राजनीति
भवानीपुर में ममता बनर्जी आगे, अन्य 2 सीटों पर भी तृणमूल आगे
शुरुआती रुझानों से पता चला है कि तृणमूल कांग्रेस भवानीपुर सहित सभी तीन निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही है। भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल और माकपा के श्रीजीब बिस्वास से है। मुख्यमंत्री की कुर्सी बरकरार रखने के लिए ममता के लिए यह सीट जीतना अनिवार्य है।
शुरूआती खबरों के मुताबिक पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के बाद ममता बनर्जी 34,000 वोटों के अंतर से आगे चल रही हैं।
मुर्शिदाबाद जिले के दो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों जंगीपुर और समसेरगंज में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। जाकिर हुसैन, जो जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, पहले दौर की मतगणना के बाद 1,300 मतों के अंतर से आगे चल रहे हैं। समसेरगंज से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमीरुल इस्लाम भी आगे चल रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए, राज्य के परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम ने बताया कि मुख्यमंत्री 70,000 से 80,000 मतों के अंतर से जीतने जा रहे हैं। हकीम ने कहा, ‘वह रिकॉर्ड अंतर से जीतेगी।’
वहीं बीजेपी प्रत्याशी प्रियंका टिबरेवाल ने कहा, ‘लोगों ने वोट दिया है और अब अगर सब कुछ सही तरीके से चलता रहा तो इसमें कोई शक नहीं कि मैं जीतने जा रही हूं। ‘
बनर्जी के खिलाफ माकपा उम्मीदवार श्रीजीब बिस्वास ने कहा, “चुनाव परिणामों से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हम एक दिन के लिए राजनीति नहीं करते हैं। हम पूरे साल लोगों के साथ रहते हैं।”
राज्य के सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय बलों की 24 कंपनियों को तैनात किया गया है और पूरे इलाके को सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया है।
ईवीएम स्ट्रांग रूम में आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और नतीजे 21 राउंड की मतगणना के बाद घोषित किए जाएंगे।
30 सितंबर को मतदान वाले तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है।
भवानीपुर में 57 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ।
समसेरगंज और जंगीपुर में क्रमश: 79.92 प्रतिशत और 77.63 प्रतिशत की उच्च मतदान दर दर्ज किया गया था।
राष्ट्रीय समाचार
सीजेपी प्रदर्शन पर हाई कोर्ट सख्त, पुलिस को सभी वैध कदम उठाने के निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस के उस आश्वासन को दर्ज कर लिया, जिसमें कहा गया है कि शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए कानून के तहत सभी संभव कदम उठाए जाएंगे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (एसीजे) नितीन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया। यह आश्वासन तब दिया गया जब एक याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि प्रस्तावित प्रदर्शन से कनॉट प्लेस में व्यावसायिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं।
उच्च न्यायालय, कनॉट प्लेस के पालिका बाजार में सड़क किनारे सामान बेचने वाले अनिल कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि सीजेपी को सेंट्रल पार्क या ऐसी किसी भी जगह पर कोई आंदोलन, प्रदर्शन, मार्च या सभा आयोजित करने से रोका जाए, जिसे विरोध प्रदर्शन के लिए तय नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन से इलाके में व्यावसायिक गतिविधियों पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर इसलिए क्योंकि यह एक बड़े हिंदू त्योहार और त्योहारी सप्ताहांत (वीकेंड) के समय हो रहा है।
पुरी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह दिपके को विरोध प्रदर्शन करने से सीधे तौर पर रोक दे। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को पिछले एक सप्ताह में पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ा है और अगर सप्ताहांत तक यह बाधा बनी रही तो उन्हें और भी भारी नुकसान होगा।
एसीजे साम्ब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया गया कि दिपके को ईमेल के जरिए नोटिस भेजा जा चुका है।
केंद्र के विधि अधिकारी द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा और सीजेपी संस्थापक की गतिविधियों को नियंत्रित व विनियमित करने के लिए कानून के तहत हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, “प्रतिवादियों (अधिकारियों) ने प्रतिवादी संख्या 6 (दिपके) की गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए पहले ही कदम उठा लिए हैं, और कानून के तहत हर संभव उपाय किए जाएंगे।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए तय कर दी है।
इससे पहले दिन में अधिवक्ता पुरी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस याचिका का जिक्र किया था। उन्होंने प्रस्तावित सभा को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी, यह आशंका जताते हुए कि इससे ट्रैफिक जाम हो सकता है, जनजीवन बाधित हो सकता है और कनॉट प्लेस के व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है।
यह प्रस्तावित प्रदर्शन सीजेपी संस्थापक दिपके के उस आह्वान के बाद हो रहा है, जिसमें उन्होंने लोगों से शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने के लिए कहा है। शुक्रवार को पार्टी के सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
बुधवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में दिपके ने इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम दिया और लोगों से शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है।
जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले में बुधवार को दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि सीजेपी के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। इन तीनों पार्टी सदस्यों को जंतर-मंतर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में एहतियातन गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।
इन पर अनधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
आपदा प्रबंधन के लिए नेपाल-विश्व बैंक में करार, जारी होगा कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड

