अपराध
कोड वर्ड के जरिए होता है नशे का धंधा
मादक पदार्थों से बने बेकरी उत्पाद मामले में एनसीबी यानी ऐंटि नार्कोटिक्स ब्यूरो ने नया खुलासा किया है। युवाओं को कोड वर्ड दिया जाता है। एनसीबी सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों ड्रग्स से बने केक एवं नशीले बेकरी प्रॉडक्ट्स मामले में गिरफ्तार आरोपी एलस्टन फर्नांडिज और उसकी महिला साथी से हुई पूछताछ के बाद 3 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें एक ऑटोरिक्शा चालक और एक स्टूडेंट भी है। गोरेगांव निवासी ऑटोरिक्शा चालक का नाम अफसर खान है। उसकी गिरफ्तारी मीरा रोड इलाके से हुई है। उसने पूछताछ में बताया कि वह अफ्रीकन नागरिकों द्वारा दिए गए ड्रग्स को मुंबई और आसपास सप्लाई करने का काम करता है। उसके पास से 20 ग्राम कोकीन मिला है। इसके अलावा फहाद कुरैशी को भी गिरफ्तार किया गया है, जो अफसर के साथ मिलकर मादक पदार्थों से बने पेस्ट्री, केक इत्यादि सामग्रियों को विभिन्न पार्टियों में ऑटोरिक्शा से लेकर जाता था।
माहिम से एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जो चरस, अफीम और गांजा बेचता और बड़ी-बड़ी पार्टियों में पहुंचाता था। इसके पास से 60 ग्राम मफेड्रिन और 350 ग्राम गांजा मिला है। गौरतलब है कि पिछले दिनों एनसीबी ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जो बेकरी पदार्थो में एक प्रकार का बीज (मादक पदार्थ) का पेस्ट मिलाकर नशीला केक, ब्राउनी केक और बेकरी पदार्थ बनाकर उसे हुक्का पार्लर सेंटरों और नशे के शौकीन युवाओं को स्पेशल गिफ्ट्स इत्यदि में तौर पर अपने सदस्यों के जरिए भेजा करता था। यह गिरोह मालाड में चल रहा था। एनसीबी सूत्रों के मुताबिक, इन दिनों ड्रग्स पैडलरों द्वारा मुंबई और आसपास स्टूडेंट्स की मदद से ड्रग्स की खरीद-बिक्री एवं खपत करवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन स्टूडेंट्स का का काम विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को नशे का सामान उपलब्ध कराना और उन्हें नशे का आदी बनाना है। मरोल के सचिन तुपे नामक व्यकि की गिरफ्तारी से इस बात का खुलासा हुआ है कि ड्रग्स के धंधे में युवाओं की संलिप्तता बढ़ते जा रही है।
इन युवाओं को कोड वर्ड नाम दिया गया है, जिसके जरिए ये लोग एलएसडी जैसे मादक पदार्थों को बेचने का काम करते हैं। सचिन के पास से एनसीबी ने 11 ब्लॉट्स एलएसडी जब्त किया है। जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के नेतृत्व में एनसीबी की मुंबई यूनिट इन आरोपियों से पूछताछ कर ड्रग्स गिरोह के बारे में और अधिक जानकारी जुटाने का काम कर रही है।
अपराध
मुंबई : हाथी दांत को 3.5 करोड़ रुपए में बेचने के मामले में चार आरोपी गिरफ्तार

ARREST
मुंबई में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चेम्बूर पुलिस ने करोड़ों रुपये के हाथी दांत बेचने की कोशिश कर रहे चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई क्राइम डिटेक्शन यूनिट द्वारा गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसमें अवैध रूप से हाथी दांत की खरीद-फरोख्त की योजना का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आकाश अशोक अव्हाड (28), संदीप रणधीर बिडलान (33), शशांक चंद्रशेखर रंजंकर (38) और दिनेश राममनोहर अग्निवंशी (40) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इन सभी ने मिलकर हाथी दांत की अवैध बिक्री के लिए सौदा तय किया था।
जानकारी के अनुसार, 22 अप्रैल को चेम्बूर के आरसी मार्ग स्थित एक होटल में पुलिस ने योजना बनाई। इसके बाद मुखबिरों को खरीदार बनाकर आरोपियों से संपर्क कराया गया और सौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक स्थानीय लॉज में कमरा बुक किया गया। आरोपियों ने तय योजना के तहत वहां हाथी दांत पहुंचाया।
जैसे ही मुखबिरों से संकेत मिला, पुलिस टीम ने होटल के कमरे में छापा मार दिया। छापेमारी के दौरान कमरे में मौजूद चारों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। मौके से दो बड़े हाथी दांत बरामद किए गए, जिन्हें बिस्तर पर रखा गया था।
महाराष्ट्र वन विभाग की टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने प्रारंभिक जांच में पुष्टि की कि बरामद वस्तुएं असली हाथी दांत हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी इन हाथी दांतों को लगभग 3.5 करोड़ रुपये में बेचने की योजना बना रहे थे।
