खेल
हॉकी में डिफेंडर चैंपियनशिप जिताते हैं, स्ट्राइकर्स मैच : मोहम्मद रियाज
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व मिडफील्डर एन मोहम्मद रियाज ने कहा है कि हॉकी में डिफेंडर्स चैंपियनशिप जिताते हैं, जबकि स्ट्राइकर्स मैच।
49 वर्षीय अर्जुन अवॉर्डी रियाज 1990 से 2000 तक भारत के लिए 280 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं। फिलहाल वह एयर इंडिया में उप महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं।
रियाज का मानना है कि मिडफील्डर स्ट्राइकर्स के लिए गोल करने का मौका बनाते हैं, जबकि विपक्षी टीम को गोल करने से रोकते हैं।
उन्होंने कहा, “डिफेंडर्स चैंपियनशिप जिताते हैं जबकि फॉरवर्ड मैच जिताते हैं।”
पूर्व भारतीय कप्तान रियाज 1996 और 2000 ओलंपिक, विश्व कप 1994 और 1998 तथा एशियाई खेल 1994 और 1998 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा वह 2002 में बेल्जियम में और 2004 में जर्मनी में पेशेवर लीग में भी खेल चुके हैं।
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और ओलंपियन वी भास्करण ने आईएएनएस से कहा, ” हॉकी उनके खून में दौड़ता है। उनके पिता मोहम्मद नबी भी एक अच्छे खिलाड़ी और एक अंतर्राष्ट्रीय रेफरी थे। उनके परिवार में भी हॉकी के अच्छे खिलाड़ी थे।”
रियाज के बड़े भाई तमिलनाडु के लिए जबकि छोटा भाई राष्ट्रीय टीम के लिए खेल चुके हैं। रियाज के बारे में ऐसा कहा जाता था कि हॉकी में वह पानी से मछली निकालने जैसे थे।
रियाज ने कहा कि 1989 की राष्ट्रीय जूनियर चैंपियनशिप उनके करियर के लिए एक टर्निग प्वाइंट था।
उन्होंने कहा, ” मैं वहां भी अच्छा खेल रहा था। जब टीम हाफ टाइम तक पीछे रहती थी तो मैं गोल करता था और टीम को जीत दिलाता था। अखबारों की हेडलाइन में ‘रियाज बनाम प्रतिद्वंद्वी टीम’ से शीर्षक होता था।”
रियाज ने उसके बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा और हॉकी में उनका खेल आगे बढ़ता गया।
मॉस्को ओलंपिक में अपनी कप्तानी में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक जिताने वाले भास्करण ने कहा, “मैंने रियाज को एक जूनियर खिलाड़ी के रूप में देखा था। वह वाराणसी में रेलवे कर्मचारियों के वार्ड के लिए आयोजित एक हॉकी टूर्नामेंट में खेल चुके थे। उनके पिता रेलवे में थे। दक्षिण रेलवे की टीम फाइनल में पहुंची थी। उस समय मुझे लगा था कि यह लड़का एक बड़े खिलाड़ी में बदल जाएगा और ऐसा ही हुआ।”
इसके बाद रियाज का चयन जूनियर टीम के लिए और फिर सीनियर टीम के लिए हुआ। उन्होंने मलेशिया में अजलान शाह कप में भारतीय टीम के लिए अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में पदार्पण किया था। वह 1993 में आस्ट्रेलिया दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।
रियाज के एक खिलाड़ी के अलावा एक कोच के रूप में भी काफी सफल रहे हैं।
उनके मार्गदर्शन में भारतीय सीनियर्स और जूनियर्स टीम ने 2011 में चीन में आयोजित एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में स्वर्ण और रजत पदक जीते थे। इसके अलावा टीम ने 2011 में चैंपियंस चैलेंज हॉकी चैंपियनशिप दक्षिण अफ्रीका में रजत और पोलैंड में ओयाजित जूनियर यूरोपीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते थे।
रियाज अब अपना खाली समय मैदान में जूनियर खिलाड़ियों को खेलने की तकनीक के लिए टिप्स दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अपने पुराने स्कूल के छात्रों के लिए हर साल मुफ्त कोचिंग करता हूं। मैं कोविलपट्टी अकादमी के खिलाड़ियों को भी कोचिंग देता हूं। मैं अपने कौशल सेट को जूनियर्स के साथ साझा करना चाहता हूं।”
