राष्ट्रीय समाचार
आईएनएस विराट 40 प्रतिशत नष्ट हो चुका, यह संग्रहालय में तब्दील नहीं हो सकता : सुप्रीम कोर्ट
युद्धपोत आईएनएस विराट को एक संग्रहालय में बदलने की एक निजी कंपनी की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को विमानवाहक पोत आईएनएस विराट को संग्रहालय में बदलने की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसे पहले से ही 40 प्रतिशत तोड़ा जा चुका है।
न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और वी. रामासुब्रमण्यन के साथ ही प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने निजी कंपनी एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील से कहा, “आप बहुत देर से आए हैं, 40 प्रतिशत जहाज पहले ही ध्वस्त हो चुका है, ऐसे में आप इसे कैसे संग्रहालय बना पाएंगे।”
इस पर कंपनी के वकील ने दलील देते हुए कहा कि वह एक प्रतिष्ठित कंपनी की सेवाएं ले सकते हैं और एक सर्वेक्षण करा सकते हैं और इसके बाद मामले में शीर्ष अदालत में जा सकते हैं।
इस पर पीठ ने जवाब दिया, “किसी ने जहाज के लिए अच्छे पैसे का भुगतान किया था। सरकार ने जहाज की बिक्री के लिए कानूनी लेन-देन में प्रवेश किया। उन्होंने 40 प्रतिशत को नष्ट कर दिया है। आपको मामले में बहुत देर हो चुकी है।”
पीठ ने कहा कि जहां तक राष्ट्रवाद की बात है तो हम आपके साथ हैं, लेकिन आपको बहुत देर हो चुकी है।
गुजरात के भावनगर जिले के अलंग में एक निजी कंपनी श्री राम ग्रुप ने विराट को पिछले साल जुलाई में हुई नीलामी में 38.5 करोड़ रुपये में खरीदा था। कंपनी ने पिछले साल दिसंबर में इसके विखंडन या तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने श्री राम ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि बंबई हाईकोर्ट ने कंपनी को रक्षा मंत्रालय के समक्ष एक अभ्यावेदन प्रस्तुत करने और उनकी अनुमति लेने के लिए कहा था। धवन ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा, “हम हस्तक्षेप नहीं करने जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने आपको (निजी फर्म) एक अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी और सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। ठीक है खारिज कर दिया।”
इससे पहले 5 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने कहा था, “जहाज अब एक निजी संपत्ति है। इसका 40 प्रतिशत हिस्सा पहले ही नष्ट हो चुका है और इसे अब विमान वाहक का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।”
फरवरी में शीर्ष अदालत ने आईएनएस विराट के तोड़ने पर रोक लगा दी थी, जो लगभग तीन दशकों तक भारतीय नौसेना के साथ सेवारत रहा था और इसे रिटायर होने के बाद सितंबर 2020 से गुजरात के अलांग के जहाज-ब्रेकिंग यार्ड में समुद्र तट पर खड़ा कर दिया गया।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली में नाबालिग लड़की से गैंगरेप और हत्या मामले का एनसीडब्ल्यू ने लिया संज्ञान, कमिश्नर को लिखा पत्र

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आउटर नॉर्थ दिल्ली में 16 साल की लड़की से गैंगरेप और हत्या का मामला खुद संज्ञान में लिया है। एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन विजया रहाटकर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर समयबद्ध और विस्तृत जांच, सख्त कानूनी कार्रवाई और सभी फोरेंसिक सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की है।
दरअसल नाबालिग लड़की की गैंगरेप के बाद चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी गई थी। लड़की का शव एक खुले मैदान में मिला था। राष्ट्रीय महिला आयोग ने पोक्सो एक्ट और बीएनएस के तहत उचित कार्रवाई करने और जहां कानूनी रूप से लागू हो, वहां 16-18 साल के आरोपियों के लिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 15 के तहत शुरुआती जांच करने को भी कहा है।
आयोग ने पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा, कानूनी मदद, काउंसलिंग और मुआवजे के साथ-साथ सात दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।
13 सितंबर को उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास सड़ी-गली लाश मिली थी। शव की हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का। पुलिस को जांच में पता चला कि गैंगरेप के बाद हत्या कर शव फेंका गया था। पुलिस के मुताबिक इस वारदात को 4 लोगों ने अंजाम दिया, जिसमें 3 नाबालिग थे।
जांच में पता चला कि पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। पुलिस के अनुसार सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की से दुष्कर्म किया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया। लावारिस कुत्तों ने शव के कुछ हिस्से खा लिए थे और पीड़िता का एक हाथ शरीर से अलग पड़ा मिला था। पुलिस ने बताया कि लड़की के परिवार ने उसकी गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी।
राष्ट्रीय समाचार
‘महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं’, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामले पर बोलीं प्रियंका

