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Thursday,20-August-2026
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दिल्ली: सभी प्राईवेट अस्पतालों के 80 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित

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Arvind-Kejrial

दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सभी प्राइवेट अस्पतालों के 80 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। दिल्ली में अभी कोरोना के लिए लगभग 7500 सामान्य और 446 आईसीयू बेड कोरोना रोगियों के लिए उपलब्ध हैं। सरकार ने गुरुवार को कुछ अहम निर्णय लिए हैं। यह निर्णय कोरोना के सामान्य बेड और आईसीयू बेड बढ़ाने के लिए हैं। पिछले हफ्ते कोर्ट की इजाजत के बाद लगभग 30-32 प्राईवेट अस्पतालों के 80 प्रतिशत आईसीयू बेड कोरोना के लिए चिन्हित कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “अब यह आदेश आज से दिल्ली के सभी निजी अस्पतालों पर लागू किया जा रहा है। इस आदेश के मुताबिक इन अस्पतालों के 80 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित कर लिए गए हैं। इससे दिल्ली को 300 से 400 अतिरिक्त आईसीयू बेड मुहैया होंगे।”

इसके अलावा जो साधारण बेड हैं वह अभी तक प्राइवेट अस्पतालों में 50 फीसदी तक कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित हैं। इन्हें अब 60 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी प्रकार से जो गैर गंभीर ऑपरेशन हैं, उन्हें फिलहाल न करने का निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “जैसे कि मान लीजिए किसी को अगर टॉन्सिल हैं तो उसका ऑपरेशन कुछ दिन बाद भी किया जा सकता है। इसी तरह से कई सारे अन्य ऑपरेशन हैं जो कि गंभीर नहीं हैं, ऐसे गैर गंभीर ऑपरेशनों को स्थगित करने के लिए सभी अस्पतालों को कहा जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली सरकार अपने अस्पतालों में 663 नए आईसीयू बेड की व्यवस्था कर रही है। केंद्र सरकार ने 750 आईसीयू बेड बनाने का आश्वासन दिया है। इसे मिलाकर दिल्ली में 1413 नए आईसीयू बेड उपलब्ध हो जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों का धन्यवाद करते हुए कहा, “मैं अपने सभी डॉक्टर्स का और कर्मचारियों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। उनको सैल्यूट करना चाहता हूं। उन्होंने न केवल मेहनत की है बल्कि सूझबूझ से जिस तरह से दिल्ली में कोरोना का मैनेजमेंट किया है। ऐसा दुनिया के बड़े-बड़े देशों में और बड़े-बड़े शहरों में भी नहीं देखा गया।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “न्यूयॉर्क के अंदर 6 अप्रैल को कोरोना का पीक आया था। 6 अप्रैल को वहां 6353 केस आए थे। इनमें से 575 लोगों की मृत्यु हो गई थी। वहां कॉरिडोर में रोगी पड़े हुए थे। सड़कों के किनारे रोगी पड़े हुए थे और अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं थे। डेड बॉडी एक दूसरे के ऊपर पड़ी हुई थीं। इसी तरह की तस्वीरें फ्रांस और इटली से आईं। वहां बेड खत्म हो गए और लोग अस्पतालों के बाहर पड़े हुए थे। दिल्ली में 8500 रोगी प्रतिदिन तक पहुंच गए, लेकिन हमारे डॉक्टर्स ने शानदार तरीके से सारी व्यवस्था की।”

महाराष्ट्र

मुंबई: नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन को वर्ली से जोड़ने वाले अंडरग्राउंड पैदल सबवे के प्रस्ताव को मंज़ूरी मिली

