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Thursday,15-October-2026
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मध्यप्रदेश में उपचुनाव आते ही पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता सुलोचना रावत भाजपा में शमिल

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मध्यप्रदेश में उपचुनाव के आते ही एक बार फिर आया राम गया राम का सिलसिला शुरू हो गया है। इसकी शुरूआत जोबट से विधायक रही और कांग्रेस नेता सुलोचना रावत ने की है। वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई हैं। आने वाले दिनों में यह सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। राज्य में तीन विधानसभा क्षेत्रों जोबट, रैगांव, पृथ्वीपुर के साथ ही खंडवा लोकसभा क्षेत्र में उप-चुनाव होने वाले हैं। यह उपचुनाव सियासी तौर पर काफी अहम माने जा रहे हैं। यही कारण है कि दोनों राजनीतिक दल अपनी ताकत को मजबूत करने में जोर लगा रहे हैं।

अलीराजपुर जिले की जोबट विधानसभा क्षेत्र में भी उपचुनाव होना है, यहां उप-चुनाव कांग्रेस की विधायक रही कलावती भूरिया के निधन के चलते हो रहा है और यहां फिलहाल दोनों राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार तय नहीं किए हैं। कांग्रेस की ओर से बड़ी दावेदार सुलोचना रावत मानी जा रही थी, जिन्होंने पाला बदल लिया है और वे भाजपा में शामिल हो गई हैं।

कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाली सुलोचना रावत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आदिवासियों के कल्याण की अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। आदिवासियांे केा जमीन के पटटे दिए जा रहे हैं तो उनके घरों तक अनाज पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही नर्मदा नदी को अलीराजपुर तक लाने के प्रयास हो रहे हैं, इन सब कामों से प्रभावित होकर ही उन्होंने भाजपा का दामन थामा है।

कांग्रेस नेता के दल-बदल करने पर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सैयद जाफर का कहना है कि सुलोचना रावत कांग्रेस के सर्वे में जनता की पसंद नहीं थीं। सुलोचना रावत का इतिहास दगाबाजी और बगावत का रहा है। देश में कैडर का दम भरने वाली भाजपा, अपने कैडर बेस से किसी कार्यकर्ता को विधानसभा की उम्मीदवारी के काबिल नहीं समझती।

दमोह चुनाव में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में गए राहुल लोधी को मिली हार का जिक्र करते हुए जाफर ने कहा कि सुलोचना रावत, दमोह की राहुल लोधी साबित होंगी।

राजनीतिक गलियारों से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस और भाजपा में उन इलाकों में जहां उप-चुनाव हो रहे हैं, वहां के कई नेताओं और कार्यकतार्ओं के आने वाले दिनों में पाला बदलने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों दलों में उम्मीदवारी के बड़े-बड़े दावेदार हैं।

राजनीति

ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सरकार ने पूरा तंत्र झोंका, सीईसी इतने महत्वपूर्ण क्यों: अभिजीत दिपके

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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मकसद सिर्फ एक व्यक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को बचाना था।

दिपके ने यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “जब से चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर मीडिया रिपोर्ट छपी है, तब से सरकार अपने पूरे तंत्र और मशीनरी का इस्तेमाल ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कर रही है। पिछले कुछ दिनों से सभी छात्र संगठन और युवा दिल्ली की सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ एक व्यक्ति ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सड़कों पर घसीटा जा रहा है।”

अभिजीत दिपके ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि विपक्षी नेताओं को भी नहीं बख्शा गया। उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) और पूर्व मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन तक को हिरासत में ले लिया गया।”

10 अक्टूबर को सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा, “शायद देश में यह पहली बार था जब रेलवे को बंद कर दिया गया और यह भी सिर्फ ज्ञानेश कुमार के लिए। रेलवे बंद करने से भी उनका मन नहीं भरा, तो उन्होंने पूरी दिल्ली में मेट्रो और मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया। किसके लिए? ज्ञानेश कुमार के लिए। इतने पर भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुला लिया।”

उन्होंने टिप्पणी की, “और तो और अब तो सरकार अपने ही देशवासियों के खिलाफ जंग छेड़ रही है।”

सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आपने तिरंगा फहराने को भी कानून का उल्लंघन बता दिया। सिर्फ ज्ञानेश कुमार के लिए? आपने दिल्ली को ठप कर दिया है। शहर को भारत-पाकिस्तान सीमा की तरह एक बॉर्डर में बदल दिया है। आपने दिल्ली में तमाम सुरक्षा बलों को बुला लिया है। क्या यह सब सिर्फ एक ज्ञानेश कुमार के लिए है? सरकार के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? अगर वह भाजपा को चुनाव जीतने में मदद नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं?”

