अंतरराष्ट्रीय
असम रिफाइनरी ने अन्य राज्यों से बड़े माल की ढुलाई के लिए आईडब्ल्यूएआई से किया समझौता
असम में सरकारी स्वामित्व वाली नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) ने गुरुवार को भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, ताकि नदियों को ओवर डायमेंशनल कंसाइनमेंट (ओडीसी) और नौकाओं के लिए पूरे साल नौवहन योग्य बनाया जा सके। आईडब्ल्यूएआई के निदेशक (पूर्वोत्तर क्षेत्र) पी. श्रीनिवासन और एनआरएल के वरिष्ठ मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएं) एपी चक्रवर्ती ने आईडब्ल्यूएआई द्वारा पूरे वर्ष नदियों को नौवहन योग्य बनाने का मार्ग प्रशस्त करने और सिंगल पीस प्रीफैब्रिकेटेड प्रक्रिया सहित बड़े कार्गो और पूंजीगत उपकरण लाने में सहायता करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
श्रीनिवासन ने कहा, “समझौता ज्ञापन भविष्य में एनआरएल से सटे धनसिरी नदी का उपयोग करके बड़ी खेपों में माल ढुलाई के साथ व्यापार और वाणिज्य को खोल देगा।”
चक्रवर्ती ने कहा कि केंद्र सरकार के ‘हाइड्रोकार्बन विजन 2030’ के हिस्से के रूप में, एनआरएल ने अपनी मौजूदा शोधन क्षमता को 30 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमएमटीपीए) से बढ़ाकर नौ एमएमटीपीए करने के लिए एक प्रमुख रिफाइनरी विस्तार परियोजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि परियोजना के हिस्से के रूप में, कई ओडीसी और ओडब्ल्यूसी सहित 1,000 से अधिक उपकरण देश और विदेश से भेजे जाएंगे।
एनआरएल उपकरणों की डिलीवरी को सुरक्षित करने के लिए सड़क और जलमार्ग के माध्यम से मल्टीमॉडल परिवहन को लागू करने का इरादा रखता है।
एनआरएल अधिकारियों के अनुसार, सड़क परिवहन में विभिन्न सीमाओं के कारण, देश के पश्चिमी क्षेत्र में प्रमुख बंदरगाहों को एनआरएल तक पूर्वोत्तर क्षेत्र से जोड़ने के लिए समुद्री और नदी मार्गों का लाभ उठाया जाएगा।
परिवहन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, एनआरएल पश्चिम बंगाल में हल्दिया बंदरगाह तक समुद्र के माध्यम से परिवहन के लिए सेल्फ डेरिक वेसल्स का उपयोग करेगा।
एनआरएल के एक बयान में कहा गया है, “भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल रूट और असम के साथ नदी मार्ग के साथ परिवहन के लिए बार्ज का उपयोग किया जाएगा। परिवहन के लिए तेरह ओडीसी की पहचान की गई है, विशेष रूप से समुद्र और जलमार्ग के माध्यम से।”
केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सबार्नंद सोनोवाल और केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जो वस्तुत: कुंजाकानन-एनआरएल टाउनशिप में आयोजित समारोह में शामिल हुए थे।
एनआरएल, तेल और गैस समृद्ध असम की चार रिफाइनरियों में से एक, गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षरित असम समझौते में किए गए प्रावधानों के अनुसार स्थापित किया गया था। इसकी कल्पना तेजी से औद्योगिक और क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए एक वाहन के रूप में की गई थी।
एनआरएल को दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 9 जुलाई 1999 को राष्ट्र को समर्पित किया था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
मिल्वौकी में जुटेंगे जी20 के व्यापार मंत्री, जबरन मजदूरी से लेकर वैश्विक व्यापार नियमों तक होगी चर्चा

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर अगले हफ्ते अमेरिका के मिल्वौकी में जी20 देशों के व्यापार मंत्रियों की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में जबरन मजदूरी, खाने-पीने की चीजों का व्यापार, जरूरत से ज्यादा औद्योगिक उत्पादन और वैश्विक व्यापार व्यवस्था के एक अहम नियम में संभावित बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) की ओर से शुक्रवार को जारी कार्यक्रम के मुताबिक, यह मंत्रिस्तरीय बैठक 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक चलेगी।
ग्रीर वैश्विक सप्लाई चेन से जबरन मजदूरी को खत्म करने और जरूरत से ज्यादा उत्पादन तथा औद्योगिक क्षमता से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत की अगुवाई करेंगे। इस बैठक में भारत की ओर से वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल हिस्सा लेंगे।
मंत्री ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ के सिद्धांत को अपडेट करने पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों के व्यापार को दबाव बनाने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के मुद्दे पर भी बातचीत होगी, जिसे यूएसटीआर व्यापार का हथियार बनाना बताया है।
‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ सिद्धांत के तहत विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के किसी सदस्य देश को अगर वह किसी दूसरे सदस्य देश को कोई खास व्यापारिक फायदा देता है, तो आमतौर पर वही फायदा दूसरे डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों को भी देना होता है। हालांकि, डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत इसके कुछ अपवाद भी हैं।