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मुंबई; वर्ली में नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन (मेट्रो-3) को वर्ली प्रोमेनेड से जोड़ने के लिए एक अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे बनाने और 300 एकड़ के लैंडस्केप गार्डन के प्रस्ताव को ‘स्वराज्य रक्षा धर्म वीर छत्रपति संभाजी महाराज कोस्टल रोड प्रोजेक्ट’ की ‘सेंटेंस मीटिंग एंड कोस्टल रोड प्रोजेक्ट’ मीटिंग में मंज़ूरी दे दी गई। स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने कहा, ‘मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) इस अंडरग्राउंड सबवे के लिए 702.44 करोड़ 35,07 लाख रुपये का खर्च उठाएगी, जबकि कंस्ट्रक्शन का काम मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन करेगी।’ कोस्टल रोड मुंबई के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक, ड्रीम प्रोजेक्ट साबित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के साथ लगभग 300 एकड़ में फैला एक बड़ा लैंडस्केप गार्डन बनाने का प्रस्ताव है। गार्डन के साथ, कोस्टल रोड पर लोगों के लिए एक खास प्रोमेनेड भी होगा। हालांकि, अभी यह इलाका फोर-व्हीलर से तो आसानी से पहुँचा जा सकता है, लेकिन आम आदमी के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या पैदल आसानी से पहुँचने के लिए कोई सही कनेक्टिविटी नहीं है। प्रस्तावित अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों का सबवे इस समस्या को हल करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा। यह अंडरग्राउंड रास्ता इसलिए प्रस्तावित है ताकि लोग नेहरू साइंस सेंटर मेट्रो स्टेशन से सीधे पैदल चल सकें, जो लाला लाजपत राय रोड के नीचे से गुज़रता है और महालक्ष्मी रेसकोर्स इलाके से होते हुए वर्ली प्रोमेनेड और लैंडस्केप गार्डन तक पहुँच सकते हैं। लगभग 1 km लंबाई और 7.5 मीटर चौड़ाई में फैला यह रास्ता बड़ी संख्या में लोगों के लिए सुरक्षित और आसान आने-जाने में मदद करेगा। मुंबई में मेट्रो से यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और मेट्रो आम मुंबईकरों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक सस्ता और सुविधाजनक तरीका साबित हो रहा है। मेट्रो लाइन 3 से नेहरू साइंस सेंटर पहुँचने पर, लोग इस अंडरग्राउंड पैदल चलने वाले रास्ते का इस्तेमाल करके सीधे प्रोमेनेड और लैंडस्केप गार्डन जा सकेंगे। इस पहल से प्राइवेट गाड़ियों पर निर्भरता कम होगी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ पैदल चलने वालों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा मिलेगा। अंडरग्राउंड वॉकवे से कोस्टल रोड इलाके में टूरिज्म को भी काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। लैंडस्केप गार्डन बन जाने के बाद, लोकल लोग और देश-विदेश के टूरिस्ट, दोनों ही मेट्रो के ज़रिए सस्ते में इस इलाके में आ-जा सकेंगे। श्री प्रभाकर शिंदे ने कहा कि यह रास्ता मुंबई के टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में एक अहम कड़ी का काम करेगा। स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने बताया कि मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जून 2025 में अंडरग्राउंड टनल का कंस्ट्रक्शन शुरू करने की तैयारी जताई थी। इसके बाद, दिसंबर 2025 में हुई एक जॉइंट मीटिंग में, म्युनिसिपल कमिश्नर ने मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रोजेक्ट को पूरा करने की मंज़ूरी दे दी। यह भी तय किया गया कि मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) प्रोजेक्ट का फाइनेंशियल खर्च उठाएगी। मेट्रो का बढ़ता नेटवर्क ट्रैफिक की भीड़ को कम करने और मुंबई की सड़कों पर बोझ कम करने में अहम भूमिका निभा रहा है, जिससे म्युनिसिपल रोड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर दबाव कम हो रहा है। इसी सिद्धांत को फॉलो करते हुए, बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) ने पहले मेट्रो 3 प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये दिए थे। अब, कॉर्पोरेशन ने इस अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे बनाने की फाइनेंशियल ज़िम्मेदारी लेने की तैयारी दिखाई है, जो लोगों के फ़ायदे के लिए काम करता है। बीएमसी और मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन दोनों ही पब्लिक सेक्टर की कंपनियाँ हैं। अगर एक पब्लिक बॉडी दूसरे को ऐसे कामों के लिए लगाए जिससे लोगों को फ़ायदा हो, तो इसमें क्या गलत है? किसी बाहरी कॉन्ट्रैक्टर को कॉन्ट्रैक्ट देने के बजाय, काम को ज़्यादा अच्छे से पूरा करने के लिए मेट्रो 3 प्रोजेक्ट की टेक्निकल एक्सपर्टीज़ का फ़ायदा उठाने का फ़ैसला किया गया। हैरानी की बात है कि इससे कुछ लोगों को दुख क्यों हुआ। ऐसा लगता है कि जो लोग कॉन्ट्रैक्ट वाले काम से जुड़े फ़ायदे के आदी हैं, वे इस प्रपोज़ल को पचा नहीं पा रहे हैं। हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी के लिए मुंबईकरों की भलाई सबसे ज़रूरी है। स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन प्रभाकर शिंदे ने कहा कि यह प्रपोज़ल लोगों को स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट, सुरक्षित और आसान पैदल चलने वालों की सुविधाएँ देने के लिए बहुमत से पास किया गया था। शिंदे ने बताया कि यह अंडरग्राउंड पैदल चलने वालों के लिए सबवे, मेट्रो, कोस्टल रोड, प्रोमेनेड और प्रस्तावित लैंडस्केप गार्डन के बीच एक अच्छा कनेक्शन बनाएगा, जो भविष्य में मुंबईकरों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सस्ते पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए एक ज़रूरी कनेक्शन का काम करेगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