रियाज ने मौजूदा भारतीय हॉकी टीम को लेकर कहा कि भारतीय टीम दुनिया में शीर्ष पांच में है और पदक की संभावनाएं बहुत दूर नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “पहले जर्मनी, स्पेन और हॉलैंड जैसे देश अधिकांश टूर्नामेंटों के सेमीफाइनल में प्रवेश करती थीं। लेकिन अब विश्व हॉकी का परिदृश्य बदल गया है और कम रैंकिंग वाली टीमें अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और चैंपियनशिप जीत रही हैं।”
खेल
यूईएफए चैंपियंस लीग: एटलेटिको मैड्रिड और आर्सेनल के बीच मुकाबला 1-1 से ड्रॉ रहा

यूईएफए चैंपियंस लीग 2026 के सेमीफाइनल के पहले लेग में स्पेन के मेट्रोपोलिटानो स्टेडियम में एटलेटिको मैड्रिड और आर्सेनल के बीच मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ। फाइनल का टिकट कटाने के लिए अगले सप्ताह दोनों टीमें लंदन में एक-दूसरे के सामने होंगी।
मैच में दोनों गोल पेनल्टी से आए। आर्सेनल के लिए यह ड्रॉ थोड़ा निराशाजनक रहा, क्योंकि वीएआर के देर से हस्तक्षेप के कारण उन्हें दूसरे पेनल्टी का मौका नहीं मिल सका, जो शायद मैच का परिणाम बदल सकता था।
एटलेटिको मैड्रिड ने अपने घरेलू मैदान पर मजबूत शुरुआत की। टीम ने लेफ्ट विंग पर एडेमोला लुकमैन और गोलपोस्ट के नीचे जान ओब्लाक को उतारा, जबकि मिडफील्ड में पाब्लो बैरियोस की गैरमौजूदगी में जॉनी कार्डोसो ने जिम्मेदारी संभाली। दूसरी ओर, आर्सेनल के लिए एबेरेची एजे और बुकायो साका पूरी तरह फिट नहीं थे और उन्हें बेंच पर रखा गया।
मुकाबले की शुरुआत से ही दोनों टीमें सतर्क नजर आईं और किसी भी तरह की रक्षात्मक गलती से बचने की कोशिश करती रहीं। आर्सेनल के नोनी मादुके ने दाईं ओर से शानदार दौड़ लगाकर पहला मौका बनाया, जबकि गोलकीपर डेविड राया ने गिउलिआनो शिमोन के प्रयास को नाकाम कर दिया।
पहले हाफ के अंतिम मिनट में आर्सेनल को पेनल्टी मिली, जब विक्टर ग्योकेरेस को डेविड हैंको ने बॉक्स के अंदर धक्का दिया। ग्योकेरेस ने खुद ही पेनल्टी लेकर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। हालांकि, दूसरे हाफ की शुरुआत में ही एटलेटिको ने वापसी कर ली। 56वें मिनट में बेन व्हाइट के हैंडबॉल के बाद वीएआर की मदद से एटलेटिको को पेनल्टी मिली, जिसे जूलियन अल्वारेज ने गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया।
78वें मिनट में आर्सेनल को एक और पेनल्टी मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन वीएआर ने रेफरी के फैसले को पलट दिया। इसके बाद भी आर्सेनल ने कोशिश जारी रखी, लेकिन कोई भी टीम निर्णायक गोल नहीं कर सकी। अंततः मुकाबला 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ।
खेल
पीएसजी बनाम बायर्न: पेरिस सेंट-जर्मेन को मिली मामूली बढ़त

पेरिस सेंट-जर्मेन और बायर्न म्यूनिख के बीच खेला गया मुकाबला 5-4 के रोमांचक स्कोरलाइन के साथ समाप्त हुआ। इस मैच में दोनों ही टीमों की तरफ से बेहतरीन अटैक देखने को मिला।
मैच की शुरुआत से ही लगने लगा था कि दोनों टीमें आक्रामक रुख अपनाएंगी। हैरी केन ने पेनल्टी के जरिए बायर्न को शुरुआती बढ़त दिलाई। यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं सकी। ख्विचा क्वारत्सखेलिया ने शानदार, बेहतरीन कौशल दिखाते हुए बराबरी का गोल दागा।
पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच लगातार जवाबी हमले होते रहे। जोआओ नेवेस के हेडर ने पीएसजी को बढ़त दिलाई, लेकिन माइकल ओलिस ने एक शानदार सोलो रन के बाद गोल कर बायर्न को फिर बराबरी पर ला दिया। हाफ खत्म होने से ठीक पहले उस्मान डेम्बेले ने पेनल्टी पर गोल कर पीएसजी को 3-2 की बढ़त दिलाई।