यूएसटीआर की ओर से जारी जानकारी में यह नहीं बताया गया कि अमेरिका एमएफएन सिद्धांत में किस तरह के बदलाव का प्रस्ताव मिल्वौकी की बैठक में रख सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार शाम ‘बिज़नेस राउंडटेबल’ और ‘नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स’ की ओर से आयोजित स्वागत कार्यक्रम से होगी। बुधवार सुबह औपचारिक कार्यक्रम की शुरुआत ‘ग्लोबल फोरम ऑन स्टील एक्सेस कैपेसिटी’ की मंत्रिस्तरीय बैठक से होगी।
स्टील उत्पादन और जरूरत से ज्यादा औद्योगिक क्षमता हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बड़े विवादों में शामिल रही है। अमेरिका बार-बार कहता रहा है कि जरूरत से ज्यादा उत्पादन से उसके घरेलू उद्योगों और कामगारों पर दबाव पड़ता है।
स्टील से जुड़ी बैठक के बाद ग्रीर और दूसरे देशों के मंत्री मिल्वौकी में ‘रॉकवेल ऑटोमेशन’ की एक फैसिलिटी का दौरा करेंगे। यूएसटीआर के मुताबिक, वे फैक्ट्री के अंदर जाकर कामगारों और उद्योग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
इस दौरे के जरिए ट्रंप प्रशासन अपने इस दावे को सामने रखना चाहता है कि उसकी व्यापार नीति अमेरिका में औद्योगिक उत्पादन को दोबारा बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद कर रही है।
बुधवार दोपहर जी20 व्यापार मंत्रियों की पहली औपचारिक बैठक में ग्रीर शुरुआती संबोधन देंगे। उसी शाम अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय और अमेरिकी कृषि विभाग विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए स्वागत डिनर का आयोजन करेंगे। मुख्य मंत्रिस्तरीय बातचीत गुरुवार को होगी। इसमें सुबह का एक सत्र दोपहर एक बजे तक चलेगा और दूसरा सत्र दोपहर बाद होगा। इन दोनों सत्रों के बीच ग्रीर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी तय है।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों से लाल निशान में खुला, फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव

कमजोर वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में खुला। सुबह 9:17 पर सेंसेक्स 628 अंक या 0.84 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,199 और निफ्टी 207 अंक या 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,299 पर था।
शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व फाइनेंशियल स्टॉक्स कर रहे थे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 2-2 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लूजर्स थे। निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी कंजप्शन और निफ्टी एनर्जी के साथ करीब सभी सूचकांक लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एचसीएल टेक, टीसीएस और इन्फोसिस गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, एचडीएफसी बैंक, एशियन पेंट्स, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एमएंडएम, भारती एयरटेल और इटरनल लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 606 अंक या 0.97 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 61,808 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 147 अंक या 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,844 पर था।
एक्सपर्ट्स ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत का 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना और यूएस के 10-साल के बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 5.11 प्रतिशत हो जाना बाजार के लिए नकारात्मक है। जब तक ये दो ग्लोबल चुनौतियां बनी रहेंगी, तब तक मार्केट में तेजी से रिकवरी की संभावना कम ही दिखती है। हाल के मार्केट ट्रेंड में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर लगातार फोकस बना हुआ है। इन सेगमेंट में ग्रोथ शेयरों में लगातार खरीदारी हो रही है, भले ही उनका वैल्यूएशन ज्यादा है।
उन्होंने आगे कहा कि इन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी घरेलू लिक्विडिटी का आना ही इस सेगमेंट के मजबूत बने रहने का मुख्य कारण है। वहीं, सही वैल्यूएशन के बावजूद लार्ज-कैप शेयर सुस्त पड़े हैं। यह ट्रेंड बदलेगा, लेकिन इसका समय कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड पर निर्भर करेगा।
ज्यादातर वैश्विक बाजार में कमजोरी देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार भी बुधवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
व्यापार
भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”
जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।
इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।
राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।
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