नेपाल और विश्व बैंक समूह का हिस्सा, ‘इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट’ (आईबीआरडी) ने डिजास्टर ‘कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड’ बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह बॉन्ड हिमालयी देश नेपाल को किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तुरंत फंड (धनराशि) जुटाने में मदद कर सकता है।
वर्ल्ड बैंक ने एक बयान में कहा कि यह समझौता एक कैटास्ट्रॉफ बॉन्ड की फिजिबिलिटी और पोटेंशियल स्ट्रक्चर (व्यवहार्यता और संभावित संरचना) का आकलन करने में सहयोग की शुरुआत है, जिसके तहत नेपाल अपने आपदा संबंधी जोखिमों का कुछ हिस्सा इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट में ट्रांसफर कर सकता है और प्राकृतिक आपदा के लिए अपनी वित्तीय संबंधी तैयारी को मजबूत कर सकता है।
समझौते के तहत, विश्व बैंक समूह कोषागार नेपाल सरकार और मार्केट पार्टिसिपेंट्स के साथ मिलकर प्रस्तावित लेन-देन का मूल्यांकन करेगा।
यह पहल ऐसे समय में हुई है जब नेपाल 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी बेसिन में आई भयानक बाढ़ के बाद भविष्य की किसी भी प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारी करने और उनसे उबरने की अपनी क्षमता को मजबूत करना चाहता है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम पुनर्निर्माण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ में लगभग 1,500 लोग मारे गए हैं, जबकि 5,000 से ज्यादा लापता हैं।
नेपाल-चीन बॉर्डर के पास एक भूस्खलन के कारण नदी का बहाव रुक गया था, जिससे बाढ़ आई और कई इंसानी बस्तियां, एक दर्जन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, एक सोलर प्लांट और कई सड़कें और पुल बह गए। वर्ल्ड बैंक की ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिजास्टर डैमेज एस्टिमेशन रिपोर्ट के मुताबिक, भौतिक या वस्तुगत नुकसान का अनुमान 1.66 बिलियन यूएस डॉलर है।
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, नेपाल भूकंप, बाढ़, लैंडस्लाइड और मौसम से जुड़े दूसरे खतरों के लिए लिहाज से बहुत संवेदनशील देश है। इस वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है, आर्थिक गतिविधियों में रुकावट आ सकती है और पब्लिक फाइनेंस पर काफी दबाव पड़ सकता है।
कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड एक फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट (वित्तीय साधन) है जो प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न वित्तीय जोखिम को सरकारों या बीमा कंपनियों से हटाकर निजी निवेशकों पर स्थानांतरित करते हैं और यह प्रक्रिया वैश्विक वित्तीय बाजारों के माध्यम से होती है। बॉन्ड की शर्तों के आधार पर, अगर कोई खास आपदा आती है तो निवेशक अपना कुछ या पूरा मूलधन खो सकते हैं, जिससे फंड का इस्तेमाल पीड़ित संस्था या देश को सपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है।
वर्ल्ड बैंक ने कहा, “ऐसे इंस्ट्रूमेंट आपदा फाइनेंसिंग का एक दूसरा सोर्स दे सकते हैं, जिससे सरकारें शायद सिर्फ बजट रीएलोकेशन या आपदा के बाद की मदद पर निर्भर रहने के बजाय ज्यादा तेजी से फंड एक्सेस कर सकेंगी।”
यह पहल वर्ल्ड बैंक ग्रुप के शुरू किए गए कैटास्ट्रॉफी बॉन्ड प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसने देशों को आपदा जोखिमों को ट्रांसफर करने और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ फाइनेंशियल सुरक्षा हासिल करने के लिए इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट तक पहुंचने में मदद की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
उत्तर कोरिया ने दागी रणनीतिक क्रूज मिसाइलें, न्यूक्लियर अटैक सबमरीन से परीक्षण की आशंका

प्योंगयाग ने बुधवार को पूर्वी सागर में पनडुब्बी से दागी जाने वाली दो तरह की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया। आशंका जताई जा रही है कि 3,000-टन श्रेणी का परीक्षण उस न्यूक्लियर अटैक सबमरीन (पनडुब्बी) से किया गया है जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से योनहाप न्यूज एजेंसी ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। हालिया परीक्षण में मिसाइलें पनडुब्बी से दागी गईं या किसी अन्य परीक्षण मंच से, इस बारे में केसीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
केसीएनए के अनुसार, परीक्षण का उद्देश्य पानी के भीतर संचालित होने वाली हथियार प्रणालियों की मौजूदा परिचालन तैयारी का आकलन करना था। उत्तर कोरिया ने दावा किया कि इस परीक्षण से नौसेना की रणनीतिक अभियानों को अंजाम देने की क्षमता मजबूत होगी और देश की प्रतिरोधक क्षमता की विश्वसनीयता प्रदर्शित होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षण की निगरानी सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य किम जोंग-सिक और मिसाइल प्रशासन के महानिदेशक जांग चांग-हा ने की। नौसेना की अंडरवाटर हथियार प्रणालियों से जुड़े इंजीनियर भी इस दौरान मौजूद थे।
हालांकि, केसीएनए ने मिसाइलों के नाम, उनकी मारक दूरी और परीक्षण के तकनीकी विवरणों का खुलासा नहीं किया। दक्षिण कोरिया की ओर से भी बुधवार के परीक्षण को लेकर तत्काल कोई विस्तृत जानकारी जारी नहीं की गई।
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर कोरिया ने सोमवार को भी प्योंगयांग क्षेत्र से पूर्वी सागर की ओर कई सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। केसीएनए ने मंगलवार को कहा था कि उस परीक्षण का उद्देश्य एक महत्वपूर्ण तकनीकी घटक के उन्नयन में मिली सफलता की पुष्टि करना था।
पनडुब्बी से दागी जाने वाली रणनीतिक मिसाइलों का विकास उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। ऐसी प्रणालियां समुद्र के भीतर से हमला करने की क्षमता प्रदान कर सकती हैं, जिससे विरोधी देशों के लिए उनके प्रक्षेपण स्थल का पता लगाना और समय रहते जवाबी कार्रवाई करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उत्तर कोरिया ने अपने सैन्य कार्यक्रमों को देश की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा है। वहीं, कोरियाई प्रायद्वीप में हाल के मिसाइल परीक्षणों और दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।
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