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Thursday,01-October-2026
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भाकियू नेता का आरोप, कृषि कानून पर देश को गुमराह कर रही सरकार

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Arvind-Kejriwal

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के एक नेता ने सरकार पर पलटवार करते हुए नये कृषि कानून को लेकर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार ने किसानों के हित में कानून बनाने से पहले विरोध के बावजूद किसानों की राय नहीं ली क्योंकि सरकार इन कानूनों के माध्यम से कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाना चाहती है। उधर, सरकार का कहना है कि नये कृषि कानून किसानों के फायदे के लिए है लेकिन कुछ लोग इसे कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के नाम पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं।

दिल्ली की सीमाओं पर चले रहे किसान आंदोलन में शामिल भाकियू के हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार खरबों रुपये के एग्रो बिजनेस को कॉरपोरेट के हवाले करना चाहती है।

उन्होंने अध्यादेश के माध्यम से कोरोना काल में इस कानून को लागू करने पर भी सवाल उठाया है।

गुरनाम सिंह का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कोरोना काल में यह कानून इसलिए लाया ताकि लोग इसके विरोध में आंदोलन ना कर पाएं, लेकिन इसके बावजूद जब कड़ा आंदोलन हुआ तब कानून में संशोधन की बात की जा रही है।

उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, जब अध्यादेश के बाद कानून बनाया गया (संसद के मानसून सत्र में तीनों अध्यादेश के बदले लाए गए विधेयकों को दोनों संसदों ने मुहर लगाई) और कानून बनाने से पहले देश में बगावत (नये कानून का विरोध) हो गई, उस वक्त इनको (सरकार) हमें बुलाना चाहिए था और किसानों से पूछना चाहिए था और इस पर बहस करनी चाहिए थी। जब बगावत हो चुकी तब इन्होंने किसानों को क्यों नहीं बुलाया और कानून में संशोधन की बात क्यों नहीं की।

गुरनाम सिंह ने सरकार पर आरोप लगाते हुए आगे कहा, इसका मतलब है कि ये देश को गुमराह कर रहे हैं और देश को गुमराह करके पूरा एग्रोबिजनेस कॉरपोरेट के हवाले करना चाहते हैं। यह खरबों का बिजनेस है जिससे देश का कोई भी वर्ग हो वह भुखमरी की कगार पर जाएगा और मोटा मुनाफा कॉरपोरेट को जाएगा।

भाकियू नेता ने कहा कि जिन लोगों से ये (सरकार) चुनावी चंदा लेते हैं उन कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए ही ये कानून बनाए गए हैं और देश को गुमराह किया जा रहा है।

गुरनाम सिंह ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के मसले पर प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) से बयान देने की मांग की। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के साथ आठ दिसंबर को हुई किसान नेताओं की मुलाकात के दौरान एमएसपी के मसले पर हुई चर्चा को दोहराते हुए कहा कि गृहमंत्री ने सभी 23 फसलों की सौ फीसदी खरीद एमएसपी पर करने से इनकार कर दिया था, लेकिन सरकार प्रचारित कर रही है कि वह एमएसपी पर फसलें खरीदने को तैयार है, इसलिए प्रधानमंत्री को इस पर बयान देना चाहिए।

राष्ट्रीय समाचार

हम मिलकर आतंकवाद से कैसे लड़ सकते हैं, इसकी बेहतरीन मिसाल कैप्टन स्मित ने पेश की: इजरायली राजदूत

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नई दिल्ली । भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कैप्टन स्मित मच्छार के शौर्य की तारीफ की है। उन्होंने कहा, “हम कैसे आतंकवाद का मिल कर सामना कर सकते हैं और आतंक के सामने घुटने नहीं टेकते उसकी ये ‘बेहतरीन मिसाल’ है।” गुरुवार को आईएएनएस से विशेष साक्षात्कार में रूवेन ने अपने विचार व्यक्त किए।

अजार ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने इस घटना को लेकर कोई बात की है या नहीं, लेकिन ऐसे मामलों में दोनों देशों की आतंकवाद-रोधी एजेंसियां ​​एक-दूसरे के संपर्क में रहती हैं।

