राजनीति
मुख्यमंत्री टीवी पर करेंगे लाइव लक्ष्मी पूजन, दिल्लीवालों से शामिल होने की अपील
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर इस बार दीपावली के पर्व पर पटाखे नहीं जलाने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में प्रदूषण को सेहत के लिए काफी खतरनाक बताते हुए दिल्ली के दो करोड़ लोगों से किसी भी हालत में पटाखे नहीं जलाने की अपील की है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “इस बार दीपावली पर हम सभी दिल्लीवासी मिलकर एक साथ लक्ष्मी पूजन करेंगे। मैं अपने सभी मंत्रियों के साथ दीपावली, 14 नवंबर की शाम 7 बजकर 39 मिनट पर लक्ष्मी पूजन करूंगा, जिसका टीवी चैनलों पर सीधा प्रसारण होगा। इस दौरान सभी लोग अपने घरों में टेलीविजन ऑन करके हमारे साथ एक ही स्वर में लक्ष्मी पूजन करें। अगर दिल्ली के दो करोड़ लोग साथ मिल कर एक ही स्वर में लक्ष्मी पूजा करेंगे, तो दिल्ली के हर परिवार में मंगल ही मंगल होगा।”
उन्होंने कहा, “दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है, अगर हम पटाखे जलाते हैं, तो हम अपनी, अपने परिवार और पूरे दिल्ली के लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।”
दिल्ली में इस वक्त कोरोना और प्रदूषण दोनों का कहर छाया हुआ है। इस स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली के लोग और दिल्ली सरकार मिलकर प्रयास कर रहे हैं। प्रदूषण की वजह से कोरोना की स्थिति ज्यादा खराब हो रही है। हर साल इन दिनों में प्रदूषण होता है, क्योंकि पराली जलने का धुआं दिल्ली की तरफ आता है।
केजरीवाल ने कहा, “दुख की बात यह है कि पिछले कई सालों से पराली जलने से यह प्रदूषण हो रहा है, लेकिन उन सरकारों ने अपने किसानों के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया। उन राज्यों के किसानों से मेरी बात हुई और किसानों ने कहा कि हम पराली जलाना नहीं चाहते हैं, पराली जलाने से हमारी जमीन के अंदर बैक्टीरिया खराब हो जाते हैं। बैक्टीरिया जल जाने से हमारी मिट्टी कम उपजाऊ होती है, लेकिन हमारे पास इसका समाधान क्या है, हमारी सरकारों ने हमारे लिए कुछ नहीं किया।”
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि, “पराली के समाधान के लिए दिल्ली सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया है। दिल्ली के लोगों और दिल्ली सरकार ने पूसा इंस्टिट्यूट के साथ मिलकर पराली का एक समाधान दिया है कि अब पराली जलाने की जरूरत नहीं है। पूसा इंस्टीट्यूट ने एक केमिकल बनाया है, अगर पराली पर उस केमिकल का छिड़काव कर दें, तो करीब 20 दिन के अंदर पराली खाद में बदल जाती है।”
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि, “पिछली बार हम लोगों ने दीपावली के समय पटाखे नहीं जलाने की सौगंध खाई थी। दीपावली पर पूरी दिल्ली के लोगों ने मिलकर कनॉट प्लेस के अंदर दीपावली मनाई थी। हम लोगों ने वहां पर लाइट शो रखा था और दिल्ली के सभी लोग कनॉट प्लेस आए थे। इस बार भी हम सब लोग मिलकर दीपावली मनाएंगे, लेकिन किसी भी हालत में पटाखे नहीं जलाएंगे।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फ्रांस: हाई स्कूल की गिरती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आज, लेंस शहर के15 वर्षीय बच्चे ने धमाके में गंवाया हाथ

फ्रांस में स्कूलों के बदहाल हालात और शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर जारी छात्र आंदोलन को लंबा वक्त बीत चुका है। विरोध राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में बदल गया है। देशभर में हजारों छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों और अभिभावक संगठनों ने मंगलवार को सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है। इस बीच उत्तरी शहर लेंस में प्रदर्शन के दौरान एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ जाने की घटना ने पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस और तेज कर दी है।
सोमवार को लेंस में एक हाई स्कूल के बाहर प्रदर्शन के दौरान छात्र गंभीर रूप से घायल हुआ। पास-दे-कलै के प्रीफेक्ट फ्रांस्वा-जेवियर लॉश ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि छात्र किस तरह घायल हुआ या इसमें पुलिस की स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल शामिल था या नहीं।
स्थानीय समाचार पत्र ‘ला वोआ दु नोर’ ने बताया कि छात्र ने पुलिस की ओर से इस्तेमाल किए गए स्टन ग्रेनेड को उठाया था, जिसके बाद विस्फोट में उसका हाथ उड़ गया। रॉयटर्स ने बाद में अपनी रिपोर्ट में भी इस दावे को स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया और स्पष्ट किया कि प्रीफेक्ट ने स्वयं इस बात की पुष्टि नहीं की थी।
प्रीफेक्ट के अनुसार, घटना के समय करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारी पुलिस पर विभिन्न वस्तुएं फेंक रहे थे, जिसके बाद दंगा-रोधी पुलिस ने हस्तक्षेप किया। घटना की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच जारी है।