दिल्ली में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म और हत्या के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया।”
उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया। देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है। महिलाओं के विकास की सिर्फ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं और हिंसा होती है, मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं। एफआईआर दर्ज तक नहीं होते।
साथ ही, प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं।
इससे पहले, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली की घटना को लेकर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती। दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।”
कांग्रेस सांसद ने लिखा, “अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं। दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सजा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।”
यह मामला 13 सितंबर को सामने आया, जब उत्तरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में कुशक रोड पर जयपाल राणा के खेत के पास एक बुरी तरह सड़ी-गली लाश मिली। हालत ऐसी थी कि पुलिस शुरू में यह भी तय नहीं कर पाई कि शव लड़के का है या लड़की का।
जांच में पीड़िता की पहचान की गई। बाद में पता चला कि इस वारदात को चार लोगों ने अंजाम दिया, जिनमें तीन नाबालिग हैं। आरोपियों ने बाद में लड़की के शव को खुले इलाके में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार, पीड़िता आरोपियों को जानती थी और उनके साथ टेंपो में सफर कर रही थी। सफर के दौरान सभी ने शराब पी और फिर लड़की के साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को खुले खेत में फेंक दिया गया।
राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी 19 सितंबर को ग्लोबल एनवायरनमेंट कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 सितंबर को ‘पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन में पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों और न्यायिक दृष्टिकोणों पर चर्चा की शुरुआत होगी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, दिल्ली में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 17 देशों के जज और न्यायिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में आने वाली कमियों जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और पर्यावरण से जुड़े कामकाज (गवर्नेंस) और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेंगे।
बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञ, भारत के सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमियों, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समितियों (एसईएसी), राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरणों (एसईआईएए), राज्य वेटलैंड प्राधिकरणों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह सम्मेलन न्यायिक दृष्टिकोण और पर्यावरण से जुड़े कामकाज के तरीकों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी अहम चुनौतियों जैसे पॉलिसी बनाने, उसे लागू करने और उसके पालन में कमियों पर बातचीत को बढ़ावा देगा और पर्यावरण से जुड़े कामकाज और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करेगा।
इससे पहले, ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ के मौके पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरपर्सन जस्टिस (रिटायर्ड) प्रकाश श्रीवास्तव ने स्वच्छ हवा को विलासिता की चीज नहीं बल्कि एक बुनियादी जरूरत बताया था। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण एक जटिल चुनौती है क्योंकि यह राजनीतिक सीमाओं को नहीं मानता।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए साथ-साथ चल सकते हैं।”
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के चेयरपर्सन ने इस बात पर जोर दिया कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ पर्यावरण में रह सकें।
जस्टिस श्रीवास्तव ने कहा, “स्थानीय निकायों को नागरिकों को जागरूक करके प्रदूषण को उसके स्रोत पर ही रोकने की कोशिश करनी चाहिए; समस्या से निपटने के लिए नवीनतम तकनीकों को अपनाना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए सभी को शामिल करने वाले और ‘पूरे समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए।”
पर्यावरण सचिव तन्मय कुमार ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों वाले, समन्वित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपना रही है। इस कार्यक्रम के दौरान, पर्यावरण मंत्रालय ने ‘नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ (एनसीएपी) के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले शहरों और वार्डों को भी सम्मानित किया। इन्हें 5वें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण’ के तहत रैंकिंग दी गई थी।
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