहा है। पर्यटन न केवल हमारी विरासत और संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाता है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक उपक्रम भी है और रोजगार एवं स्थानीय विकास के नए अवसर पैदा करता है।

मंत्री चैतन्य काश्यप ने कहा कि विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्ध घुमन्तु वर्गों के विभाग अंतर्गत संचालित छात्रावासों, कल्याण आश्रमों एवं अन्य कल्याणकारी संस्थानों को अभी तक 12 किलो अनाज 5 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जाता था। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वर्गों के छात्रावासों तथा इसी प्रकार की कल्याणकारी संस्थाओं को 1 रुपए प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराया जा रहा था।

बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्ध घुमन्तु वर्गों के विभाग अंतर्गत आने वाले छात्रावासों एवं संबंधित संस्थानों को भी अब 1 रुपए प्रति किलो की दर से अनाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों एवं जरूरतमंदों के हित में एक महत्वपूर्ण कल्याणकारी कदम है।

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