ईरान के खिलाफ ट्रंप की ‘आर्थिक हमले’ वाली बात चीन को नहीं आई रास

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चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कैंपेन की आलोचना की है जिसके तहत वो ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। बीजिंग के मुताबिक ऐसी पाबंदियां स्थिति को और उलझा सकती हैं। “इकोनॉमिक डी-डे” कैंपेन की आलोचना करते हुए कहा कि और ज्यादा प्रतिबंध लगाने से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मदद नहीं मिलेगी।

बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने प्रेस ब्रीफिंग में पत्रकारों से कहा, “प्रतिबंध लगाने और दबाव डालने से समस्या का समाधान नहीं होता है।”

इसमें आगे कहा गया, “चीन संबंधित पक्षों से जिम्मेदार कदम उठाने और कूटनीतिक व राजनीतिक तरीकों से मुद्दों को सुलझाने का आग्रह करता है।”

दरअसल, इन कदमों से चीन पर खास तौर पर असर पड़ेगा, क्योंकि एनालिटिक्स फर्म केप्लर के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, वह ईरान से निर्यात होने वाले तेल का 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा खरीदता है। ऐसे में अगर अमेरिका ने ईरानी तेल खरीदने वाली चीनी कंपनियों, बैंकों या शिपिंग नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगाए, तो इसका सीधा असर अमेरिका-चीन संबंधों पर पड़ सकता है। यही ट्रंप की नई आर्थिक रणनीति का सबसे संवेदनशील मोर्चा हो सकता है।

अमेरिका पहले भी ईरानी तेल की खरीद और उसके परिवहन से जुड़े चीन स्थित रिफाइनरी तथा शिपिंग कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अब ट्रंप की ताजा चेतावनी से संकेत मिल रहा है कि वाशिंगटन ऐसे प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा सकता है।

गुरुवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर ‘इकोनॉमिक डी-डे’ का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वो ईरान के साझेदारों और मददगारों के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कदम उठाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को डील करने का जितना बड़ा मौका मैंने दिया, उतना किसी और ने नहीं दिया। दुख की बात है कि वे इसका फायदा उठाने में सफल नहीं रहे।’

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अब अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध और अलग-थलग पड़ने का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने दूसरे देशों को भी चेतावनी दी कि वे ईरान को किसी भी तरह की मदद न मुहैया कराएं, और ऐसा करने पर उन्हें भी भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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राष्ट्रीय समाचार

एसबीआई ने बचत खातों से नकद निकासी की फीस में किया बदलाव, अब 15 रुपए प्रति लेनदेन का करना होगा भुगतान

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बेसिक बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) खातों से नकद निकासी की फीस में बदलाव किया है। अब खाताधारकों को एक निश्चित सीमा से अधिक बार निकासी करने पर 15 रुपए प्रति लेनदेन का भुगतान करना होगा। यह जानकारी बैंक की ओर से गुरुवार को दी गई।

एसबीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि बदले हुए नियमों के तहत, ग्राहकों को हर महीने चार बार मुफ्त कैश निकालने की सुविधा मिलती रहेगी, जबकि इस सीमा से ज्यादा बार नकद निकालने पर हर लेनदेन के लिए 15 रुपए (जीएसटी को हटाकर) के शुल्क का भुगतान करना होगा।

हालांकि, बैंक के अनुसार, सभी डिजिटल लेनदेन बिना किसी रोक-टोक के मुफ्त बने रहेंगे।

इसके अलावा, बैंक ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) लेनदेन के नियमों में भी बदलाव किया है। पहले, महीने के चार मुफ्त लेनदेन की गिनती करते समय डिजिटल लेनदेन के तहत एईपीएस लेनदेन को शामिल नहीं किया जाता था। बदले हुए नियमों के तहत, इस छूट को हटा दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, एसबीआई का वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 19,160.44 करोड़ रुपए था।

वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक की ब्याज से आय सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 1,27,896.46 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 1,17,830.28 करोड़ रुपए थी।

अन्य आय को मिलाकर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एसबीआई की कुल आय सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,43,819.15 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,35,341.56 करोड़ रुपए थी।

इस दौरान बैंक के कुल खर्च में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एसबीआई का कुल खर्च सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत बढ़कर 1,10,289.97 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,04,797.09 करोड़ रुपए था।

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