अंतरराष्ट्रीय
कप्तान कोहली ने सोशल मीडिया पर फोटो साझा की, प्रशंसकों ने मांगे जवाब
भारत के कप्तान विराट कोहली ने पिछले महीने सोशल मीडिया पर एक फोटो साझा की थी, जिसमें वह जीभ निकाले, रस्सी से बंधे हुए दिखाई दिए थे। उन्होंने इस फोटो पर कैप्शन दिया था कि यह ऐसा एहसास है, मानो बायो बबल में खेलने जैसा।
इस फोटो के जरिए कप्तान शायद कोई ऐसी बात बताना चाहते थे, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट पंडितों ने उस समय नजरअंदाज कर दिया था। या शायद, वे इस पर हंसे थे। लेकिन अब टी20 वर्ल्ड कप में लगातार दो मैचों में भारत की हार के बाद एक बार फिर इस पर बहस छिड़ गई है।
कुछ लोगों का मानना है कि टी20 विश्व कप से पहले नॉन-स्टॉप क्रिकेट और बायो बबल से थकान के कारण टी20 वर्ल्ड कप में भारत का खराब प्रदर्शन में रहा।
सीमर जसप्रीत बुमराह ने भी रविवार को कहा कि बायो-बबल थकान खिलाड़ियों के दिमाग में रहती है, यहां तक कि वे कोविड-19 महामारी के बीच खेल खेलने के लिए सामान्य होने की पूरी कोशिश करते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों को अपने परिवारों से दूर रहने का दर्द महसूस होती है, लेकिन जब वे मैदान पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए उतरते हैं तो वे इन सभी बातों को भूल जाते हैं।
दरअसल, कुछ महीने पहले बीसीसीआई के मेडिकल एडवाइजर डॉ. अशोक आहूजा ने भी इस मसले पर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा, “लंबे समय तक बायो-बबल में रहने की अपनी अलग समस्याएं हैं। अगर टीम बायो बबल से होने वाली थकान को दूर नहीं करती है, तो टी20 वर्ल्ड कप में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है।”
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बोर्ड के खिलाड़ियों और अधिकारियों को नतीजों के बारे में पता था तो इस समस्या को कम करने के लिए कुछ क्यों नहीं किया गया? आईपीएल 2021 के दूसरे फेस के दौरान, कई विदेशी खिलाड़ियों ने बायो बबल से होने वाली थकान के मुद्दों का हवाला देते हुए लीग में खेलने पर अपनी आपत्ति जाहिर की थी।
लेकिन कोई भी भारतीय खिलाड़ी आधिकारिक तौर पर इस मुद्दे को उठाने के लिए आगे नहीं आया, इसलिए अब ऐसा लगता है कि यूएई में आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप में भारत को नुकसान उठाना पड़ा। इंग्लैंड दौरे से लौटने के बाद भारतीय क्रिकेटर आईपीएल के लिए बायो बबल में शामिल हो गए और फिर इसके बाद विश्व कप के लिए दूसरे बबल में शिफ्ट हो गए थे।
हालांकि, अब तक के शर्मनाक प्रदर्शनों के मद्देनजर, क्रिकेट पर मरने वाले लाखों भारतीय प्रशंसक बायो-बबल थकान है या नहीं, पर जवाब मांग रहे हैं।
एक नेटिजन ने लिखा, “यह बायो-बबल वाली चीज नहीं थी, यह वास्तव में टीम के आसपास बनाया गया एक नकली बबल था जो अंत में फट गया।”
दूसरे प्रशंसक ने ट्वीट किया, “बबल थकान हमारे आत्मसमर्पण के लिए हवाला दिया जा रहा है, अन्य खिलाड़ियों और अन्य टीमों के बारे में क्या? क्या उन्हें बबल में थकान का सामना नहीं करना पड़ा है, वे भी आईपीएल और अन्य क्रिकेट खेल रहे हैं जो कोविड महामारी में बायो बबल के बीच खेला जा रहा है। इससे आगे बढ़िए।”
कुछ लोगों ने विश्व कप शुरू होने से पहले विराट कोहली के टी20 कप्तानी छोड़ने की घोषणा पर भी सवाल उठाए थे। एक ने लिखा, “ऐसा लगता है कि कप्तानी छोड़ने की जल्दबाजी ने टीम के भीतर एक तरह का भ्रम पैदा कर दिया।”
एक पूर्व क्रिकेटर ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को तय करना होगा कि उनके लिए क्या ज्यादा महत्वपूर्ण है। आईपीएल या देश के लिए खेलना? वे काफी स्मार्ट हैं और वे जानते हैं कि ज्यादा क्रिकेट खेलना समस्याएं पैदा कर सकती है। बीसीसीआई लीग की खातिर प्रमुख टूर्नामेंटों की अनदेखी नहीं कर सकता।
स्पोर्ट्स में जीत या हार खेल का हिस्सा है, लेकिन बिना लड़ाई के हारना अस्वीकार्य है। भारतीय मुख्य कोच रवि शास्त्री को अगले मैच से पहले जीत के लिए अच्छी रणनीति बनानी होगी।
बल्लेबाज रोहित शर्मा, केएल राहुल, ऋषभ पंत, ईशान किशन, सूर्य कुमार यादव फिट और अनफिट हो रहे हैं। ऐसे में हार्दिक पांड्या जैसे बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेने की जरूरत है, ताकि गेंदबाजों के पास मैच जिताने के लिए एक अच्छा स्कोर हो।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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