राजनीति
असम के पूर्व मुख्यमंत्री गोगोई को हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि
गुवाहाटी में बड़ी संख्या में पार्टी नेता, कार्यकर्ता और हजारों महिला, पुरुषों ने अपने दिग्गज कांग्रेस नेता और असम के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे तरुण गोगोई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका गौहाटी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल(जीएमसीएच) में सोमवार को निधन हो गया था। वह 86 साल के थे। गोगोई के पार्थिव शरीर को मंगलवार को जीएमसीएच से उनके आधिकारिक निवास, राज्य नागरिक सचिवालय जनता भवन और असम कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन ले जाया गया था। यहां लोगों द्वारा अंतिम सम्मान दिए जाने के लिए उनके शव को श्रीमंत संकरादेवा कलाक्षेत्र में रखा गया था।
असम प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख रिपुन बोरा ने कहा कि गोगोई का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ गुरुवार को दिसपुर के मानबेन्द्र सरमा कॉम्प्लेक्स में होने की संभावना है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कुछ अन्य केंद्रीय नेताओं के बुधवार को गुवाहाटी आने की संभावना है।
दिवंगत नेता का शव कांच के ताबूत, पुष्पमाला और फूलों में लिपटा हुआ था। उन्हें उनके सांसद बेटे गौरव गोगोई, रिपुन बोरा, विपक्षी नेता देवव्रत सैकिया और प्रदुत बोरदोलोई और रकीबुल हुसैन जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कंधा दिया।
असम के पूर्व मुख्यमंत्री के पार्थिव शरीर के साथ जुलूस के दौरान, हजारों राहगीरों और प्रतीक्षा करने वाले पुरुषों और महिलाओं ने अपने प्रिय नेता को पुष्पांजलि अर्पित की। उनमें से कई रोते हुए देखे गए।
वहीं राज्य सचिवालय जनता भवन में मुख्य सचिव जिष्णु बरूआ, पुलिस प्रमुख भास्कर ज्योति महंत और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित की।
असम के मुख्यमंत्री सबार्नंद सोनोवाल ने सोमवार को गोगोई के सम्मान में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। गौरतलब है कि गोगोई 15 सालों तक, यानी साल 2001-2016 तक असम के मुख्यमंत्री रहे।
साल 1971 से 2001 के बीच असम से छह बार सांसद रहे दिवंगत गोगोई अपनी मृत्यु के समय जोरहाट जिले के टीटाबर विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे।
कोविड-19 से संक्रमित हुए गोगोई को 60 दिनों के इलाज के बाद संक्रमण से उबरने के पश्चात 25 अक्टूबर को जीएमसीएच से छुट्टी दे दी गई थी।
हालांकि पोस्ट कोविड-19 जटिलताओं के बाद वरिष्ठ राजनेता को 2 नवंबर को जीएमसीएच में फिर से भर्ती करना पड़ा और शुक्रवार से उनकी हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई।
जीएमसीएच के डॉक्टर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों के साथ लगातार संपर्क में थे। उनकी गंभीर स्थिति के कारण गोगोई को इलाज के लिए राज्य के बाहर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रूस के साथ मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी का मुद्दा भारत लगातार उठा रहा: एमईए

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि भारत रूस के साथ विभिन्न स्तरों पर उन भारतीय नागरिकों की रिहाई का मुद्दा उठाना जारी रखेगा, जो अभी भी रूस के पास है। उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी20 बैठक के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की और यूरोप तथा मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “विदेश मंत्री ने जी20 बैठक के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। इनमें से एक बैठक रूस के विदेश मंत्री के साथ थी, जिसमें यूरोप और मध्य पूर्व के मौजूदा संघर्षों पर चर्चा हुई।”
विदेश मंत्री जयशंकर ने शनिवार को अटलांटा में आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव से मुलाकात की थी। बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा था कि उन्होंने रूस के विदेश मंत्री के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नई दिल्ली और उससे पहले बिश्केक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि वह स्वयं भी मॉस्को गए थे और वहां लावरोव से चर्चा की थी। इसके अलावा वह इस दौरान कीव भी गए थे।
रूस के साथ मौजूद भारतीय नागरिकों की वापसी के बारे में रणधीर जायसवाल ने कहा, “जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूं, यह ऐसा मुद्दा है जिसे हम लगातार विभिन्न स्तरों पर रूसी पक्ष के साथ उठा रहे हैं।”
पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने बताया था कि करीब 259 भारतीय नागरिकों की भर्ती रूसी सेना में हुई थी। इनमें से 139 लोगों को भारत सरकार के प्रयासों से सेवा से मुक्त कराकर वापस भारत लाया जा चुका है, जबकि 69 अन्य भारतीयों की वापसी को लेकर मॉस्को के साथ बातचीत जारी है।
मंत्रालय ने कहा कि वह यह नहीं बता सकता कि इनमें से कितने लोगों ने रूसी नागरिकता ले ली है, क्योंकि उसके रिकॉर्ड केवल भारतीय नागरिकों से संबंधित हैं।
राष्ट्रीय समाचार
नीट-पीजी 2025 : सुप्रीम कोर्ट में कट-ऑफ घटाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट – पोस्टग्रेजुएट (नीट-पीजी) 2025 परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट-पीजी 2025 परीक्षा के लिए क्वालीफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल घटाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की।