बरामद हाथी दांतों का वजन क्रमशः करीब 11 किलोग्राम और 20.6 किलोग्राम बताया गया है। इसके अलावा पुलिस ने परिवहन में इस्तेमाल किए गए बैग, पैकिंग सामग्री और चार मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। सभी जब्त वस्तुओं को सील कर सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं—9, 39, 44, 48, 50 और 51 के तहत मामला दर्ज किया है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। हाथी दांतों के स्रोत का पता लगाने और इस अवैध तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए आरोपियों से पूछताछ जारी है।
अपराध
नासिक के बाद मुंबई में यौन उत्पीड़न के मामलों में लव जिहाद और कॉर्पोरेट जिहाद करने की साजिश, आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने कॉर्पोरेट जिहाद की बात से किया इनकार

ARREST
मुंबई; नासिक टीसीएस के बाद अब मुंबई में सेक्सुअल असॉल्ट केस को कॉर्पोरेट और धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई है। यहां, मुंबई के अग्रीपारा पुलिस स्टेशन ने 19 साल की टेलीमार्केटर को परेशान करने के मामले में अशरफ सिद्दीकी नाम के 25 साल के युवक को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस अब इस केस की जांच कर रही है, लेकिन पीड़ितों के परिवार इसे कॉर्पोरेट जिहाद और लव जिहाद भी कहने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ने इससे भी इनकार किया है। एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में थर्ड-पार्टी टेलीमार्केटर के तौर पर काम करने वाली महिला सहकर्मी को अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में अग्रीपारा पुलिस स्टेशन में अशरफ नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस 75, 78(2) और 70 और आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन के तहत केस दर्ज किया गया है। पीड़िता के बयान और पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने न सिर्फ उसे सेक्सुअल इंटरकोर्स के लिए कई मैसेज भेजे, बल्कि अपनी महिला सहकर्मियों के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए अश्लील तस्वीरें भी भेजीं। पुलिस को दिए अपने बयान में पीड़िता ने कहा कि जब उसने अशरफ को बताया कि वह हिंदू है, तो उसने जवाब दिया, “आजकल हिंदू लड़कियां मुस्लिम लड़कियों को पसंद करती हैं।” इसके बाद पीड़िता के परिवार ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, उसके रिश्तेदारों ने मांग की है कि यह लव जिहाद का मामला है, इसलिए इसकी एसआईटी जांच होनी चाहिए और साथ ही आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया जाना चाहिए।
अपराध
मुंबई क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, अवैध हथियारों के साथ 5 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई में क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी आरोपी बिना लाइसेंस के अवैध हथियार और कारतूस बेचने की कोशिश कर रहे थे। अब पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले के तह तक जाने की कोशिश कर रही है।
यह मामला पायधोनी इलाके का है, जहां पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारा और इन लोगों को रंगे हाथों पकड़ लिया। पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ लोग नारायण धुरु स्ट्रीट के एक होटल में अवैध हथियारों की डील करने आने वाले हैं। इस जानकारी के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने तुरंत टीम बनाकर वहां निगरानी शुरू की और फिर मौके पर छापा मार दिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां मौजूद 5 लोगों को पकड़ा। तलाशी लेने पर उनके पास से 3 पिस्तौल, 3 मैगजीन और 21 जिंदा कारतूस बरामद हुए। जब पुलिस ने उनसे हथियारों के लाइसेंस के बारे में पूछा तो वे कोई भी वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके। पूछताछ में उन्होंने यह भी माना कि वे इन हथियारों को बेचने के लिए लाए थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुरेंद्र अमरलालजी मीणा (25), रोहित घनश्याम मीणा (24), कार्तिक बिजेंद्र पारचा (19), दीपक कुमार चितरमल बिल (26) और रोहण/रोनुरोनक पन्नालाल मेरोथा (25) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी राजस्थान और हरियाणा के रहने वाले बताए जा रहे हैं और उनकी उम्र 19 से 26 साल के बीच है।
इस पूरे मामले में पायधोनी पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट की धारा 3 और 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा अन्य संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन आरोपियों का किसी बड़े गैंग से कोई संबंध तो नहीं है। खासकर यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इनका कुख्यात बिश्नोई गैंग से कोई लिंक है या नहीं। फिलहाल पुलिस हर एंगल से इस मामले की जांच कर रही है।
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