सीजेपी प्रमुख ने आगे कहा, “‘एक देश, एक चुनाव’ तो बस एक नारा है, असल मकसद ‘एक देश, एक पार्टी’ है। अगर आप छात्र नेताओं, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को इस तरह हिरासत में रखना चाहते हैं, तो आधिकारिक तौर पर आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दीजिए, आप किस बात से डर रहे हैं?”

दिपके ने ‘तिरंगा सभा’ ​​के लिए अपनी अपील दोहराई और लोगों से आग्रह किया कि वे कल शाम 5 बजे नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में इकट्ठा हों। यह सभा उनकी पार्टी के सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा लहराने के लिए आयोजित की जा रही है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज के सदस्यों, मजदूर और किसान यूनियनों से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक विचारधाराओं को एक तरफ रखकर इस सभा में शामिल हों।

अभिजीत दिपके ने कहा, “हमें अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होना होगा। अगर हमारा वोट सुरक्षित रहेगा, तभी लोकतंत्र बचेगा। आशुतोष और सौरव को तिरंगा लहराने के लिए जेल में डाल दिया गया है। राष्ट्रीय ध्वज लहराना कोई अपराध नहीं हो सकता। तिरंगे से बढ़कर कुछ भी नहीं है और ज्ञानेश कुमार तो बिल्कुल भी नहीं।”

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज और अन्य लोगों ने भी संबोधित किया।

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राष्ट्रीय समाचार

सीजेपी प्रदर्शन पर हाई कोर्ट सख्त, पुलिस को सभी वैध कदम उठाने के निर्देश

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दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस के उस आश्वासन को दर्ज कर लिया, जिसमें कहा गया है कि शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के तहत सभी संभव कदम उठाए जाएंगे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) नितीन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। यह आश्वासन तब दिया गया जब एक याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि प्रस्तावित प्रदर्शन से कनॉट प्लेस में व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं।

उच्च न्यायालय, कनॉट प्लेस के पालिका बाजार में सड़क किनारे सामान बेचने वाले अनिल कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि सीजेपी को सेंट्रल पार्क या ऐसी किसी भी जगह पर कोई आंदोलन, प्रदर्शन, मार्च या सभा आयोजित करने से रोका जाए, जिसे विरोध प्रदर्शन के लिए तय नहीं किया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन से इलाके में व्यावसायिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह एक बड़े हिंदू त्योहार और त्योहारी सप्ताहांत (वीकेंड) के समय हो रहा है।

पुरी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह दिपके को विरोध प्रदर्शन करने से सीधे तौर पर रोक दे। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को पिछले एक सप्ताह में पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है और अगर सप्ताहांत तक यह बाधा बनी रही तो उन्हें और भी भारी नुकसान होगा।

एसीजे साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि दिपके को ईमेल के जरिए नोटिस भेजा जा चुका है।

केंद्र के विधि अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा और सीजेपी संस्थापक की गतिविधियों को नियंत्रित व विनियमित करने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “प्रतिवादियों (अधिकारियों) ने प्रतिवादी संख्या 6 (दिपके) की गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं, और कानून के तहत हर संभव उपाय किए जाएंगे।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए तय कर दी है।

इससे पहले दिन में अधिवक्ता पुरी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस याचिका का जिक्र किया था। उन्होंने प्रस्तावित सभा को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी, यह आशंका जताते हुए कि इससे ट्रैफिक जाम हो सकता है, जनजीवन बाधित हो सकता है और कनॉट प्लेस के व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