नीट-पीजी 2025 परीक्षा को लेकर मंगलवार को 12 सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की गई। विशेषज्ञ समिति ने बताया कि 2027 से नीट-पीजी और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट – सुपर स्पेशियलिटी (नीट-एसएस) के लिए पर्सेंटाइल-आधारित प्रणाली को रैंक-आधारित प्रणाली से बदलने का प्रस्ताव दिया है, जिसे नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, लेकिन नियमों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
कोर्ट को बताया गया कि समिति की चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल खाली सीटों को भरने के लिए पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के न्यूनतम योग्यता मानकों में ढील नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कमेटी की रिपोर्ट सभी पक्षों को सौंपने का निर्देश दिया। कमेटी की रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता अपना जवाब दाखिल करेंगे।
बता दें कि नीट-पीजी परीक्षा का आयोजन नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) द्वारा कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में किया जाता है। नीट-पीजी 2025 की परीक्षा 3 अगस्त 2025 को एक ही शिफ्ट में सुबह 9 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक आयोजित की गई थी। परीक्षा का परिणाम 3 सितंबर 2025 को घोषित कर दिया गया था।
एनबीईएमएस की ओर से नीट-पीजी 2025 की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड 31 जुलाई 2025 को जारी किए गए थे। वहीं, उम्मीदवारों के लिए परीक्षा शहर चुनने और उसमें सुधार करने के लिए विंडो 13 से 17 जून 2025 तक आधिकारिक पोर्टल पर सक्रिय थी।
एनबीईएमएस की ओर से देश के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन), एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और पीजी डिप्लोमा जैसे पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों की पात्रता और रैंकिंग निर्धारित करने के लिए नीट-पीजी परीक्षा आयोजित की जाती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत से व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर का नुकसान: रिपोर्ट

भारत के साथ वर्ष 2019 से व्यापारिक संबंध निलंबित होने के कारण पाकिस्तान को अनुमानित 40 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। भारत से आयात बंद होने के बाद पाकिस्तानी कारोबारियों को दूसरे और दूरस्थ देशों से सामान मंगाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी वृद्धि हुई है। पाक-इंडिया बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष ने यह जानकारी दी।
कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काउंसिल के अध्यक्ष नूर मुहम्मद कसूरी ने कहा कि पुलवामा आतंकी हमले और उसके बाद दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते वाणिज्यिक संबंध बाधित हुए। इसका सीधा असर पाकिस्तान के कारोबार और उद्योगों पर पड़ा है। भारत से पहले जिन वस्तुओं का आयात आसानी से हो जाता था, अब उन्हें दूसरे देशों से मंगाने में अधिक समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
कसूरी ने बताया कि पाकिस्तान का दवा उद्योग पहले भारत से मिलने वाले कच्चे माल पर काफी हद तक निर्भर था। उनके अनुमान के मुताबिक, भारत से आयात दोबारा शुरू होने पर पाकिस्तान को हर साल 2 से 3 अरब डॉलर की बचत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर कपास उत्पादन में गिरावट के कारण पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग पर भी अतिरिक्त 5 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। कपड़ा मिलों को अब ब्राजील, मिस्र, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कपास मंगानी पड़ रही है। वहीं, कपास उत्पादन वाले पारंपरिक क्षेत्रों के किसान तेजी से गन्ने की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह संकट और गंभीर हो सकता है।
कसूरी के मुताबिक, पाकिस्तान भारत की पर्याप्त उत्पादन क्षमता के बावजूद चीनी, उर्वरक, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद, लोहा और इस्पात, सब्जियां तथा भारी मशीनरी जैसी वस्तुएं दूरस्थ बाजारों से आयात कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार बहाल होने से परिवहन लागत कम हो सकती है और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आ सकता है। भारत की तेल रिफाइनरियां भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के अधिक नजदीक हैं, इसलिए भारत से पेट्रोलियम उत्पादों का आयात सस्ता पड़ सकता है। इसके अलावा, भारतीय कृषि और औद्योगिक उत्पादों की उपलब्धता से पाकिस्तान के कई उद्योगों की उत्पादन लागत भी घट सकती है।
कसूरी ने कहा कि व्यापारिक संबंधों के निलंबन का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। पाकिस्तान आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या में बड़ी कमी आई है। इनमें धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ अपने पैतृक घरों और गांवों को देखने आने वाले लोग भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं, जो दोनों देशों के बीच बेहतर रिश्तों की नींव बन सकते हैं।
कसूरी ने क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का उदाहरण देते हुए श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत की ओर से दी गई वित्तीय सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में क्षेत्रीय सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।
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