अंतरराष्ट्रीय
ओलंपिक के लिए टीम अच्छी स्थिति में : कोथाजीत
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के डिफेंडर कोथाजीत सिंह का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बीच अगस्त में खेल गतिविधियों को फिर से शुरू करने के बाद से टोक्यो ओलंपिक के लिए टीम अच्छी स्थिति में है। भारत के लिए 200 से अधिक मैच खेल चुके कोथाजीत ने आगे कहा कि भारतीय टीम सही समय पर मैदान पर लौटी है और प्रत्येक खेल गतिविधियों के सत्र के साथ आगे बढ़ रही है।
कोथाजीत ने कहा, “पिच पर वापस आना शानदार रहा। हमने पिछले दो महीनों में काफी सुधार देखा है और हम ओलंपिक के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हम सही समय पर पिच पर लौटे हैं और इसलिए पूरी तरह से अपने फॉर्म में लौटने के लिए हमारे पास पर्याप्त समय है। हम वास्तव में हॉकी इंडिया और साई का शुक्रगुजार हैं जिन्होंने त्वरित समय में सभी सुरक्षा उपाय किए ताकि हम ओलंपिक पर ध्यान केंद्रित कर सकें।”
ओलंपिक क्वालीफायर मैच से बाहर रहने के बाद प्रो लीग 2020 से राष्ट्रीय टीम में वापसी करने वाले डिफेंडर ने कहा कि वह उन पहलुओं को जानते हैं, जिन पर उन्हें लगातार काम करने की जरुरत है ताकि भारतीय टीम में जगह बनाई जा सके ।
उन्होंने कहा, “टीम से बाहर होना कभी भी आसान नहीं होता है और इसलिए मैं भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए जितना संभव हो उतना कठिन काम करने के लिए ²ढ़ हूं। मैंने लॉकडाउन के दौरान अपने खेल का अच्छी तरह से विश्लेषण किया और मुझे अपने खेल के पहलुओं के बारे में पता है कि मुझे कहां काम करने की आवश्यकता है।”
28 वर्षीय ने कोथाजीत ने कहा, “अगले कुछ महीने हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और ओलंपिक स्थगित होने के साथ ही हमारे पास अपने व्यक्तिगत और टीम के खेल को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है।”
अंतरराष्ट्रीय
हमलों के बीच ईरान का बयान: होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं, पर सुरक्षा नियम सख्त

तेहरान, 23 मार्च : अमेरिका और इजरायल के लगातार हमलों के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं है और इस जलमार्ग में नौवहन जारी है। हालांकि, उसने कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने हमेशा नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा और बचाव का सम्मान किया है। उसने सालों से इन सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए काम किया है।
मंत्रालय ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली सैन्य हमलों के बाद खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट पर एक खतरनाक स्थिति पैदा हो गई है, जिसका सीधा असर क्षेत्रीय समुद्री सेफ्टी और सिक्योरिटी पर पड़ रहा है।
आत्मरक्षा के अपने कानूनी अधिकार का दावा करते हुए ईरान ने कहा कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। साथ ही, उसने यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं कि आक्रमणकारी और उनके समर्थक देश के खिलाफ अपने मकसद को पूरा करने के लिए स्ट्रेट का गलत इस्तेमाल न कर सकें।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसने आक्रमणकारियों से जुड़े या उनके साथ संबद्ध जहाजों के गुजरने को अंतरराष्ट्रीय कानून के स्थापित सिद्धांतों के तहत रोका है। उसने कहा कि दूसरे देशों के या उनसे जुड़े गैर-दुश्मन जहाज, ईरानी अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेशन में स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता बना सकते हैं, बशर्ते उन्होंने ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाइयों में हिस्सा न लिया हो या उनका समर्थन न किया हो, साथ ही बताए गए सेफ्टी और सिक्योरिटी रेगुलेशन का पालन किया हो।
मंत्रालय ने कहा कि स्ट्रेट में स्थायी सुरक्षा और स्थिरता की बहाली के लिए जरूरी है कि ईरान विरोधी सैन्य हमले और धमकियां बंद हों, अमेरिका और इजरायल की अस्थिर करने वाली गतिविधियां रुकें, और ईरान के वैध हितों का पूरा सम्मान किया जाए।