इस घटना में भारतीय पायलट और यात्रियों की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “…हम जानते हैं कि आतंकवाद से लड़ने के लिए सरकारों का मिलकर काम करना ही काफी नहीं है। यह जरूरी है कि लोग भी मिलकर काम करें, जैसा कि हमने कल (बुधवार) देखा। मुझे लगता है कि यह एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे आतंकवादियों के सामने घुटने न टेककर और व्यक्तिगत स्तर पर मिलजुलकर अपना भविष्य तय कर सकते हैं। और जो कल हुआ वो ठीक ऐसा ही हुआ।”

बुधवार को, फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट, जिसमें 170 से ज्यादा यात्री सवार थे, के को-पायलट ने विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की और बाद में कैप्टन स्मित पर हमला किया, जो उसे ऐसा करने से रोकने की कोशिश कर रहे थे।

उस समय, बोइंग 737 विमान, जो लगभग 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, 15,600 फीट तक पहुंचने से पहले लगभग 23,000 फीट प्रति मिनट की रफ्तार से नीचे गिरने लगा। हालांकि, मच्छार ने को-पायलट का मुकाबला किया, उसे रोका और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया ताकि यात्री और क्रू मेंबर उसे काबू में कर सकें।

जब उनसे पूछा गया कि क्या पीएम मोदी और पीएम नेतन्याहू ने इस घटना के बारे में बात की है, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता कि इस समय नेताओं ने एक-दूसरे से बात की है या नहीं। मुझे लगता है कि हम लगातार संपर्क में हैं। हमारी आतंकवाद-रोधी एजेंसियां ​​लगातार बातचीत कर रही हैं, और मुझे यकीन है कि चाहे उच्चतम स्तर पर हो, या मध्यम और ऑपरेशनल स्तर पर, हम जानकारी साझा करेंगे और आतंकवाद से लड़ने के लिए जरूरी हर कदम उठाने की स्थिति बनाने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।”

इससे पहले, अजार ने कहा कि वह कैप्टन स्मित के ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं। एक्स पर उन्होंने लिखा, “इजरायल, भारत और यूएई के साथ मिलकर, मैं फ्लाईदुबई की फ्लाइट एफजेड1073 के अनुभवी और काबिल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की सलामती के लिए प्रार्थना करता हूं। उनकी और दूसरे इजरायली व अमीराती यात्रियों और क्रू सदस्यों की हिम्मत ने 180 लोगों की जान बचाई।”

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राष्ट्रीय समाचार

शाहजहांपुर: मंदिर में दो साधुओं की निर्मम हत्या, जलाए शव, इलाके में सनसनी

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शाहजहांपुर । उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर में एक मंदिर के अंदर दो साधुओं की हत्या से इलाके में सनसनी फैल गई। स्थानीय युवक पर दो साधुओं की हत्या करने और उसके बाद दोननों के शवों को जलाने का आरोप है। फिलहाल, पुलिस मुख्य आरोपी सुमित को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

यह मामला जनपद शाहजहांपुर के खुदागंज थाना अंतर्गत सूथा गांव का है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों साधुओं की हत्या के बाद उनके शवों को मंदिर परिसर में ही जला दिया गया था। गुरुवार सुबह जब ग्रामीण मंदिर पहुंचे तो वहां दो चिताओं की राख और जले हुए अवशेष देखकर हड़कंप मच गया।

मृतकों की पहचान साधु गोपालदास और उनके शिष्य बिहारीदास के रूप में हुई है। दोनों साधु मंदिर में ही रहते थे। इस घटना के बाद ग्रामीणों और अन्य साधुओं में आक्रोश है। बाबा बिहारी दास के भतीजे प्रदीप सिंह ने आरोप लगाया कि गांव के युवक ने उनके चाचा और उनके शिष्य की हत्या कर दोनों लोगों को जला दिया।