यह प्रस्तावित प्रदर्शन सीजेपी संस्थापक दिपके के उस आह्वान के बाद हो रहा है, जिसमें उन्होंने लोगों से शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने के लिए कहा है। शुक्रवार को पार्टी के सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।

बुधवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में दिपके ने इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम दिया और लोगों से शामिल होने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है।

जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में बुधवार को दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि सीजेपी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इन तीनों पार्टी सदस्यों को जंतर-मंतर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

इन पर अनधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

आपदा प्रबंधन के लिए नेपाल-विश्व बैंक में करार, जारी होगा कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड

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नेपाल और विश्व बैंक समूह का हिस्सा, ‘इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट’ (आईबीआरडी) ने डिजास्टर ‘कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड’ बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह बॉन्ड हिमालयी देश नेपाल को किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तुरंत फंड (धनराशि) जुटाने में मदद कर सकता है।

वर्ल्ड बैंक ने एक बयान में कहा कि यह समझौता एक कैटास्ट्रॉफ बॉन्ड की फिजिबिलिटी और पोटेंशियल स्ट्रक्चर (व्यवहार्यता और संभावित संरचना) का आकलन करने में सहयोग की शुरुआत है, जिसके तहत नेपाल अपने आपदा संबंधी जोखिमों का कुछ हिस्सा इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट में ट्रांसफर कर सकता है और प्राकृतिक आपदा के लिए अपनी वित्तीय संबंधी तैयारी को मजबूत कर सकता है।

समझौते के तहत, विश्व बैंक समूह कोषागार नेपाल सरकार और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ मिलकर प्रस्तावित लेन-देन का मूल्यांकन करेगा।

यह पहल ऐसे समय में हुई है जब नेपाल 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में आई भयानक बाढ़ के बाद भविष्य की किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारी करने और उनसे उबरने की अपनी क्षमता को मजबूत करना चाहता है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम पुनर्निर्माण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ में लगभग 1,500 लोग मारे गए हैं, जबकि 5,000 से ज्यादा लापता हैं।

नेपाल-चीन बॉर्डर के पास एक भूस्खलन के कारण नदी का बहाव रुक गया था, जिससे बाढ़ आई और कई इंसानी बस्तियां, एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, एक सोलर प्लांट और कई सड़कें और पुल बह गए। वर्ल्ड बैंक की ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिजास्टर डैमेज एस्टिमेशन रिपोर्ट के मुताबिक, भौतिक या वस्तुगत नुकसान का अनुमान 1.66 बिलियन यूएस डॉलर है।

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, नेपाल भूकंप, बाढ़, लैंडस्लाइड और मौसम से जुड़े दूसरे खतरों के लिए लिहाज से बहुत संवेदनशील देश है। इस वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है, आर्थिक गतिविधियों में रुकावट आ सकती है और पब्लिक फाइनेंस पर काफी दबाव पड़ सकता है।

कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड एक फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट (वित्तीय साधन) है जो प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न वित्तीय जोखिम को सरकारों या बीमा कंपनियों से हटाकर निजी निवेशकों पर स्थानांतरित करते हैं और यह प्रक्रिया वैश्विक वित्तीय बाजारों के माध्यम से होती है। बॉन्ड की शर्तों के आधार पर, अगर कोई खास आपदा आती है तो निवेशक अपना कुछ या पूरा मूलधन खो सकते हैं, जिससे फंड का इस्तेमाल पीड़ित संस्था या देश को सपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है।

वर्ल्ड बैंक ने कहा, “ऐसे इंस्ट्रूमेंट आपदा फाइनेंसिंग का एक दूसरा सोर्स दे सकते हैं, जिससे सरकारें शायद सिर्फ बजट रीएलोकेशन या आपदा के बाद की मदद पर निर्भर रहने के बजाय ज्यादा तेजी से फंड एक्सेस कर सकेंगी।”

यह पहल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के शुरू किए गए कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसने देशों को आपदा जोखिमों को ट्रांसफर करने और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ फाइनेंशियल सुरक्षा हासिल करने के लिए इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट तक पहुंचने में मदद की है।

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