बता दें कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर हमले किए, जिसमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और कई सैन्य अधिकारी मारे गए। ईरान की ओर से भी जवाबी हमले हुए। उसने खाड़ी के कई देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। अभी भी ईरान का अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष जारी है।
अंतरराष्ट्रीय
डोनाल्ड ट्रंप के वीजा प्रतिबंधों से भारत और चीन को भारी नुकसान : रिपोर्ट

TRUMP
वॉशिंगटन, 23 मार्च : संयुक्त राज्य अमेरिका में 2025 के पहले आठ महीनों के दौरान कानूनी आप्रवासन में तेज गिरावट दर्ज की गई है। जिसमें भारत और चीन सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा वीजा नीतियों को सख्त किए जाने के चलते यह गिरावट आई है। द वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने जनवरी से अगस्त 2025 तक 2024 की इसी अवधि की तुलना में लगभग 250,000 कम वीजा जारी किए। मार्च की शुरुआत में जारी आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर स्थायी निवासी और अस्थायी वीजा की कुल स्वीकृतियों में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यह गिरावट छात्रों, कामगारों और अमेरिकी नागरिकों और कानूनी निवासियों के परिवार के सदस्यों के वीजा पर लागू होती है। इसी अवधि के दौरान पर्यटक वीजा में भी कमी आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन में वीजा की संख्या में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। इन देशों के नागरिकों के वीजा में लगभग 84,000 की कमी आई। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, यह गिरावट मुख्य रूप से छात्र, श्रमिक और पारिवारिक वीजा की संख्या में कमी के कारण हुई।
अंतर्राष्ट्रीय छात्र सबसे अधिक प्रभावित हुए। 2025 के पहले आठ महीनों में छात्र वीजा में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। एक्सचेंज वीजा में भी भारी गिरावट दर्ज की गई और इनकी संख्या लगभग 30,000 कम हो गई। स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड के लिए वीजा स्वीकृतियों में भी कमी आई है। सबसे बड़ी गिरावट कामगारों, अफगानिस्तान और इराक जैसे देशों के नागरिकों के वीजा में देखी गई।
अधिकारियों और विश्लेषकों ने इस गिरावट का कारण नीतिगत बदलावों और प्रशासनिक कारकों के संयोजन को बताया है। अखबार के अनुसार, इनमें 19 देशों पर यात्रा प्रतिबंध, छात्र वीजा साक्षात्कारों पर अस्थायी रोक और सोशल मीडिया जांच सहित विस्तारित जांच आवश्यकताएं शामिल हैं।
विदेश विभाग में कर्मचारियों की छंटनी से भी प्रक्रिया क्षमता कम हो गई है। कई व्यस्त स्थानों पर कम कांसुलर अपॉइंटमेंट और लंबे प्रतीक्षा समय की सूचना मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा, “वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। बाइडन प्रशासन के विपरीत, राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा से समझौता करके बिना जांच-पड़ताल वाले विदेशी नागरिकों के बड़े पैमाने पर देश में प्रवेश की अनुमति देने को तैयार नहीं हैं।”
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प को अमेरिकी नागरिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के भारी जनादेश के साथ चुना गया था और उनके द्वारा लिए गए हर नीतिगत निर्णय में यह प्राथमिकता झलकती है।”
विश्लेषकों का कहना है कि नीति और मांग दोनों कारक इस गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
निस्कनेन सेंटर की सेसिलिया एस्टरलाइन ने कहा, “हमारे पास यह स्पष्ट रूप से बताने के लिए कोई डेटा नहीं है कि इस गिरावट का कितना हिस्सा मांग और कितना नीति के कारण है। ये दोनों ही स्पष्ट रूप से जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या पर दबाव डाल रहे हैं।”
