राजनीति
महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट ने छोड़े कई अनुत्तरित सवाल
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सोमवार शाम को कथित तौर पर आत्महत्या करने की घटना ने कई सवालों को जन्म दिया है। आत्महत्या से भी कहीं अधिक उनके द्वारा छोड़े गए कथित सुसाइड नोट ने कुछ अनुत्तरित सवाल पीछे छोड़ दिए हैं, जिनके उत्तर तलाशना जरूरी है।
लगभग 6 पृष्ठों के सामने आ रहे सुसाइड नोट से पता चलता है कि महंत बहुत परेशान थे, लेकिन यह नोट स्पष्ट रूप से उन घटनाओं का उल्लेख नहीं करता है, जिन्होंने उन्हें यह चरम कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
महंत ने कहा है कि वह अपने अलग हुए शिष्य आनंद गिरि और हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी के कारण परेशान थे, लेकिन उन्होंने विस्तार से नहीं बताया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “महंत ने इन तीनों से संबंधित विशिष्ट घटनाओं के बारे में कुछ भी नहीं कहा है, जिससे वह बहुत परेशान थे। हम उन तीनों से अलग-अलग पूछताछ कर रहे हैं, जिन्होंने दिवंगत संत को परेशान किया।”
पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुसाइड नोट का खुलासा करने में बेहद सतर्कता बरत रही है।
इसके अलावा, नोट की सत्यता पर भी सवाल उठाया गया है, क्योंकि संत के करीबी लोगों ने कहा है कि वह एक या दो वाक्य से आगे लिखने में माहिर नहीं थे।
यहां तक कि आरोपी आनंद गिरी ने भी कहा है कि उन्हें फंसाने के लिए सुसाइड नोट छोड़ा गया है।
सुसाइड नोट एक तरह की वसीयत भी है, क्योंकि इसमें महंत की अपने उत्तराधिकार के बारे में अपनी इच्छाओं का उल्लेख किया है।
पुलिस अधिकारी ने कहा, “पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है और हम उनकी लिखावट से नमूनों का मिलान करेंगे।”
पुलिस के मुताबिक इस सुसाइड नोट में मठ और अखाड़े के उत्तराधिकारियों के नाम भी लिखे गए हैं, लेकिन इसमें शामिल कंटेंट का अभी खुलासा नहीं किया गया है।
इसके साथ ही ‘सम्मान और अपमान’ के बारे में भी कुछ बातें लिखी गई हैं।
महंत ने लिखा कि उन्होंने अपना जीवन सम्मान और गरिमा के साथ जिया है और अब वे अपमान नहीं सह सकते।
सुसाइड नोट महंत के शव के पास बिस्तर पर पड़ा मिला था।
सूत्रों के मुताबिक महंत ने वीडियो में एक मैसेज भी रिकॉर्ड किया, जो अब पुलिस के कब्जे में है।
जानकारी के मुताबिक, 4 मिनट के वीडियो में भी सिर्फ वही कहा गया है, जो सुसाइड नोट में बताया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय, पहले ही दिन वरिष्ठ अधिकारियों संग की बैठक

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। रविवार को उन्होंने मंत्रालय का कार्यभार संभाला और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। दरअसल शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।
लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है।
शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं।
मनोरंजन
घुटने की सर्जरी के बाद अस्पताल में भर्ती हैं नंदमुरी बालकृष्ण, हालचाल जानने पहुंचे चंद्रबाबू नायडू

टॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और आंध्र प्रदेश की राजनीति का बड़ा चेहरा नंदमुरी बालकृष्ण हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती हैं। हाल ही में फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके घुटने में गंभीर चोट लग गई, जिसके चलते डॉक्टरों को उनकी सर्जरी करनी पड़ी।
इस बीच उनके स्वास्थ्य की जानकारी लेने के लिए रविवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू खुद अस्पताल पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ बालकृष्ण से मुलाकात की, बल्कि डॉक्टरों से भी उनके इलाज, सर्जरी और रिकवरी की पूरी जानकारी ली।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हैदराबाद के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (एआईजी) अस्पताल पहुंचकर नंदमुरी बालकृष्ण का हालचाल जाना। बालकृष्ण उनके पारिवारिक रिश्तेदारी में आते हैं और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के वरिष्ठ नेता भी हैं। अस्पताल में दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से मुलाकात कर उनकी मौजूदा स्थिति और आगे की इलाज प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
बता दें, नंदमुरी बालकृष्ण को 21 जुलाई को राजमुंदरी में अपनी नई फिल्म की शूटिंग के दौरान घुटने में चोट लग गई थी। शूटिंग के दौरान हुए इस हादसे के बाद पहले उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन चोट गंभीर होने के कारण अगले ही दिन एयर एंबुलेंस के जरिए हैदराबाद लाया गया। यहां उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया और कई जरूरी मेडिकल जांच की गईं।
डॉक्टरों की जांच में पता चला कि बालकृष्ण के बाएं पैर के क्वाड्रिसेप्स टेंडन में गंभीर चोट आई है। यह टेंडन जांघ की मांसपेशी को घुटने की हड्डी से जोड़ता है। इसके अलावा घुटने के दोनों तरफ मौजूद सपोर्टिंग टिशू को भी नुकसान पहुंचा। सभी जांचों के बाद डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी को सबसे बेहतर विकल्प माना।
23 जुलाई को नंदमुरी बालकृष्ण की सर्जरी की गई। अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि यह ऑपरेशन करीब तीन घंटे तक चला और यह पूरी तरह सफल रहा।
अस्पताल के अनुसार, फिलहाल नंदमुरी बालकृष्ण की हालत स्थिर है और उन्हें पोस्ट-ऑपरेटिव ऑब्जर्वेशन में रखा गया है। डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए हैं।
बालकृष्ण के घायल होने की खबर सामने आने के बाद, आंध्र प्रदेश सरकार में मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने फोन पर उनसे बात कर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी।
महाराष्ट्र
समाजसेवी उमर लकड़ावाला ने झूला मैदान फैंसी मार्केट के फेरीवालों के रोज़गार का मुद्दा उठाया, न्याय की मांग की

मुंबई: समाजसेवी उमर लकड़ावाला ने झूला मैदान फैंसी मार्केट को हटाए जाने के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावित फेरीवालों के लिए न्याय और उनके रोज़गार की बहाली की मांग की है।
उमर लकड़ावाला ने कहा कि झूला मैदान फैंसी मार्केट पिछले लगभग 50 वर्षों से हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी का प्रमुख साधन रही है। यह मार्केट अग्रीपाड़ा और भायखला क्षेत्र के लोगों के लिए रोजमर्रा की खरीदारी का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी थी, जहां उचित दामों पर लगभग हर ज़रूरत का सामान आसानी से उपलब्ध हो जाता था।
उन्होंने कहा कि मार्केट हटाए जाने के कारण 500 से अधिक गरीब फेरीवाले बेरोज़गार हो गए हैं, जबकि स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं को भी दैनिक आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उमर लकड़ावाला ने आरोप लगाया कि एक डेवलपर की कथित साजिश के तहत इस मार्केट को हटाया गया और ड्रग्स के मुद्दे को कार्रवाई का आधार बनाया गया। उन्होंने कहा, “हम हमेशा से ड्रग्स के खिलाफ रहे हैं और आगे भी रहेंगे। लेकिन सवाल यह है कि यदि कार्रवाई ड्रग्स के खिलाफ थी, तो एक ही दिन में 500 से अधिक गरीब फेरीवालों के रोज़गार पर क्यों असर पड़ा? क्या सभी फेरीवाले ड्रग्स बेचने में शामिल थे?”
उन्होंने कहा कि यदि कानून का पालन कराना है, तो उसे पूरे अग्रीपाड़ा पुलिस क्षेत्र और पूरे ‘ई’ वार्ड में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। केवल एक सड़क या एक मार्केट को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।
उमर लकड़ावाला ने बताया कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के साथ अग्रीपाड़ा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मार्केट हटाए जाने के पीछे की कथित साजिश का मुद्दा उठाया और प्रभावित फेरीवालों के रोज़गार की बहाली के लिए समाधान निकालने की मांग की।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशासन इस मामले में न्यायपूर्ण समाधान निकालेगा ताकि बेरोज़गार हुए फेरीवाले दोबारा अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। उमर लकड़ावाला ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन गरीबों की रोज़ी-रोटी की कीमत पर नहीं। कानून और न्याय सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए।
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