दूसरे हाफ में कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि पीएसजी मैच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लेगा। अशरफ हकीमी के शानदार क्रॉस पर क्वारात्सखेलिया ने अपना दूसरा गोल किया, और फिर डेम्बेले ने भी एक और गोल जोड़कर स्कोर 5-2 कर दिया। इस समय पीएसजी का आक्रमण बेहद संगठित और घातक दिख रहा था।
बायर्न म्यूनिख के लिए दयोत उपामेकानो ने हेडर के जरिए एक गोल किया और इसके तुरंत बाद लुइस डियाज ने शानदार स्ट्राइक लगाकर स्कोर 5-4 कर दिया। इस वापसी ने मैच को अंत तक रोमांचक बनाए रखा।
पीएसजी के कोच लुइस एनरिक ने मैच के बाद कहा कि यह मुकाबला किसी भी दिशा में जा सकता था, जो इस खेल की गुणवत्ता को दर्शाता है। वहीं, डेम्बेले ने भी माना कि दोनों टीमें आक्रामक खेल में विश्वास रखती हैं और दूसरे लेग में भी ऐसा ही मुकाबला देखने को मिल सकता है।
अब जब दोनों टीमें दूसरे लेग के लिए एलियांज एरिना में उतरेंगी, तो उम्मीद की जा रही है कि यह मुकाबला फिर से फुटबॉल प्रेमियों को एक और क्लासिक देखने का मौका देगा।
खेल
आईपीएल 2026: ‘दुनिया के श्रेष्ठ गेंदबाजों के खिलाफ 9000 रन बनाना आसान नहीं’, मिशेल मैक्लेनाघन ने विराट कोहली की प्रशंसा की

विराट कोहली ने आईपीएल 2026 के दौरान सोमवार को अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ खेलते हुए लीग में अपने 9,000 रन पूरे किए। न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज मिशेल मैक्लेनाघन ने कोहली को उनकी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है और उनकी निरंतरता की प्रशंसा की है।
मिशेल मैक्लेनाघन ने जियोस्टार से कहा, “विराट कोहली लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ 9000 आईपीएल रन बनाना कोई आसान काम नहीं है। यह भूख, अनुशासन और हर साल खुद को ढालने की बात है, और यही चीज उनसे उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवाती है। वह 2008 से आईपीएल में हैं, और सबसे अच्छी बात यह है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक ओपनर के तौर पर नहीं की थी।”
उन्होंने कहा, “कोहली ने निचले मध्य क्रम में बल्लेबाजी की, अपनी जगह के लिए संघर्ष किया, फिर तीसरे नंबर पर आए। बाद में, उन्होंने क्रिस गेल के साथ ओपनिंग की। इससे उनका खेल पूरी तरह से बदल गया। वह जल्द ही 10,000 रन के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे, इसमें कोई शक नहीं है। कोहली आईपीएल के अब तक के सबसे महान बल्लेबाज हैं – सिर्फ रनों की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि उन्होंने अलग-अलग दौर में खुद को कैसे बदला है और अपना दबदबा बनाए रखा है।”
विराट कोहली आईपीएल में 9,000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज हैं। एक अहम बात यह भी है कि उन्होंने सभी रन आरसीबी के लिए खेलते हुए ही बनाए हैं। विराट आईपीएल के पहले सीजन (आईपीएल 2008) से ही आरसीबी का हिस्सा हैं और साल-दर-साल अपने बेहतरीन प्रदर्शन से टीम की सफलता में बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं। लंबे समय तक टीम की कप्तानी करने वाले विराट ने 2025 में टीम को चैंपियन बनाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
आईपीएल 2026 की 8 मैचों की 8 पारियों में 3 अर्धशतक की मदद से 351 रन बना चुके विराट ने कुल 275 मैचों की 267 पारियों में 8 शतक और 66 अर्धशतक लगाते हुए 9,012 रन बनाए हैं।
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