आलोचकों का तर्क है कि इन प्रतिबंधों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के जेसन फरमैन ने कहा, “अमेरिकी अर्थव्यवस्था के वर्तमान और भविष्य के लिए आप्रवासन से अधिक महत्वपूर्ण कोई नीति नहीं है। जब हम आप्रवासन को प्रतिबंधित करते हैं, तो हम न केवल आज श्रम शक्ति की वृद्धि को बाधित करते हैं, बल्कि भविष्य में नवाचार और उत्पादकता वृद्धि को भी कम करते हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरानी हमले के बाद हालात का जायजा लेने पहुंचे राष्ट्रपति हर्जोग, ईरान को कड़ी चेतावनी दी

तेल अवीव, 23 मार्च : ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष में एक नया और गंभीर मोड़ आया है। 28 फरवरी, 2026 से शुरू हुए हमलों के क्रम में, ईरान ने शनिवार को इजरायल के न्यूक्लियर शहर अराद और डिमोना पर हमला किया। इतने दिनों में पहली बार ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर ठिकाने को निशाना बनाया। घटना के बाद रविवार को इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ईरान को कड़ी चेतावनी दी।
हालांकि ईरान के इस हमले में किसी भी इजरायली नागरिक की मौत नहीं हुई, लेकिन इमारतों को नुकसान पहुंचा। अराद में ईरानी हमले में एक बेकरी हाउस को भी नुकसान पहुंचा। राष्ट्रपति हर्जोग ने बेकरी के मालिक से भी मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जाहिर की।
इजरायली राष्ट्रपति ने बताया कि बेकरी के मालिक के बेटे को 7 अक्टूबर 2023 को हमास की ओर से किए गए हमले में किडनैप कर लिया गया था। हालांकि, बंधकों की रिहाई वाले समझौते के तहत उसकी वापसी भी हो गई। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने लिखा, “अराद में हाउस ऑफ ब्रेड बेकरी पर कल रात शहर पर ईरानी मिसाइल हमला हुआ। इस जगह के मालिक डिमोना के कालपोन परिवार हैं, जिनके प्यारे बेटे सेगेव को गाजा में किडनैप कर लिया गया था और पिछली होस्टेज डील में हमें लौटा दिया गया था।”
उन्होंने आगे कहा कि इस परिवार ने बहुत कुछ झेला है, इतने दिनों तक दर्द और दुआएं की और कल उनके बिजनेस पर भी असर पड़ा। सब कुछ होने के बावजूद, आज उनकी मुस्कान, उनका विश्वास और इजरायली भावना, जो लगातार मजबूती से धड़क रही है, देखकर मैं उम्मीद से भर गया।
इजरायली राष्ट्रपति ने कहा, “छोटे बिजनेस को समर्थन करना पूरे इजरायली भावना को समर्थन करना है। उन्हें और इलाके के सभी लोगों को ढेर सारा प्यार। यह ‘इजरायली राष्ट्रवाद’ का सर्वश्रेष्ठ स्वरूप है।”
वहीं डिमोना के दौरे पर उन्होंने कहा, “हम यहां डिमोना में हैं। हम खास जरूरतों वाले लोगों के लिए एक हॉस्टल में हैं।” ईरानी हमले में हुई तबाही के बावजूद, हर्जोग ने बताया कि किसी की मौत नहीं हुई, उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जब सायरन बजा तो लोग सुरक्षा के लिए बंकर में पनाह लेने लगे। उन्होंने कहा, “खुशकिस्मती से, किसी की जान नहीं गई। क्योंकि नगर पालिकाओं और लोगों ने निर्देश सुने।”
ईरान पर सीधा निशाना साधते हुए राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा, “मैं ईरान में हमारे दुश्मनों से बस इतना कहना चाहता हूं कि आप गलत हैं। आप इंसानों को मारने के लिए मिसाइल भेजकर इंसानियत के खिलाफ जुर्म करते रहेंगे, उम्र और लिंग, धर्म, या यहां तक कि उनकी डिसेबिलिटी में भी कोई फर्क नहीं करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि इजरायल टिकेगा और आखिर में जीतेगा। हर्जोग ने कहा, “आप गलत हैं। हमने हमेशा ज्यादा मजबूती दिखाई है। हम जानते हैं कि आपके नेतृत्व में तबाही और गड़बड़ी है। और हमें पक्का यकीन है कि न सिर्फ हम जीतेंगे, बल्कि आप भी मुंह के बल गिरेंगे।”
हफ्तों की लड़ाई के बाद इजरायली राष्ट्रपति ने रणनीतिक लक्ष्य बताते हुए कहा, “युद्ध तब खत्म होगा जब यह साफ हो जाएगा कि ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और निश्चित रूप से ईरान के पास अपनी बैलिस्टिक क्षमता नहीं हो सकती।”
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