मामले में पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने बताया कि गुरुवार सुबह करीब 7 बजे थाना खुदागंज क्षेत्रांतर्गत ग्राम सूथा से सूचना प्राप्त हुई कि गांव के बाहर एक देवस्थान बना हुआ है, जहां दो संन्यासी हैं। उक्त दोनों संन्यासियों के शव जली हुई अवस्था में मिले हैं। सूचना का तत्काल संज्ञान लेते हुए थाना पुलिस, उच्चाधिकारीगण और फोरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि गांव के ही शिव कुमार, जो उक्त देवस्थान के संरक्षक भी हैं, की ओर से पुलिस को लिखित तहरीर है कि गांव का ही सुमित, जो कुछ दिन पहले न्यायालय से जमानत प्राप्त कर जेल से बाहर आया है, विगत कुछ दिनों से देवस्थान पर दोनों संन्यासियों के साथ उठने बैठने लगा था। ग्रामवासियों की ओर से प्राथमिक तौर पर इस बात की पुष्टि की गई है कि दोनों संन्यासियों को एक बार सुमित की ओर से यह कहा गया था कि ‘आप दोनों यहां से हट जाइए, अब मैं यहां रहने वाला हूं, मेरा ही एकाधिकार होगा।’

एसपी के अनुसार, प्रथम दृष्टया इसी बात को लेकर बुधवार रात में यह घटना कारित किया जाना प्रतीत हो रहा है। मौके से सभी भौतिक साक्ष्य संकलित करते हुए दोनों शवों को घटना का सही समय और सही कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। थाना पुलिस को प्राप्त तहरीरी सूचना के आधार पर नामजद आरोपी सुमित के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी सुमित को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पूरे घटनाक्रम में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं, उनके आधार पर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

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राजनीति

वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश का आरोप, सीएम शिवकुमार बोले-फॉर्म 7 के फर्जी आवेदनों पर नजर रखें

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बेंगलुरु । कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंटों (बीएलए), पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए ‘फॉर्म 7’ के तहत बड़ी संख्या में आवेदन जमा किए जाने के आरोपों के बारे में जानकारी दें।

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए दो वीडियो में, शिवकुमार ने बीएलए, बीएलए-1, बीएलए-2 और पार्टी के दूसरे नेताओं से कहा कि वे बूथ-लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ मिलकर यह पता लगाएं कि क्या उनके विधानसभा क्षेत्रों और पोलिंग बूथों में वोटरों के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है।

शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कुछ भाजपा नेता बड़ी संख्या में ‘फॉर्म 7’ एप्लीकेशन जमा कर रहे हैं ताकि वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाए जा सकें। उनका आरोप है कि खास तौर पर अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को निशाना बनाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि उन्हें बेलगावी, भालकी, मुदिगेरे, मैसूर और कर्नाटक के कई अन्य इलाकों से ऐसी घटनाओं की जानकारी मिली है, जिनमें कांग्रेस विधायकों वाले विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं। आलंद विधानसभा क्षेत्र में ‘फॉर्म 7’ के कथित गलत इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि ऐसे तरीकों से कांग्रेस को चुनावी तौर पर चुनौती देने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं से कहा कि वे जमा किए गए आवेदनों की संख्या और प्रभावित विधानसभा क्षेत्रों व पोलिंग बूथों के बारे में पक्की जानकारी इकट्ठा करें। उन्होंने उनसे कहा कि वे गुरुवार दोपहर से पहले ये जानकारी उनके ऑफिस और ईमेल एड्रेस पर भेज दें।

सीएम शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने पहले ही पुलिस अफसरों, डिप्टी कमिश्नरों और कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी से इन आवेदनों और कथित गड़बड़ियों के बारे में जानकारी मांगी है।

उन्होंने कहा कि वे इस मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे ताकि यह पक्का किया जा सके कि योग्य वोटर अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।

इस बात पर जोर देते हुए कि राजनीतिक जुड़ाव, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि से परे वोट देने के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए, शिवकुमार ने कहा कि हर असली वोटर का नाम वोटर लिस्ट में बना रहना चाहिए।

‘फॉर्म 7’ का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। ऐसे आवेदनों की चुनाव नियमों के तहत जांच की जाती है। कर्नाटक में विवाद इस आरोप पर है कि बड़ी संख्या में आवेदन जमा करके योग्य वोटरों के नाम हटाने की कोशिश की जा सकती है।

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