छात्र संगठनों ने मंगलवार को देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान किया था। ट्रेड यूनियनों, शिक्षकों, सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और अभिभावक संगठनों ने भी छात्रों के समर्थन में मार्च का आह्वान किया है।
यह आंदोलन फ्रांस की शिक्षा व्यवस्था में कथित कम निवेश, शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शुरू हुआ था। पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शनों ने तेजी पकड़ ली और कई जगहों पर छात्रों तथा पुलिस के बीच झड़पें हुईं।
शिक्षा मंत्री एडुआर जफ्रे के अनुसार, सोमवार को देश के करीब 3,700 हाई स्कूलों में से 400 से 500 स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहने की संभावना थी। इससे पहले सरकार ने कहा था कि 24 स्कूलों में आगजनी या तोड़फोड़ हुई है और 78 शिक्षा कर्मचारी घायल हुए हैं।
प्रदर्शन अब केवल हाई स्कूलों तक सीमित नहीं रह गया है। सोमवार को फ्रांस के करीब 40 विश्वविद्यालय परिसरों में भी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के समर्थन में गतिविधियां कीं। उच्च शिक्षा मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट ने कहा कि मंगलवार के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालयों में भी व्यवधान बढ़ सकता है।
पिछले दिनों प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई हैं। पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया है और स्कूलों तथा अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस अधिकारियों के घायल होने की भी खबर है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ऐसे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं, जहां कक्षाएं जरूरत से ज्यादा भरी हुई हैं, शिक्षकों की कमी है और इमारतों की हालत खराब है। छात्रों का आरोप है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में पर्याप्त निवेश नहीं किया गया है।
सरकार ने हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की निंदा की है। फ्रांसीसी अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान किया जाएगा, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मंगलवार के प्रदर्शन से पहले राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई । अधिकारियों को आशंका है कि बड़ी संख्या में छात्रों के सड़कों पर उतरने से तनाव बढ़ सकता है। छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार से छात्रों की मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग को लेकर है।
इस बीच 15 वर्षीय छात्र के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्रांस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है। छात्र आंदोलन के मंगलवार के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के साथ और व्यापक होने की आशंका है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में 79 प्रतिशत खनिज परिवहन ट्रकों में नहीं लगा जीपीएस, सरकार ने बढ़ाई समयसीमा

तमिलनाडु में निर्माण खनिजों के परिवहन के लिए पंजीकृत पांच में से लगभग चार ट्रकों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण नहीं लगे हैं, जिसके चलते खनिज आवागमन की निगरानी को कड़ा करने के उद्देश्य से मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद स्थापना की समय सीमा को एक बार फिर बढ़ा दिया गया है।
खनिज प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर पंजीकृत 1.4 लाख ट्रकों में से 30 सितंबर तक केवल 30,000 ट्रकों में ही वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरण लगे हुए थे। शेष 79 प्रतिशत ट्रकों को एम-रेत, पी-रेत और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को ढकने की आवश्यकता का पालन करना बाकी है।
भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने परिवहन संघों द्वारा अतिरिक्त समय की मांग के बाद, समय सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया है। मूल समय सीमा 31 मार्च को पहले ही बढ़ा दी गई थी जबकि सरकार ने अलग से घोषणा की थी कि जीपीएस उपकरण के बिना वाहनों को 1 सितंबर से खनिज पारगमन पास मिलना बंद हो जाएगा।
वाहन ट्रैकर्स को खनिज प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य ट्रकों द्वारा सामग्री लोड करने के स्थान और उनकी आवाजाही को रिकॉर्ड करके खनिज परिवहन की निगरानी को मजबूत करना है। ऐसे रिकॉर्ड अधिकारियों को अनधिकृत खदानों से आने वाली आपूर्ति की पहचान करने और अवैध खनन और परिवहन उल्लंघनों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।
इस प्रणाली के धीमी गति से लागू होने पर ट्रक मालिकों ने सरकार की इस प्रणाली को लागू करने की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु राज्य ट्रक मालिक संघ के महासचिव जी. गणेश ने कहा कि ट्रैकिंग उपकरणों की लागत में भारी गिरावट आई है, जो 15,000 रुपये से घटकर 3,700 रुपये हो गई है।
उन्होंने कहा कि कई विक्रेता एआईएस-140 मानक को पूरा करने वाले एक लाख से अधिक उपकरण उपलब्ध करा सकते हैं और उनका तर्क था कि उपलब्धता को देखते हुए और देरी को उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस आवश्यकता को लागू करने में सरकार की अनिच्छा ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उसके संकल्प पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लगभग 37 अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं के पास अल्पावधि के भीतर शेष सभी वाहनों को सुसज्जित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं है।
एक अधिकारी ने बताया कि यह नवीनतम विस्तार कई संगठनों के अनुरोधों के बाद किया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि फर्जी क्यूआर कोड वाले फर्जी खनिज पारगमन पास बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
खनन संबंधी उल्लंघनों की शिकायतों के लिए जल्द ही एक समर्पित नंबर शुरू किया जाएगा और इसे चेन्नई स्थित विभाग के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा।
निर्माण की मांग और अधिकृत खदान उत्पादन के बीच पर्याप्त अंतर के बीच प्रवर्तन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं।
तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की औसत दैनिक आवश्यकता लगभग 5.25 लाख यूनिट है, जबकि खदानों से अनुमत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट है, जो गहन नियामकीय जांच की आवश्यकता को उजागर करता है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
रूस की लैब में प्लेग के संदिग्ध मामले पर अमेरिका सतर्क, अंदरूनी तौर पर फैलने का डर: मार्को रुबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्लेग का संदिग्ध मामले को चिंंता जताई। मामला रूस की एक लैब का है। पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा कि रूस की एक लैब के कर्मचारी में प्लेग का संदिग्ध मामला सामने आने के बाद अमेरिका हालात पर करीबी नजर रख रहा है। संक्रमण लैब के अंदर दूसरे लोगों तक भी फैल सकता है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका के पास इस घटना के बारे में फिलहाल उतनी ही जानकारी है, जितनी रूस के अधिकारियों ने दी है। हालांकि, किसी संक्रामक बीमारी के एक जगह से दूसरी जगह फैलने के खतरे को देखते हुए अमेरिकी अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
यूरोप दौरे पर रवाना होने से पहले जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो ने कहा, “हमें वही जानकारी है जो रूस ने दी है। ऐसा लगता है कि लैब का एक कर्मचारी संक्रमित हुआ है और चिंता है कि संक्रमण कम से कम लैब के अंदर दूसरे लोगों तक फैल सकता है। इसी वजह से वहां इस तरह की क्वारंटीन की व्यवस्था भी की गई है।
रुबियो ने कहा कि रूस और अमेरिका के बीच लोगों की आवाजाही काफी कम है। इसके बावजूद अमेरिका इस मामले को गंभीरता से ले रहा है क्योंकि संक्रमण के बड़े स्तर पर फैलने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
रुबियो ने आगे कहा, “इसलिए हम हालात पर करीबी नजर रख रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अभी घबराने की कोई वजह है, लेकिन इस पर ध्यान देना और नजर बनाए रखना जरूरी है और हम यही कर रहे हैं।”
हालांकि रुबियो ने यह नहीं बताया कि मामला रूस की किस लैब में सामने आया है, लैब कहां स्थित है या प्लेग का कौन सा प्रकार सामने आया है। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने अपने स्तर पर संक्रमण की पुष्टि की है या नहीं।
उनकी बातों से संकेत मिला कि अमेरिका के पास मौजूद जानकारी रूस की तरफ से ही दी गई है।
रुबियो ने पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध, यमन, सऊदी अरब, ब्रिटेन में अमेरिकी सैन्य तैनाती और अमेरिकी सरकार की लंबे समय की राष्ट्रीय सुरक्षा योजना समेत कई दूसरे मुद्दों पर भी बात की।
रूस की ओर से यूक्रेन की राजधानी कीव में मौजूद विदेशी राजनयिकों को शहर छोड़ने की सलाह दिए जाने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि मॉस्को पिछले कई महीनों से ऐसी चेतावनियां देता रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का दूतावास कीव में काम कर रहा है और वहां के सुरक्षा हालात को लेकर अमेरिका खुद अपना आकलन करेगा।
रुबियो ने कहा, “हम हर दिन दुनिया भर में अपने सभी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा का आकलन करते हैं। अगर हमें ऐसा कोई खतरा दिखता है, जिसके चलते अपनी स्थिति में बदलाव करने की जरूरत हो, तो हम ऐसा करेंगे।” उन्होंने कहा कि अभी तक हमने वहां ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
रुबियो से पिछले हफ्ते मिली एक धमकी के बाद ब्रिटेन के आरएएफ फेयरफोर्ड से अमेरिकी बमवर्षक विमानों को दूसरी जगह भेजे जाने के बारे में भी सवाल किया गया।
उन्होंने कहा कि विमानों की आवाजाही को सीधे उस धमकी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अमेरिकी सेना अपने सैन्य संसाधनों और जवानों की तैनाती में नियमित रूप से बदलाव करती रहती है। रुबियो ने कहा कि रक्षा विभाग लगातार अपने संसाधनों को जरूरत के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर तैनात करता रहता है।
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